11/12/2025
मोतियाबिंद की सर्जरी कब करवानी चाहिए?
मोतियाबिंद (Cataract) कोई इमरजेंसी नहीं है, लेकिन सही समय पर करवाना बहुत ज़रूरी है।
कब करवाएं सर्जरी? (सही समय)
जब मोतियाबिंद आपकी रोज़मर्रा की ज़िंदगी में दिक्कत डालने लगे, तब करवा लें, जैसे:
- रात में गाड़ी चलाते समय लाइट चुभना या चकाचौंध होना
- पढ़ने, टीवी देखने, सिलाई करने या गोल्फ खेलने में परेशानी
- लोगों के चेहरे पहचानने में दिक्कत
- बार-बार गिरने का डर (खासकर बुजुर्गों में)
- ड्राइविंग लाइसेंस की वैधता पर असर (ज्यादातर जगह 6/12 यानी 20/40 से कम नहीं होना चाहिए)
नया नियम: जब मरीज खुद कहे – "अब बहुत तकलीफ हो रही है, अब करवा लूँ" → तब सर्जरी का सही समय है।
पुराना मिथक था – "मोतियाबिंद पूरी तरह पक जाए तब ऑपरेशन करें"
ये बिल्कुल गलत और खतरनाक है!
आजकल का ऑपरेशन (फैको विधि) तब सबसे आसान और सुरक्षित होता है जब मोतियाबिंद मध्यम स्टेज में हो, पूरी तरह सफेद होने की ज़रूरत नहीं।
अगर टालते रहे तो क्या नुकसान?
- धीरे-धीरे नज़र और कमज़ोर होती जाएगी
- गिरने का खतरा 2-3 गुना बढ़ जाता है (बुजुर्गों में कूल्हे की हड्डी टूटने का डर)
- ड्राइविंग बंद हो सकती है → घर में कैद होने जैसा हाल
- बहुत देर करने पर सर्जरी मुश्किल और रिस्क ज्यादा हो जाता है
- बहुत रेयर केस में अचानक आँख का प्रेशर बढ़ सकता है (ग्लूकोमा)
किन लोगों को जल्दी करवाना चाहिए?
- जिन्हें लाइट बहुत चुभती हो (पोस्टरियर सबकैप्सुलर मोतियाबिंद)
- जिनकी एक ही आँख ठीक हो
- जो पेशे से ड्राइवर, पायलट या सर्जन हों
- जिन्हें गिरने का ज्यादा डर हो
अंतिम सलाह
अगर आपको लग रहा है कि नज़र में कुछ दिक्कत है, तो एक बार आँखों के डॉक्टर से जरूर मिल लें। 5 मिनट की जाँच में पता चल जाएगा कि अभी इंतज़ार कर सकते हैं या अब सर्जरी का सही समय है।
आजकल का मोतियाबिंद ऑपरेशन बहुत सुरक्षित, सिर्फ 5-10 मिनट का और बिना टांके वाला है।
सही समय पर करवाएंगे तो फिर चश्मा भी कम लगेगा और ज़िंदगी फिर से रंगीन हो जाएगी!
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#मोतियाबिंद