Shiv Homoeo Clinic

Shiv Homoeo Clinic ALL DISEASES OCCURING BY VIRUS IS EASLY AND FASTLY CONTROLED AND CURED BY HOMOEOPATHY THEN ANY OTHER

20/07/2017
22/03/2017
01/03/2017

सोविनीयर में प्रकाशनार्थ
भारत में होमियोपैथी का विकास
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यह सर्वविदित है कि होमियोपैथिक चिकित्सा पद्धति की शुरूआत सर्वप्रथम जर्मनी के डॉ फ़्रेडेरिक सैमुएल हैनिमैन द्वारा लगभग 221 वर्ष पूर्व 1796 में की गई थी। भारतवर्ष में इसकी शुरूआत अठारहवीं शताब्दी में जर्मनी के ही एक यात्री द्वारा हुई जब पहली बार डॉ हैनिमैन द्वारा रचित ऑर्गेनन के प्रथम संस्करण का प्रकाशन हुआ था।
होमियोपैथिक सिद्धान्त के प्रतिपादन में भगवत पुराण में उल्लेखित यह प्रश्न काफ़ी महत्वपूर्ण है-
क्या यह सत्य नहीं कि जब किसी सजीव प्राणी द्वारा ग्रहण किया गया
कोई पदार्थ किसी व्याधि का कारण बनता है तो वही पदार्थ किसी विशेष प्रकार से अनुशंसित किए जाने पर उसी प्रकार की व्याधि को दूर कर सकता है?
इसी प्रश्न के उत्तर की खोज है होमियोपैथी जिसने सम सम: समीश्यति ( सिमीलिया सीमिलीबस
क्यूरेन्टर ) जैसे सिद्धान्त का प्रतिपादन किया। इसका मतलब हुआ कि होमियोपैथिक सिद्धान्त का पहलू हमारे प्राचीन भारत के पन्नों में
ही छिपा हुआ था। तथापि यह श्रेय जर्मनी को मिला।
जर्मनी के ट्रांसिल्वानिया से आए डॉ. मार्टिन होनिवर्गर ने 1839 में तत्कालीन पंजाब के महाराजा रणजीत सिंह की स्वर नलिका के लक़वे एवं भीतरी सुजन(ईडिमा) का इलाज मात्र डल्कामारा के चंद खुराकों से कर दिया था जिसे स्थानीय चिकित्सक ठीक करने में विफल रहे। इस घटना से डॉ होनिवर्गर को राजवैद्य नियुक्त कर दिया गया। फलस्वरूप आयुर्वेदिक और युनानी चिकित्सकों में जलन होने लगी। इधर डॉ होनिवर्गर के दारूलसफा ( चिकित्सालय) में रोगियों की भीड़ बढ़ने लगी। लगभग 15 वर्षों तक उन्होंने पंजाब में रहकर होमियोपैथी की पहचान क़ायम करने में सफलता पायी। बाद में वे कलकत्ता चले गए।
इस प्रकार पंजाब के बाद बंगाल में भी होमियोपैथी की लहर चलने लगी।जर्मन के धर्म प्रचारक के रूप में आए लीनर, ग्रीनर और हेविथ जैसे लोगों ने ग़रीबों में हेमियोपैथिक दवाओं को मुफ़्त में वितरित करना शुरू कर दिया।इस दौरान बंगाल के होमियोपैथिक चिकित्सक डॉ टोनर ने भी होमियोपैथिक चिकित्सा विज्ञान का काफी प्रचार प्रसार किया। इसी प्रकार दक्षिण प्रान्त के वर्तमान मैंगलुरू में फ़ादर मूलर ने हमारे देश में होमियोपैथी को विस्तार दिया एवं
एक होमियोपैथिक विश्वविद्यालय स्थापित करने के साथ साथ होमियोपैथिक औषधियों के निर्माण के लिए एक छोटी इकाई भी शुरू की जो आज व्यापक पैमाने पर फैल चुकी है।
