20/10/2024
श्रीरामचरितमानस
गुर पद पंकज सेवा,
तीसरि भगति अमान।
चौथि भगति मम गुन गन,
करइ कपट तजि गान।।
अरण्यकांड )
राम राम 🙏 देवियों और सज्जनों! सीता जी को खोजते हुए राम जी शबरी जी के आश्रम पहुँचे हैं और शबरी जी से कहते हैं। मैं जीव से केवल एक भक्ति का संबंध मानता हूँ। नवधा भक्ति मैं आपको बताता हूँ। इसे ध्यान से सुन कर हृदय में धारण करें। अभिमान रहित होकर गुरु चरणों की सेवा करना तीसरी भक्ति है और कपट छोड़कर मेरे गुणों का गान करना चौथी भक्ति है।
हम जीवन में मान पाने के लिए ही तो सब कुछ करते हैं और जीवन निष्कपट तब बनता है जब हम बिना स्वार्थ के राम गुणगान करते हैं। स्वार्थ रहित गुणगान ही हमें मान रहित बनाता है और हमारी भक्ति को पुष्ट करता है। अतएव नि:स्वार्थ राम जी में लगें, दो दो भक्ति मिल जाएगी। अथ! राम राम, जय राम राम। श्री राम, जय राम, जय जय राम।🚩🚩🚩