PhD in Psychology- Najir Hussain

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13/04/2026
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American embassy school Delhi 1 batch

26/03/2026
ITL transport company
26/03/2026

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15/02/2026
This is the Brazilian client came to India for the business is a automobile Engineer my duty with him for 15 days
06/02/2026

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04/06/2025

I am enjoying bus driving at Delhi India gate circle

27/02/2022

पढ़ाई में ध्यान कैसे लगाएं ? Padhaai mein dhyan kaise lagaen ?

Website- hussainnajir.com

अगर आपके पास सिर्फ और सिर्फ एक ही ऑप्शन है कि पढ़ाई करना है पढ़ाई नहीं करूंगा तो एक अच्छी नौकरी नहीं मिलेगी और मेरे पास मेरे बाप दादा के द्वारा छोड़ा हुआ संपत्ति भी नहीं है अगर मैं नहीं पड़ा तो अच्छी नौकरी नहीं मिलेगी और मैं एक अच्छी जिंदगी नहीं जी सकता खाने के भी लाले पड़ जाएंगे तो ऐसी सिचुएशन में आप पढ़ोगे चाहे कुछ भी हो जाए l

पढ़ाई में ध्यान कैसे लगाएं ?

पढ़ाई में ध्यान कैसे लगाएं ? Padhaai mein dhyan kaise lagaen ?

दूसरा सिचुएशन यह है कि अगर आपके बाप दादा ने आपके लिए बहुत ज्यादा संपत्ति पैसा आपके लिए छोड़ा है तो आप सोचोगे मुझे पढ़ने की क्या जरूरत है बसा बसाया बिजनेस है बाप दादा के द्वारा छोड़ा हुआ संपत्ति है उसी से गुजारा हो जाएगा तो ऐसी सिचुएशन में आप का मन पढ़ाई में कभी भी नहीं लगेगा क्योंकि आपके पास ऑप्शन है अगर आपके पास ऑप्शन नहीं होता तो आप भी पढ़ाई में मन लगा ते, चाहे कुछ भी हो जाए l

यह भी एक यूनिवर्सल विश्वव्यापी कारण है जिसको आप नकार नहीं सकते आपको भी अच्छी तरह से पता है l

Dimag tej karne ke upay ? दिमाग तेज करने के उपाय ?

क्योंकि आप और मैं अक्सर देखते हैं कि वैसे ही बच्चे वैसे ही लोग पढ़ाई नहीं करते और नहीं करना चाहते सिर्फ स्कूल जाते हैं आते हैं मौज मस्ती करते हैं लड़की पटाते हैं इंजॉय करते हैं क्योंकि उनको पता होता है कि उनको पढ़ने की क्या जरूरत है उनके पास तो पहले से ही बहुत सारा संपत्ति पड़ा है l

क्योंकि जो गरीबी में पलता है वही दुनिया बदलता है एक बहुत ही पुरानी कहावत है

इस दुनिया में जितने भी महान लोग हुए हैं जितने भी वैज्ञानिक हुए हैं उनकी बायोग्राफी उठा कर देखे तो पाया जाता है कि उनका बचपन कितना कष्ट में गुजरा भूखे नंगे रह के उन्होंने पढ़ाई करी l इसका एक जीता जागता उदाहरण है दादा साहेब रामजी डॉक्टर भीमराव अंबेडकर भारत के संविधान के रचयिता है l

पढ़ाई में मन लगाने के कुछ साधारण उपाय जिसको आप फॉलो कर सकते हो आपको जरूर फायदा लाभ होगा l

फिर भी इस दुनिया में कुछ ऐसे साधारण उपाय हैं जिस को फॉलो किया जाए तो हमारा और आपका मन पढ़ाई में जरूर लगेगा आइए जान लेते हैं l

आपको क्या करना है

पढ़ाई के लिए उचित वातावरण इन भार में ढूंढिए जहां पर आप शांति से पढ़ सके l
Mass and distributed method का इस्तेमाल करें
चुपचाप बैठ कर पढ़ाई शुरू करिए l

अब आप को क्या नहीं करना है l

घबराइए मत
जहां कंप्यूटर मोबाइल और टेबलेट का यूज़ करना पड़े जरूर करें
म्यूजिक सुनते हुए कभी भी पढ़ाई नहीं करनी चाहिए यह गलत बात है आपको कुछ भी याद नहीं होगा l
अपने फ्यूचर के लिए जो प्लान किया है उसको कभी मत बोलिए l
सबसे बड़ी बात हिम्मत कभी मत हारिए

अभी तक मैंने आपको जो कुछ भी बताया वह एक साधारण बात है उसमें कोई नई बात नहीं है आपको भी पता है l

पढ़ाई में ध्यान कैसे लगाएं ? Padhaai mein dhyan kaise lagaen ?

अब आई है कुछ साइकोलॉजिकल मेथड को भी जान लेते हैं जिसको फॉलो करने से डेफिनेटली हमारा माइंड पढ़ाई लिखाई में हंड्रेड परसेंट तेज हो जाएगा हमारा मन पढ़ाई लिखाई में लगने लगेगा हंड्रेड परसेंट proven.

पढ़ाई में ध्यान कैसे लगाएं ? Padhaai mein dhyan kaise lagaen ? पढ़ाई लिखाई के मामले में सबसे ज्यादा इस्तेमाल यूज होने वाला अगर कोई चीज है तो वह है ध्यान अवधान यानी अटेंशन l

तो आइए जान लेते हैं सबसे पहले कि व्हाट इज अटेंशन ध्यान आवर्धन क्या होता है l

Meaning of attention in Psychology in Hindi

ध्यान यानि अवधान अटेंशन हमारी मानसिक गतिविधि मेंटल प्रोसेस का एक इंपोर्टेंट पार्ट होता है l ध्यान अवधान अटेंशन सभी सफल गतिविधियों के लिए बुनियादी आवश्यकता फंडामेंटल needs है पर्याप्त मात्रा में ध्यान अवधान अटेंशन के बिना किसी भी मेंटल प्रोसेस में भाग लेना पॉसिबल नहीं है सीखने सिखाने की प्रक्रिया में ध्यान अवधान यानी अटेंशन सीखने का इंर्पोटेंट सोर्स होता है l

पढ़ाई में ध्यान कैसे लगाएं ? Padhaai mein dhyan kaise lagaen ?

