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किडनी फेल्योर का आयुर्वेद में ही है सही इलाज !!अंग्रेजी चिकित्सा विज्ञान में बताया जाता है कि किडनी फेल्योर दो प्रकार का...
12/04/2026

किडनी फेल्योर का आयुर्वेद में ही है सही इलाज !!

अंग्रेजी चिकित्सा विज्ञान में बताया जाता है कि किडनी फेल्योर दो प्रकार का होता है- तीव्र (एक्यूट) और जीर्ण (क्रॉनिक) । एक्यूट में किसी भी कारण से पहले वायु की क्रिया विषम होती है परिणामतः अग्नि (मेटाबोलिक फायर) की क्रिया भी असंतुलित हो जाती है। परिणामतः मलों (यूरिया, क्रिटनीन) का निष्कासन करने वाले अवयव, गुर्दों का कार्य भी बन्द हो जाता है या कम हो जाता है, डॉक्टर कहने लगते हैं कि 'एक्यूट रीनल फेल्योर' ।

जीर्ण (क्रॉनिक) गुर्दा फेल्योर जिसे डॉक्टर क्रॉनिक रीनल फेल्योर (सी. आर.एफ.) कहते हैं उसमें गुर्दे के नेफ्रान्स आदि अवयव क्षतिग्रस्त हो जाते हैं और किडनी द्वारा किये जाने वाले कार्यों की क्षमता घट जाती है या नष्ट ही हो जाती है । फिर शरीर में विजातीय तत्व (यूरिया, क्रिटनीन आदि) एकत्र हो जाते हैं जो शरीर के लिये घातक होते हैं।

आधुनिक चिकित्सा वैज्ञानिक अन्य की तुलना में जिन रोगों में गुर्दा फेल्योर होने की आशंकायें अधिक बताते हैं वे रोग हैं-

1 - हाई ब्लडप्रेशर होना ।
2 - मधुमेह (डायबिटीज) होना ।
3 - क्रॉनिक किडनी डिजीज का पारिवारिक इतिहास असाध्य होना।
4 - अधिक उम्र होना ।
5 - गुर्दे की पथरी होना ।
6 - गठिया, गाउट, सीआरपी के कारण दर्द वाले रोगी जो अक्सर पेन किलर्स लेते हैं।
7 - एण्टीबायोटिक और पेनकिलर का अनियमित
प्रयोग।

अब आयुर्वेदीय सिद्धान्तों के आधार पर जब हम आगे बढ़ते हैं तो पाते हैं कि आधुनिक चिकित्सा वैज्ञानिक उपर्युक्त जिन कारणों को गुर्दा फेल्योर में हेतु बताते हैं उनमें वायु की विषमता/ असंतुलन ही प्रधान रूप से सिद्ध होती है।

'हाई ब्लडप्रेशर' तो वायु जन्य विकार है ही इस पर बहुत बताने की आवश्यकता प्रतीत नहीं होती । मधुमेह को भी विकृत 'वायु' ही पैदा करता है-

'तैरावृत्तगतिर्वायुरोज आदाम गच्छति ।
यदा वस्तिं तदा कृच्छ्रो मधुमेहः प्रवर्तते ॥' च.सू.17/81

अनेक कारणों से शरीर में विचरण करने वाली वायु की गति में अवरोध उत्पन्न होता है जिससे कुपित (Aggravated) वायु शरीर के ओज को लेकर मूत्राशय में प्रवेश करती है और कष्टकर मधुमेह की उत्पत्ति होती है।

देखें-
कषायमधुरं पाण्डु रुक्षं मेहति यो नरः । वातकोपादसाध्यं तं प्रतीयान्मधुमेहितम् ॥ चि.नि. 4/ 44

अर्थात् वात प्रकोप से प्रभावित व्यक्ति जब कसैला, मधुर, पाण्डु और रूक्ष मूत्र का त्याग करता है तो उसे मधुमेही कहते हैं और वह असाध्य होता हैं।

किडनी फेल्योर में एक अवस्था यह भी होती हैं कि मूत्र के साथ शरीर का कुछ महत्वपूर्ण पोषक द्रव्य भी जाने लगता है, उस समय मूत्र परीक्षण में प्रोटीन / एल्ब्यूमिन पाया जाता है।