तत्कालीन कलकत्ता के बाबू राजेन्द्र लाल दत्त के योगदान को भुलाया नहीं जा सकता जिन्होंने होमियोपैथिक औषधियों के प्रभाव का अध्ययन किया और कई शोध भी किए। फलत: गम्भीर बीमारियों के उपचार में उन्होंने महारत हासिल कर ल।
1863 में ब्रिटिश एलोपैथिक मेडिकल चिकित्सा से जुड़े डॉ एम एल सरकार ने होमियोपैथी की तीव्र निन्दा शुरू कर दी । किंतु पड़ोस में रह रहे डॉ राजेन्द्र लाल दत्त के यहॉं रोगियों की भीड़ बढ़ने लगी। यह देख कर डॉ सरकार की उत्सुकता बढ़ने लगी
और धीरे-धीरे वे होमियोपैथी के सिद्धान्त और औषधियों पर अध्ययन करने लगे और उनका झुकाव इस चिकित्सा विज्ञान की तरफ बढ़ने लगा। वे होमियोपैथी के मूलभूत सिद्धान्त - सिमीलिया , सिमीलीबस, क्यूरेन्टर के प्रति समर्पित हो गए और अपनी जिज्ञासु प्रवृति के कारण खुद भी होमियोपैथिक औषधियों का प्रयोग करने लगे। बाद में प्रभावित होकर उन्होंने अपनी प्रचलित एलोपैथिक चिकित्सा को छोड़ दिया और होमियोपैथी से मरीज़ों का इलाज करने लगे। वे कलकत्ता विश्वविद्यालय के स्नाकोत्तर एवं प्रतिभाशाली छात्र थे। परंतु सब कुछ त्याग कर होमियोपैथिक चिकित्सा का पुरज़ोर प्रचारक बन गए। इतना ही नहीं खुले मंच से एलोपैथी की ख़ामियों और होमियोपैथी की विशेषताओं को प्रचारित करने लगे। इसके कारण उन्हें एलोपैथिक एसोसिएशन से बाहर कर दिया गया। ठीक वैसे ही जैसे होमियोपैथी के इजादकर्ता डॉ हैनिमैन के साथ हुआ था । यह सिद्ध करने के लिए काफ़ी है कि होमियोपैथी की गहराइयों में जो तथ्य छुपे हुए हैं वह किसी भी चिकित्सा विज्ञान में नहीं है। आगे चल कर डॉ एम एल सरकार हमारे देश में 19वीं शताब्दी के
सबसे चर्चित होमियोपैथ चिकित्सक बने।
इसमें अतिशयोक्ति नहीं कि भारत में होमियोपैथी के विकास में कलकत्ता के चिकित्सकों का विशेष योगदान रहा है।
इसी क्रम में डॉ पी सी मजूमदार का नाम आता है अमेरिका के एक होमियोपैथिक चिकित्सा महाविद्यालय से शिक्षा ग्रहण कर आए पहले भारतीय चिकित्सक थे। उन्होंने ही भारत में पहला होमियोपैथिक मेडिकल इंस्टीट्यूट की स्थापना की थी। उनके सानिध्य में आए कलकत्ता के रसायन विज्ञानी एवं प्रख्यात डॉक्टर महेश चंद्र भट्टाचार्य ने होमियोपैथिक औषधियों की आपूर्ति के लिए व्यापक पैमाने पर निर्माण कार्य करना शुरू कर दिया जिसमें अच्छी गुणवत्ता की औषधियॉं तैयार की जाती थीं।
उन्होंने ही अंग्रेज़ी और बंगला में होमियोपैथिक पुस्तकें प्रकाशित करने काम भी शुरू किया।उन पुस्तकों का बाद में हिन्दीअनुवाद हुआ और होमियोपैथी के क्षेत्र में क्रान्तिकारी बदलाव आया।
आगे चल कर 1943 में जनरल कउंसिल एंड स्टेट फ़ैकल्टी ऑव होमियोपैथिक मेडीसिन का गठन किया गया। तदंतर डॉ एस डब्ल्यू युवान ,डॉ जे एन मजूमदार , डॉ जे एम घोष, डॉ एस के नाग और डॉ एन एम चौधरी आदि चिकित्सक इस संस्था से जुड़ कर होमियोपैथी का नाम रोशन किया।
• डॉ बी एल प्रवीण
मो.8540098113
निदेशक : जिला होमियोपैथिक संघ,बक्सर

