16/02/2026
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इस रविवार को दैनिक समाचार पत्र हिंदुस्तान के "डॉक्टर की सलाह" में फोन पर सैकड़ों मरीजों की समस्याएं सुनीं और इस दौरान मैंने अधिकांश मरीजों को घुटने की समस्या से ग्रसित पाया | घुटने में 60-65 वर्ष के बाद आर्थराइटिस होना तो आम बात है परन्तु पचास वर्ष से कम उम्र के लोग भी इससे काफी तदाद में ग्रसित है और यह चिंता जनक है | घुटने के दर्द सुजन और लचक से जूड़े कुछ जरूरी विषयों पर यहाँ बात करना आवश्यक है |
✅ मोटापा ( Obesity) : घुटने शरीर के सबसे बडे़ जोड़ है और इनपर पुरे शरीर का भार है इसलिए मोटापा होने की वजह से कम उम्र में ही घुटने की गद्दी ( मेनिसकस ) फटने और घीसने लगती है जिसके चलते आर्थराइटिस की समस्या शुरू होती है |
✅ पुराने चोट ( नी इंजूरी ) : प्रायः देखा जाता है कि लोग दर्द कमने के बाद घुटने के चोट को भूल जाते हैं जो बाद में चलकर आर्थराइटिस का कारण बनता है |
✅ लिगामेंट के टूटने और उखड़ने से ( लिगामेंट इंजूरी ) : वैसे तो चार मुख्य लिगामेंट्स होते है परन्तु एसीएल और पीसीएल के टूटने से घुटने में लचक और अस्थिरता ज्यादा हो जाती है जिसके चलते गद्दी के रगड़ खाने और फटने का खतरा बढ़ जाता है | ऐसी परिस्थिति में समय से आपरेशन नहीं होने से कुछ महीने और साल के अंदर आर्थराइटिस शुरू हो जाता है | अत: लिगामेंट के आपरेशन को जितना जल्दी हो करा लेना ही बेहतर होता है |
✅ कैल्सियम और विटामिन डि 3 की कमी : शहरों के अपार्टमेंट सिस्टम और खास कर घर में रहने वाली महिलाओं में सूर्य की रौशनी नहीं मिलने से विटामिन डी की कमी हो जाती है | खान पान की खराब गुणवत्ता से कैल्सियम, मैग्नीशियम, फास्फोरस और अन्य एलिमेंट्स की घोर कमी हो जाती है जो बिना जांच के लम्बे समय तक पता नहीं चलता है | इसके कारण हड्डियों और जोड़ों में दर्द और सुजन तथा मांसपेशियों में कमजोरी होने लगती है |
✅ बढ़ते उम्र का प्रभाव ( एजिंग ) : समय के साथ बढ़ती उम्र और बुढापा भी घुटने के जोड़ो में परिवर्तन लाते है | इस दौरान घुटने घीसने और आर्थराइटिस से पैर टेढे़ होने लगते हैं | कभी कभी घुटने से नीचे पैरों में भी दर्द जाने लगता है जिससे stress fracture होने का खतरा बढ़ जाता है | ऐसी परिस्थिति में पैर सीधा करने के लिए नी रिप्लेसमेंट ( घुटना प्रत्यारोपण ) की आवश्यकता पड़ती है |
✅ अन्य कारण ( औदर कौजेज ) : रूमेटवाएड आर्थराइटिस, सायनोभाईटीस, डायबिटीज, थायराइड की समस्या, इंफेक्शन तथा ट्यूमर जैसे कारणों से भी घूटने में दर्द और सूजन हो सकते हैं |
घुटने के तकलीफ के दौरान क्या करे (✅) और क्या नही करें (❌)
▶️ घुटने में जब सूजन और दर्द की शिकायत हो तो चोट लगने की स्थिति में बर्फ से सेंक करे! आर्थराइटिस के चलते यदि दर्द है तो गरम पानी की सेंकाई से लाभ मिल सकता है!
▶️ घुटने के अंदर पानी या ब्लड भर गया हो और उस कारण सूजन आ गया हो तो सिरिंज से पानी या ब्लड को बाहर खिंच लेने से आराम मिलता है | इसके बाद जांच हेतु निकाले हुए फ्लूड को भेजा जा सकता है और एक्स रे या एमआरआई भी कराया जाता है ताकि घुटने के दर्द और सूजन का कारण पता चल सके |
▶️ ऐसे मरीजों को नीचे जमीन पर बैठने और स्क्वैटिंग एक्सरसाइज तथा अनावश्यक सीढ़ी चढ़ने उतरने से परहेज करना चाहिए |
▶️अपने आर्थोपेडिक सर्जन से मिलकर कैलसियम और विटामिन डी तथा उचित खान पान पर ध्यान देना चाहिए |
▶️ फिजियोथेरेपी एवं क्वाड्रिसेप्स (जांघ के सामने की मांसपेशियां) को मजबूत करने के लिए क्वाड सेट (Quad Sets) (लेटे हुए घुटने को नीचे दबाना), स्ट्रेट लेग रेज (Straight Leg Raises), चेयर स्क्वैट्स (Chair Squats), और स्टेप-अप्स (Step-ups) सबसे प्रभावी व्यायाम हैं। ये घुटने के दर्द को कम करने और स्थिरता बढ़ाने के लिए दिन में 2-3 बार 10-15 बार के 2-3 सेट में किए जा सकते हैं |
▶️ नी ब्रेस या घुटने के अन्य बेल्ट का अनावश्यक इस्तेमाल नहीं करे | शुरुआत में नी ब्रेस से आराम तो मिलता है परन्तु लम्बे समय के इस्तेमाल से घुटने के मांसपेशियों में कमजोरी होने लगती है जिसके कारण घुटने ज्यादा तेजी से खराब होने लगते हैं | अतः यूज करने से पहले अपने डाक्टर से जरूर सलाह ले |👆
▶️ यदि दर्द के आलावा घुटने में लचक है और वजन देने पर लगता है कि पैर आगे या पीछे भाग रहा है तो यह लिगामेंट इंजूरी के लक्षण हो सकते हैं | दूरबीन ( आर्थ्रोस्कोपी ) द्वारा लिगामेंट का आपरेशन होने के बाद घुटने की अस्थिरता खत्म हो जाएगी और आपका घुटना खराब होने से बच जाएगा|
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डॉ बी एन चतुर्वेदी
(आर्थोस्कोपी, ज्वाईंट रिप्लेसमेंट एवं ट्रॉमा सर्जन)
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पता
🟣 राजलक्ष्मी हास्पिटल, मूलचन्द पथ मेन रोड कंकडबाग, पटना
🟣 मीरा हास्पिटल, काशी बजार, छपरा
☎ 083402 75860