यह अवस्था बहुत ही कृच्छ्रसाध्य या असाध्य होती है। पर आपको जानकर आश्चर्य और आयुर्वेद की वैज्ञानिकता पर गर्व होगा कि यदि इस अवस्था को अंग्रेजी चिकित्सा वैज्ञानिकों ने मेटाबोलिक विकृति कहते हैं तो आयुर्वेद के आचार्य सुश्रुत ने बहुत पहले ही इसे शरीर में विकृत या विषम वायु से उत्पन्न बीमारी ही बताते आ रहे हैं-
शुक्रदोष प्रमेहांस्तु व्यानापान प्रकोपजः । सु.नि. 1/20

अर्थात् व्यान और अपान वायु के प्रकोप से शुक्रदोष (Seminal Disorders) और प्रमेह विकार होते हैं।

वायु के प्रकोप से अग्नि (मेटाबोलिक फॉयर) की विषमता या मृदुकता फिर प्रमेह यानी पेशाब में प्रोटीन या एल्ब्युमिन का आना।

इस प्रकार आयुर्वेद के अनुसार गुर्दा फेल्योर में ऐसी जीवनशैली या ऐसे कारण बनते हैं जिससे पक्वाशय में वायु प्रकुपित होती है, पश्चात् अपानवायु गति प्रतिलोम होती है, जिससे मल, मूत्र व शरीर के टॉक्सिक बाहर करने वाले वायु का अवरोध होता है। जिससे जठराग्नि मन्द पड़ती है, साथ - साथ किडनी जैसे अवयव क्षतिग्रस्त हो जाते हैं।

चिकित्सा- यदि रोगी अत्यन्त वमन से पीड़ित हो, क्षीण हो, यानी रस, रक्त, मांस, मेद, अस्थि, मज्जा और शुक्र धातुयें क्षीण हो गयीं हों, शूल हों, रोगी मल का वमन कर रहा हो, रोगी की रोग प्रतिरोधक क्षमता बहुत कमजोर हो तो ऐसा रोगी असाध्य होता है ।

योग रत्नाकरकार चिकित्सा स्थान -1 में कम शब्दों में कितना श्रेष्ठ चिकित्सा सूत्र बताया है-
'सर्वेष्वेतेषु भिषजा चोदावर्त्तेषु कृत्स्न्त्शः ।
वायो क्रिया विधातव्याः स्वमार्गप्रतिपत्तये॥' अर्थात् वायु की क्रिया को प्रकृतिस्थ करने का उपक्रम करना चाहिए ।

रोग चाहे जो भी हो सभी की साध्य, कृच्छ्रसाध्य, याप्य, प्रत्याख्येय और असाध्य अवस्था होती है पर यह हम दावे के साथ कह सकते हैं कि आयुर्वेद में किडनी फेल्योर की बहुत ही श्रेष्ठ चिकित्सा है।

यह हम इसलिए कहते हैं कि जिस असाध्य, याप्य और प्रत्याख्येय किडनी फेल्योर रोगी को अंग्रेजी डॉक्टर और अस्पताल मरने के लिए छोड़ देते हैं उस अवस्था तक के रोगी आयुर्वेद चिकित्सा में जीवन पा जाते हैं । यदि रोगी साध्य अवस्था का हो, पथ्य पालन करे, स्वस्थ जीवनशैली का पालन करे, तो डायलेसिस से बचा रहता है और लम्बा जीवन व्यतीत करना कोई मुश्किल काम नहीं है।

जब कोई चिकित्सक किडनी फेल्योर रोगी को चिकित्सा में लेता है उस समय उसके सामने चुनौती रहती है कि जितनी किडनी खराब हो गयी है उससे आगे न खराब होने पाये, साथ ही जितने नेफ्रान्स डिजेनरेट हो गये हैं, मृदूकता आ गयी है
तो उन्हें पुनर्जीवित करे, यूरिया, क्रिटनीन जैसे विष जो शरीर में जमा हैं उनका निष्कासन हो अन्यथा किसी भी समय यूरेमिया होकर जान का खतरा हो सकता है।

किडनी फेल्योर की चिकित्सा लम्बे समय तक चलने वाली चिकित्सा होती है अतः रोगी को बहुत धैर्य और नियम पालन के साथ इलाज जारी रखना पड़ता है।

