RRIUM Patna

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Regional Research Institute of Unani Medicine (RRIUM) Patna is a peripheral research institute of the Central Council for Research in Unani Medicine (CCRUM) under Ministry of Ayush, Government of India. क्षेत्रीय यूनानी चिकित्सा अनुसंधान संस्थान, पटना की स्थापना वर्ष 1979 में की गई थी। यह संस्थान केंद्रीय यूनानी चिकित्सा अनुसंधान परिषद (CCRUM), आयुष मंत्रालय, भारत सरकार के अधीन कार्यरत एक प्रमुख अ

नुसंधान केंद्र है। संस्थान का उद्देश्य यूनानी चिकित्सा पद्धति के वैज्ञानिक मूल्यांकन, औषधीय संयोजनों की प्रभावकारिता एवं सुरक्षा का परीक्षण, तथा नैदानिक एवं अनुप्रयुक्त अनुसंधान को बढ़ावा देना है। संस्थान रोगियों को प्रमाण आधारित यूनानी चिकित्सा सेवाएं प्रदान करने के साथ-साथ जनस्वास्थ्य से जुड़े अनुसंधान कार्यक्रमों और शैक्षणिक गतिविधियों में भी सक्रिय भूमिका निभाता है।
Established in 1979, the Regional Research Institute of Unani Medicine (RRIUM), Patna, is a leading research institute functioning under the Central Council for Research in Unani Medicine (CCRUM), Ministry of AYUSH, Government of India (www.ccrum.res.in). The institute is dedicated to the scientific validation of Unani medicine, assessment of the efficacy and safety of Unani formulations, and promotion of clinical and applied research. In addition to offering evidence-based Unani healthcare services, the institute is actively involved in public health research initiatives and academic activities.

02 मई, 2026 क्षेत्रीय यूनानी चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (RRIUM), पटना द्वारा जागरूकता व्याख्यान का आयोजन 'टी.बी. मुक्त भा...
02/05/2026

02 मई, 2026 क्षेत्रीय यूनानी चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (RRIUM), पटना द्वारा जागरूकता व्याख्यान का आयोजन 'टी.बी. मुक्त भारत: 100 दिवसीय अभियान' के संकल्प को नई ऊर्जा देते हुए, आज एक विशेष जागरूकता व्याख्यान का सफलतापूर्वक आयोजन किया गया । इस कार्यक्रम का ध्येय समाज को क्षय रोग (T.B.) के प्रति सचेत करना और इस बीमारी के समूल उन्मूलन के लिए जन-भागीदारी सुनिश्चित करना था । संस्थान के प्रभारी डॉ. अब्दुर्रशीद ने कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए टी.बी. उन्मूलन के लिए एक एकीकृत दृष्टिकोण पर बल दिया । उन्होंने कहा: "टी.बी. जैसी गंभीर बीमारी को हराने के लिए यूनानी चिकित्सा पद्धति की शक्ति और आधुनिक चिकित्सा के दृष्टिकोण का समन्वय अत्यंत प्रभावी सिद्ध हो सकता है ।"
मुख्य वक्ता के रूप में डॉ. मोहम्मद. उसामा, अनुसंधान अधिकारी (यू०) ने संस्थान के कर्मचारियों और ओ.पी.डी. (OPD) में आए रोगियों को विस्तार से जानकारी दी । उनके व्याख्यान के मुख्य अंश निम्नलिखित रहे: लक्षणों को शुरुआत में ही पहचान कर जांच कराना ही पूर्ण उपचार की पहली सीढ़ी है । टी.बी. का इलाज बीच में छोड़ना बेहद खतरनाक और जानलेवा हो सकता है । चिकित्सक द्वारा निर्धारित पूर्ण कोर्स करना अनिवार्य है । उचित खान-पान, व्यक्तिगत स्वच्छता और रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immunity) बढ़ाकर इस बीमारी से प्रभावी ढंग से लड़ा जा सकता है । इस अवसर पर संस्थान के समस्त अधिकारी व कर्मचारी उपस्थित रहे ।

