Reiki Healing

Reiki Healing Reiki is a gentle relaxing therapy that soothes your Body, Mind and Spirit, transporting you to a st

04/03/2026

03/03/2026

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01/03/2026

゚viralシalシ

01/03/2026
सत्य क्या है...??उसने पानी में पत्थर फेंका,,लहरें उठीं, फिर शांत हो गईं....!!वह बोला...पत्थर घर्षण से राह बनाता है,,पानी...
24/02/2026

सत्य क्या है...??

उसने पानी में पत्थर फेंका,,
लहरें उठीं, फिर शांत हो गईं....!!

वह बोला...
पत्थर घर्षण से राह बनाता है,,
पानी बिना शोर के खुल जाता है...!!

जो पत्थर बनकर आया है,,
वह रास्ता बनायेगा...!!
जो पानी बनकर आया है,,
वह बहना सीखेगा....!!

न कोई बड़ा, न कोई छोटा...
जो जैसा है, वही उसका सत्य....!!

🙏🙏🙏🧚‍♀️🧚‍♀️

मैं आपको आज दे रहा हूँ एक बहुत ही प्रभावी साक्षी भाव आधारित होश ध्यान विधि, जो सीधी है, गहरी है और प्रैक्टिकल है। यह विध...
21/02/2026

मैं आपको आज दे रहा हूँ एक बहुत ही प्रभावी साक्षी भाव आधारित होश ध्यान विधि, जो सीधी है, गहरी है और प्रैक्टिकल है। यह विधि आपको सिर्फ शांत नहीं करेगी बल्कि अंदर जागरूकता की आग जला देगी 🔥

साक्षी होश ध्यान –

आज का इंसान सबसे ज्यादा किस चीज़ से परेशान है? विचारों से… भविष्य की चिंता, पैसे की टेंशन, रिश्तों की उलझन। इस ध्यान में आपको कुछ रोकना नहीं है, कुछ दबाना नहीं है, बस देखना है। यही साक्षी भाव है।

सबसे पहले किसी शांत जगह पर बैठ जाइए, रीढ़ सीधी रहे लेकिन शरीर ढीला। आँखें पूरी बंद मत कीजिए, हल्की आधी खुली रखें ताकि नींद न आए। अब कुछ मत कीजिए… बस अपने श्वास को आते-जाते देखिए। ध्यान रखिए – “कंट्रोल” नहीं करना है, सिर्फ देखना है।

अब असली काम शुरू होता है। जैसे ही कोई विचार आए – “कल क्या होगा”, “पैसा कैसे आएगा”, “वो इंसान ऐसा क्यों बोला”… आप उस विचार से जुड़ना मत। बस मन ही मन कहिए – “देख रहा हूँ”। बस इतना।

धीरे-धीरे आपको एहसास होगा कि विचार अलग हैं और आप अलग हैं। यही साक्षी भाव है। यही होश है।

इससे क्या होगा?

– ओवरथिंकिंग 70% तक कम हो जाती है
– डर, चिंता, घबराहट धीरे-धीरे खत्म होती है
– निर्णय लेने की शक्ति तेज होती है
– नींद गहरी होती है
– चेहरे पर अजीब सा आत्मविश्वास आता है ✨

सबसे खास बात – जब आप साक्षी बनते हैं, तब आप अपने कर्मों के गुलाम नहीं रहते। आप प्रतिक्रिया नहीं देते, आप सजग होकर उत्तर देते हैं।

Practical प्रयोग

अगर आप ऑफिस में हैं और अचानक बॉस डाँट देता है, उसी समय 3 सांसें गहरी लें और अंदर से कहें “मैं देख रहा हूँ क्रोध को”। बस 10 सेकंड में ऊर्जा बदल जाएगी।
अगर घर में तनाव है, तुरंत अपने पैरों के तलवों पर ध्यान ले आइए और महसूस कीजिए जमीन को। शरीर में आ जाइए, विचारों से बाहर निकल आइए।

छोटी सी प्रार्थना 🙏

हे परम चेतना, मुझे इतना होश दे कि मैं हर परिस्थिति में साक्षी बना रहूँ। मेरे अंदर की बेचैनी को जागरूकता में बदल दे। मुझे प्रतिक्रिया से बचा और समझ से भर दे।
इसे रोज सुबह ध्यान के बाद 3 बार बोलें और महसूस करें कि शब्द नहीं, ऊर्जा काम कर रही है।