हमने अनेकों रोगियों को देखा है कि रोगी यहाँ जब रहा पंचकर्म कराया, औषधियाँ तथा खान- पान का सही सेवन किया तो अच्छे परिणाम आये किन्तु घर जाने पर खान-पान का परहेज किया पर ब्रह्मचर्य का पालन नहीं किया तो फिर उसी दशा में हो गये। क्योंकि उधर रक्तादि धातुओं का निर्माण तो हो नहीं रहा, उधर मैथुन करके धातुक्षय किया तो हानि होना तो सुनिश्चित है । इसीलिए पुरुषों की अपेक्षा किडनी फेल्योर महिलायें उत्तम लाभ पाती हैं।

इस प्रकार किडनी फेल्योर रोगी में निम्नांकित स्तर पर चिकित्सा करनी होती है ।

👉 अग्निबल व्यवस्थित/सम्यक हो इसके लिए वायु को प्रकृतिस्थ करना

👉 शारीरिक दुर्बलता नष्ट हो और धातुओं का पुननिर्माण हो, इसके लिये रसायन चिकित्सा और उचित खान-पान ।

👉 शरीरस्थ विषाक्तता दूर हो इसके लिए पंचकर्म चिकित्सा द्वारा शरीर शोधन |

👉 शरीर में विषाक्तता बढ़े नहीं इसके लिये उचित खान-पान और ।

1️⃣ सहचर तैल, अश्वगन्धाबला तैल, पिण्ड तैल, वृहद् सैन्धवादि तैल, निर्गुण्डी चन्दनबला क्षादि तैल, रोग, रोगी के अनुसार अभ्यंग हेतु चयन |

2️⃣ सहचर तैल, महानारायण तैल, वृ. सैन्धवादि तैल, महानारायण तैल का पान।

3️⃣ गुग्गुलुतिक्तकघृतम्, पंचगव्यघृत, महापंचगव्य, दाड़िमादिघृत, धान्वन्तरम् घृत का सेवन ।

4️⃣ रोग में वायु की अधिकता हो तो अनुवासन बस्ति, स्नेहन बस्ति, मधुतैलिक बस्ति, योग बस्ति का प्रयोग करना चाहिए, पित्त की प्रधानता हो तो क्षीर बस्ति तथा कफ की प्रधानता हो तो गोमूत्र की बस्ति देनी चाहिए।

5️⃣ यदि बस्ति कर्म के बाद भी दोष अधिक हो तो सामान्य विरेचन दिया जा सकता है। धातुक्षय हो, पाण्डु हो तो विरेचन में सावधान रहें।

6️⃣ शिरोभ्यंग के पश्चात् मोहान्धसूर्य नस्य देना चाहिए। अणु तैल का नस्य भी लाभप्रद है।

7️⃣ अमृतांजन का अंजन करना चाहिये ।

8️⃣ लघु, सुपाच्य आहार, लौकी, परवल, कच्चा पपीता, बथुआ, चौलाई, पपीता, जीरक, उष्ण जलपान, गोदुग्ध, अजा (बकरी) दुग्ध का आहार नियमों के अनुसार सेवन कराना चाहिए।

9️⃣ शतावरी घनवटी, पुनर्नवादि मण्डूर, शोथारि तो मण्डूर, स्वर्णमाक्षिक भस्म, मुक्तापिष्टी, प्रवाल भस्म, प्रवालपंचामृत मुक्तायुक्त, मुक्तापंचामृत, गिलोयघन, सर्वतोभद्रा वटी, महेश्वर वटी, शिलाजित्वादि वटी स्वर्ण (शुक्ररोगाधिकार), गोक्षुरादि गुग्गुल, शाल्मली घृत, पुनर्नवासव, उशीरासव, स्फटिक भस्म, अभ्रक भस्म शतपुटी, पाषाण भेद चूर्ण, श्वेत पर्पटी, गन्धर्वहस्तादि `तैलम्/कैपसूल आदि।

यह चिकित्सा और चिकित्सा सिद्धान्त हजारों रोगियों पर की जाती है और इसके आधार पर लगातार किडनी फेल्योर रोगियों को जीवनदान मिल रहा है।