VOLUNTARY ATTENTION:- हमें और आपको पढ़ाई लिखाई के मामले में हमेशा वॉलंटरी अटेंशन का इस्तेमाल यूज़ करना चाहिए अपनाना चाहिए l आखिर यह वॉलंटरी अटेंशन क्या होता है आइए जान लेते हैं l

वॉलंटरी अटेंशन अटेंशन ध्यान अवधान है जो व्यक्ति व्यक्तित्व पर्सनालिटी द्वारा उद्देश्य पूर्ण रुप से लागू और कंट्रोल किया जाता है या कमोबेश एक एक्टिव मेंटल प्रोसेस है as for example एक बच्चा शिक्षक जो पढ़ा रहा है उस पर बिना किसी इंटरेस्ट के ध्यान अवधान ए टेंशन दे रहा है वह सिर्फ इसलिए ध्यान दे रहा है क्योंकि उसे एग्जाम पास करना है किसी भी हालत में उसको सीखने की इच्छा है चाहे कुछ भी हो जाए इसे ही वॉलंटरी अटेंशन कहा जाता है l

अगर आप इसका इस्तेमाल करते हो तो आपकी रिमेंबरिंग पावर याददाश्त मजबूत हो जाएगी जो कुछ भी आप पढ़ोगे वह आपको लाइफ टाइम के लिए याद रहेगा l

HABITUAL ATTENTION:- हम अपनी जिंदगी में HABITUAL ATTENTION का यूज करके भी अपनी ध्यान को पढ़ाई लिखाई में लगा सकते हैं कैसे आइए जानते हैं l

आदतन ध्यान वह है जो कुछ इंटरेस्ट के कारण उत्पन्न होता है जिन्हें हमने समय के साथ साथ विकसित डिवेलप किया होता है हम विशेष चीजों पर ध्यान अवधान एटेंशन देते हैं क्योंकि हम इसे लंबे समय से कर रहे होते हैं उदाहरण के लिए एक मां अपने बच्चे की देखभाल करती है एक छात्र अध्ययन के लिए जाता है एक क्रिकेटर अभ्यास करने के लिए उपस्थित होता है अगर हम किसी काम को लंबे समय से कर रहे होते हैं तो वह हमारी आदत बन जाती है और हमारी आदत पर ध्यान देना आदतन ध्यान यानी HABITUAL ATTENTION है l

पढ़ाई में ध्यान कैसे लगाएं ? Padhaai mein dhyan kaise lagaen ? अगर आप चाहते हो कि आप का मन पढ़ाई लिखाई में खूब लगे तो आपको मेरे द्वारा बताए गए उपाय को अपनाना होगा और उस पर नजर रखनी होगी तब जाकर आप जो कुछ भी पढ़ोगे वह आपको हमेशा हमेशा के लिए याद रहेगा और आप का मन पढ़ाई में खूब लगेगा l

ध्यान को प्रभावित करने वाले कारक factor affecting of attention .

ध्यान को प्रभावित करने वाले कारकों में हम दो भागों में बांट सकते हैं पहला एक्सटर्नल फैक्टर दूसरा है इंटरनल फैक्टर्स l

EXTERNAL FACTOR:- ध्यान अवधान यानी अटेंशन की एक्सटर्नल फैक्ट पर्यावरण में विधान रहती है पर्यावरण में उपस्थित कारक फैक्ट जैसे वस्तु कमोडिटी व्यक्ति व्यक्तित्व पर्सनालिटी एवं क्रिया व्यक्ति के लिए उद्दीपक का कार्य करती है l

SIZE OF STIMULUS:- उद्दीपक का बड़ा आकार या असाधारण आकार हमारा ध्यान जल्दी अट्रैक्ट करता है जैसे बड़ा पोस्ट बड़ा चांद बड़ी बस 12 ट्रेन बड़ा प्लेन बड़ा हवाई जहाज l

NOVELTY OF STIMULUS:- नई वस्तु व्यक्ति व्यक्तित्व पर्सनालिटी एवं क्रिया आदि भी हमें अपनी ओर अट्रैक्ट करते हैं, as for example नए खिलौने नई बुक्स नई फिल्म्स इत्यादि l

उद्दीपक की विचित्रता:- हमारे पर्यावरण में कुछ विचित्र प्रकार के उद्दीपक है जो व्यक्ति व्यक्तित्व पर्सनालिटी को अपनी ओर अट्रैक्ट करते हैं जैसे विचित्र वेशभूषा व्यक्तित्व आकर्षण का केंद्र बन जाता है l

INTENSITY OF STIMULUS:- यदि कोई वस्तु अत्यंत चटकीली होती है तो वह सहज ही व्यक्ति व्यक्तित्व पर्सनालिटी का ध्यान अवधान अटेंशन अपनी ओर अट्रैक्ट करती है उद्दीपक की आवृत्ति रे पेटीशन ऑफिस ट्यूबलेस जब कोई वस्तु बार-बार दिखाई जाती है तो वह ध्यान अवधान जरूर आकर्षित करती है l

CHANGE IN A STIMULUS:- उद्दीपक में अचानक परिवर्तन भी व्यक्ति व्यक्तित्व पर्सनालिटी का ध्यान अवधान अट्रैक्ट करता है जैसे शांति में एकाएक शोरगुल शुरू हो जाना l

DURATION OF STIMULUS:- लॉन्ग टाइम तक सामने रहने वाला stimulus भी हमारी ज्ञानेंद्रियों सेंस ऑर्गन्स को अपनी ओर अट्रैक्ट करता है l

PLACE OF STIMULUS:- उद्दीपक की विशिष्ट स्थिति में होना भी व्यक्ति व्यक्तित्व पर्सनालिटी का attention ध्यान अवधान अट्रैक्ट करने का कारण बनता है जैसे समाचार पत्र में बॉक्स में छपे समाचार l

पढ़ाई में ध्यान कैसे लगाएं ? Padhaai mein dhyan kaise lagaen, हमें और आपको विशेष रूप से इन सारी बातों का ध्यान रखना चाहिए, on the time of reading books.

