Rajneesh Life-Education & Sanjeevani Reiki

Rajneesh Life-Education & Sanjeevani Reiki Learn Sanjeevani Reiki & Mind-Mastery to be free from all tensions, worries and problems of life. This program is very unique and interesting.

Our purpose is social service through this program to help you to bring joy, happiness and bliss in your life.

08/01/2026
Osho teaches meditation with dance, joy and celebration !Laugh fully and love all !Do masti with bhajan and bhakti !Danc...
02/01/2026

Osho teaches meditation with dance, joy and celebration !
Laugh fully and love all !
Do masti with bhajan and bhakti !
Dance like krishna and meditate like budhha !

Osho is the master of masters.He teaches meditation with dance, joy and celebration !Laugh fully and love all !Do masti with bhajan and bhakti !Dance like kr...

 # # Don't miss this article !  # # # # Remembrance of death takes away your all miseries.  # #दोस्‍तोव्‍सकी और फांसी—📚📚...
02/01/2026

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# # Remembrance of death takes away your all miseries. # #
दोस्‍तोव्‍सकी और फांसी—📚📚

दोस्तोव्सकी को फांसी की सज़ा दी गई थी—रूस के एक चिंतक, विचारक और लेखक को। ठीक छह बजे उसका जीवन नष्‍ट हो ने वाला था, और छह बजने के पाँच मिनट पहले खबर आई , जार की कि वह क्षमा कर दिया गया है। एन वक्‍त पर उसकी फांसी की सज़ा माफ हो गई। दोस्‍तोव्‍सकी ने बाद में अपने संस्‍मरणों में लिखा है। कि उस क्षण जब छह बजने के करीब आ रहे थे तक मेरे मन में न कोई वासना थी और न कोई इच्‍छा थी। न कोई जीवन में रस था। न ही सपने बचे थे।

क्‍योंकि सपनों के लिए समय चाहिए था। अभिलाषाओं के, इच्‍छा और के समय चाहिए था। वो मेरे पास नहीं था। उस समय मैं इतना शांत हो गया था। और मैं इतना शून्‍य हो गया था। कि मैंने उस क्षण में जाना कि साधु, संत जिस समाधि की बात करते है वह क्‍या है।

लेकिन जैसे ही जार का आदेश पहुंचा और मुझे सुनाया गया कि मैं छोड़ दिया जा रहा हूं। मेरी फांसी की सज़ा माफ कर दी गई है। अचानक जैसे मैं किसी शिखर से नीचे गिर गया। बस वापस लौट आय धरातल पर। सब इच्‍छाएं; सब क्षुद्र तम इच्‍छाएं, जिनका कोई मुल्‍य नहीं था, क्षण भर पहले, वह सब वापस लौट आयी। पैर तक मैं जूता काट रहा था। उसका फिर पता चलने लगा। जूता काट रहा था पैर में उसको में क्षण भर पहले कैसे भूल गया था।

जैसे की वो भी कोई दर्द है। उस जूते का ख्‍याल आ गया की ये जूता तो पुराना हो गया है। अब जाकर नया जूता लेना है। कैसा जूता लूगा। रंग कैसा होगा। ये सारे विचार पल में आंधी की तरह मेरे मन पर छा गये। पल के हिस्‍से में और न जाने कितनी योजनाएं तैयार हो गई। दोस्तोव्सकी कहता था—उस शिखर को मैं दुबारा नहीं छू पाया। वो मेरे जीवन का दुर्लभ अनुभव था। जो उस क्षण आसन्‍न मृत्‍यु के निकट अचानक घटित हुआ था।

हुआ क्‍या था? उस क्षण दोस्तोव्सकी को, अब मृत्‍यु इतनी सुनिश्चित हो तो चेतना सब संबंध छोड़ देती है। इसलिए समस्‍त साधकों ने मृत्‍यु के सुनिश्‍चित के अनुभव पर बहुत जोर दिया है। बुद्ध तो भिक्षुओं को मरघट में भेज देते थे कि तुम तीन महीने लोगों को मरते, जलते, मिटते, राख होते देखो। और देखो जो प्रिय उन्‍हें कल तक सीने से लगाये थे। किस तरह से अपने ही हाथ उसे जला देते है।

ताकि तुम्‍हें अपनी मृत्‍यु बहुत सुनिश्‍चित हो जाये। और जब तीन महीने बाद कोई साधक मृत्‍यु पर ध्‍यान करके लौटता था तो जो पहली घटना उसके मित्रों को दिखाई पड़ती थी, वह थी रस परित्याग। रस चला गया।

रस के जाने का सूत्र है—चेतना और मन का संबंध टुट जाएं। वह संबंध कैसे टूटेगा। और संबंध कैसे निर्मित हुआ है। जब तक मैं सोचता हूं। मैं मन हूं—तब तक संबंध है। यह आइडेंटिटी, तादात्म्य कि मैं मन हूं, तब तक संबंध है। यह संबंध का टूट जाना यह जानना कि मैं मन नहीं हूं।
💗💗💗💗💗💗💗💗
ओशो🌷🌹🌸🌹🌷🌹🌷
Osho Life-Education And Meditation Program.
M : 8282823460

