Ashtang Ayurved Clinic And Panchakarma Center

Ashtang Ayurved Clinic And Panchakarma Center Suvarna Prashan, Acute & Chronic pain management, ortho disease, Gynac diseases, infertility, Skin

04/10/2021
18/06/2021
11/06/2020

आयुर्वेद का मुख्य प्रयोजन स्वस्थ व्यक्ति के स्वास्थ्य की रक्षा करना तथा रोगी मनुष्य के रोग की चिकित्सा करना है। इस प्रयोजन की सम्पूर्ति हेतु आचार्यो ने दिनचर्या, रात्रिचर्या, ऋतुचर्या का विधान बताया है।
आयुर्वेद में काल को वर्षा, शरद, हेमन्त, शिशिर, बसन्त, ग्रीष्म इन छः ऋतुओं में बाँटा गया है। इन ऋतुओं में पृथक-पृथक् चर्या बतायी गयी है। यदि मानव इन सभी का ऋतुओं में बतायी गयी चर्याओ का नियमित व विधिपूर्वक पालन करता है, तो किसी प्रकार के रोग उत्पन्न होने की सम्भावना नहीं रहती है, अन्यथा अनेक मौसमी बिमारियों से ग्रसित हो जाता है।
मौसम के बदलाव के साथ ही खान-पान में बदलाव जरूरी है, ये बदलाव करके मौसमी-रोगों से बचा जा सकता है।

वर्षा ऋतुचर्या
समय - श्रावण, भाद्रपद (जुलाई , अगस्त )
सम्भावित राेेग - भूख कम लगना, जोड़ों के दर्द, गठिया, सूजन, खुजली, फोड़े-फुंसी, दाद, पेट में कीड़े, नेत्राभिष्यन्द (आंख आना), मलेरिया, टाइफाइड, दस्त और अन्य रोग होने की सम्भावना रहती है।

पथ्य आहार-विहार
• अम्ल, लवण, स्नेहयुक्त भोजन, पुराने धान्य (चावल, जौ, गेंहू) तथा मांस रस, घी एवं दूध का प्रयोग, छाछ में बनाई गई बाजरा या मक्का की राबड़ी, कद्दू, बैंगन, परवल, करेला, लौकी, तुरई, अदरक, जीरा, मैथी, लहसुन का सेवन हितकर है।

संशोधित जल का प्रयोग करना चाहिए, कुंआ, तालाब और नदी के जल का प्रयोग बिना शुद्ध किये नहीं करना चाहिए। पानी को उबाल कर उपयोग में लेना श्रेष्ठ है।
• भीगने से बचें, भीगने पर शीघ्र सूखे कपड़े पहने, नंगे पैर, गीली मिट्टी या कीचड़ में नहीं जाना चाहिए, सीलन युक्त स्थान पर नहीं रहना चाहिए तथा बाहर से लौटने पर पैरों को अच्छी तरह धोकर पोंछ लेना चाहिए।
• तैल की मालिश करना हितकर है तथा कीट-पतंग एवं मच्छरों से बचने के लिए मच्छरदानी का उपयोग हितकर है।

अपथ्य आहार-विहार
• नये चावल, आलू, अरबी, भिण्डी तथा पचने में भारी आहार द्रव्यों का प्रयोग, बांसी भोजन, दही, मांस, मछली, अधिक तरल पदार्थ, शराब आदि का सेवन अहितकर है तथा तालाब एवं नदी के जल का सेवन उचित नहीं है।
• दिन में सोना, रात में जागना, खुले में सोना, अधिक व्यायाम, धूप सेवन, अधिक परिश्रम,अहितकर है।

• जीवनचर्या: पंचकर्म की शुद्धि क्रियाएँ, सुगंधियों का प्रयोग भी इस ऋतु में करने योग्य है.

वैद्य पूजा भंडारे
अष्टांग आयुर्वेद क्लिनिक व पंचकर्म सेंटर

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