Today, on 29-04-2026, a quality-focused training session titled “ISO 15189:2022 & NABL Awareness” was organized at RRIUM...
29/04/2026

Today, on 29-04-2026, a quality-focused training session titled “ISO 15189:2022 & NABL Awareness” was organized at RRIUM, Patna, for the Biochemistry and Pathology Laboratories in line with laboratory quality requirements and continual improvement standards.
The session was conducted by Dr. Mangal Singh, ARO (Biochemistry) and attended by staff members from both the Biochemistry and Pathology Laboratories, strengthening our collective commitment to accuracy, reliability, competence, and patient-centered laboratory services.

क्षेत्रीय यूनानी चिकित्सा अनुसंधान संस्थान, पटना (एन.ए.बी.एच एवं एन.ए.बी.एल मान्यता प्राप्त) संस्थान में 27 अप्रैल 2026 ...
27/04/2026

क्षेत्रीय यूनानी चिकित्सा अनुसंधान संस्थान, पटना (एन.ए.बी.एच एवं एन.ए.बी.एल मान्यता प्राप्त) संस्थान में 27 अप्रैल 2026 को OPD हॉल में “एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस (AMR)” विषय पर एक जन-जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ. अब्दुर रशीद, रिसर्च ऑफिसर (इंचार्ज) ने की। मुख्य वक्ता डॉ. चंद्रमणि यादव, अन्वेषक (सांख्यिकी) ने एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस की अवधारणा पर एक व्यापक एवं विश्लेषणात्मक व्याख्यान प्रस्तुत किया। उन्होंने इसके उत्पन्न होने के प्रमुख कारणों, इसके विकास के वैज्ञानिक तंत्र तथा मानव स्वास्थ्य पर इसके गंभीर प्रभावों को सरल एवं प्रभावशाली तरीके से समझाया।
अपने संबोधन में डॉ. चंद्रमणि यादव ने जोर देते हुए कहा, “एंटीबायोटिक्स हर संक्रमण का समाधान नहीं हैं। यदि आज इनके विवेकपूर्ण और उचित उपयोग को सुनिश्चित नहीं किया गया, तो निकट भविष्य में हमारे पास प्रभावी उपचार विकल्पों की गंभीर कमी हो सकती है।”
उन्होंने आगे बताया कि एंटीबायोटिक्स का अनुचित और अत्यधिक उपयोग सूक्ष्मजीवों में प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ावा देता है, जिससे सामान्य संक्रमणों का उपचार भी अधिक जटिल, लंबा और महंगा हो जाता है।
इस कार्यक्रम में संस्थान के अधिकारियों एवं कर्मचारियों के साथ-साथ OPD में उपचार के लिए आए मरीजों ने भी उत्साहपूर्वक भाग लिया।
कार्यक्रम का समापन सामुदायिक स्वास्थ्य के हित में जन-जागरूकता बढ़ाने के महत्वपूर्ण संदेश के साथ किया गया।

23 अप्रैल, 2026 'राष्ट्रीय पोषण पखवाड़ा–2026' के देशव्यापी अभियान के अंतर्गत आज पटना स्थित क्षेत्रीय यूनानी चिकित्सा अनु...
23/04/2026