01/03/2017

होमियो गीत
स्वस्थ जगत का नारा है
होमियो एक सितारा है
खाना विष है पीना विष
मन में विषयों का ही विष
विष से हुए लक्षण जब पैदा
विष ने विष को मारा है
स्वस्थ जगत का नारा है -------------------
दो सौ साल हुए डेंगू ने
फिर से पॉंव पसारा है
युपिटोरियम का नाम अभी
सब औषधि से न्यारा है
स्वस्थ जगत का नारा है ------------------
हेरिंग, बर्नेट, केंट, घोष
किया सिर्फ़ मानव पर शोध
दिया रोशनी जग में वह
हैनीमैन हमारा है
स्वस्थ जगत का नारा है ------------------
मार्टिन, मूरे या क्लार्क
सुसलर, बोरिक, लियोनार्द
पीकर ज़हर किया त्राण वह
प्राणों से भी प्यारा है
स्वस्थ जगत का नारा है
होमियो एक सितारा है •

डॉ बी एल प्रवीण • 9934907335
प्रवीण होमियो रिसर्च सेंटर
डुमरॉंव , बक्सर 802119

01/03/2017

होमियो गीत
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ये है सारा संसार होमियो का
होमियो का है संसार होमियो का
क्यूँ नहीं जागे हम
क्यूँ नहींआगे हम
चाहे तो छू लें यूँ
सारा आकाश हम
अब तो आया बाज़ार होमियो का
होमियो का है संसार होमियो का
बढ़ चले क़ाफ़िले
बढ़ चला है कारवाँ
जादू की छड़ी है ये
झुका सकेंगे आसमां
सपना होगा साकार होमियो का
होमियो का है संसार होमियो का
हौसले में जोश है
अब नहीं कोई होश है
जीत लें सारा जहॉं
हर कोई मदहोश है
देखो आया त्योहार होमियो का
होमियो का है संसार। होमियो का

01/03/2017

राजगीर में चले तीन दिवसीय सम्मेलन की सफलता हेतु "बिहार राज्य होमियोपैथिक संघ के तमाम कर्यकरताओं को बहुत -बहुत बधाई।इस सम्मेलन के बाद "बिहार राज्य होमियोपैथिक संघ "केअध्यक्ष श्री दउद अली जी का कद जितना बढ़ गया है इस परिस्थिति में मैं उन्हें धन्यबाद नहीं दे सकता बल्कि मैं सलाम करता हूँ।तमाम होमियो जगत को इस नयाब हीरे को बचाकर रखने का प्रयास करना पड़ेगा।उन्होंने जिस प्रकार अपने संवेदनापूर्ण भाषण से सभागार में उपस्थित तमाम होमियो परिवार को रुलादिया उससे बिहार प्रदेश के महामहिम गवर्नर श्री रामनाथ कोविन्दजी भी प्रभावित हुए बिना नहीं रह सके और उनकी सांत्वना ने लोगों को काफी रहत दिलाई।अब इस आह एवं वाह की भी परवाह सरकार को नहीं हुई तो भगवान ही उसका मलिक होंगे।मैं होमियोपैथ के प्रति समर्पित,निष्ठावान,एवं जुझारू इस शख्सियत क बहुत -बहुत सलाम करता हूँ। डा.एस.एन.सिंह -अध्यक्ष ~जि. हो.संघ बक्सर

01/03/2017

नालंदा : होमियोपैथ चिकित्सा पद्धति विश्व की एक ऐसी चिकित्सीय प्रणाली है, जो असाध्य रोगों को जड़ समेत समाप्त करने की क्षमता रखती है. देश भर में बिहार की होमियोपैथ चिकित्सा प्रणाली की चर्चा व उपलब्धि जगजाहिर है. एलोपैथ पद्धति के बाद होमियोपैथ का नाम आता है. इस चिकित्सा पद्धति के विकास व सुविधाजनक बनाने के लिए केंद्र सरकार द्वारा चलाये जा रहे आयुष नामक योजना के क्रियान्वयन के तर्ज पर राज्य सरकार को भी इस दिशा में योजना चलाने पर पहल करनी चाहिए. ये बातें राज्यपाल रामनाथ कोविंद ने सोमवार को कहीं.

राज्यपाल अंतर्राष्ट्रीय कन्वेंशन सेंटर के सभागार में बिहार राज्य होमियोपैथिक संघ की ओर से आयोजित तीन दिवसीय चिकित्सकों के अधिवेशन के समापन समारोह सत्र को संबोधित कर रहे थे. इसके पहले राज्यपाल को संघ के अध्यक्ष डॉ दाउद अली, महासचिव अनिल कुमार वर्मा व डॉ अमित कुमार तथा आयोजक सचिव संजय कुमार गुप्ता ने गुलदस्ता देकर भव्य स्वागत किया. इसके बाद कार्यक्रम का राज्यपाल ने दीप प्रज्जवलित कर उद्घाटन किया.

राज्यपाल ने इन तीन दिनों के सम्मेलन के दौरान हुए विभिन्न रोगों व उनके निदान के प्रकरण में निहित होमियोपैथ पद्धति चिकित्सा से जुड़े नये शोध के रिपोर्ट कार्ड व व्याख्यान पत्र पर चर्चा की. उन्होंने कहा कि सम्मेलन में शामिल विभिन्न चिकित्सकों व अभ्यासरत विद्यार्थियों को चाहिए कि वे इस दौरान तीन दिवसीय सम्मेलन के सभी व्याख्यान पत्र की जानकारी सहेज कर रखें.