पढ़ाई लिखाई करते समय किसी भी हालत में यह सारे फैक्टर अफेक्टिंग अटेंशन किसी भी रूप में किसी भी हालत में आपके सामने उपस्थित नहीं होने चाहिए वरना आपका ध्यान भंग होगा और आप का मन पढ़ाई लिखाई में कभी भी नहीं लगेगा इसीलिए कहा जाता है कि पढ़ाई लिखाई करने के लिए हमेशा शांत एकांत और एक रूम में बंद हो जाना चाहिए l

यह था मेरा ऑपिनियन अबाउट रिलेशन ऑफ़ पढ़ाई में ध्यान कैसे लगाएं l अगर आपको मेरा यह पोस्ट अच्छा लगा तो मेरे वेबसाइट को जरुर विजिट करें और उसमें आपके मतलब के बहुत सारे आर्टिकल और पोस्ट मैंने पब्लिश किए हैं उनको जरूर पढ़ें और लाभ उठाएं l

तो इसी के साथ मिलता हूं नेक्स्ट ब्लॉक पोस्ट में एक नए आइडिया और थॉट विचार के साथ तब तक आप मुझे आज्ञा दीजिए थैंक यू एंड गुड बाय जय हिंद l

This post was written and directed by Najir Hussain co-founder of this blog.

Learning is never ending process.

PhD in psychology.

Thanks for reading my blog post.

See you in next post.

_____________________________ countinue

26/02/2022

Definition:- Definition of ID, Ego, Super Ego.

ID, Ego, Super Ego

Follow me website hussainnajir.com

According to father of psychoa**lysis Mr Sigmund Freud, 6 May 1856-1939. Austria viana, किसी भी व्यक्ति के पर्सनैलिटी के 3 parts (personality formation को लेकर) बताए गए हैं । 1923 मे l

ID, मैं ही सब कुछ हूं l I want Right now.

Ego, (society) अरे भाई, समाज क्या कहेगा l

Super Ego, (Religious) अरे रुको रुको धर्म मजहब, कानून, संविधान, सभ्यता, संस्कृति, परंपरा रीति रिवाज, की बात को भी Sirf मानना है

से रिलेटेड होता है l हर एक व्यक्ति ID, Ego, Super Ego से प्रभावित होकर ही अपने जीवन में हर एक फैसला लेता है l और यह फैसले भी अलग-अलग personality formation के हिसाब से ही लिए जाते हैं l ID, Ego, Super Ego भी व्यक्ति के social, educational invironment के ऊपर डिपेंड करता है l

This definition according to me, Najir Hussain, co-founder of this blog.
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INDEX
Brief explanation of ID, Ego, Super Ego.
सिगमंड फ्रायड का व्यक्तित्व व्यवहार personality behaviour क्या कहता है l
ID, Ego, Super Ego में से व्यक्ति सबसे ज्यादा किस की सुनता है l
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Question 1- ID brief explanation of lD

अब आईए, आम बोलचाल की भाषा में समझ लेते हैं कि आखिर किस चिड़िया का नाम है ID, Ego, Super Ego.

ऊपर मैंने जो डेफिनिशन दिया है उससे तो साफ जाहिर हो जाता है कि आखिर ID, Ego, Super Ego किसे कहते हैं लेकिन एक आम नागरिक जिसको सायकोलॉजी का थोड़ा बहुत भी ज्ञान नहीं है उसको समझाने के लिए मैं कुछ देसी एग्जांपल देना बताना चाहूंगा l

1st example:-मान लो आप कहीं रास्ते से जा रहे हो आपको एक लड़की दिखाई देती है जो बहुत सुंदर है तो जाहिर सी बात है हर लड़का चाहेगा उस लड़की के साथ संभोग सेक्स करना l अगर किसी लड़की को कोई सुंदर लड़का दिखता है तो जाहिर सी बात है उसके भी मन में उसके साथ सेक्स और संभोग करने की इच्छा जागृत होगी इसमें कुछ गलत नहीं है हर ऑपोजिट सेक्स के प्रति इंसान अट्रैक्टिव होता है l अगर लड़का लड़की के मन में सेक्स करने की इच्छा जागृत होती है तो यह उसके व्यक्तित्व निर्माण पर्सनैलिटी फॉरमेशन Id की वजह से ही होता है क्योंकि Id में, ID, मैं ही सब कुछ हूं l I want Right now. हमेशा चाहता है खास करके सेक्सुअल डिजायर और यह मैं नहीं महान साइकोलॉजिस्ट सिगमंड फ्रायड ने भी कहा है l

2ND example:- अगर कोई छोटा बच्चा, दूध पीता बच्चा रात को 12 बजे जग कर चिल्लाता है और अपने मम्मी पापा से कहता है कि मुझे अभी दूध चाहिए वह भी पाउडर वाला या पैकेट वाला इस समय उस बच्चे को चाहे कितना भी समझा लो कि रात को 12 बजे सारी दुकानें बंद हो चुकी है कहीं भी दूध नहीं मिलेगा ना ही पाउडर वाला ना ही पैकेट वाला और घर में भी नहीं है पड़ोसी भी सो रहे हैं और रात को 12 बजे किसी को जगाना भी ठीक नहीं है कल सुबह हम तुम्हारे लिए पैकेट वाला दूध और पाउडर वाला दूध दोनों लाएंगे फिर भी बच्चा नहीं मानता है क्योंकि 3 साल 4 साल की कम उम्र के बच्चों में सिर्फ और सिर्फ lD जागृत होता है Ego, and Super Ego 5 साल की उम्र के बाद जागृत होते हैं l

Id का संबंध किसी भी तरह के व्यक्तित्व निर्माण personality formation से नहीं होता है l कि कौन सा व्यक्ति किस तरह के सोशल एनवायरमेंट एजुकेशनल इनफॉर्मेंट में पल रहा है बड़ा हो रहा है l I'd हर एक बच्चे में जन्मजात होता है और मरते दम तक व्यक्ति के व्यक्तित्व में बना रहता है l और रह रह के उफान मारता रहता है l lD को हर समय सेक्सुअल एंजॉयमेंट सेक्सुअल प्लेजर चाहिए होता है खास करके और कुछ चाहिए या ना चाहिए लेकिन सेक्सुअल इंजॉय मेंट सेक्सुअल प्लेजर किसी भी सूरत में lD पूरा करना चाहता है क्योंकि Id सोसाइटी से धर्म मजहब से कानून से रीति रिवाज से संविधान से कोई लेना देना नहीं होता l