23 अप्रैल, 2026 'राष्ट्रीय पोषण पखवाड़ा–2026' के देशव्यापी अभियान के अंतर्गत आज पटना स्थित क्षेत्रीय यूनानी चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (RRIUM), पटना में एक विशेष जागरूकता व्याख्यान का आयोजन किया गया । इस कार्यक्रम का प्राथमिक उद्देश्य बच्चों के सर्वांगीण विकास में पोषण की महत्ता को रेखांकित करना और आधुनिक जीवनशैली से उत्पन्न खतरों के प्रति अभिभावकों को सचेत करना था ।
कार्यक्रम की अध्यक्षता संस्थान के अनुसंधान अधिकारी (यूनानी),वैज्ञानिक-II, डॉ. मोहम्मद मनज़र आलम द्वारा की गई । मुख्य वक्ता के रूप में उन्होंने संस्थान के अधिकारियों, कर्मचारियों और ओ.पी.डी. में आए रोगियों को संबोधित किया । उनके व्याख्यान का मुख्य विषय था: “स्वस्थ समाज के निर्माण हेतु बच्चों को मोबाइल और टेलीविजन की लत से दूर रखना अनिवार्य ।”
डॉ. आलम ने अपने संबोधन में मोबाइल और टीवी के अत्यधिक उपयोग से बच्चों पर होने वाले नकारात्मक प्रभावों पर विस्तार से प्रकाश डाला: स्क्रीन की लत बच्चों की एकाग्रता को कम करती है और उनके मस्तिष्क के स्वाभाविक विकास को अवरुद्ध करती है । स्क्रीन देखते हुए भोजन करने से बच्चों का ध्यान स्वाद और भोजन की मात्रा पर नहीं रहता। इसके परिणामस्वरूप बच्चे या तो कम खाते हैं या फिर 'ओवर ईटिंग' (अत्यधिक भोजन) का शिकार हो जाते हैं । लंबे समय तक एक ही स्थान पर बैठकर स्क्रीन देखने से बच्चों में मोटापे की समस्या बढ़ रही है और उनकी शारीरिक गतिविधियां सीमित हो गई हैं। डिजिटल उपकरणों में खोए रहने के कारण बच्चे सामाजिक मेल-जोल से कट रहे हैं, जिससे उनके सामाजिक कौशल (Social Skills) प्रभावित हो रहे हैं ।
डॉ. आलम ने उपस्थित जनसमूह को बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए निम्नलिखित व्यावहारिक सुझाव दिए : भोजन करते समय मोबाइल और टीवी का प्रयोग पूरी तरह वर्जित रखें । बच्चों को आउटडोर गेम्स और शारीरिक खेलों के लिए प्रोत्साहित करें । माता-पिता स्वयं बच्चों के सामने मोबाइल का सीमित प्रयोग करें, क्योंकि बच्चे अपने बड़ों का ही अनुसरण करते हैं । कार्यक्रम के समापन पर उपस्थित सभी लोगों ने बच्चों के उज्ज्वल और स्वस्थ भविष्य के लिए डिजिटल उपकरणों के सीमित उपयोग और बेहतर पोषण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई ।


22 अप्रैल, 2026 'राष्ट्रीय पोषण पखवाड़ा–2026' के देशव्यापी अभियान के अंतर्गत, क्षेत्रीय यूनानी चिकित्सा अनुसंधान संस्थान...
23/04/2026