रिपोर्ट को राजभवन भेजने के लिए कहा

राज्यपाल कोविंद ने यह भी अपील करते हुए कहा कि अपने इस व्याख्यान पत्र रिपोर्ट को राजभवन भी भेजें, ताकि हम भी इस सम्मेलन के हर पहलू से रूबरू हो सकें. वहीं संघ के अध्यक्ष द्वारा अप्रत्यक्ष रूप से होमियोपैथ दवाओं के निर्माण, अनुसंधान व शोध में प्रयोग होनेवाले अल्कोहल का शराबबंदी कानून के पचड़े में चले जाने से जाहिर की गयी पीड़ा पर राज्यपाल ने कहा कि होमियोपैथ चिकित्सा के जन्मदाता जर्मनी के हेनीमैन को भी समस्याओं से संघर्ष करना पड़ा था, पर उन्होंने हार नहीं मानी और आज उनके बाद भी यह चिकित्सा प्रणाली लोगों को स्वस्थ कर रही है. राज्य सरकार का ध्यान आकृष्ट कराते हुए कहा कि इस संबंध में संवैधानिक प्रक्रिया के तहत सभी बारीकियों पर गंभीरता पूर्वक विचार कर संतोषजनक व संतुलित हल निकाला जाना चाहिए. तभी इस चिकित्सा पद्धति का मूलभूत विकास संभव है.

स्मारिका का किया गया विमोचन

राजगीर विधायक कुमार रवि ज्योति ने कहा कि यह सच है कि दुनिया में बगैर दुष्प्रभाव के इलाज में शुमार होमियोपैथ चिकित्सा पद्धति विश्वभर में दूसरे स्थान पर है, परंतु उसे अव्वल पायदान पर रखने के लिए होमियोपैथ चिकित्सकों को समझदारी तथा ईमानदारी से काम करने की सख्त जरूरत है. संघ के अध्यक्ष डॉ. दाउद अली ने राज्यपाल से निवेदन करते हुए कहा कि आज के दौर में होमियोपैथ को समाप्त करने की हो रही घोर साजिश से इसकी रक्षा का दायित्व निभाएं. उन्होंने गोपालगंज व मीरगंज में होमियोपैथ चिकित्सकों से मारपीट व उनके साथ हुए दुर्व्यवहार पर भी राज्यपाल से अपील की कि आगे इस तरह की घटना नहीं हो. मौके पर स्मारिका का विमोचन भी राज्यपाल ने किया. धन्यवाद ज्ञापन संघ के महासचिव अनिल कुमार वर्मा ने किया. इस अवसर पर डॉ. अरविंद कुमार सिंह, डॉ. राजेन्द्र प्रसाद, डॉ. एसएन सिंह, डॉ. अनवर, डॉ. संत प्रसाद, डॉ. एचके देव, डॉ. मनीष कुमार, डॉ. यूपी सिंह, डॉ. रमाकांत सिंह, डॉ. खुर्शीद आलम, डॉ. बिजेन्द्र प्रताप सिंह सहित सैकड़ों की संख्या में चिकित्सक व विद्यार्थी उपस्थित थे.

01/03/2017



इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर, राजगीर में चल रहे बिहार राज होम्योपैथिक संघ के राज्य स्तरीय सम्मेलन के तीसरे दिन और अंतिम दिन सोमवार को राज्यपाल रामनाथ कोविंद शामिल हुए। सम्मेलन की शुरुआत राष्ट्रगान से हुई। राज्यपाल रामनाथ कोविंद ने कहा कि होम्योपैथ बीमारी को जड़ से मिटाती है। दवा का चयन बेहतर हो तो रोग जड़ से भागता है। उन्होंने कहा कि होमियोपैथिक चिकित्सकों को गंभीरता पूर्वक रोगों का इलाज करना चाहिए। वही इस मौके पर राज्यपाल ने प्रथम राज्य स्तरीय सम्मेलन की स्मारिका का भी विमोचन किया। इस अवसर पर पूर्व सांसद मोहम्मद साबिर अली, स्थानीय विधायक रवि ज्योति कुमार सहित अन्य लोग शामिल हुए।

