Dr. Nikhil kendrekar's Chitra super speciality physiotherapy clinc

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Dr. Nikhil kendrekar's Chitra super speciality physiotherapy  clinc 10% off on 1 month spine program

we have advanced physiotherapy like DNS (dynamic neuromuscular stabilization, Prague), concept, ,
Matrix Rhythm therapy, Chiropractic & Osteopathy, U-lipolisis, Dry needling therapy, magneto therapy etc

क्रॉनिक पाठदुखी (दीर्घकाळची कंबरदुखी) – केवळ शरीराची नाही, तर भावनांशीही जोडलेलीआजच्या संशोधनातून एक महत्त्वाची गोष्ट सम...
05/01/2026

क्रॉनिक पाठदुखी (दीर्घकाळची कंबरदुखी) – केवळ शरीराची नाही, तर भावनांशीही जोडलेली

आजच्या संशोधनातून एक महत्त्वाची गोष्ट समोर आली आहे 👉
खूप दिवस चालणारी पाठदुखी (Chronic Back Pain) ही फक्त हाडे-स्नायूंची समस्या नसून, त्यात भावनांचा मोठा सहभाग असतो.

हे कसे घडते?

जेव्हा पाठदुखी 3–6 महिन्यांपेक्षा जास्त काळ राहते, तेव्हा:
• मेंदू वेदना सतत लक्षात ठेवतो
• भीती, ताण, चिंता, नैराश्य यामुळे वेदना अधिक तीव्र वाटू लागतात
• शरीर बरे झाले तरी मेंदू “दुखत आहे” असा सिग्नल देत राहतो

म्हणजेच 👉
वेदना शरीरात कमी असते, पण मेंदू-भावनांमध्ये अडकलेली असते.

कोणत्या भावना पाठदुखी वाढवतात?
• सततचा ताण (Stress)
• हालचाल करण्याची भीती
• “माझं कधीच बरं होणार नाही” अशी नकारात्मक विचारसरणी
• कामाचा, घरचा किंवा भावनिक दबाव

त्यामुळे काय होते?
• स्नायू सतत घट्ट राहतात
• हालचाल कमी होते
• वेदना चक्र (Pain Cycle) सुरूच राहते

मग उपचार काय?

फक्त औषध किंवा मशीन पुरेसे नसते.
शरीर + मन दोन्हीवर उपचार गरजेचे असतात.

फिजिओथेरपीमध्ये:
• सुरक्षित व्यायाम
• योग्य हालचाल शिकवणे
• वेदनांची भीती कमी करणे
• रिलॅक्सेशन व श्वसन तंत्र
• रुग्णाला आत्मविश्वास देणे

यामुळे मेंदूला कळते 👉 “मी सुरक्षित आहे”
आणि हळूहळू वेदना कमी होऊ लागतात.

सोप्या शब्दात सांगायचं तर:

🧠 मेंदू शांत झाला
💪 शरीर सैल झालं
😌 वेदना कमी झाली

👉 म्हणूनच क्रॉनिक पाठदुखीत
फक्त कंबर नाही, भावना देखील उपचारात महत्त्वाच्या असतात. डॉ निखिल केंद्रेकर (सिनिअर फिजीओथेरपी तज्ज्ञ) 7875838479

#परभणीफिजीओथेरपी

यूटेराइन प्रोलैप्स (बच्चेदानी का नीचे खिसकना) में पेल्विक फ्लोर एक्सरसाइज़ की भूमिका – आसान हिंदी मेंजब पेल्विक फ्लोर की...
04/01/2026

यूटेराइन प्रोलैप्स (बच्चेदानी का नीचे खिसकना) में पेल्विक फ्लोर एक्सरसाइज़ की भूमिका – आसान हिंदी में

जब पेल्विक फ्लोर की मांसपेशियाँ कमजोर हो जाती हैं, तब बच्चेदानी को सही जगह पर पकड़कर रखने की ताकत कम हो जाती है। इसी कारण यूटेराइन प्रोलैप्स हो सकता है। पेल्विक फ्लोर एक्सरसाइज़ इन मांसपेशियों को मजबूत करने में बहुत मदद करती हैं।

