physio Dr. Amit Kumar Sharma

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29/04/2026
C6 C7Disc bulge  with raditic  Right hand and L5 S1 disc bulge with Back pain Physiotherapy Treatment onlty 4 siting  pa...
27/04/2026

C6 C7Disc bulge with raditic Right hand and
L5 S1 disc bulge with Back pain
Physiotherapy Treatment onlty 4 siting pain Reduse
Dard mai bahut aaram hae ab
Dr Amit Kumar Sharma Physiotherapist
Amit Physiotherapy and rehabilitation centre निकट विशाल टॉकीज झंकार मार्केट पीलीभीत
078309 30644

क्या आप भी कमर के दर्द से परेशान है ।तो आज ही मिले डॉ ए के शर्मा पीटी से ,इन्होंने पिछले 10 सालों में लगभग सभी मरीजों को...
22/04/2026

क्या आप भी कमर के दर्द से परेशान है ।
तो आज ही मिले डॉ ए के शर्मा पीटी से ,
इन्होंने पिछले 10 सालों में लगभग सभी मरीजों को सही किया जो आपकी तरह ही परेशान थे जो महीनों सालों से दवाइयां ले ले कर परेशान थे ठीक नहीं हो रहा था,फिर इन्होंने फिजियोथेरेपी ट्रीटमेंट लिया और कुछ ही दिनों में बिल्कुल ठीक हो गए।वह अब बिना दर्द के अपना जीवन जी रहे है
तो आप भी अपना अपॉइंटमेंट बुक करें और दर्द से छुटकारा पाएं
डॉ ए के शर्मा पीटी
7830930644
पता निकट विशाल टॉकीज झंकार मार्केट पीलीभीत

'कर्म प्रधान विश्व रचि राखा, जो जस करहि सो तस फलु चाखा'मानव सेवा परम प्रधान सेवा 🙏🏻🙏🏻🙏🏻
18/04/2026

'कर्म प्रधान विश्व रचि राखा,
जो जस करहि सो तस फलु चाखा'

मानव सेवा परम प्रधान सेवा
🙏🏻🙏🏻🙏🏻

सायटिका (Sciatica) पीठ के निचले हिस्से( कमर )से निकलकर कूल्हों और पैरों के पीछे से नीचे तक जाने वाली नस (Sciatic nerve) ...
12/03/2026

सायटिका (Sciatica) पीठ के निचले हिस्से( कमर )से निकलकर कूल्हों और पैरों के पीछे से नीचे तक जाने वाली नस (Sciatic nerve) में सूजन या दबाव के कारण होने वाला तेज दर्द है, जो अक्सर एक ही पैर में महसूस होता है। इसके प्रमुख लक्षणों में झुनझुनी, सुन्नपन या जलन शामिल है। यह समस्या सही *फिजियोथेरेपी*, और जीवनशैली में बदलाव से ठीक हो सकती है।

= सायटिका दर्द(Sciatica Pain) के मुख्य लक्षण:

• तेज दर्द: पीठ के निचले हिस्से से शुरू होकर पैर के पिछले हिस्से, घुटने या टखने तक जाने वाला असहनीय या ऐंठन जैसा दर्द।
• सुन्नपन और झुनझुनी: पैर में सुई चुभने जैसी सनसनी या सुन्नपन महसूस होना।
• कमजोरी: प्रभावित पैर में कमजोरी महसूस होना, चप्पल पहनने में कठिनाई या चलते समय पैर कांपना।
• दर्द बढ़ना: खांसने, छींकने या लंबे समय तक बैठने पर दर्द का तेज होना।

=सायटिका के कारण (Causes):

• स्लिप डिस्क (Herniated Disc): रीढ़ की हड्डी की डिस्क का खिसकना जो नसों को दबाती है।
• स्पाइनल स्टेनोसिस: स्पाइनल कैनाल का संकीर्ण होना।
• स्पोंडिलोलिस्थीसिस: एक कशेरुका का दूसरी के ऊपर फिसल जाना।
• गर्भावस्था या मोटापा: नसों पर अतिरिक्त दबाव।

घरेलू उपचार और उपाय:

• सही मुद्रा (Posture): सीधे बैठें और झुककर वजन उठाने से बचें।
• हल्की स्ट्रेचिंग: फिजियोथेरेपी डॉक्टर से मिलकर नस का दबाव कम किया जा सकता है।
• सक्रिय रहें: लंबे समय तक बिस्तर पर लेटने (bed rest) से बचें; हल्की-फुल्की हलचल करते रहें।

दवा और चिकित्सा (Treatment):

• फिजियोथेरेपी डॉक्टर से मिलकर पीठ और कोर की मांसपेशियों को मजबूत करने के लिए कुछ exercise करनी होती हैं और साथ में कुछ मशीनों के द्वारा नस पर दबाव,सूजन ,सुन्नपन, और झनझनावात को कम करने के लिए उपयोग किया जाता जिसमें लगभग (99%)सभी मरीजों को आराम मिल जाता है और फिजियोथेरेपी इलाज का हमारे शरीर पर कोई side Effect भी नहीं है 100%सुरक्षित है

सावधानी: आगे झुककर पैर की उंगलियों को छूने वाले व्यायाम (forward bends) से बचें, क्योंकि यह साइटिका के दर्द को बढ़ा सकता है।

=पेन किलर (दर्द वाली दवाई )का उपयोग करने से बचें,ज्यादा उपयोग करने से आपके शरीर पर भयंकर साइड इफेक्ट देखने को मिल सकता हैं जिसमें किडनी,लीवर ,हार्ट ओर गैस से संबंधित समस्या हो सकती हैं जो आजकल बहुत सारे मरीजों में देखने को मिलता है