01/03/2017

होमियोपैथिक दवा से मानव शरीर पर कोई कुप्रभाव नहीं होता। इससे जटिल से जटिल बीमारी का इलाज संभव है। इसका कोई रिएक्शन नहीं होता है। यह चिकित्सा पद्धति सबसे सस्ती है। होमियोपैथिक दवा बीमारी को जड़ से मिटाती है। दवा का चयन अगर बेहतर हो गया तो बीमारी पूरी तरह से ठीक हो जायेगी। होमियोपैथिक चिकित्सकों को गंभीरता पूर्वक रोगों का निदान करना चाहिए। इससे उन पर लोगों का और भी विश्वास बढ़ेगा। उक्त बातें राज्यपाल राम नाथ कोविंद ने सोमवार को इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर में चल रहे बिहार राज्य होमियोपैथिक संघ के तीन दिवसीय प्रथम राज्य स्तरीय सम्मेलन के अंतिम दिन के समापन सत्र के दौरान कही। राज्यपाल ने कहा कि केन्द्र व राज्य की सरकार भी होमियोपैथी को सहायता करेगी। उन्होंने कहा कि संघ के द्वारा तीन दिनों तक चले सम्मेलन के दौरान हुई परिचर्चा में आयी समस्याओं व उनके हल के उपायों पर एक लिखित रिपोर्ट बनायें। उस रिपोर्ट को राजभवन भी भेंजे। इसको संघ के सदस्यों के बीच भी दें। इससे संघ को काफी फायदा होगा। राज्यपाल ने कहा कि होमियोपैथ के जनक डॉ. हेनिमैन को भी समस्याओं का सामना करना पड़ा था पर उन्हें सफलता मिली थी। इसका परिणाम है कि आज होमियोपैथिक चिकित्सा विश्व में दूसरे नम्बर की पैथी है। उन्होंने कहा कि मौजूदा समय में चल रही समस्याओं का इससे जुड़े लोग सामना करें। सफलता मिलेगी। राज्यपाल ने कहा कि राजगीर एक काफी खुबसूरत स्थल है। यहां का यह इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर सूबे का इकलौता सेंटर है। आने वाले दिनों में जल्द ही पटना में भी इसी तरह का सम्राट अशोक कन्वेंशन सेंटर बनाया जा रहा है। पूर्व राज्यसभा सांसद मो. शाबीर अली ने कहा कि होमियोपैथी दवा मर्ज को जड़ से खत्म करती है। सरकार को इसका पूरा समर्थन करना चाहिए। इसके विकास के लिए काम करना चाहिए। बिहार में होमियोपैथिक चिकित्सक जितने अच्छे हैं उतने विश्व के किसी कोने में नहीं है। सरकार को चाहिए कि वे इन चिकित्सकों को प्रोत्साहित करे। विधायक रवि ज्योति कुमार ने कहा कि होमियोपैथिक दवा कम खर्च में सुलभ मिल जाती है। उन्होंने होमियोपैथिक चिकित्सकों को समझदारी से काम करने को कहा। उन्होंने कहा कि होमियोपैथी दवा के बारे में पूरी जानकारी रखें। मरीज के लक्षण को पूरी तरह सही पकड़कर इलाज करें। इससे लोगों में विश्वास बढ़ेगा और धीरे-धीरे यह हर लोगों की जुबान पर होगी। संघ के प्रदेश अध्यक्ष पूर्व विधायक डॉ. दाउद अली ने कहा कि होमियोपैथी सिस्टम को खत्म करने की साजिश रची जा रही है। इसे बचाना होगा। यह आज पूरे विश्व में दो नम्बर की पैथ है। इसे नम्बर वन पर लाना है। डॉ. अली ने कहा कि बिहार के मीरगंज में जहर खाने से किसी व्यक्ति की मौत होती है। उस व्यक्ति के घर में होमियोपैथी दवा की सीसी पायी जाती है। उसके बाद उत्पाद विभाग की टीम उस इलाके के सभी होमियोपैथी दवा बेचने वाले, चिकित्सकों को तंग व प्रताड़ित करने का काम करती है। कुछ लोगों को जेल भी भेज दिया गया है। डॉ. अली ने सरकार से मांग की है कि इस घटना की उच्च स्तरीय जांच होनी चाहिए। इस तरह होमियापैथिक चिकित्सकों व दुकानदारों को प्रताड़ित किया जाना ठीक नहीं है। अगर सरकार को लगता है कि होमियोपैथिक दवा ही गलत है तो इस सिस्टम को ही बंद करवा दे। संघ के महासचिव अनिल कुमार वर्मा ने कहा कि होमियापैथिक दवा का लगातार सेवन करने वाले लोग हमेशा निरोग रहते हैं। लोगों में विश्वास जगाना होगा। लोगों की धारणा को बदलना होगा। होमियोपैथिक में छोटे से छोटे लक्षणों को ध्यान में रखकर इलाज किया जाता है। यह अन्य किसी प्रणाली में नहीं होती है। यही कारण है कि इससे असाध्य रोगों का इलाज सहज तरीके से होता है। उन्होंने बताया कि इस तीन दिवसीय सम्मेलन में उत्तरप्रदेश, बंगाल, झारखंड व पूरे बिहार के विभिन्न जिले से आये हुए होमियोपैथिक चिकित्सक, होमियोपैथी दवा दुकानदार व इससे जुड़े 900 प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इस मौके पर डॉ. देवी प्रसाद पाल, डॉ. शांतनु घोष, डॉ. शरत चन्द्र संतोष, डॉ. दिनेश प्रसाद, संघ के महासचिव अनिल कुमार वर्मा, डॉ. अरविन्द कुमार, डॉ. बीएल प्रवीण, डॉ. राजेन्द्र प्रसाद, डॉ. मो. अनवर, प्यारे चौधरी, डॉ. संत प्रसाद, डॉ. एचके देव, चंदन कुमार, डॉ. अमित, अनिल कुमार, डॉ. राजीव कुमार, डॉ. प्रभाकर कुमार सहित अन्य मौजूद थे। राज्यपाल ने किया संघ की पत्रिका का विमोचन:इंटरनेशनल कन्वेंशन में चल रहे बिहार राज्य होमियोपैथिक संघ के तीन दिवसीय राज्य स्तरीय सम्मेलन के तीसरे दिन सोमवार को राज्यपाल ने संघ के द्वारा प्रकाशित प्रथम राज्य स्तरीय सम्मेलन स्मारिका का विमोचन किया। इसमें होमियोपैथ के बारे में विस्तार से जानकारी दी गयी है।