पेल्विक फ्लोर एक्सरसाइज़ क्या करती हैं?
• पेल्विक फ्लोर की मांसपेशियों को मजबूत बनाती हैं
• बच्चेदानी को सपोर्ट देती हैं
• नीचे की ओर खिंचाव और भारीपन की शिकायत कम करती हैं
• पेशाब की समस्या (लीकेज, बार-बार जाना) में सुधार करती हैं
• आगे बढ़ने से (प्रोलैप्स की गंभीरता बढ़ने से) रोकने में मदद करती हैं

किन महिलाओं को ज्यादा फायदा होता है?
• शुरुआती स्टेज के यूटेराइन प्रोलैप्स में
• डिलीवरी के बाद
• जिनको हल्का-मध्यम भारीपन या नीचे कुछ आने जैसा महसूस होता है

⚠️ बहुत ज्यादा बढ़े हुए (एडवांस्ड) प्रोलैप्स में अकेले एक्सरसाइज़ पर्याप्त नहीं होतीं, लेकिन लक्षण कम करने और सर्जरी के बाद रिकवरी में फिर भी उपयोगी रहती हैं।

आसान पेल्विक फ्लोर (केगल) एक्सरसाइज़ कैसे करें?
1. पेशाब रोकने जैसी मांसपेशियों को हल्का कसें
2. 5 सेकंड पकड़ें
3. 5 सेकंड ढीला छोड़ें
4. दिन में 2–3 बार, 10–10 बार करें

ध्यान रखें: पेट, जांघ या नितंब न कसें, सांस न रोकें।

फिजियोथेरेपी की भूमिका
• सही मांसपेशियों की पहचान करवाना
• सही तकनीक सिखाना
• जरूरत पड़ने पर बायोफीडबैक / इलेक्ट्रोथेरेपी
• लाइफस्टाइल सलाह (कब्ज, वजन, खांसी कंट्रोल)

सरल शब्दों में निष्कर्ष

पेल्विक फ्लोर एक्सरसाइज़ बच्चेदानी को थामने वाली मांसपेशियों को मजबूत करती हैं, जिससे यूटेराइन प्रोलैप्स के लक्षण कम होते हैं और आगे बिगड़ने से बचाव होता है। #परभणीफिजीओथेरपी

बहुत से पुरुषों में इरेक्टाइल डिसफंक्शन (लिंग में ठीक से या देर तक तनाव न आना) का कारण केवल हार्मोन या ब्लड सर्कुलेशन ही...
04/01/2026

बहुत से पुरुषों में इरेक्टाइल डिसफंक्शन (लिंग में ठीक से या देर तक तनाव न आना) का कारण केवल हार्मोन या ब्लड सर्कुलेशन ही नहीं होता, बल्कि पेल्विक फ्लोर मसल्स की जकड़न भी हो सकती है।

पेल्विक फ्लोर क्या होता है?

पेल्विक फ्लोर मसल्स पेट के निचले हिस्से में होती हैं। ये मसल्स:
• लिंग में खून के प्रवाह को कंट्रोल करती हैं
• इरेक्शन बनाए रखने में मदद करती हैं
• पेशाब, वीर्य स्खलन और सेक्सुअल कंट्रोल में अहम भूमिका निभाती हैं

जब पेल्विक फ्लोर बहुत टाइट हो जाए तो क्या होता है?
• लिंग तक जाने वाला खून सही से नहीं पहुँच पाता
• नसों पर दबाव पड़ता है
• जल्दी थकान और कमजोरी महसूस होती है
• इरेक्शन कमजोर या जल्दी खत्म हो जाता है

टाइट पेल्विक फ्लोर को रिलीज़ करने से क्या फायदे होते हैं?