#साक्षीभाव #ध्यान #होश #आध्यात्मिकता

Dhyan
17/02/2026

Dhyan

जानिए आपका कौनसा चक्र बिगडा है एवं उसको ठीक कैसे करें- (1) मूलाधार चक्र - गुदा और लिंग के बीच चार पंखुरियों वाला 'आधार च...
16/02/2026

जानिए आपका कौनसा चक्र बिगडा है एवं उसको ठीक कैसे करें-

(1) मूलाधार चक्र - गुदा और लिंग के बीच चार पंखुरियों वाला 'आधार चक्र' है । आधार चक्र का ही एक दूसरा नाम मूलाधार चक्र भी है। इसके बिगड़ने से वीरता,धन ,समृधि ,आत्मबल ,शारीरिक बल ,रोजगार ,कर्मशीलता,घाटा,असफलता रक्त एवं हड्डी के रोग ,कमर व पीठ में दर्द ,आत्महत्या के बिचार ,डिप्रेशन ,केंसर अदि होता है।
(2) स्वाधिष्ठान चक्र - इसके बाद स्वाधिष्ठान चक्र लिंग मूल में है । उसकी छ: पंखुरियाँ हैं । इसके बिगड़ने पर क्रूरता,गर्व, आलस्य, प्रमाद, अवज्ञा, नपुंसकता ,बाँझपन ,मंद्बुधिता ,मूत्राशय और गर्भाशय के रोग ,अध्यात्मिक सिद्धी में बाधा बैभव के आनंद में कमी अदि होता है।
(3) मणिपूर चक्र - नाभि में दस दल वाला मणिचूर चक्र है । इसके इसके बिगड़ने पर तृष्णा, ईष्र्या, चुगली, लज्जा, भय, घृणा, मोह, अधूरी सफलता ,गुस्सा ,चिंचिरापन, नशाखोरी,तनाव ,शंकलुप्रबिती,कई तरह की बिमारिया ,दवावो का काम न करना ,अज्ञात भय ,चहरे का तेज गायब ,धोखाधड़ी,डिप्रेशन,उग्रता ,हिंशा,दुश्मनी ,अपयश ,अपमान ,आलोचना ,बदले की भावना ,एसिडिटी ,ब्लडप्रेशर,शुगर,थाईरायेड,सिरएवं शारीर के दर्द,किडनी ,लीवर ,केलोस्ट्राल,खून का रोग आदि इसके बिगड़ने का मतलब जिंदगी का बिगड़ जाना ।
(4) अनाहत चक्र - हृदय स्थान में अनाहत चक्र है । यह बारह पंखरियों वाला है । इसके बिगड़ने पर लिप्सा, कपट, तोड़ -फोड़, कुतर्क, चिन्ता,नफरत ,प्रेम में असफलता ,प्यार में धोखा ,अकेलापन ,अपमान, मोह, दम्भ, अपनेपन में कमी ,मन में उदासी , जीवन में बिरानगी ,सबकुछ होते हुए भी बेचनी,छाती में दर्द ,साँस लेने में दिक्कत ,सुख का अभाव,ह्रदय व फेफड़े के रोग,केलोस्ट्राल में बढ़ोतरी अदि ।
(5) विशुद्धख्य चक्र - कण्ठ में विशुद्धख्य चक्र यह सरस्वती का स्थान है । यह सोलह पंखुरियों वाला है। यहाँ सोलह कलाएँ सोलह विभूतियाँ विद्यमान है, इसके बिगड़ने पर वाणी दोष ,अभिब्यक्ति में कमी ,गले ,नाक,कान,दात, थाई रायेड,आत्मजागरण में बाधा आती है।
(6) आज्ञाचक्र - भू्रमध्य में आज्ञा चक्र है, यहाँ '?' उद्गीय, हूँ, फट, विषद, स्वधा स्वहा, सप्त स्वर आदि का निवास है । इसके बिगड़ने पर एकाग्रता ,जीने की चाह,निर्णय की सक्ति, मानसिक सक्ति,सफलता की राह आदि इसके बिगड़ने मतलब सबकुछ बिगड़ जाने का खतरा ।
(7) सहस्रार चक्र - सहस्रार की स्थिति मस्तिष्क के मध्य भाग में है । शरीर संरचना में इस स्थान पर अनेक महत्वपूर्ण ग्रंथियों से सम्बन्ध रैटिकुलर एक्टिवेटिंग सिस्टम का अस्तित्व है । वहाँ से जैवीय विद्युत का स्वयंभू प्रवाह उभरता है ।इसके बिगड़ने पर मानसिक बीमारी, अध्यात्मिकता का आभाव ,भाग्य का साथ न देना आदि ।

जानकारी अच्छी लगी हो तो आगे जरूर भेजिए।

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