07/11/2018
🔥 *ओ३म्* 🔥
*दीपावली = शारदीय नवसस्येष्टि*
(कार्त्तिक कृष्ण अमावस्या)
आज *_शरद ऋतु_* की समाप्ति में केवल पन्द्रह दिन शेष हैं. 15 दिनों पश्चात् *_हेमन्त ऋतु_* का प्रारम्भ और शीत (winter) का शासन होगा.
वर्षा के बीतने और शीत (cold) लगने पर जनता को कुछ विशेष समारम्भ (तैयारियाँ) करनी पडती है. *वर्षा-ऋतु* में _नमी और कीचड से वायुमण्डल और घर-बाहर मलिन, दुर्गन्धित हो जाता है,_ जिसकी संशुद्धि और स्वच्छता की आवश्यकता होती है. मच्छरों के आधिक्य से _मलेरिया, डेंगू_ आदि का प्रकोप होता है. वायुमण्डल का संशोधन *हवन* से होता है, घर-बाहर की स्वच्छता *लिपाई-पुताई* (Cleaning, Painting) से होती है. इसी समय भावी शीत निवारण हेतु, *गरम-वस्त्रों* का प्रबन्ध करना पडता है, इसी समय *श्रावण-मास के नयी-फसलों* का आगमन होता है. शास्त्रों में इस अवसर पर यज्ञ करने का विधान है. इन सब कार्यों के लिए *कार्त्तिक कृष्ण अमावस्या* की तिथि प्राचीन काल से नियत है.
```सस्य = फसल```
```इष्टि = यज्ञ (हवन)```
```दर्श = अमावस्या = Dark Moon```
जिस प्रकार *शरद-पूर्णिमा* की _चाँदनी_, वर्षभर की बारह पौर्णमासियों ```(full Moon)``` में सर्वोत्कृष्ट होती है, उसी प्रकार *कार्त्तिक मास की अमावस्या* ```(Dark Moon)``` का _अन्धकार_, वर्षभर की बारह अमावस्याओं में सघनतम होता है, जिसकी निवृत्ति के लिए *दीपमाला(दीपावली)* का उत्सव मनाया जाता है. यह दीपमाला भी वर्षाकालीन आर्द्रता (Damp) के संशोषण (absorption) से उनके ```संशोधन(purification)``` में सहायक होती है.
आजकल यह उत्सव _गृहपरिशोधन, परिमार्जन, दीपावली(=दीपमाला) प्रकाशन, मिष्टान्न-वितरण_ तक ही सीमित रह गया है, *दर्शेष्टि यज्ञ* एवं *नवसस्येष्टि यज्ञ(हवन)* का लोप हो गया है. हाँ कहीं-कहीं _गुग्गुलु-धूपबत्ती_ जलाने की रीति प्रचलित है. भारत में रुढिवादिता एवं पाखण्ड से इस अवसर पर _द्यूत (Gambling)_ खेला जाने लगा, और _पटाखे_ जलाए जाने लगे, जो की अवैदिक होने से त्याज्य (evitable) है.
आज के दिन (ईसाई वर्ष 1883 में) ही _योगीराज, वेदोद्धारक, समाज-सुधारक, पाखण्ड-खण्डक, गौ-रक्षक, राष्ट्र-समर्पित, (लालालाजपत राय, तिलक, सरदार पटेल, भगत सिंह आदि सभी क्रांतिकारियों के गुरु)_ *महर्षि दयानन्द सरस्वती* की विष-पान से मृत्यु हुई थी.
```Happy Deepawali !```
आपको और आपके परिवार को, दीपावली की हार्दिक शुभकामनायें !!! 🙏🏼🙏🏼