22 अप्रैल, 2026 'राष्ट्रीय पोषण पखवाड़ा–2026' के देशव्यापी अभियान के अंतर्गत, क्षेत्रीय यूनानी चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (RRIUM), पटना में एक विशेष जागरूकता व्याख्यान का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य माता-पिता और परिवार के सदस्यों को बच्चों के समुचित विकास के प्रति जागरूक करना था ।
संस्थान के अनुसंधान अधिकारी प्रभारी, डॉ. अब्दुर्रशीद ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की और सामुदायिक स्वास्थ्य में पोषण के महत्व पर बल दिया ।
संस्थान की अनुसंधान अधिकारी (यूनानी), वैज्ञा-I, डॉ. ज़िकरा तहसीन ए ने मुख्य वक्ता के रूप में विस्तार से अपना वक्तव्य प्रस्तुत किया।
व्याख्यान का मुख्य विषय "Awareness lecture AWCs for parents and family members on simple stimulation practices" (अंगवाड़ी केंद्रों पर माता-पिता और परिजनों के लिए सरल उद्दीपन प्रथाओं पर जागरूकता) रहा |
डॉ. ज़िकरा ने अपने संबोधन में बच्चों के प्रारंभिक विकास (Early Childhood Development) के लिए निम्नलिखित 'सिंपल स्टिमुलेशन प्रैक्टिस' (सरल उद्दीपन प्रथाओं) को अपनाने पर जोर दिया: बच्चों के साथ निरंतर बातचीत और कहानियों के माध्यम से उनके मानसिक विकास को गति देना । साधारण घरेलू वस्तुओं के उपयोग से बच्चों की संज्ञानात्मक क्षमताओं (Cognitive Skills) को बढ़ाना | सही पोषण के साथ-साथ एक प्रेमपूर्ण और उत्साहजनक पारिवारिक वातावरण तैयार करना । आंगनवाड़ी केंद्रों (AWCs) की सुविधाओं का बेहतर लाभ उठाने के लिए माता-पिता को प्रोत्साहित करना ।
डॉ. ज़िकरा ने अंत में इस बात पर विशेष बल दिया कि यदि इन छोटी-छोटी प्रथाओं को माता-पिता अपने दैनिक जीवन में सुव्यवस्थित रूप से शामिल करें, तो बच्चों का शारीरिक और मानसिक भविष्य अत्यंत उज्ज्वल और सुदृढ़ बनाया जा सकता है ।

राष्ट्रीय पोषण पखवाड़ा–2026' के देशव्यापी अभियान के क्रम में, आज दिनांक 21 अप्रैल, 2026 को क्षेत्रीय यूनानी चिकित्सा अनु...
21/04/2026

राष्ट्रीय पोषण पखवाड़ा–2026' के देशव्यापी अभियान के क्रम में, आज दिनांक 21 अप्रैल, 2026 को क्षेत्रीय यूनानी चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (RRIUM), पटना द्वारा एक विशेष जागरूकता व्याख्यान का सफलतापूर्वक आयोजन किया गया । कार्यक्रम की अध्यक्षता संस्थान के अनुसंधान अधिकारी प्रभारी, डॉ. अब्दुर्रशीद द्वारा की गई । डॉ. मोहम्मद मनज़र आलम अनुसंधान अधिकारी (यूनानी), वैज्ञानिक-II ने मुख्य वक्ता के रूप में शिरकत की । उन्होंने "Awareness lecture on promotion of outdoor games, physical activities, Sports & Yoga" विषय पर विस्तार से प्रकाश डाला ।
डॉ. आलम ने अपने संबोधन में शारीरिक गतिविधियों, खेलकूद और योग के महत्व को रेखांकित करते हुए बताया कि कैसे ये तत्व पोषण के साथ मिलकर एक स्वस्थ जीवनशैली का आधार बनते हैं ।
व्याख्यान के समापन पर संस्थान के उपस्थित सभी अधिकारियों और कर्मचारियों ने भविष्य में 'डिजिटल अनुशासन' (Digital Discipline) अपनाने का सामूहिक संकल्प लिया ।

क्षेत्रीय यूनानी चिकित्सा अनुसंधान संस्थान, पटना (एन.ए.बी.एच एवं एन.ए.बी.एल मान्यता प्राप्त) संस्थान में आज दिनांक 20 अप...
20/04/2026