सफ़ेद मूसली 100सतावर 100आंवला 100सालम पंजा 50मिश्री 350प्रवाल पिष्टी 10बंग भस्म 10यौनशक्ति वर्धक, स्वपनदोष, शीघ्रपतन आदि...
10/03/2026

सफ़ेद मूसली 100
सतावर 100
आंवला 100
सालम पंजा 50
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06/02/2026

🌿 आयुर्वेदिक संजीवनी – शतावरी + अश्वगंधा 🌿

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"रुकावट" समझदारी यह है कि अगर आपको शीघ्रपतन, पेनिस सेंसेटिव (संवेदनशील) धात स्वप्नदोष कमजोर यौन इच्छा, कम उत्तेजना, या अ...
25/01/2026

"रुकावट"

समझदारी यह है कि अगर आपको शीघ्रपतन, पेनिस सेंसेटिव (संवेदनशील) धात स्वप्नदोष कमजोर यौन इच्छा, कम उत्तेजना, या अन्य यौन समस्याएं हैं, तो यह सारी समस्याएं इशारा करती हैं कि आपका वीर्य जैसा होना चाहिए वह नहीं है ऊपर से आप इन समस्याओं के लिए एक लाख रुपये का नुस्खा इस्तेमाल कर रहे हैं, लेकिन वीर्य की कोई भी समस्या हल नहीं हो रही है, वीर्य में पतलापन है वीर्य पानी जैसा पतला है तो रुकावट नाम की चीज नहीं है ऐसे में आपको लगता है कि आपका पैसा बर्बाद हो रहा है।

ऐसे में क्यों न आप पहले अपने अंदर दो मिनट की रुकावट शक्ति पैदा कर लें? इसके बाद, आप आत्मविश्वास के साथ दो लाख रुपये का इलाज कर सकते हैं। इससे आपका पैसा बर्बाद होने का खतरा समाप्त हो जाएगा।

यहाँ ध्यान देने योग्य बात यह है कि यौन समस्याओं का इलाज करने से पहले अपनी रुकावट शक्ति को बढ़ाना बहुत जरूरी है।
यह तभी संभव है जब आपका वीर्य गाढ़ा हो और चिपका हुआ पैदा हो इससे आपको अपनी समस्याओं का समाधान करने में मदद मिलेगी और आपका पैसा भी बर्बाद नहीं होगा।

पावर बूस्टर बहुत ही धीरे-धीरे वीर्य की क्वालिटी को बेहतर बनाने के साथ चिपका हुआ और गाढ़ा पैदा करता है वीर्य की रुकावट वाले सिस्टम को मज़बूत करता है शीघ्रपतन के इलाज में सबसे पहले वीर्य का गाढ़ा होना जरूरी है।
पावर बूस्टर में एक दवा स्पेशल लिंग के अगले भाग की संवेदनशीलता को कम करने के लिए रखी गई है।
क्योंकि यह भी एक समस्या है कि लिंग संवेदनशील अगर है तो वह गर्मी और रगड़ बर्दाश्त नहीं कर पाता फोरन डिस्चार्ज हो जाता है।
इसी लिए लिंग की संवेदनशीलता (पेनिस सेंसिटिव /ओवर ऐक्टिव) कम करने के लिए दवा रखी गई है।
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गुप्त रोगों से संबंधित. धात. स्वप्नदोष. शीघ्रपतन.वीर्य की गर्मी के कारण वीर्य पतला. वीर्य में शुक्राणु की कमी. व पस सेल. पेशाब की जलन. लिकोरया. लीवर की गर्मी. बच्चेदानी की रसौली आदि. उपचार संबंधित निशुल्क परामर्श.
नाड़ी वैद्य संतराम

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धन्यवाद

13/01/2026

*_वैद्य राम दास जी के द्वारा रोग निवारण।_*

*एसिडिटी के कारण क्या हैं*

1. मसालेदार चटपटा खाना खाना
2. स्मोकिंग, शराब और दूसरे नशे करना
3. लम्बे समय तक ख़ाली पेट रखना
4. रात का भोजन सही समय पर नही करना
5. ख़ाली पेट चाय का सेवन करना
6. शरीर में गर्मी बढ़ जाना

