Mid-Brain Chakras

Mid-Brain Chakras Mid-brain activation is the technique of optimizing the function of our middle brain, which is the bridge between left and right brain.

आपने ब्रह्म मुहूर्त की बहुत महिमा सुनी होगी। एक विद्यार्थी से लेकर एक सन्यासी तक के लिए इस मुहूर्त को लाभकारी बताया जाता...
27/01/2018

आपने ब्रह्म मुहूर्त की बहुत महिमा सुनी होगी। एक विद्यार्थी से लेकर एक सन्यासी तक के लिए इस मुहूर्त को लाभकारी बताया जाता है। तो आइए जानते हैं कि आखिर कब शुरु होता है यह ब्रह्म मुहूर्त और क्यों लाभदायक है यह :

मैं ब्रह्म मुहूर्त के बारे में कुछ जानना चाहता हूं। जहां तक मुझे पता है इसकी शुरुआत साढ़े तीन बजे से होती है, लेकिन खत्म कब तक होता है, ये मुझे ठीक-ठीक नहीं मालूम। हम इस मुहूर्त का बेहतरीन फायदा कैसे ले सकते हैं – क्या इस समय ध्यान या कोई क्रिया अथवा दोनों कर सकते हैं? इसी से जुड़ा मेरा अगला सवाल है कि साढ़े तीन बजे का इस मुहूर्त के साथ क्या संबंध है और इसका क्या महत्व है?

साढ़े तीन बजे का महत्व सिर्फ 33 डिग्री अक्षांश तक के लिए ही होता है। 3.40 पर सूर्य उस जगह पहुंच जाता है, जहां उसका सीधा संबंध पृथ्वी से हो जाता है। इस समय उसकी किरणें ठीक आपके सिर के ऊपर होती हैं। जब सूर्य की किरणें धरती के दोनों तरफ एक ही जगह पड़ती हैं, तो इंसान का सिस्टम एक खास तरीके से काम करने लगता है और तब एक संभावना बनती है। इस संभावना के इस्तेमाल करने को लेकर लोगों में जागरूकता रही है।

अगर आपके सिस्टम में एक जीवंत बीज पड़ चुका है और अगर आप ब्रह्म मुहूर्त में जागकर कोई भी अभ्यास करने बैठते हैं तो यह बीज आपको सबसे ज्यादा फल देगा।
ब्रह्म मुहूर्त का समय

वैसे तो सूर्य हमेशा आपके सिर के ऊपर ही होता है, लेकिन जब मैं कहता हूं कि सूर्य ठीक आपके सिर पर है तो इसका मतलब है उस समय वह आपके सिर पर लंबवत है। उस समय यह एक विशेष तरीके से काम करता है। यह समय होता है 3.40 से लेकर अगले 12 से 20 मिनट तक।
अब सवाल आता है कि इस समय में हम क्या करें? इस समय में हम ध्यान करें या क्रिया करें? इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि आप क्या करें। इस समय में आपको वही करना चाहिए, जिसमें आपको दीक्षित किया गया है। दरअसल, दीक्षा का मतलब यह नहीं है कि आपको कोई क्रिया सिखाई गई है, इसका मतलब है कि इस क्रिया से आपके सिस्टम को परिचित करा कर आपके सिस्टम में इसे बाकायदा स्थापित किया गया है।
अगर आपके सिस्टम में एक जीवंत बीज पड़ चुका है और अगर आप ब्रह्म मुहूर्त में जागकर कोई भी अभ्यास करने बैठते हैं तो यह बीज आपको सबसे ज्यादा फल देगा। उसकी वजह है कि इस समय धरती आपके सिस्टम के अनुसार काम करती है। अगर आप खास तरीके से जागरूक हो जाते हैं, आपके भीतर एक खास स्तर की जागरूकता आ जाती है तो आपको इस समय का सहज रूप से अहसास हो जाता है। अगर आप सही वक्त पर सोने चले जाते हैं तो आपको उठने के लिए घड़ी देखने की जरूरत नहीं पड़ेगी। आपको हमेशा पता चल जाएगा कि कब 3.40 का वक्त हो गया है, क्योंकि यह वक्त होते ही आपका शरीर एक अलग तरीके से व्यवहार करने लगेगा।