🌸माला ध्यान के लिए एक उपकरण है" आप मुझसे पूछते हैं, “यह माला क्यों?  यह तस्वीर क्यों ?🌸मैं कहूंगा, "इसको इस  तरह से उपयो...
23/12/2025

🌸माला ध्यान के लिए एक उपकरण है" आप मुझसे पूछते हैं, “यह माला क्यों? यह तस्वीर क्यों ?🌸

मैं कहूंगा, "इसको इस तरह से उपयोग करें तो ऐसा होगा," और मेरा उत्तर जितना संभव हो वैज्ञानिक होगा। धर्म कभी भी तर्कसंगत होने का दावा नहीं करता है, इसका केवल मात्र दावा तर्कहीन होने का है।

इस तरह से माला का प्रयोग करें: चित्र पर ध्यान करें तो एक समय ऐसा आएगा तब चित्र नहीं रहेगा। ऐसा होता है। फिर तस्वीर की अनुपस्थिति एक दरवाजा बन जाती है। उस दरवाजे के माध्यम से मेरे साथ संवाद करे। ऐसा होता है। *ध्यान करने के बाद, इस माला को उतार दे और महसूस करें, और फिर इस माला को पहने और महसूस करें, और आप अंतर महसूस करेंगे।*
इस माला के बिना आप पूरी तरह से असुरक्षित महसूस करेंगे, पूरी तरह से एक बिना बागडोर की शक्ति में जो हानिकारक हो सकता है। *इस माला के साथ आप सुरक्षित महसूस करेंगे, आप अधिक आश्वस्त, व्यवस्थित होंगे। कुछ भी बाहर से विक्षुब्ध नहीं कर सकता। ऐसा होता है; आप प्रयोग करेंगे तो जान पाएंगे।* ऐसा क्यों होता है इसका वैज्ञानिक रूप से भी उत्तर दिया जाना संभव नहीं है। और धार्मिक रूप से उत्तर देने का कोई सवाल नहीं है। धर्म कभी दावा नहीं करता, यही कारण है कि धर्म के इतने सारे अनुष्ठान अप्रासंगिक हो जाते हैं।
समय बीतने के साथ, एक बहुत ही सार्थक अनुष्ठान भी व्यर्थ हो जाते हैं, क्योंकि चाबियाँ खो जाती हैं और कोई भी यह नहीं कह सकता है कि यह अनुष्ठान क्यों मौजूद है। तब यह सिर्फ एक मृत रस्म बन जाती है। आप इसके साथ कुछ नहीं कर सकते। आप इसे प्रदर्शन कर सकते हैं, लेकिन कुंजी खो गई है। उदाहरण के लिए, आप माला पहनकर जा सकते हैं, और यदि आप नहीं जानते कि इसमें चित्र कुछ आंतरिक संवाद के लिए है, तो यह सिर्फ एक मृत वजन होगा। फिर चाबी खो जाती है। माला आपके साथ हो सकती है, लेकिन कुंजी खो गई है। *फिर एक न एक दिन आपको माला फेंकनी ही पड़ेगी क्योंकि यह बेकार है।*
माला ध्यान के लिए एक उपकरण है। यह एक कुंजी है। लेकिन यह केवल अनुभव के माध्यम से आएगा। मैं केवल अनुभव की ओर आपकी मदद कर सकता हूं। और जब तक ऐसा नहीं होगा, आपको पता नहीं चलेगा। लेकिन ऐसा हो सकता है, यह इतना आसान है, यह बिल्कुल मुश्किल नहीं हैं। जब मैं जीवित हूं, तो यह बहुत आसान हैं। जब मैं वहां नहीं रहूंगा, तो यह बहुत मुश्किल होगा।
इस पृथ्वी पर मौजूद ये सभी प्रतिमाएँ ऐसे ही साधन के रूप में उपयोग की जाती थीं, लेकिन अब वे अर्थहीन हैं। बुद्ध ने घोषणा की कि उनकी प्रतिमा नहीं बनाई जानी चाहिए। लेकिन मूर्तियों द्वारा जो काम किया गया था, वह अभी भी करना होगा। *यद्यपि प्रतिमा निरर्थक है, लेकिन असली चीज वह काम है जो इसके माध्यम से किया जा सकता है।*
*महावीर का अनुसरण करने वाले आज भी अपनी प्रतिमा के माध्यम से महावीर से संवाद कर सकते हैं।* तो बुद्ध के शिष्यों को क्या करना चाहिए? इसीलिए बोधि वृक्ष इतना महत्वपूर्ण हो गया; इसका उपयोग बुद्ध की प्रतिमा के स्थान पर किया गया था। बुद्ध के बाद पाँच सौ वर्षों तक कोई मूर्ति नहीं थी। बौद्ध मंदिरों में केवल बोधि वृक्ष की तस्वीर और दो प्रतीकात्मक पैरों के निशान रखे गए थे, लेकिन यह पर्याप्त था। वह अब भी जारी है। बोधगया में मौजूद वृक्ष मूल वृक्ष के साथ निरंतरता में है। इसलिए आज भी जो लोग जानते हैं वे बुद्ध के साथ बोधगया में बोधि वृक्ष के माध्यम से संवाद कर सकते हैं।
यह सिर्फ व्यर्थ नहीं है कि दुनिया भर से भिक्षु बोधगया आते हैं। *लेकिन उन्हें कुंजी पता होनी चाहिए, अन्यथा वे बस जाएंगे और पूरी बात सिर्फ एक अनुष्ठान होगी।*
तो ये कुंजियाँ हैं- विशेष मंत्रों का एक विशेष तरीके से जप किया जाता है, एक विशेष तरीके से उच्चारित किया जाता है, इस तरह की और ऐसी आवृत्तियों के साथ एक विशेष तरीके से जोर दिया जाता है। एक तरंग दैर्ध्य बनाया जाना चाहिए, तरंगों का निर्माण किया जाना चाहिए। फिर बोधि वृक्ष सिर्फ बोधि वृक्ष नहीं है; यह एक मार्ग बन जाता है, यह एक दरवाजा खोलता है। *फिर पच्चीस सदी और नहीं हैं, समय का अंतराल खो जायेगा और तुम बुद्ध के सामने आ जाओगे।* लेकिन चाबियां हमेशा खो जाती हैं। तो बस यही कहा जा सकता है: लॉकेट का उपयोग करें, और आपको बहुत कुछ पता चल जाएगा। मैंने जो कहा है, वह सब तो ज्ञात होगा ही, और उस से भी अधिक जो मैंने नहीं कहा है वह भी ज्ञात होगा।