क्षेत्रीय यूनानी चिकित्सा अनुसंधान संस्थान, पटना (एन.ए.बी.एच एवं एन.ए.बी.एल मान्यता प्राप्त) संस्थान में आज दिनांक 20 अप्रैल 2026 को ओ.पी.डी. हाल में “रोगाणुरोधी प्रतिरोध (Antimicrobial Resistance - AMR)” विषय पर एक जन-जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया ।
कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ० अब्दुर्रशीद, अनुसंधान अधिकारी प्रभारी द्वारा की गई । कार्यक्रम के मुख्य वक्ता डॉ० मंगल सिंह, सहायक अनुसंधान अधिकारी (बायोकेमिस्ट्री) रहे, जिन्होंने अपने विस्तृत एवं विश्लेषणात्मक व्याख्यान में रोगाणुरोधी प्रतिरोध की अवधारणा, इसके उत्पत्ति के प्रमुख कारणों, विकास की वैज्ञानिक प्रक्रिया तथा मानव स्वास्थ्य पर इसके गंभीर दुष्प्रभावों को सरल एवं प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया । अपने संबोधन में डॉ० मंगल सिंह ने कहा :
“एंटीबायोटिक्स प्रत्येक संक्रमण का समाधान नहीं हैं । यदि वर्तमान में इनका उचित एवं संयमित उपयोग सुनिश्चित नहीं किया गया, तो निकट भविष्य में प्रभावी उपचार विकल्पों की उपलब्धता गंभीर संकट में पड़ सकती है ।” उन्होंने आगे स्पष्ट किया कि एंटीबायोटिक दवाओं का अनियंत्रित एवं अनुचित उपयोग रोगाणुओं में प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ावा देता है, जिसके परिणामस्वरूप सामान्य संक्रमणों का उपचार भी जटिल, दीर्घकालिक एवं अधिक खर्चीला हो जाता है ।
कार्यक्रम में संस्थान के समस्त अधिकारीगण, कर्मचारीगण एवं ओ.पी.डी. में उपचार हेतु आए रोगियों की सक्रिय एवं उत्साहपूर्ण सहभागिता रही । कार्यक्रम का समापन जनहित में जागरूकता के संदेश के साथ किया गया ।

क्षेत्रीय यूनानी चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (RRIUM), पटना में 18 अप्रैल, 2026 'राष्ट्रीय पोषण पखवाड़ा – 2026' अभियान के अ...
19/04/2026

क्षेत्रीय यूनानी चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (RRIUM), पटना में 18 अप्रैल, 2026 'राष्ट्रीय पोषण पखवाड़ा – 2026' अभियान के अंतर्गत, दिनांक. 18 अप्रैल, 2026 को क्षेत्रीय यूनानी चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (RRIUM), पटना द्वारा एक विशेष जागरूकता व्याख्यान विषय: शीघ्र स्तनपान की शुरुआत, पूर्ण स्तनपान तथा समयबद्ध एवं आयु-अनुरूप पूरक आहार पर जागरूकता प्रस्तुत किया गया |
इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य नवजात शिशुओं के सर्वांगीण विकास के लिए पोषण के महत्व को रेखांकित करना था ।
कार्यक्रम की अध्यक्षता संस्थान के अनुसंधान अधिकारी प्रभारी, डॉ. अब्दुर्रशीद द्वारा की गई ।
डॉ. ज़िकरा तहसीन ए. अनुसंधान अधिकारी (यू.), वैज्ञानिक-I, ने मुख्य वक्ता के रूप में विषय पर विस्तार से प्रकाश डाला । उन्होंने निम्नलिखित महत्वपूर्ण बिंदुओं पर चर्चा की:
• शीघ्र स्तनपान (Early Initiation): जन्म के तुरंत बाद स्तनपान शुरू करने के लाभ।
• पूर्ण स्तनपान (Exclusive Breastfeeding): जीवन के पहले छह महीनों तक केवल स्तनपान की अनिवार्यता।
• पूरक आहार (Complementary Feeding): छह माह की आयु के बाद सही समय पर आयु-अनुरूप ऊपरी आहार की शुरुआत।
इस ज्ञानवर्धक सत्र में संस्थान के समस्त अधिकारीगण, कर्मचारीगण एवं इंटर्नशिप कर रहे छात्र-छात्राओं ने हिस्सा लिया । साथ ही, ओ.पी.डी. (OPD) में आए मरीजों ने अपनी उपस्तिथि दर्ज कराइ ।

राष्ट्रीय पोषण पखवाड़ा – 2026 के तत्वावधान में, क्षेत्रीय यूनानी चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (RRIUM), पटना द्वारा गर्भवती ...
17/04/2026