ID पैदा लेने के साथ ही ताउम्र मरते दम तक व्यक्ति के व्यक्तित्व में बना रहता है l

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Ego

Ego:- लेकिन यहीं पर दूसरी ओर अगर उस लड़का और लड़की के माइंड में कोई कह रहा है कि नहीं यह गलत है समाज क्या कहेगा, लड़की क्या सोचेगी , लोग क्या सोचेंगे, मम्मी पापा क्या सोचेंगे, जो भी सुनेगा मुझे बुरा भला कहेगा, और मेरा इस दुनिया में इस समाज में जीना दुश्वार हो जाएगा, यह सब सोचकर अगर लड़का लड़की सेक्स की इच्छा नहीं करते, छोड़ देते हैं, और आगे चले जाते हैं अपने काम में बिजी हो जाते हैं इसका मतलब उस लड़का लड़की का जो ego है जो व्यक्तित्व निर्माण है ego कह रहा है कि गलत है क्योंकि ego हमेशा समाज को मद्देनजर रखकर फैसले लेता है l

5 साल की उम्र के बाद ego व्यक्तित्व में आने लगता है

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Super ego

लेकिन यही तीसरी ओर किसी लड़के और लड़की के माइंड में एक दूसरे के साथ सेक्स करें ना करें सोच ही रहे हैं तभी माइंड में एक thought आता है माइंड में कोई कहता है कि नहीं यह गलत है तुम्हारी परवरिश इस कदर नहीं हुई है कि तुम इस तरह के शर्मनाक काम करो, शादी से पहले, अपने मम्मी पापा का, अपने समाज का, अपने परिवार का, अपने गांव का, अपने देश का, अपने जाति का, नाम खराब करो तुम्हारे धर्म में तुम्हारे मजहब में यह तुम्हें नहीं सिखाया गया, तुम एक अच्छे खानदान से हो तुम एक ऐसे देश के नागरिक हो जहां महिलाओं को बहुत सम्मान दिया जाता है, जहां मर्दों को भगवान राम की तरह मर्यादा पुरुषोत्तम कहा जाता है, इज्जत की जाती है जहां भाभी को भी भाभी मां कहा जाता है इस तरह के काम तुम नहीं कर सकते, नहीं कर सकती, इसका मतलब आपका Super ego लड़का हो या लड़की तुमसे कह रहा है कि यह गलत है क्योंकि super Ego हमेशा धर्म मजहब, रीति रिवाज, संविधान, परंपरा, संस्कृति सभ्यता, कानून से रिलेटेड होता है संबंधित होता है l

12 साल की उम्र के बाद सुपर हीरो व्यक्तित्व में दिखने लगता है

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Question 2:- सिगमंड फ्रायड का व्यक्तित्व व्यवहार personality behaviour क्या कहता है

सिगमंड फ्रायड के इस थ्योरी को पर्सनैलिटी बिहेवियर theory को मनो लैंगिक भी कहा गया है l

सिगमंड फ्रायड का मानना था कि जब बच्चा पैदा होता है तो वह अपना पहला लैंगिक संबंध अपनी माता के साथ स्थापित करता है दूध पीने के दौरान सतन पान के दौरान चाहे वह लड़का हो या लड़की l

क्योंकि आपने भी देखा होगा जब छोटा बच्चा स्तन पान करता है दूध पीता है तो अपने माता के स्तन के साथ ब्रेस्ट् के साथ नोचता है खसोटता है खींचता है और च्चुसक+च्चुसक कर दूध भी पीता है इसी को सिगमंड फ्रायड ने देख कर कहां है l

लेकिन फ्राइड के इस मनोलैंगिक विकास थ्योरी का दुनिया भर में जोरदार आलोचना किया गया था है और आज भी होता है क्योंकि यह थ्योरी थोड़ा असामाजिक है थोड़ा धार्मिक रूप से गलत भी है पूरी दुनिया में मां और पुत्र का संबंध बरा पवित्र माना जाता है जिस पर यह थ्योरी खरा नहीं उतरता है लेकिन देखा जाए तो जब इतना बड़ा महान साइकोलॉजिस्ट अपने सिद्धांतों में कुछ कह रहा है इसका मतलब उसने कुछ रिसर्च और एक्सपेरिमेंट किया है क्योंकि Sigmund फ्राइड ने ही साइकोलॉजी को एक नई दिशा दिया है साइकोलॉजी को एक नई पहचान दिलाई है दुनिया में अगर वह कह रहा है तो उसने अपने एक्सपेरिमेंट में रिसर्च में कुछ न कुछ तो जरूर पाया होगा बाकी लोगों का पता नहीं लेकिन मैं इस ब्लॉग का राइट najir Hussain इस बात से पूरी तरह से सहमत हूं सिगमंड फ्रायड यू आर राइट l

सिगमंड फ्रायड ने मनोलैंगिक व्यक्तित्व विकास psychosexual personality development को 5 अवस्थाओं में विभाजित किया है

मौखिक अवस्था oral stage:- जन्म से 1 वर्ष तक
गुदा अवस्था a**l stage:- 2 वर्ष से 3 वर्ष तक
लैंगिक अवस्था sexual stage:- 4 से 5 वर्ष तक
सुसुप्त अवस्था dormant state:- छह से 12 वर्ष तक
जननी अवस्था birth stage:- 12 से 20 वर्ष तक

सिगमंड फ्रायड ने अपने साइकोसेक्सुअल पर्सनालिटी डेवलपमेंट theory में यहां तक कहा है कि जब कोई लड़का अपनी माता से ज्यादा प्रेम करता है पिता के अलावा तो इसका कारण odipus ग्रंथि है

अगर कोई लड़की अपने पिता से ज्यादा प्रेम करती है माता से कम प्रेम करती है इसका कारण है बायोलॉजिकल electra ग्रंथि ।

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Question 3:- ID, Ego, Super Ego में से व्यक्ति सबसे ज्यादा किस की सुनता है l

मान लो दो दोस्त एक का नाम मोहन है और दूसरे का नाम सोहन है l

दोनों रात के अंधेरे में ड्रिंक करके शराब पी के डिस्को से या किसी बीयर बार से किसी सुनसान रास्ते से जा रहे हैं अचानक उनको एक सुंदर और सेक्सी हॉट वह भी जवान हम उम्र लड़की दिखाई देती है अब इन दोनों का मूड खराब होता है सेक्सुअल डिजायर को फुलफिल करने की इच्छा जागृत होती है लड़की के साथ शारीरिक संबंध बनाने की इच्छा जाहिर होती है l जिसे पूरी दुनिया भर में रेप और बलात्कार कहा जाता है l