ओशो 👏🏻
आई एम दी गेट-3, प्रश्न2 (अंश) से अनुवादित
Osho Life-Education And Meditation Program.
8282823460

Creativity comes only to non-greedy persons.          यह विश्वास छोड़ दो कि तुम रचनात्मक नहीं हो।मुझे पता है यह विश्वास ...
14/12/2025

Creativity comes only to non-greedy persons.


यह विश्वास छोड़ दो कि तुम रचनात्मक नहीं हो।
मुझे पता है यह विश्वास कैसे पैदा होता है:
शायद तुम विश्वविद्यालय में स्वर्ण पदक विजेता नहीं रहे;
शायद कक्षा में अव्वल नहीं आए;
शायद तुम्हारी पेंटिंग की किसी ने प्रशंसा नहीं की;
और जब तुम बाँसुरी बजाते हो तो पड़ोसी पुलिस को फोन कर देते हैं।
संभव है —
लेकिन सिर्फ इन कारणों से यह गलत धारणा मत बना लेना कि तुम रचनात्मक नहीं हो।
यह इसलिए भी हो सकता है कि तुम दूसरों की नकल कर रहे हो।

लोगों की रचनात्मकता को लेकर धारणा बहुत सीमित है —
गिटार बजाना, बाँसुरी बजाना, कविता लिखना।
इसीलिए लोग कविता के नाम पर कूड़ा लिखते रहते हैं।

तुम्हें यह खोज करनी है कि तुम क्या कर सकते हो और क्या नहीं।

हर व्यक्ति सब कुछ नहीं कर सकता!

यदि तुम अपने जीवन से प्रेम नहीं करते
और किसी और चीज़ से प्रेम करते हो,
तो समस्या पैदा हो जाती है।

यदि तुम धन से प्रेम करते हो और रचनात्मक होना चाहते हो,
तो तुम रचनात्मक नहीं हो सकते।

धन की महत्वाकांक्षा स्वयं तुम्हारी रचनात्मकता को नष्ट कर देगी।

यदि तुम्हें यश चाहिए, प्रसिद्धि चाहिए - तो रचनात्मकता को भूल जाओ।

हर मनुष्य इस संसार में एक विशेष भाग्य लेकर आता है —
उसे कुछ पूरा करना है,
कोई संदेश पहुँचाना है,
कोई कार्य पूर्ण करना है।

तुम यहाँ संयोग से नहीं आए हो —
तुम यहाँ अर्थपूर्ण ढंग से आए हो।
तुम्हारे पीछे एक उद्देश्य है।
समग्र सत्ता
तुम्हारे माध्यम से कुछ करना चाहती है।

— ओशो 🌷🌺🌷🌹💐🌸🏵️🌻

A Sudden Clash of Thunder
Osho Life Education and Meditation Program.
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12/12/2025

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