✔️ ब्लड फ्लो बेहतर होता है – लिंग में खून अच्छे से जाता है
✔️ नसों पर दबाव कम होता है – संवेदनशीलता (sensation) बढ़ती है
✔️ मसल्स का संतुलन सुधरता है – इरेक्शन को पकड़ने की ताकत बढ़ती है
✔️ दर्द और तनाव कम होता है – परफॉर्मेंस एंग्जायटी घटती है
✔️ सेक्सुअल कॉन्फिडेंस बढ़ता है

पेल्विक फ्लोर रिलीज़ कैसे की जाती है?
• विशेष फिजियोथेरेपी तकनीक
• मैनुअल थेरेपी / मायोफेशियल रिलीज़
• सही तरीके से कराए गए रिलैक्सेशन एक्सरसाइज़
• साँस लेने की तकनीक (Breathing techniques)

⚠️ ध्यान रखें: सिर्फ केगल एक्सरसाइज़ करना हर मरीज के लिए सही नहीं होता। अगर मसल्स पहले से टाइट हैं तो गलत एक्सरसाइज़ समस्या बढ़ा सकती है।

कब डॉक्टर या फिजियोथेरेपिस्ट से मिलें?
• इरेक्शन में लगातार कमजोरी हो
• पेशाब या सेक्स के समय दर्द हो
• लोअर एब्डॉमेन या पेल्विक एरिया में भारीपन महसूस हो

सही जांच और पेल्विक फ्लोर फिजियोथेरेपी से बिना दवा भी सुधार संभव है।

डॉ निखिल केंद्रेकर (सिनिअर फिजीओथेरपी तज्ज्ञ) 7875838479. explore

डॉ. निखिल केंद्रेकर यांची आधुनिक फिजिओथेरपी = जलद बरे होणेडॉ. निखिल केंद्रेकर यांच्या Modern Physiotherapy मुळे रुग्णांन...
03/01/2026

डॉ. निखिल केंद्रेकर यांची आधुनिक फिजिओथेरपी = जलद बरे होणे

डॉ. निखिल केंद्रेकर यांच्या Modern Physiotherapy मुळे रुग्णांना वेदनांमधून लवकर आराम मिळतो आणि बरे होण्याचा वेग वाढतो.

हे कसं शक्य होतं?

🔹 रुग्णानुसार उपचार
प्रत्येक रुग्णाची समस्या वेगळी असते. तपासणीनंतर त्याच्यासाठी खास उपचार योजना केली जाते.

🔹 आधुनिक टेक्निक्स व मशीन
DNS, मॅन्युअल थेरपी, पेल्विक फ्लोर रिहॅब, इलेक्ट्रोथेरपी, लेझर, TECAR यांसारख्या आधुनिक पद्धती वापरल्या जातात.

🔹 वेदना कमी + हालचाल सुधारणा
फक्त वेदना कमी करणे नाही, तर हालचाल, ताकद आणि कार्यक्षमता सुधारली जाते.

🔹 मुळ कारणावर उपचार
फक्त लक्षणांवर नाही तर वेदनेच्या मुळ कारणावर उपचार केल्यामुळे समस्या परत येण्याची शक्यता कमी होते.

🔹 जलद आणि सुरक्षित रिकव्हरी
शस्त्रक्रियेनंतर, खेळातील दुखापत, पाठ-मान-गुडघा दुखणे, महिलांचे व पेल्विक फ्लोर प्रॉब्लेम्स—सगळ्यांसाठी सुरक्षित आणि प्रभावी उपचार.

परिणाम काय?
✅ कमी सत्रांत जास्त फायदा
✅ दैनंदिन कामांमध्ये लवकर परतणे
✅ दीर्घकाळ टिकणारा आराम

डॉ. निखिल केंद्रेकर यांची आधुनिक फिजिओथेरपी म्हणजे
“फक्त उपचार नाही, तर पूर्ण बरे होण्याचा मार्ग.” डॉ.निखिल केंद्रेकर (सिनिअर फिजीओथेरपी तज्ज्ञ,परभणी ) 7875838479

Urine hesitancy का मतलब है पेशाब आने की इच्छा होने के बाद भी पेशाब शुरू होने में देर लगना या रुक-रुक कर आना।Somato-Visce...
03/01/2026

Urine hesitancy का मतलब है पेशाब आने की इच्छा होने के बाद भी पेशाब शुरू होने में देर लगना या रुक-रुक कर आना।

Somato-Visceral Manipulation क्या है?