डॉ अमित कुमार शर्मा
फिजियोथैरेपिस्ट
अमित फिजियोथेरेपी एंड रिहैबिलिटेशन सेंटर
निकट विशाल टॉकीज झंकार मार्केट पीलीभीत
मोबाइल नंबर 7830930644

यहाँ फिजियोथेरेपी उपचार की 1 दिन से 15 दिन तक की वास्तविक, नैदानिक (Clinical) और जैविक प्रगति का विश्लेषण प्रस्तुत है:दि...
18/12/2025

यहाँ फिजियोथेरेपी उपचार की 1 दिन से 15 दिन तक की वास्तविक, नैदानिक (Clinical) और जैविक प्रगति का विश्लेषण प्रस्तुत है:

दिन 1 के पश्चात: “पीड़ा में वृद्धि” — क्या यह विफलता है?
​रोगी का अनुभव:
​पीड़ा (Pain) पहले से अधिक महसूस होना।
​शरीर में कठोरता (Stiffness) का बढ़ना।
​शारीरिक भारीपन (Heaviness) का अनुभव।
​रोगी के मन में संशय (Doubt) और घबराहट (Anxiety) का उत्पन्न होना।
​शरीर में क्या घटित हो रहा है:
​वर्षों से जमी मांसपेशियों की अकड़न (Muscle Rigidity) पहली बार सक्रिय होती है।
​तंत्रिकाओं (Nerves) की सुस्ती टूटने लगती है।
​वे अंग जो लंबे समय से निष्क्रिय (Inactive) थे, उनमें चेतना (Sensation) आती है।
​👉 यह दर्द किसी क्षति (Damage) का संकेत नहीं, बल्कि "शरीर के पुनर्जागरण" का प्रतीक है।
​📌 ध्यान दें: यह वैसी ही पीड़ा है जो लंबे अंतराल के बाद व्यायाम शुरू करने पर होती है — यह नुकसान नहीं, बल्कि नव-आरंभ है।
​🗓️

दिन 3 के पश्चात: “कोई लाभ नहीं” — जबकि सुधार शुरू हो चुका होता है
​रोगी की धारणा:
​किसी भी प्रकार का सुधार (Improvement) न दिखना।
​लगना कि धन और समय व्यर्थ गया।
​जैविक सत्य:
​शरीर में सूजन चक्र (Inflammation Cycle) इस समय विघटित (Breaking Down) हो रहा होता है।
​मस्तिष्क (Brain) और तंत्रिकाओं के बीच नई संचार व्यवस्था (Communication Pathways) बन रही होती है।
​शरीर पुरानी, त्रुटिपूर्ण गति शैलियों (Faulty Movement Patterns) को छोड़ने का प्रयास करता है।
​👉 लाभ दिखाई नहीं देता, परंतु शरीर के भीतर आधारशिला (Foundation) रखी जा चुकी होती है।
​🌟
दिन 5 के पश्चात: 10%–20% सुधार — पहला विश्वास उत्पन्न होता है
​रोगी की अनुभूति:
​हल्की राहत (Slight Relief) का अनुभव।
​गतिविधि (Movement) में थोड़ी सहजता (Ease) आना।
​सुबह की जकड़न में कमी महसूस होना।
​चिकित्सकीय अभिप्राय:
​मांसपेशी संकुचन (Muscle Spasm) शिथिल (Loosening) पड़ने लगता है।
​रक्त संचार (Blood Flow) में सुधार होता है।
​पीड़ा ग्राहियों (Pain Receptors) की अति-सक्रियता कम होती है।
​📈 यहीं से उपचार की दिशा सही सिद्ध होती है।
​🎯 दिन 7 के पश्चात: 40% सुधार — शरीर सहयोग देना प्रारंभ करता है
​रोगी का वक्तव्य:
​"अब अंतर स्पष्ट दिखाई दे रहा है।"
​"पहले से बेहतर चल पा रहा हूँ।"
​आंतरिक बदलाव:
​जोड़ों की गतिशीलता (Joint Mobility) बढ़ती है।
​मांसपेशियाँ संतुलन (Balance) में आने लगती हैं।
​तंत्रिकाएँ अब पीड़ा नहीं, बल्कि नियंत्रण (Control) का संदेश भेजती हैं।
​👉 यह वह चरण है जहाँ शरीर उपचार से संघर्ष करना छोड़ देता है और समर्थन देना शुरू करता है।
​💡 दिन 10 के पश्चात: 60% सुधार — पीड़ा नहीं, आत्मविश्वास बढ़ता है
​रोगी की अवस्था:
​दैनिक कार्य (Daily Tasks) आसानी से पूरे हो पाते हैं।
​नींद की गुणवत्ता (Sleep Quality) में सुधार आता है।
​पीड़ा की तीव्रता (Intensity) पहले से कम हो जाती है।
​वैज्ञानिक कारण:
​केंद्रीय तंत्रिका तंत्र (Central Nervous System) पीड़ा को कम महत्व देने लगता है।
​शक्ति (Strength) और लचीलेपन (Flexibility) का संतुलन स्थापित होता है।
​गलत आसन (Faulty Posture) में सुधार होने लगता है।
​📌 सार: इस स्तर पर फिजियोथेरेपी केवल पीड़ा का इलाज नहीं, बल्कि जीवन की गुणवत्ता (Quality of Life) सुधारने का माध्यम बन जाती है।

​✅ दिन 15 के पश्चात: 80% सुधार — यह वह पड़ाव है जहाँ धैर्य रखने वाले सफल होते हैं
​रोगी की अनुभूति:
​पीड़ा पहले से नियंत्रित (Controlled) है।
​गतिविधि पहले से सहज (Effortless) है।
​दवाओं पर निर्भरता (Dependence on Medication)

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Pilibhit
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