राष्ट्रीय पोषण पखवाड़ा – 2026 के तत्वावधान में, क्षेत्रीय यूनानी चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (RRIUM), पटना द्वारा गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य और पोषण के प्रति जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस वर्ष के कार्यक्रम का मुख्य विषय “Importance of Ante Natal Care (ANC)” यानी 'प्रसव पूर्व देखभाल का महत्व' रखा गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता संस्थान के अनुसंधान अधिकारी प्रभारी, डॉ० अब्दुर्रशीद द्वारा की गई । कार्यक्रम की मुख्य वक्ता डॉ० ज़िकरा तहसीन ए, अनुसंधान अधिकारी (यू०), वैज्ञानिक-I ने Importance of Ante Natal Care (ANC)” विषय पर विस्तार से प्रकाश डाला । उनके संबोधन के मुख्य बिंदु निम्नलिखित थे: संतुलित आहार की अनिवार्यता, प्रसव पूर्व जांच (ANC) का महत्व, यूनानी दृष्टिकोण और पोषण | कार्यक्रम में संस्थान के अधिकारीगण, कर्मचारीगण, इंटर्नशिप कर रहे छात्र-छात्राएं एवं ओ०पी०डी० में आए मरीजों ने सक्रिय भागीदारी निभाई ।

दिनांक 16 अप्रैल, 2026 को क्षेत्रीय यूनानी चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (RRIUM), पटना के ओ०पी०डी० हॉल में राष्ट्रीय पोषण पख...
17/04/2026

दिनांक 16 अप्रैल, 2026 को क्षेत्रीय यूनानी चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (RRIUM), पटना के ओ०पी०डी० हॉल में राष्ट्रीय पोषण पखवाड़ा – 2026 के अंतर्गत “पोषण की कहानी दादी नानी की ज़ुबानी” विषय पर एक जागरूकता कार्यक्रम का सफलतापूर्वक आयोजन किया गया ।
कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ० अब्दुर्रशीद, अनुसंधान अधिकारी प्रभारी द्वारा की गई ।
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता के रूप में डॉ० मोहम्मद मनज़र आलम, अनुसंधान अधिकारी (यू०), वैज्ञा-II ने अपने संबोधन में पोषण के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि स्वस्थ जीवन के लिए संतुलित एवं पौष्टिक आहार अत्यंत आवश्यक है । उन्होंने पारंपरिक खान-पान की उपयोगिता को रेखांकित करते हुए बताया कि दादी-नानी के घरेलू नुस्खे आज भी स्वास्थ्य के लिए अत्यंत लाभकारी हैं ।
विषय पर विस्तृत व्याख्यान प्रस्तुत किया । उन्होंने अपने व्याख्यान में पारंपरिक भारतीय आहार पद्धति, घरेलू पोषण उपायों तथा स्थानीय उपलब्ध खाद्य पदार्थों के महत्व को विस्तार से समझाया। उन्होंने बताया कि संतुलित आहार में सभी आवश्यक पोषक तत्वों—प्रोटीन, विटामिन, खनिज, वसा एवं कार्बोहाइड्रेट—का समुचित समावेश होना चाहिए ।
कार्यक्रम में संस्थान के अधिकारीगण, कर्मचारीगण, इंटर्नशिप कर रहे छात्र-छात्राएं एवं ओ०पी०डी० में आए मरीजों ने सक्रिय भागीदारी निभाई ।

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Guzri, Patna City
Patna
800008

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Monday 9am - 4:30pm
Tuesday 9am - 4:30pm
Wednesday 9am - 4:30pm
Thursday 9am - 4:30pm
Friday 9am - 4:30pm
Saturday 9am - 2pm

Website

https://portal.nabh.co/documents_Unani.aspx#gsc.tab=0, https://fssai.gov.in/, https://nablmelt.qc

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