*🔹एसिडिटी के लक्षण 🔹*

1. पेट में जलन महसूस होना
2. कड़वी और खट्टी डकारें आना
3. पेट में गैस बनना
4. खाने के बाद पेट में दर्द
5. कब्ज़ की शिक़ायत होना
6. उल्टी आना या फिर
बार-बार उबाक आना

*🔹एसिडिटी दूर करने का घरेलू इलाज*🔹

1. एसिडिटी दूर करने के लिए सुबह शाम एक गिलास पानी के साथ *आँवले* का चूर्ण खायें। इसके बाद आधे घंटे तक कुछ और नहीं खाना है। अगर चूर्ण नहीं है तो इसकी जगह आप आँवले का जूस भी पी सकते हैं।

2. *अदरक* को छोटे-छोटे टुकड़ों में काटकर पानी में उबाल लें। फिर इस पानी को छानकर गुनगुना पियें। अदरक की चाय भी एसिडिटी से छुटकारा देती है।

3. हर दिन एलोवेरा जूस पीने वाले लोगों को पेट में एसिडिटी की समस्या नहीं होती है।

4. 1-1 चम्मच जीरा, सौंफ, अजवाइन और सावा के बीज पानी में उबालें। इसे छानकर पानी को दिन में 2-3 बार पिएं। इस प्रयोग से पेट की समस्याओं से छुटकारा

5. यष्टि मधु और दालचीनी चूर्ण को शहद के साथ मिलाकर गोलियाँ बनायें। फिर इन्हें आवश्यकतानुसार चूसें।

6. एक गिलास दूध लीजिये और उसमे चुटकी भर अश्वगंधा मिलाकर पीने से एसिडिटी समाप्त होती है।
*यह लेख सामान्य उपचार की जन सामान्य को जानकारी और आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति के प्रचार प्रसार के लिए लिखा गया है. यदि आप किसी विशेष और गम्भीर रोग से पीड़ित हैं तो अपने निकट के वैद्य से मिलकर ही अपना इलाज करवाएं. या हमसे संपर्क करे*

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*विशेष चिकित्सीय सलाह हेतु आप व्यक्तिगत सुबह ९ बजे के बाद और साय ५ बजे सम्पर्क कर सकते हैं*

*_वैद्य रामदास जी (आयुर्वेदाचार्य, पंचकर्म, योगा विशेषज्ञ)_*

*_प्रधान -आदि शंकराचार्य योगा और औषधालय केंद्र ,जीदं रोड सफिदो।_*

*_सचिव हरीयाणा-सर्व ब्राह्मण महासभा भारत_*

*_आयुर्वेद विशेषज्ञ एवं अध्यापक-रामस्वरूप आक्षर्म,(सफिदो,कपालमोचन, ऋषिकेश,हरिद्वार)_*

*_चिकित्सा सलाहकार एवं आयुर्वेद प्रचारक-स्वामी निगमबोध आक्षर्म एवं टर्सट,(लुधियाना,हरिद्वार)_*

*_ओषधि निर्माण एवं मुख्य चिकित्सक-डेरा बाबा दया दास (कुचपड धनाना, महम,रोहतक)_*

*_मैं वैद्य राम दास उदासीन भारत को भारतीयता के मान्यता के आधार पर फिर से खड़ा करना चाहता हूँ उस काम मे लगा हुआ हूँ_*

*_वैद्य राम दास उदासीन जी के आयुवेदिक ग्रुप में सदस्य बना चाहते है तो वडसप्प नम्बर 9781249547,7888700072पर- नाम,पता,क्या कार्य करते हे- मैसेज करे।_*

*_जटिल से जटिल रोगों के उपचार हेतु लेख पढ़ें व share करें।_*

*अमर शहीद राष्ट्रगुरु, आयुर्वेदज्ञाता, होमियोपैथी ज्ञाता स्वर्गीय भाई राजीव दीक्षित जी के सपनो (स्वस्थ व समृद्ध भारत) को पूरा करने हेतु अपना समय दान दें मेरी दिल की तम्मना है हर इंसान का स्वस्थ स्वास्थ्य के हेतु समृद्धि का नाश न हो इसलिये इन ज्ञान को अपनाकर अपना व औरो का स्वस्थ व समृद्धि बचाये। ज्यादा से ज्यादा शेयर करें और जो भाई बहन इन सामाजिक मीडिया से दूर हैं उन्हें आप व्यक्तिगत रूप से ज्ञान दें।*