सोहन कहता है मोहन से की चलो आज रंगरलिया मनाते हैं इंजॉय करते हैं लड़की के साथ शारीरिक संबंध बनाते हैं चाहे कुछ भी हो जाए उम्र कैद हो जाए फांसी हो जाए जिंदगी खराब हो जाए दुनिया इधर की उधर हो जाए लेकिन मैं आज इस लड़की के साथ सेक्स करके ही रहूंगा l

मोहन कहता है कि नहीं यह गलत है फांसी हो जाएगी उम्र कैद हो जाएगी नाम खराब हो जाएगा जिंदगी खराब हो जाएगी मैं, पुलिस पकड़ के ले जाएगी, मैं यह नहीं कर सकता l

इसका साफ मतलब यह है कि सोहन का ID, Ego and Super Ego के ऊपर हावी है भारी है इसीलिए lD जो कहेगा सोहन वही कहेगा और lD हमेशा एंटी सोशल वर्क असामाजिक कार्य करवाता है किसी भी व्यक्ति से

मोहन का व्यक्तित्व का फैक्टर Ego or Super Ego हावी है भारी है lD के ऊपर इसीलिए मोहन कह रहा है कि नहीं मैं रेप नहीं कर सकता यह गलत है

जब भी किसी व्यक्ति का व्यक्तित्व के ऊपर ID, Ego, Super Ego के ऊपर हावी होता है तो व्यक्ति विनाश की तरफ जाता है

और जब भी किसी व्यक्ति का व्यक्तित्व में ego or Super Ego lD के ऊपर भारी पड़ते हैं हावी होते हैं तो व्यक्ति का व्यक्तित्व निखर जाता है व्यक्ति एक दिन महान पुरुष बनता है ।

ID- Ego or Super Ego के ऊपर भारी पड़ेगा, Ego, or Super Ego ID के ऊपर भारी पड़ेंगे यह किसी भी व्यक्ति के उस सोशियल invironment, एजुकेशनल invironment, परवरिश के ऊपर डिपेंड करता है जहां इंसान के व्यक्तित्व का निर्माण होता है सोशलाइजेशन होता है जहां इंसान पैदा होता है पलता पड़ता है

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website पर मैं psychology से related different, but very इसimportant article post करता रहता हूं ।
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The end

Learning is never ending process

Thanks for reading my blog post

Najir Hussain writer

25/02/2022

आप बचपन से जिस काम में जिस व्यवसाय में जिस बिजनेस में रसे बसे हो जो करना आपको अच्छा लगता है मजा आता है सिर्फ और सिर्फ उसी काम में आप सफल हो सकते हो उसी व्यवसाय बिजनेस में सफल हो सकते हो चाहे वह बिजनेस अच्छा हो या खराब । जैसे मान लो आपके पिताजी सब्जी बेच रहे हैं बचपन से ही और सब्जी की दुकान आप बचपन से ही देखते आ रहे हो कि आपके पापा सब्जी बेचते हैं तो जाने अनजाने सब्जी बेचने से रिलेटेड जितने सारे टर्म एंड कंडीशन है क्या क्या सावधानी बरतनी चाहिए कैसे फायदा होगा और कैसे नुकसान यह सारी टेक्निक यह सारी डिग्री यह सारी डिप्लोमा इन सारी नॉलेज आपको विरासत में मिलेगी जिसमें आप एक्सपोर्ट होगे और आप भी अगर सब्जी की दुकान खोलना चाहते हो तो हंड्रेड परसेंट चांस इसमें भी हाई कि आप सफल हो जाओगे ।

हम बिजनेस करने से इतना डरते क्यों हैं ? मैं बिजनेस करना चाहता हूं लेकिन डर लगता है कि कहीं फेल+असफल ना हो जाऊं ?

हम बिजनेस करने से इतना डरते क्यों हैं ? मैं बिजनेस करना चाहता हूं लेकिन डर लगता है कि कहीं फेल+असफल ना हो जाऊं ?
Contents

लेकिन अगर आप सोचते हो कि नहीं सब्जी बेचना अच्छा काम नहीं है आपको दरोगा एसपी मजिस्ट्रेट डीआईजी डीएसपी एसपी, कलेक्टर डीएम, मुख्यमंत्री प्रधानमंत्री राष्ट्रपति, या कोई officially जॉब करना है सूट बूट टाई वाला तो चांसेस में भी हाई कि आप असफल हो जाओगे क्योंकि यह काम आपके व्यक्तित्व में आपके पर्सनालिटी फॉरमेशन में नहीं है और जो काम पर्सनालिटी फॉर्नेशन में व्यक्तित्व निर्माण में नहीं होता वह दुनिया का कोई भी इंसान नहीं कर सकता ।

अब आप यहां पर यह भी कह सकते हो सोच सकते हो बोल सकते हो कि एवरीथिंग इस पॉसिबल कुछ भी हो सकता है इस दुनिया में । हां इस बात को तो मैं भी मानता हूं कि एवरीथिंग इस पॉसिबल लेकिन कुछ ऐसी चीजें हैं जो आज भी इंपॉसिबल है जैसे अगर चांद पर आपको जाना है तो आपको रॉकेट में बैठ कर जाना होगा पक्षी की तरह हवा में उड़ते हुए नहीं जा सकते क्योंकि अंतरिक्ष में ऑक्सीजन हवा नहीं होता । अब पता चला एवरीथिंग इज नॉट पॉसिबल का मजा आया ।

मैं यहां पर यह भी कहना चाहूंगा कि यह जो सेंटेंस है एवरीथिंग इज पॉसिबल इस सेंटेंस ने इस वाक्य ने इस मुहावरे ने लाखों करोड़ों अरबों खरबों लोगों की जिंदगी बर्बाद की है क्योंकि बिना सोचे समझे लोग कहते हैं कि किताब में मैंने पढ़ा है कैलेंडर पर मैंने देखा है स्कूल कॉलेज की दीवारों पर भी लिखा रहता है एवरीथिंग इस पॉसिबल इसका मतलब है इस दुनिया में कुछ भी किया जा सकता है बिना ऑक्सीजन बिना हवा के बिना रॉकेट के पक्षी की तरह हवा में उड़ते हुए अंतरिक्ष में भेजा जा सकता है जो कि possible नहीं है और इसी चक्कर में बहुत सारी जिंदगी बर्बाद हो जाती है ।

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मानसिक रोग से कैसे बचे ? मानसिक रोग से बचने के घरेलू उपाय ?