ब्रह्म मुहूर्त का महत्त्व

आप जिस भी क्रिया में दीक्षित हुए हैं, अगर इस समय वह करना शुरू कर देंगे, तो आपको इसका सर्वश्रेष्ठ फल मिलेगा। हां, यह समय किताब पढ़ कर सीखी हुई क्रिया करने का नहीं है। आपके भीतर पड़ा वह बीज इस समय विशेष सहयोग मिलने से अकुंरित होने लगेगा या दूसरे समय की अपेक्षा ज्यादा तेजी से फूटेगा। यह समय सिर्फ दीक्षित हुए लोगों के लिए ही अनुकूल है। अगर आप दीक्षित नहीं है तो फिर 3.40 हो या 6.40 या फिर 7.40 कोई खास फर्क नहीं पड़ता है। ऐसे लोगों के लिए संध्या काल ज्यादा महत्वपूर्ण होता है। यह एक तरह का संधि काल होता है।

जब मैं कहता हूं कि सूर्य ठीक आपके सिर पर है तो इसका मतलब है उस समय वह आपके सिर पर लंबवत है। उस समय यह एक विशेष तरीके से काम करता है। यह समय होता है 3.40 से लेकर अगले 12 से 20 मिनट तक।
संध्या का मतलब है संक्रमण या एक स्थिति से दूसरी में जाना। सूर्योदय से बीस मिनट पहले व बीस मिनट बाद या सूर्यास्त से बीस मिनट पहले व बीस मिनट बाद का समय संध्या कहलाता है। ऐसा ही वक्त दोपहर बारह बजे और आधी रात को आता है, लेकिन ये दोनों संध्याएं अलग प्रकृति की होती है। दिन में चालीस मिनट की ये चार अवधियां संध्या काल कहलाती हैं। इस संध्या काल में आपका सिस्टम एक खास तरह के संक्रमण से गुजरता है। इस समय में मानव शरीर में मौजूद दो प्रमुख नाडिय़ों –इड़ा और पिंगला के बीच एक खास तरह का संतुलन कायम होता है।
सुबह शाम की ये दो संध्याएं गैर दीक्षित लोगों के लिए ठीक हैं। जबकि जो लोग शक्तिशाली ढंग से दीक्षित हुए हैं, उनके लिए 3.40 का वक्त आदर्श है।
अगर व्यक्ति अपने जीवन की दिशा को एक खास तरह से बदलने के लिए इच्छुक नहीं है, तो उसे आधी रात को साधना नहीं करना चाहिए। क्योंकि इस दौरान की गई साधना कुछ ऐसे बदलाव लाती है, जिसे आप शायद संभाल न पाएं

25/01/2018

मालिक एक, नामः अनेक।

ध्यान साधना और सिद्धियाँ

हमारे शरीर में ७२००० नाड़ियाँ हैं जिनके इंग्ला, पिंगला, और सुषुम्ना मुख्य हैं, और ये तो सब जानते हैं कि सुषुम्ना के रास्ते साधक अपने चेतना को मूलाधार में प्रवेश करवाने के बाद नीचे मूलाधार तक लेकर जाते हैं जहाँ माता कुंडलिनी या प्राणशक्ति का केंद्र स्थान होता, और वहीं से प्राण शक्ति निरंतर शरीर में ऊर्जा सप्लाई करती हैं, वैसे तो इंसान का शरीर एक रहस्य हैं और इसमें तरह तरह की सिद्धियाँ सुप्त अवस्था में रहती उन्हें जागृत करवाने के लिए एक निश्चित ऊर्जा का ज़रूरत पड़ता और इंद्रियों को ये ऊर्जा तब मिलता जब साधक का चेतना अंतर्मुखी हो जाती, ७२००० नाड़ियों में ७२०००० सिद्धियाँ होती साधक पे डिपेंड करता हैं वो कितने नाड़ियों में ऊर्जा देकर उसे जागृत कर देता

सिद्धियों का दूसरा नामः ही ऊर्जा होता हैं, क्यूँकि हमारा शरीर सिर्फ़ ऊर्जा से प्रभावित होता। ग़ुस्सा में ऊर्जा हाश, काम वासना में ऊर्जा का हाश etc, इसी व्यर्थ का ऊर्जा नष्ट ना करें।

Address

Palm Beach Road
Navi Mumbai
400705

Telephone

9409471037

Website

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when Mid-Brain Chakras posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Share