*_Note- इस पोस्ट को अधिक से अधिक शेयर करें ताकि किसी रोगी को इसका फायदा मिल सके_*

*_वन्देमातरम_*

03/01/2026
03/01/2026

रसेन्द्र चूड़ामणि रस (अक्सीरी – राजयोग)
रसेन्द्र चूड़ामणि रस रसशास्त्र का परम गोपनीय, अक्सीरी और राजयोग है। यह वही दिव्य रसायन है जिसका प्रयोग प्राचीन काल में राजा-महाराजा और श्रेष्ठ अमीर वर्ग करता था—जिससे उनमें अद्भुत बल, निरंतर यौवन, अपार कामशक्ति और असाधारण आकर्षण बना रहता था। यह कोई साधारण औषधि नहीं, बल्कि धातुओं के पुनर्निर्माण और यौवन के पुनर्जागरण का अमोघ रसायन है, जो अपने प्रभाव को तुरन्त प्रकट करता है।
यह योग शरीर की सभी क्षीण धातुओं की पूर्ण पूर्ति करता है l केवल एक माह के सेवन से शरीर में नवजीवन का संचार,चेहरे पर लाली, नूर, आँखों में चमक,शरीर में चुस्ती-फुर्ती, आत्मविश्वास और पुरुषत्व की जागृति करता है। यह योग विशेष रूप से निम्न समस्याओं में जड़ से प्रभावी है:
नामर्दी,लिंग में तनाव की कमी,शीघ्रपतन,हस्तमैथुन जनित कमजोरी,लिंग का टेढ़ापन,कामेच्छा की कमी
वीर्य विकार एवं धातुक्षय इतना ही नहीं ,जो व्यक्ति पूर्णतः स्वस्थ हैं, या जो दीर्घकाल तक यौवन, सामर्थ्य और पुरुषार्थ बनाए रखना चाहते हैं,वे भी इस योग का सेवन कर सकते हैं।यह योग ऐसा है जो बुढ़ापे में भी जवानी का एहसास करवा दे और जवानी में राजसी सामर्थ्य प्रदान करे।इस योग के कुछ ही दिनों के सेवन से शरीर में नया जोश,मन में उत्साह,चेहरे पर ताजगी,नेत्रों में तेज
और सम्पूर्ण व्यक्तित्व में आकर्षण लौट आता है
हर पुरुष को जीवन में एक बार तो रसेन्द्र चूड़ामणि रस अवश्य लेना चाहिए।”क्योंकि यह योग इच्छा नहीं, सामर्थ्य देता है।
रसेन्द्र चूड़ामणि रस जितनी तपस्या, धैर्य और शुद्धता से बनाया जाता है,उतना ही यह अद्भुत, अक्सिरी और प्रभावशाली बनता है। इसी कारण यह योग केवल सिद्ध, अनुभवी और भरोसेमंद वैद्य/हकीम द्वारा ही बनाया जाना चाहिए।हमारे पास यह योग पुरातन आयुर्वेदिक मर्यादाओं के अनुसार पूर्ण शुद्धता और मौलिकता की जिम्मेदारी के साथ उपलब्ध है।किसी को भी चाहिए संपर्क कर सकता है।
इस योग मै शामिल या यूँ कहे, पड़ने वाले अनमोल भस्म जो ऐसे फौलादी ताकत के लिए बेसुमार हैं

शुद्ध पारद भस्म – 1 भाग
स्वर्ण भस्म। – 2 भाग
नाग भस्म (100 पुट्टी)। – 3 भाग
अभ्रक भस्म (1000 पुट्टी)। – 4 भाग
बंग भस्म। – 5 भाग
अतुल शक्ति दाता योग (164 पुट्टी) – 6 भाग
चाँदी भस्म। – 7 भाग
स्वर्ण माक्षिक। – 8 भाग

📞 Contact & WhatsApp: 9781249547
🔔 यह योग केवल योग्य वैद्य की देख-रेख में, उचित मात्रा एवं नियम से ही प्रयोग करे