01/03/2017



राजगीर। निज संवाददाताअ+अ-

Updated: 26-02-17 05:11 PM

होमियापैथिक दवा का लगातार सेवन करने वाले लोग हमेशा निरोग रहते हैं। यह धारणा लोगों में बनानी होगी। इसके लिए हम सबों को लोगों में विश्वास जगाना होगा। लोगों की धारणा को बदलना होगा। होमियोपैथ को खत्म करने की साजिश चल रही है। यह विदेश की साजिश है। इसके लिए हम सबों को आगे आकर मुकाबला करना होगा। होमियोपैथ पर अटैक करने वालों से लड़ाई लड़नी होगी। उक्त बातें बिहार राज्य होमियोपैथिक संघ के प्रदेश अध्यक्ष सह पूर्व विधायक डॉ. दाउद अली ने रविवार को इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर में चल रहे बिहार राज्य होमियोपैथिक संघ के प्रथम तीन दिवसीय राज्य स्तरीय सम्मेलन के दूसरे दिन कही।डॉ. अली ने कहा कि होमियोपैथिक चिकित्सकों व दवा दुकानदारों की जांच करने वाले ड्रग इस्पेक्टरों की संपत्ति की जांच की जानी चाहिए। होमियोपैथ की जानकारी रखने वाला ही इनकी जांच करे। उन्होंने चिकित्सकों से कहा कि बिना डरे वे आने पर उसका मुकाबला करें। होमियोपैथ के नियमों की जानकारी रखें। डॉ. अली ने कहा कि बिहार होमियोपैथिक चिकित्सा बोर्ड की स्थिति बदहाल हो गयी है। इसका विकास किया जाना चाहिए। राजगीर से ही अनेकों तरह की लड़ाई की शुरूआत हुई है। यहीं से होमियोपैथ को बचाने व इसके विकास की भी लड़ाई शुरू हो रही है जो पूरे देश में चलेगी। मौजूदा समय में होमियोपैथिक चिकित्सा पूरे विश्व में दो नम्बर पर है जो आने वाले दिनों में एक नम्बर पर हो इसके लिए पूरा प्रयास करना है। दूसरे राज्यों में जाकर संघ होमियोपैथ की प्रचार-प्रसार करेगी। बंगाल के चिकित्सक डॉ. देवी प्रसाद पाल ने डायबेटिक मेलिटस के साथ डायबेटिक अलसर एवं डायबेटिक फूट पर लोगों को विस्तार से बताया। उन्होंने यह बताया कि इसमें किस तरह के लक्षण से मरीजों को परेशानी होती है। उन्होंने बताया कि डायबेटिक फूट के सहारे उन्होंने 70 साल के मरीज के लाइलाज बीमारी को ठीक किया था। डॉ. शांतनु घोष ने पल्मोनरी टयूबरकुलेसिस रोग पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि होमियोपैथिक प्रणाली विश्व में किसी भी चिकित्सा प्रणाली से बेहतर है। लोगों को इसके विकास के लिए आगे आने की जरूरत है। डॉ. सुनील प्रसाद ने कहा कि होमियोपैथिक चिकित्सकों को अपने भीतर डॉक्टर के गुण लाने की जरूरत है। बक्सर के डॉ. बीएल प्रवीण ने कहा कि होमियोपैथिक में छोटी से छोटी लक्षणों को ध्यान में रखकर इलाज की जाती है। यह अन्य किसी प्रणाली में नहीं होती है। यही कारण है कि इससे असाध्य रोगों का इलाज सहज तरीके से होता है। सासाराम के डॉ. शरत चन्द्र संतोष ने कहा कि होमियोपैथिक में जटिल से जटिल बीमारी भी कम खर्च में ठीक होती है। इसके लिए लोगों में जागरुकता फैलाने की जरूरत है। होमियोपैथिक चिकित्सक मरीजों को इलाज के पहले कि स्थिति व उसके बाद इलाज करने से हुए फायदे को जरूर बतायें। इस मौके पर डॉ. बीके भास्कर, संघ के महासचिव अनिल कुमार वर्मा, विनोद कुमार, डॉ. अरविन्द कुमार, डॉ. राजेन्द्र प्रसाद, डॉ. दिनेश प्रसाद, डॉ. एसएन सिंह, डॉ. मो. अनवर, डॉ. संत प्रसाद, डॉ. एचके देव, डॉ. मनीष कुमार, डॉ. यूपी सिंह, डॉ. रामाकांत सिंह, डॉ. खुर्शीद आलम, डॉ. एमके श्रीवास्तव, डॉ. रामकृष्ण केसरी, डॉ. शरत चन्द्र संतोष, चंदन कुमार, डॉ. अमित कुमार, डॉ. रिंकी कुमारी, अनिल कुमार, डॉ. राजीव कुमार सहित अन्य मौजूद थे।

