Zyrex Hospital of Kidney Treatment

Zyrex Hospital of Kidney Treatment A herbal treatment for kidney patients ( kidney failure and dialysis patients)

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25/05/2020

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22/04/2020

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20/04/2020

Glomerular filtration rate (GFR) is the best overall index of kidney function. Normal GFR varies according to age, s*x, and body size, and declines with age. The National Kidney Foundation recommends using the CKD-EPI Creatinine Equation (2009) to estimate GFR.

Serum Creatinine:mg/dL μmol/LSerum Cystatin C:mg/LAge:YearsGender:Male FemaleRace:Black OtherStandardized Assays:Yes No Not SureRemove body surface adjustment:Yes No

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08/04/2020

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क्या है क्रिएटिनिन शरीर में मौजूद क्रिएटिन नामक मेटाबॉलिक पदार्थ भोजन को ऊर्जा में बदलते समय क्रिएटिनिन (अपशिष्ट पदार्थ) में बदल जाता है। स्वस्थ किडनी क्रिएटिनिन को यूरिन के रास्ते बाहर निकालती है।

क्या है क्रिएटिनिन शरीर में मौजूद क्रिएटिन नामक मेटाबॉलिक पदार्थ भोजन को ऊर्जा में बदलते समय क्रिएटिनिन (अपशिष्ट पदार्थ) में बदल जाता है। स्वस्थ किडनी क्रिएटिनिन को यूरिन के रास्ते बाहर निकालती है। लेकिन प्रोटीन की अधिकता, पानी की कमी, रक्तसंचार में रुकावट व शुगर लेवल के बढऩे से किडनी क्रिएटिनिन को बाहर नहीं निकाल पाती जो किडनी के खराब होने की ओर इशारा करता है।

इसकी मात्रा बढऩे यह बाहर न निकलकर ब्लड में मिलकर इसे दूषित कर देती है। क्रिएटिनिन की सामान्य मात्रा पुरुषों में 0.7 से 1.3 व महिलाओं में 0.6 से 1.1 मिग्रा प्रति डेसिलीटर होनी चाहिए। इससे अधिक होने पर डायलिसिस या किडनी ट्रांसप्लांट की आशंका रहती है। कब पड़ती जरूरत भूख न लगने, हाथ-पैरों या पेट के निचले हिस्से में सूजन, कमर के निचले हिस्से में लगातार दर्द होने, सामान्य से अधिक या ज्यादा यूरिन आना, हाई ब्लड परेशर, उल्टी या अनिद्रा की शिकायत होने पर विशेषज्ञ क्रिएटिनिन टैस्ट करवाने की सलाह देते हैं।

इस टैस्ट में कुछ लैब टैस्ट जैसे ब्लड यूरिया नाइट्रोजन (बीयूएन), बेसिक मेटाबॉलिक पैनल (बीएमपी) और कॉम्प्रिहेंसिव मेटाबॉलिक पैनल (सीएमपी) भी शामिल हैं। इनसे रोग व उसके कारण का पता चल जाता है। 45 साल से अधिक उम्र के लोगों को वर्ष में एक बार यह टैस्ट रुटीन चैकअप के दौरान करवाना चाहिए।

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08/04/2020

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डायलिसिस क्या है?
जब किसी व्यक्ति की किडनी सुचारू रूप से काम नहीं करती तो उस समय डायलिसिस किया जाता है और डायलिसिस जब तक किया जाता जब तक किडनी क्रियाशील न हों. यह तब किया जाता है जब किडनी ठीक से काम नहीं करती हैं, शरीर को संतुलन में रखने के लिए इस दोर से गुजरना पड़ता है. डायलिसिस की प्रक्रिया शरीर से वेस्ट, नमक के साथ-साथ अतिरिक्त पानी को हटा देती है, इस प्रकार उन्हें आपके शरीर में जमा होने से रोकती है. यह सोडियम, बाइकार्बोनेट और पोटेशियम जैसे ब्लड में कुछ केमिकल्स को ऑप्टीमल लेवल के भीतर रखना सुनिश्चित करता है. अन्त में, यह ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करने में भी मदद करता है.

एक स्वस्थ किडनी दिन में लगभग 1500 लीटर ब्लड को साफ़ करने का काम करती है. यदि किडनी ठीक से काम नहीं कर पाती हैं, तो ब्लड में वेस्ट जमा हो सकता है. इससे स्वास्थ्य संबंधी गंभीर समस्याएं हो सकती हैं, जिसके परिणामस्वरूप कोमा और यहां तक कि मौत भी हो सकती है.

डायलिसिस के विभिन्न प्रकार क्या हैं?
डायलिसिस के दो अलग-अलग प्रकार हैं:

हीमोडायलिसिस: ब्लड से वेस्ट और एक्स्ट्रा केमिकल्स को हटाने के लिए एक हेमोडायलिसिसर का उपयोग किया जाता है.
पेरिटोनियल डायलिसिस: इसमें एक सर्जरी शामिल होती है जहां एक कैथेटर को पेट क्षेत्र में प्रत्यारोपित किया जाता है और डायलीसेट नामक एक तरल पदार्थ पेट में प्रवाहित होता है. यह तरल पदार्थ आपके पेट से वेस्ट को बाहर निकालता है जिसके बाद इसे बाहर निकाल दिया जाता है.
डायलिसिस कैसे काम करता है?

डायलिसिस अस्पताल के डायलिसिस यूनिट में या घर पर किया जा सकता है. डॉक्टर आपकी वरीयताओं और आपकी स्थिति की स्थिति के आधार पर निर्णय लेता है.

हीमोडायलिसिस:

यह डायलिसिस का सबसे आम रूप है. डॉक्टर एक चीरा बनाता है ताकि ब्लड आर्टिफीसियल किडनी या हेमोडायलॉजर में प्रवाहित हो सके. इसके प्रवेश बिंदु को हाथ या पैर में एक छोटा चीरा लगाकर बनाया जाता है. इसे बनाने के लिए त्वचा के नीचे ब्लड वेसेल्स या एक नस में धमनियों में से एक में शामिल किया जाता है जिसे फिस्टुला के रूप में जाना जाता है.

यह सर्जिकल पॉइंट एंट्रेंस के दौरान आपके शरीर से बड़ी मात्रा में ब्लड फ्लो होने की अनुमति देता है

23/11/2019

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