यह एक हल्की, हाथों से की जाने वाली थेरेपी है, जिसमें शरीर की मांसपेशियों, रीढ़ (spine) और आसपास के हिस्सों को धीरे-धीरे ढीला किया जाता है ताकि अंदर के अंगों (जैसे मूत्राशय – bladder) और नसों (nerves) का काम बेहतर हो सके।



यह Urine Hesitancy में कैसे मदद करती है?
1. नसों का दबाव कम होता है
रीढ़ और पेल्विक एरिया की जकड़न कम होने से bladder तक जाने वाले नर्व सिग्नल बेहतर होते हैं, जिससे पेशाब शुरू करना आसान होता है।
2. मांसपेशियों का तनाव घटता है
पेल्विक फ्लोर और पेट की टाइट मांसपेशियाँ ढीली होती हैं, जिससे पेशाब के रास्ते की रुकावट कम होती है।
3. ब्लड सर्कुलेशन सुधरता है
अच्छे रक्त प्रवाह से bladder और आसपास के अंगों का काम बेहतर होता है।
4. ब्लैडर-ब्रेन कनेक्शन बेहतर होता है
दिमाग और मूत्राशय के बीच तालमेल सुधरने से पेशाब का कंट्रोल और शुरुआत आसान होती है।
5. दर्द और असहजता कम होती है
यदि जकड़न या दर्द की वजह से पेशाब रुक रहा हो, तो इसमें राहत मिलती है।



किन मरीजों को ज्यादा फायदा हो सकता है?
• लंबे समय से कमर/पेल्विक दर्द वाले
• तनाव (stress) या मांसपेशियों की जकड़न के कारण पेशाब में दिक्कत
• सर्जरी या चोट के बाद पेशाब शुरू करने में परेशानी
• फंक्शनल समस्या (जब रिपोर्ट सामान्य हों, पर दिक्कत बनी रहे)



जरूरी बात
• यह थेरेपी दवा या डॉक्टर की जांच का विकल्प नहीं है।
• प्रोस्टेट की गंभीर समस्या, संक्रमण या अन्य मेडिकल कारणों में पहले डॉक्टर से सलाह जरूरी है।
• बेहतर परिणाम के लिए इसे पेल्विक फ्लोर एक्सरसाइज़ और सही ब्रीदिंग के साथ किया जाता है।

सरल शब्दों में:
Somato-Visceral Manipulation शरीर की जकड़न खोलकर नसों और मांसपेशियों को आराम देती है, जिससे पेशाब आने पर उसे शुरू करना आसान हो जाता है।

डॉ निखिल केंद्रेकर (सिनिअर फिजीओथेरपी तज्ज्ञ) 7875838479
#परभणीफिजीओथेरपी

मूत्रधारणेचा त्रास (Urinary Incontinence) – रुग्णांसाठी सोप्या शब्दांतमूत्रधारणेचा त्रास म्हणजे लघवीवर पूर्ण नियंत्रण न ...
02/01/2026

मूत्रधारणेचा त्रास (Urinary Incontinence) – रुग्णांसाठी सोप्या शब्दांत

मूत्रधारणेचा त्रास म्हणजे लघवीवर पूर्ण नियंत्रण न राहणे. हसताना, खोकताना, शिंकताना, चालताना किंवा कधी अचानक लघवी होते आणि थांबवता येत नाही—यालाच मूत्रधारणेचा त्रास म्हणतात. हा त्रास लाजिरवाणा नसून उपचाराने बरा होऊ शकतो.

हे का होते?
• मूत्राशय व श्रोणीतील (pelvic floor) स्नायू कमकुवत होणे
• प्रसूतीनंतर महिलांमध्ये
• वाढते वय
• प्रोस्टेटची समस्या (पुरुषांमध्ये)
• मधुमेह, लठ्ठपणा
• सतत खोकला, बद्धकोष्ठता
• मज्जातंतूंचे आजार

मूत्रधारणेचे प्रकार
1. Stress Incontinence – खोकताना, हसताना, वजन उचलताना लघवी होते
2. Urge Incontinence – अचानक तीव्र लघवीची भावना येते व थांबत नाही
3. Mixed Incontinence – वरील दोन्ही प्रकार एकत्र

उपचार कसे होतात?
• फिजिओथेरपी व व्यायाम (Pelvic floor / Kegel exercises)
• मूत्राशयाचे प्रशिक्षण (Bladder training)
• जीवनशैलीतील बदल (वजन नियंत्रण, योग्य पाणी पिणे)
• गरज असल्यास औषधे
• क्वचित प्रसंगी शस्त्रक्रिया