01/03/2017

: 25-02-17 06:33 PM

होमियोपैथिक चिकित्सा सबसे सस्ती होती है। इसका कोई साइड इफेक्ट नहीं होता है। लोगों को इस चिकित्सा विधि पर भरोसा करना होगा। चिकित्सक को लोग भगवान का दूसरा रूप मानते हैं। चिकित्सक जीवन रक्षक होते हैं। राजगीर ज्ञान स्थली है। नालंदा प्राचीन काल से ही ज्ञान का केन्द्र रहा है। नये-नये रोगों से निजात के लिए दवा का रिसर्च जरूरी है। उक्त बातें ग्रामीण विकास सह संसदीय कार्य मंत्री श्रवण कुमार ने शनिवार को इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर में आयोजित बिहार राज्य होमियोपैथिक संघ के प्रथम तीन दिवसीय राज्य स्तरीय सम्मेलन में कही। मंत्री ने कहा कि होमियोपैथिक चिकित्सकों को भी मरीज को रोग की पूरी विवरणी देनी चाहिए। उनमें आत्मविश्वास जगाने की जरूरत है। मौजूदा समय में सरकारी अस्पताल में भी होमियोपैथिक डॉक्टर बहाल हैं जो वहां इलाज कर रहे हैं। होमियोपैथिक चिकित्सा से जुड़े लोगों को कॉलेज की स्थापना के लिए आगे आना चाहिए। सरकार अपने मापदंड के अनुसार उन्हें पूरी मदद करेगा। श्री कुमार ने कहा कि संघ ने गरीबों को झुग्गी झोपड़ियों में जाकर जो इलाज करने व उनके बीच दवा बांटने की योजना बनायी है, वह काफी सराहनीय है। संघ अपनी समस्याओं व सुझावों को लेकर सरकार के पास लोक संवाद में जाकर रखे। पूर्व आईएचओ के सेक्रेटरी जनरल डॉ. महेश प्रसाद सिंह ने कहा कि अगर होमियोपैथ की दवाओं के निर्माण पर रोक लगायी गयी तो होमियोपैथिक साइंस बेकार हो जायेगा। दवा के निर्माण में अल्कोहल के इस्तेमाल की पद्धति अलग है। एक होमियोपैथिक चिकित्सक सभी तरह के रोगों का इलाज करते हैं। उन्होंने कहा कि सरकार प्रखंड स्तर पर होमियोपैथिक डॉक्टर की बहाली करे। सूबे में एक रिसर्च सेंटर खोला जाय ताकि लोगों को आसानी से दवाएं उपलब्ध हो सके। बिहार राज्य होमियोपैथिक संघ के प्रदेश अध्यक्ष सह पूर्व विधायक डॉ. दाउद अली ने कहा कि होमियोपैथिक चिकित्सा विज्ञान विश्व में दूसरे नम्बर पर है। डेंगू जैसी बीमारी का इलाज इस चिकित्सा पद्धति में तीन दिनों में किया जा सकता है। जटिल से जटिल बीमारी भी कम खर्च में ठीक होती है। इसके लिए लोगों में जागरुकता फैलाने की जरूरत है। डॉ.