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हम लोग इसी चक्कर में जिंदगी भर भागते रहते हैं उस काम के पीछे पड़े रहते हैं लगे रहते हैं जो हमारे बस का नहीं है हमारे व्यक्तित्व निर्माण में personality इंफॉर्मेशन में नहीं है और जिंदगी खत्म हो जाती है थक हार के हम छोड़ देते हैं और लोगों से कहते फिरते हैं कि शायद यह काम या बिजनेस व्यापार यह व्यवसाय मेरे किस्मत में नहीं था जो कि या अनसाइंटिफिक है अवैज्ञानिक है इसका कारण रीजन कुछ और ही है । और वह कारण है व्यक्तित्व निर्माण पर्सनालिटी फॉरमेशन एक बार जो इंसान जैसा बन गया और जो काम उसको अच्छा लगता है और जिस काम में उसको मजा आता है वह जीवन में वही काम कर सकता है चाहे वहां काम अच्छा हो या बुरा ।

जैसे एक जेब कतरे को कहोगे कि जाओ किसी का जेब काट के लेकर आओ तो वह तुरंत जाएगा किसी ना किसी का जेब कतर के लेकर आएगा लेकिन एक ऐसा इंसान जिसने ऐसा काम कभी किया नहीं है उसको बोलोगे तो जेब काटने तो जाएगा लेकिन पीट-पीटकर आएगा क्योंकि यह काम उसके पर्सनल इंफॉर्मेशन व्यक्तित्व निर्माण में नहीं है

ठीक है ऐसे ही एक आतंकवादी को बोलोगे कि जाओ देश के नाम पर धर्म मजहब के नाम पर लोगों की हत्या करके आओ तो बड़े ही आराम से मजे मजे में हजारों लाखों करोड़ों लोगों को मौत के घाट उतार के आ सकता है लेकिन यही काम हमें और आपको कहा जाए तो हम खुद मर जाएंगे लेकिन यह काम नहीं करेंगे क्योंकि यह काम हमारे व्यक्तित्व निर्माण पर्सनल इंफॉर्मेशन में नहीं है ।

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हम बिजनेस करने से इतना डरते क्यों हैं ? मैं बिजनेस करना चाहता हूं लेकिन डर लगता है कि कहीं फेल+असफल ना हो जाऊं ?

आखिर कैसे पता करें कि आप जो बिजनेस व्यवसाय व्यापार करने जा रहे हो उसमें आपको सफलता मिलेगी या असफलता सक्सेस मिलेगी या failure, बिजनेस शुरू करने से पहले ।

एक तरीका है एक मेथड है एक उपाय है जिससे हम लोग पता कर सकते हैं कि हम और आप जो बिजनेस व्यवसाय व्यापार शुरू करने जा रहे हैं वह सफल होगा या असफल व्यवसाय शुरू करने से पहले और इसका जवाब सिर्फ और सिर्फ मनोविज्ञान साइकोलॉजि के पास है क्योंकि साइकोलॉजी द साइंस ऑफ एक्सपीरियंस एंड बिहेवियर ऑफ एनिमल एंड वुमन ।

सबसे पहले फर्स्ट ऑफ ऑल आपको यह देखना होगा कि आपका नेचर स्वभाव हाव-भाव व्यवहार बिहेवियर थिंकिंग रिमेंबरिंग फॉर गेटिंग किस प्रकार का है किस तरह का है आपको किस तरह के लोगों के साथ मिलना जुलना उठना बैठना खाना-पीना नहाना धोना पसंद है और ना पसंद आपको अकेले रहना पसंद है या भीड़ भाड़ में, आपको धार्मिक लोग पसंद है या नास्तिक लोग पसंद है आप कलचर सिविलाइजेशन सभ्यता संस्कृति रीति रिवाज में विश्वास करते हो या नहीं इन सारी चीजों को बड़े ही ध्यान से कहीं बैठकर सोचना पड़ेगा कोई भी बिजनेस व्यापार करने से पहले क्योंकि इसका बहुत ही गहरा संबंध होता है बिजनेस व्यापार से। किसी भी व्यक्ति व्यक्तित्व पर्सनालिटी से।

अब मांग लो आपको चुपचाप रहना पसंद है आप बहुत कम बोलते हो फालतू नहीं बोलते ।

और आपने जाने अनजाने बाई मिस्टेक रेलवे इंक्वायरी की जॉब नौकरी पकड़ ली और जब वहां पर तरह तरह के लोग इंक्वायरी विंडो पर खिड़की पर आते हैं और एक ही ट्रेन के बारे में बार-बार पूछते हैं और आप बार-बार बता देते हो फिर वह 4 मिनट 5 मिनट के बाद घूम के फिर से आता है और वही बात पूछता है और बार-बार पूछता है तो आपका तो दिमाग खराब होगा ही क्योंकि आपको कम बोलने की आदत है ज्यादा बोलने की आदत नहीं है और आपने ऐसी नौकरी पकड़ ली जिसमें तोते की तरह फटाफट बोलते ही रहना है 24 घंटे जब तक आप की ड्यूटी है तो सोचिए क्या वह आप ड्यूटी नौकरी कर पाओगे नहीं कुछ ही महीनों दिनों के बाद नौकरी छोड़कर भाग जाओगे बोलोगे मैं साला कुछ और काम कर लूंगा लेकिन यह काम नहीं करूंगा साले लोग कितने पागल हैं एक ही बात को बार बार पूछते हैं मैं बार-बार बताता हूं फिर घूम के आ जाते पागल साले ।

हम बिजनेस+व्यापार करने से इतना डरते क्यों हैं ? मैं बिजनेस करना चाहता हूं लेकिन डर लगता है कि कहीं फेल+असफल ना हो जाऊं ?