काय लक्षात ठेवावे?
• हा त्रास सामान्य आहे आणि उपचाराने सुधारतो
• लाज न बाळगता तज्ञांचा सल्ला घ्या
• वेळेवर उपचार घेतल्यास दैनंदिन जीवन पूर्वीसारखे होऊ शकते

👉 तुमच्या जवळच्या फिजिओथेरपिस्ट/डॉक्टरांचा सल्ला घ्या. डॉ निखिल केंद्रेकर (सिनिअर फिजीओथेरपी तज्ज्ञ) 7875838479 #परभणीफिजीओथेरपी

01/01/2026

#परभणीफिजीओथेरपी

31/12/2025

टोटल हिप रिप्लेसमेंट के बाद फिजियोथेरेपी क्यों ज़रूरी है? (मरीज़ों की सरल भाषा में)हिप रिप्लेसमेंट सर्जरी के बाद सिर्फ ऑ...
29/12/2025

टोटल हिप रिप्लेसमेंट के बाद फिजियोथेरेपी क्यों ज़रूरी है? (मरीज़ों की सरल भाषा में)

हिप रिप्लेसमेंट सर्जरी के बाद सिर्फ ऑपरेशन ही काफ़ी नहीं होता। सही और समय पर फिजियोथेरेपी कराने से ही आप दोबारा बिना दर्द के चल-फिर सकते हैं और सामान्य जीवन में लौट पाते हैं।

1️⃣ चलने-फिरने की ताकत वापस लाने के लिए

ऑपरेशन के बाद जांघ और हिप की मांसपेशियाँ कमज़ोर हो जाती हैं।
फिजियोथेरेपी से
• मांसपेशियाँ मज़बूत होती हैं
• चलने में सहारा मिलता है
• लंगड़ाकर चलने से बचाव होता है

2️⃣ दर्द और सूजन कम करने के लिए

सर्जरी के बाद दर्द और सूजन सामान्य है।
फिजियोथेरेपी से
• दर्द धीरे-धीरे कम होता है
• सूजन घटती है
• दवाइयों पर निर्भरता कम होती है

3️⃣ हिप की मूवमेंट (हिलने-डुलने की क्षमता) बढ़ाने के लिए

अगर एक्सरसाइज़ नहीं की तो जोड़ जकड़ सकता है।
फिजियोथेरेपी से
• हिप आसानी से मुड़ता-सीधा होता है
• बैठना, उठना और सीढ़ियाँ चढ़ना आसान होता है

4️⃣ दोबारा गिरने या डिसलोकेशन से बचाव के लिए

गलत चलने या गलत मूवमेंट से नया जोड़ अपनी जगह से हिल सकता है।
फिजियोथेरेपी सिखाती है
• सही चलने का तरीका
• सही बैठने और उठने का तरीका
• किन मूवमेंट से बचना है

5️⃣ रोज़मर्रा के काम खुद करने के लिए

फिजियोथेरेपी से आप
• बिना डर चल सकते हैं
• कपड़े पहनना, बाथरूम जाना
• कुर्सी पर बैठना-उठना
आसानी से कर पाते हैं

6️⃣ जल्दी और सुरक्षित रिकवरी के लिए

जो मरीज़ फिजियोथेरेपी करते हैं
• वे जल्दी ठीक होते हैं
• लंबे समय तक जोड़ सही रहता है
• भविष्य की दिक्कतें कम होती हैं

🔹 याद रखें

“सर्जरी से नया जोड़ मिलता है,
लेकिन फिजियोथेरेपी से उस जोड़ की ताकत और ज़िंदगी मिलती है।”

डॉ.निखिल केंद्रेकर (सिनिअर फिजीओथेरपी तज्ज्ञ,परभणी) 7875838479.

Address

Chitra Clinic (physiotherapy & Homeopathy), Nanal Peth, Shani Mandir Road, In Front Of Police Quarters Petrol Pump, Parbhani
Parbhani
431401

Opening Hours

Monday 11am - 2pm
6pm - 8pm
Tuesday 11am - 2pm
6pm - 8pm
Wednesday 11am - 2pm
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Telephone

+919890336581

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