अली ने कहा कि हार्ट जैसे रोगों का भी इसमें आसानी से इलाज है। उन्होंने कहा कि संघ के द्वारा यह तय हुआ है कि गरीबों के झुग्गी-झोपड़ियों में जाकर मुफ्त इलाज व उनके बीच दवा बांटी जायेगी। जनता के बीच जाकर इलाज करना है। इससे पहचान व लोगों में विश्वास बढ़ेगा। उन्होंने कहा कि होमियोपैथिक डॉक्टरों व दवा दुकानों की जांच एलोपैथ पढ़ा ड्रग इंस्पेक्टर करने के काबिल नहीं है। इसके लिए सरकार होमियोपैथिक की जानकारी रखने वाले को ही नियुक्त करे तो बेहतर होगा। इस संबंध में उन्होंने ड्रग कंट्रोलर ऑफ इंडिया को लिखा है। इसके अलावा दुकानदारों को नवीनीकरण के लिए ऑन लाइन की प्रक्रिया की जानी चाहिए। प्रक्रिया में जब तक पारदर्शिता नहीं आयेगी तब तक चिकित्सा विज्ञान का विकास सही तरीके से नहीं हो सकता है। इस मौके पर आईएचओ के पूर्व सेक्रेटरी जनरल डॉ. महेश प्रसाद सिंह, लखनऊ के डॉ. बिक्रमा प्रसाद, उत्तरप्रदेश के डॉ. विजेन्द्र प्रताप सिंह, बिक्रम के डॉ. संत कुमार, मुजफ्फरपुर के डॉ. एमके श्रीवास्तव, आरा के डॉ. अनवर, डॉ. रामाकांत, डॉ. एचएन श्रीवास्तव, डॉ. दिनेश कुमार, डॉ. अमित कुमार, झारखंड के डॉ. रिंकी कुमारी, डॉ. अनिल कुमार, रांची के डॉ. राजीव कुमार सहित अन्य मौजूद थे। बच्चों में होने वाली जौंडिस को चार दिन में ठीक कर सकता है होमियोपैथिक दवा:आरा के डॉ. मो. अनवर ने कहा कि पूरे देश में सबसे ज्यादा होमियोपैथिक चिकित्सक बिहार में हैं। बिहार में होमियो इंडस्ट्री का विकास होना चाहिए। इसके लिए नयी सोच बनाया जाय। उन्होंने कहा कि छोटे बच्चों में जब जौंडिस हो जाता है तो उसे होमियोपैथ की दवा चार दिन में ठीक कर सकती है। लोगों में ज्यादा बीमारियों की जड़ ऐलोपैथ दवा का बेतरीका प्रयोग से हो रहा है। एक होमियोपैथिक डॉक्टर 20 एलोपैथ डॉक्टर के बराबर:रांची के डॉ. राजीव कुमार ने कहा कि होमियोपैथिक चिकित्सक को लोग पुड़िया का डॉक्टर कहकर बुलाते हैं। इसके लिए सभी डॉक्टरों को अपने रहन-सहन में सुधार करना होगा। अपने दवा खाना से लेकर चैम्बर को एक बेहतर लुक देना चाहिए। मरीज को पुर्जा जरूर बनायें। फीस लें। उन्होंने कहा कि ऐलोपैथ जहां खत्म हो जाती है होमियोपैथ वहां से शुरू होती है। एक होमियोपैथिक चिकित्सक 20 एलोपैथ डॉक्टर के बराबर होता है। ग्रामीण इलाके व गरीबों की सबसे मददगार दवा:उत्तर प्रदेश के पूर्व निदेशक होमियोपैथ डॉ. बिक्रमा प्रसाद ने कहा कि यह गांव के लोगों के लिए सबसे मददगार होने वाली इलाज है। होमियोपैथिक चिकित्सक मरीजों को इलाज के पहले की स्थिति व उसके बाद इलाज करने से हुए फायदे को जरूर बतायें। फर्मासिस्ट की बहाली होनी चाहिए।

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