बुढ़ापे की लाठी (वृद्धदारूक) विधारा,,,,।।।.. 🌱💚🌿💚
02/01/2026

बुढ़ापे की लाठी (वृद्धदारूक) विधारा,,,,।।।.. 🌱💚🌿💚

30/12/2025

नीम आयुर्वेद की उन औषधियों में से है जिन्हें केवल कड़वाहट के कारण नहीं, बल्कि उनके गहरे शुद्धिकरण गुणों के कारण सम्मान दिया गया है। यह रक्त, त्वचा और अग्नि—तीनों स्तरों पर कार्य करता है और शरीर के भीतर छिपी अशुद्धियों को धीरे-धीरे बाहर लाने में सहायक बनता है।

आयुर्वेद में नीम को केवल एक घरेलू उपाय नहीं माना गया, बल्कि उसे अनुशासन, संयम और सही विधि के साथ अपनाने योग्य औषधि कहा गया है। सही मात्रा, सही समय और शास्त्रसम्मत प्रयोग के बिना कोई भी द्रव्य अपना पूर्ण प्रभाव नहीं दिखा सकता—और नीम इसका श्रेष्ठ उदाहरण है।

आज के समय में, जब शरीर पर रसायनों का भार बढ़ चुका है, नीम जैसा शुद्ध द्रव्य हमें संतुलन की ओर लौटने का मार्ग दिखाता है। इसकी कड़वाहट असहज नहीं, बल्कि शरीर को सचेत करने वाला संकेत है कि भीतर की शुद्धि आवश्यक है।

Desi Alchemist में हम मानते हैं कि आयुर्वेद का उद्देश्य लक्षणों को दबाना नहीं, बल्कि शरीर को उसकी मूल अवस्था में लौटाना है—जहाँ शुद्धि, संतुलन और स्वास्थ्य स्वाभाविक रूप से विकसित होते हैं।






DesiAlchemist

18/12/2025

डाक्टरी में अपने काम के प्रति ईमानदार होने के कुछ तरीके ऐसे भी होते हैं जो दुनिया को दिखाई नहीं देते , और समझाये नहीं जाते । आपको बस अपनी आत्मा को जवाब देना होता है ।
जैसे की -
-किसी मरीज़ को शायद बिना भर्ती के भी इलाज हो सकता है तो बिना भर्ती के ही किया जाए
- मरीज़ को अगर 2 दिन भर्ती कर के ही काम चल जाए तो 5 दिन क्यू करना
- अगर मरीज़ में ज़्यादा उम्मीद बाक़ी नहीं तो फालतू में उसे ना खींचना और तीमारदारों को सलाह देना की घर ले जाओ ।
- अगर मरीज़ पूरी तरह ठीक नहीं हुआ तो कम से कम बिल में उसकी मदद करना ।
- अगर किसी प्रोसीजर में बताए fixed पैकेज से ज़्यादा खर्च हो गया । तो भी मरीज़ से पहले से बताया हुआ fixed पैकेज ही लेना ।
- मरीज़ की अगर मौत हो जाए । तो बकाया बिल माफ कर देना
- मरीज़ अगर आपके महकमे का नहीं है । जैसे अगर न्यूरो का मरीज़ है । तो उसे ख़ुद इलाज करने की कोशिश करने के बजाए सही डॉक्टर के पास जाने की सलाह देना
- ज़्यादा बिल बना के बाद में discount का अहसान लादने से अच्छा पहले ही फ़ालतू के बिल ना बनने देना । और बाद के डिस्काउंट के झंझट से बचना
- पहले से अनुमान से थोड़ा खर्च बढ़ा कर ही बताना , भले ही बाद में असल खर्च कम हो तो कम लेना । बजाए इसके की पहले तो कम खर्च बताना और बाद में बम फोड देना ।

अब गालियाँ बकने वाले तो बकेंगे ही , लेकिन ये सारी चीज़ें मैं अपनी प्रैक्टिस में करने की पूरी कोशिश करता हूँ। और जवाब केवल अपने आप को देता हूँ।
लेकिन अगर मरीज़ को भर्ती से पहले ही जो खर्च बताया था , खर्च उसी के अंदर हुआ । मरीज़ स्वास्थ्य होकर घर गया तो मैं किसी के दबाव में नहीं आता ।

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