इसका कारण यह है कि आपका व्यक्तित्व निर्माण पर्सनालिटी फॉरमेशन चुपचाप रहना शांत और एकांत रहना है और आपने ऐसा काम पकड़ लिया जिसमें फटाफट फटाफट तोते की तरह बोलते ही रहना है।

मान लो आपको घूमने फिरने की आदत है आप एक जगह टिकते ही नहीं हूं कभी इंडिया कभी पाकिस्तान कभी बांग्लादेश कभी हालैंड कभी थाईलैंड कभी मलेशिया तो कभी सिंगापुर घूमते ही रहते हो ।

और ऐसे में आपको कोई कहता है आपको ऑफर देता है कि भाई मेरे पास एक नौकरी है एक महीने का तुमको ₹5000000 मिलेंगे तुमको करना कुछ नहीं है बस एक जगह बैठकर चौकीदारी करना है आपको यूनिफार्म और बंदूक भी मिलेगा वर्दी और यूनिट भी मिलेगी आप हो सकता है कि इस ऑफर को देख कर फटाफट हां बोल दो लेकिन जब आपको एक जगह 24:00 24 घंटे 12 12 घंटे महीने भर सालों भर बैठने के लिए कहा जाएगा तो आप थक जाओगे कुछ ही दिनों में बोलोगे साला यह काम मैं नहीं करूंगा मेरे से नहीं होगा चाहे तुम मुझे अब पांच crore रुपए महीने में या 1 दिन में दे दो क्योंकि यह बैठने वाला काम है बैठे-बैठे मेरे पिछवाड़े में खुजली हो जाती है मेरा मन नहीं लगता है।

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इसका भी कारन व्यक्तित्व निर्माण पर्सनालिटी Formation है जो काम आपके व्यक्तित्व निर्माण में पर्सनल इनफॉरमेशन में नहीं है उसके लिए आपको अरबों खरबों रुपए भी दे दिया जाए तो आप नहीं कर पाओगे और जो काम आपके व्यक्तित्व निर्माण पर्सनालिटी फॉरमेशन में है उसको आप कम पैसे में भी कर लोगे क्योंकि वह काम करना आपको अच्छा लगता है ।

हम बिजनेस+व्यापार करने से इतना डरते क्यों हैं ? मैं बिजनेस करना चाहता हूं लेकिन डर लगता है कि कहीं फेल+असफल ना हो जाऊं ?

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आखिर क्या कारण है कि नेता का बेटा नेता हीरो का बेटा हीरो बिजनेसमैन का बेटा बिजनेसमैन, किसान का बेटा किसान, सब्जी मुर्गी मछली अंडा बेचने वाले का बेटा भी यही काम करता है, टीचर का बेटा टीचर, Sainik Fauji ka beta bhi Sainik aur Fauji, बनता है 95% चांसेस में भी हाई।

इसका भी सीधा जवाब है व्यक्तित्व निर्माण पर्सनालिटी फॉरमेशन जो बच्चा बचपन से जिस तरह के साइकोलॉजिकल एनवायरमेंट में रहता है पलता बढ़ता है एजुकेशनल रिलीजियस कल्चरल एजुकेशनल सोशियल जिस तरह का वह इन्वायरमेंट होगा व्यक्ति का व्यक्तित्व का निर्माण भी उसी प्रकार का होता है और फिर वह जीवन में वही कार्य करता है जो कार्य उसके व्यक्तित्व निर्माण में समायोजित समाया हुआ रहता है । और यह बात गलत नहीं है 95 पर सेंट आप नजर उठाकर अपने गांव समाज देश दुनिया आस पड़ोस में देख लो ।

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आइए अब इन सब बातों को उदाहरण के माध्यम से समझने की कोशिश करते हैं ।

अब मैं जितने भी एग्जांपल उदाहरण दूंगा वह कोई कहानी नहीं है बल्कि रियालिटी है रियल कहानी है स्टोरी है जो मैंने देखा है अपनी आंखों से ।

एक बंदा था जो बचपन से ही लेदर के जैकेट का काम सीखते सीखते कारीगर बना और बहुत बड़ा कारीगर बना और बहुत सारे पैसे कमाए नोएडा दिल्ली जैसे शहर में जमीन खरीद कर घर बनाया गांव में भी प्रॉपर्टी बनाया ।

फिर उसको माइंड में ख्याल आया आईडिया आया कि अब क्यों ना हो कि हम गांव में जाकर बसे क्योंकि उम्र हो गई है और वहां पर ही कोई धंधा पानी बिजनेस में बस आए व्यापार सेट करके आराम से अपना बुढ़ापा व्यतीत करेंगे।

वह इंसान अपना सारा सामान लपेट लपेट कर गांव के लिए रवाना हो जाता है और वहां पर 6:00 ₹700000 लगाकर एक मुर्गी फार्म पोल्ट्री फार्म खोलता है जिसका उसे एबीसीडी भी नहीं पता बस पैसे के दम पर पैसा था और उसने बिजनेस सेट तो कर लिया लेकिन कुछ ही महीने में वह बिजनेस डूब गया वह उस बिजनेस को चला नहीं पाया पैसा तो उसके पास बहुत था दोबारा लगा सकता था लेकिन लगा या नहीं क्योंकि पहली बार जब बिजनेस डूबने लगा तो इसी में उसका मन टूट गया और दोबारा उसने पैसे लगाए नहीं छोड़ दिया और धंधा पानी भी बंद कर दिया पोल्ट्री फार्म किसी को बेच दिया मुर्गियां सारे भेज दिए ।

हम बिजनेस+व्यापार करने से इतना डरते क्यों हैं ? मैं बिजनेस करना चाहता हूं लेकिन डर लगता है कि कहीं फेल+असफल ना हो जाऊं ?

अब मैं आपसे पूछना चाहता हूं कि आपके हिसाब से इसका कारण क्या हो सकता है बिजनेस डूबने का शायद आपको नहीं पता मैं आपको बताता हूं।

क्योंकि इस इंसान के व्यक्तित्व निर्माण पर्सनालिटी फॉरमेशन में लेदर के जैकेट का काम व्यापार बिजनेस व्यवसाय था इसको वही करना चाहिए था लेकिन इसने एक्सपीरियंस कम होने की वजह से जाने अनजाने में वह बिजनेस शुरू कर दिया जो बिजनेस इसके पर्सनैलिटी फॉरमेशन व्यक्तित्व निर्माण में नहीं था और जो काम जो बिजनेस जो व्यापार आपके व्यक्तित्व निर्माण पर्सनालिटी फॉरमेशन में नहीं है उसे आप क्या आप का बाप भी नहीं कर सकता ।

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आइए एक कोरियर असली दूसरा एग्जांपल भी देख लेते हैं यह भी कोई कहानी नहीं है बल्कि असलियत और हकीकत है जिसको मैंने अपनी आंखों से देखा और माइंड से एक्सपीरियंस किया है ।

ऐसे ही एक बंदा एक इंसान था यूपी का जो बचपन में ही सऊदी अरब में जाकर लेबर का काम करते करते एक स्किल्ड मिस्त्री बन गया राजमिस्त्री जो घर बनाते हैं वही ।

इतना बड़ा ठेकेदार बना कि उसके नीचे बहुत सारे इंडियन पाकिस्तानी और बांग्लादेशी लेबर काम करने लगे यह बस डायरेक्शन देता था और साइट पर जाकर ऑब्जरवेशन करता था बहुत पैसा कमाया बहुत इसी के साथ मैं सऊदी अरब में रूम पार्टनर बन कर कुछ दिनों में ही न हो रहा था मैंने उसकी कहानी सुनी वही आपको बताने जा रहा हूं ।

उसने कहा कि कुछ सालों पहले वह अपने यूपी गांव आया और उसने भी पोल्ट्री फार्म खोला 6 7 लाख रुपए लगाए होंगे बहुत मेहनत किया मजदूरों की तरह लेकिन बिजनेस को सफल नहीं बना पाया बिजनेस सक्सेस नहीं हो पाया डूबने लगा मुर्गीया मरने लगी बिक नहीं रहा था कोई खरीदने वाला नहीं मिल रहा था कुछ तो कुत्ते बिल्ली खा जाते थे कुछ को सांप लेकर भाग जाता था अंततोगत्वा इसका भी बिजनेस डूब गया क्योंकि हर बिजनेस में कुछ कंपीटीटर होते हैं जो माहिर होते हैं अपने फील्ड में और अपने दूसरे competitor को हराने के लिए हर दांव लगाते हैं आपके सामने ही आपको बर्बाद करते हैं और आपको पता नहीं चलता।

थक हार कर इसको भी अपना बिजनेस मुर्गी वाला बंद करना पड़ा ।

फिर इसलिए सोचा क्यों ना एक जनरल स्टोर राशन चावल दाल की दुकान खोली जाए अपने गांव के मेन मार्केट में गया चौराहे पर बहुत सारा डिपाजिट देकर एक दुकान को लिया रेंट पर 12 13 लाख रुपए लगाए सामान भरने में एक 2 साल उसमें भी दिया वह बिजनेस भी नहीं चला धीरे धीरे डूबने लगा फायदा हो नहीं रहा था थक हार कर उस बिजनेस को भी यहां बेच कर घर बैठ गया और फिर से सऊदी अरब आने का यानी जाने का प्लान बनाने लगा फाइनली सऊदी अरब वह आ गया।

वह वहां पर जेब में ₹0 लेकर गया था लेकिन पैसे ना होने के बाद भी जिस काम में वह रासा बसा था जो काम इसके पर्सनल इनफॉरमेशन व्यक्तित्व निर्माण में था उसको शुरू किया बिना पैसे की मात्र एक ही दिन में उसने दो गाड़ी खरीद ली और बहुत सारे labours इस के अंडर में वापस आ गए काम करने के लिए और जो भी सऊदी नागरिक इसको मिलता अपना construction ka kaam इस को देता था कंस्ट्रक्शन से रिलेटेड और कुछ ही दिनों महीनों में यह वापस उसी पोजीशन पर पहुंच गया सब को हराते हुए पछारते हुए जिस पोजीशन पर यह हुआ करता था ।

आप जरा सोचिए जिस बिजनेस में इसने लाखों लाखों रुपए लगाएं वह असफल हो गया और जिस बिजनेस में काम में इसने खाली जेब लेकर पैसे ना होने पर भी जिस बिजनेस को शुरू किया वह सफल हो गया सक्सेस हो गया वापस उसी पोजीशन पर पहुंच गया जिस पोजीशन पर वह किसी जमाने में हुआ करता था इसका भी कारण personality formation व्यक्तित्व निर्माण है क्योंकि राजमिस्त्री का काम किया बचपन से जानता था उसमें क्या टर्म एंड कंडीशन होते हैं Competitor कैसे दांवपेच खेलते हैं कंस्ट्रक्शन का काम कैसे हथिया लेते हैं क्या सावधानी बरतनी चाहिए कहां पर काम मिलेगा लेबर कहां से आएंगे उनकी सैलरी कहां से दी जाएगी मैं कैसे काम आ पाऊंगा यह सारी पढ़ाई डिग्री डिप्लोमा पीएचडी जान चुका था इसलिए इस काम में वह सक्सेस हो गया

अक्सर पढ़ा लिखा इंसान यही सोचता है कि वह पढ़ा लिखा है उसके पास डिग्री डिप्लोमा सर्टिफिकेट है

और वह सोचता है कि एक सब्जी बेचने वाला एक मुर्गी बेचने वाला एक अंडा बेचने वाला एक दुकान चलाने वाला उसके पास तो कोई डिग्री डिप्लोमा नहीं है वह अपने जीवन में क्या कर सकता है तो मैं उसको बताना चाहता हूं कि हर एक काम अपने आप में एक डिग्री डिप्लोमा है जो काम मैं कर सकता हूं तुम नहीं कर सकते जो काम तुम कर सकते हो वह मैं नहीं कर सकता एक सब्जी बेचने वाला जो कर सकता है एक डॉक्टर नहीं कर सकता एक जो डॉक्टर कर सकता है वह सब्जी बेचने वाला नहीं कर सकता क्योंकि सब ने अपने-अपने फील्ड में पढ़ाई करी है पीएचडी करी है अगर आपको कहा जाए कि जाओ सब्जी मंडी से होलसेल में सब्जी खरीद कर ले आओ आप से नहीं हो पाएगा लेकिन जो 4:00 बजे सुबह उठकर जाता है पिछले 20 सालों से वह आंख मूंद कर भी जाएगा तो अच्छी सब्जी होलसेल में उठा कर लाएगा क्योंकि उसने यह सब्जी बेचने में डिप्लोमा डिग्री पीएचडी सर्टिफिकेट की पढ़ाई की है।

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