Arogya dham ayurvedic clinic Dr Pathak jee Ramgarh Jharkhand

Arogya dham ayurvedic clinic Dr Pathak jee Ramgarh Jharkhand यहां सभी प्रकार के पुराने से पुराने रोगों का ईलाज आयुर्वेद पद्धति से होता है।

24/05/2023

भारत में बढ़ते हार्ट अटैक !! अपनाएं ये उपचार

हमारे देश भारत में 3000 साल पहले एक बहुत बड़े ऋषि हुये थे.
उनका नाम था महाऋषि वागवट जी
उन्होंने एक पुस्तक लिखी थी
जिसका नाम है अष्टांग हृदयम
(Astang hrudayam)
और इस पुस्तक में उन्होंने बीमारियों को ठीक करने के लिए 7000 सूत्र लिखें थे
यह उनमें से ही एक सूत्र है !
वागवट जी लिखते हैं कि कभी भी हृदय को घात हो रहा है मतलब दिल की नलियों मे blockage होना शुरू हो रहा है !
तो इसका मतलब है कि रक्त (blood) में , acidity (अम्लता ) बढ़ी हुई है
अम्लता आप समझते हैं !
जिसको अँग्रेजी में कहते हैं acidity
अम्लता दो तरह की होती है
एक होती है पेट की अम्लता
और एक होती है रक्त (blood) की अम्लता
आपके पेट में अम्लता जब बढ़ती है तो आप कहेंगे
पेट में जलन सी हो रही है !
खट्टी खट्टी डकार आ रही हैं !
मुंह से पानी निकल रहा है !
और अगर ये अम्लता (acidity) और बढ़ जाये !
तो hyperacidity होगी !
और यही पेट की अम्लता बढ़ते-बढ़ते जब रक्त में आती है तो रक्त अम्लता (blood acidity) होती है !
और जब blood में acidity बढ़ती है तो ये अम्लीय रक्त (blood) दिल की नलियों में से निकल नहीं पाती और नलियों में blockage कर देता है !
तभी heart attack होता है इसके बिना heart attack नहीं होता
और ये आयुर्वेद का सबसे बढ़ा सच है जिसको कोई डाक्टर आपको बताता नहीं
क्योंकि इसका इलाज सबसे सरल है !
इलाज क्या है ?
वागवट जी लिखते हैं कि जब रक्त (blood) में अम्लता (acidity) बढ़ गई है तो आप ऐसी चीजों का उपयोग करो जो क्षारीय हैं
आप जानते हैं दो तरह की चीजें होती हैं
अम्लीय और क्षारीय !
acidic and alkaline
अब अम्ल और क्षार को मिला दो तो क्या होता है ?
acid and alkaline को मिला दो तो क्या होता है ?
‼️neutral‼️
होता है सब जानते हैं !
तो वागवट जी लिखते हैं कि रक्त की अम्लता बढ़ी हुई है तो क्षारीय (alkaline) चीजें खाओ !
तो रक्त की अम्लता (acidity) neutral हो जाएगी !
और रक्त में अम्लता neutral हो गई !तो heart attack की जिंदगी मे कभी संभावना ही नहीं !
ये है सारी कहानी !
अब आप पूछेंगे कि ऐसी कौन सी चीजें हैं जो क्षारीय हैं और हम खायें ?
आपके रसोई घर में ऐसी बहुत सी चीजें है जो क्षारीय हैं जिन्हें आप खायें तो कभी heart attack न आए
और अगर आ गया है
तो दुबारा न आए
यह हम सब जानते हैं कि सबसे ज्यादा क्षारीय चीज क्या हैं और सब घर मे आसानी से उपलब्ध रहती हैं, तो वह है लौकी
जिसे दुधी भी कहते हैं
English में इसे कहते हैं bottle gourd
जिसे आप सब्जी के रूप में खाते हैं ! इससे ज्यादा कोई क्षारीय चीज ही नहीं है !
तो आप रोज लौकी का रस निकाल-निकाल कर पियो या कच्ची लौकी खायो !
वागवट जी कहते हैं रक्त की अम्लता कम करने की सबसे ज्यादा ताकत लौकी में ही है तो आप लौकी के रस का सेवन करें !
कितना सेवन करें ?
रोज 200 से 300 मिलीग्राम पियो !
कब पिये ?
सुबह खाली पेट (toilet जाने के बाद ) पी सकते हैं या नाश्ते के आधे घंटे के बाद पी सकते हैं
इस लौकी के रस को आप और ज्यादा क्षारीय बना सकते हैं ।
इसमें 7 से 10 पत्ते तुलसी के डाल लो तुलसी बहुत क्षारीय है इसके साथ आप पुदीने के 7 से 10 पत्ते मिला सकते हैं पुदीना भी बहुत क्षारीय है इसके साथ आप काला नमक या सेंधा नमक जरूर डाले
ये भी बहुत क्षारीय है
लेकिन याद रखें
नमक काला या सेंधा ही डाले वो दूसरा आयोडीन युक्त नमक कभी न डाले ये आओडीन युक्त नमक अम्लीय है
तो आप इस लौकी के जूस का सेवन जरूर करें
2 से 3 महीने की अवधि में आपकी सारी heart की blockage को ठीक कर देगा
21 वें दिन ही आपको बहुत ज्यादा असर दिखना शुरू हो जाएगा
कोई आपरेशन की आपको जरूरत नहीं पड़ेगी
घर में ही हमारे भारत के आयुर्वेद से इसका इलाज हो जाएगा
और आपका अनमोल शरीर और लाखों रुपए आपरेशन के बच जाएँगे
आपने पूरी पोस्ट पढ़ी , आपका बहुत बहुत धन्यवाद !!
Dr Pathak jee Ramgarh Jharkhand आप गूगल में सर्च कर सकते है dr pathak jee Ramgarh Jharkhand

18/05/2023

*उल्टी और दस्त के घरेलु उपचार*

* उल्टी होने पर नीँबू का रस पानी में घोल कर लेने से शीघ्र ही फायदा होता है ।
* आप एक दो लौंग, दालचीनी या इलायची मुहँ में रखकर चूसिये यह मसाले उल्टियाँ विरोधक औषधियों होने के कारण उल्टियाँ रोकने में बहुत ही मददगार साबित होते है।
* तुलसी के पत्तों का एक चम्मच रस शहद के साथ लेने से उल्टी में लाभ मिलता है ।
* एक चम्मच प्याज का रस पीने से भी उल्टी में लाभ मिलता है ।
* गर्मियों में यदि बार बार उल्टियाँ आती है तो बर्फ चूसनी चाहिए ।
* पुदीने के रस को लेने से भी उल्टी में लाभ मिलता है ।
* धनिये के पत्तों और अनार के रस को थोड़ी थोड़ी देर के बाद बारी-बारी से पीने से भी उल्टी रुक जाती है ।
* 1/4 चम्मच सोंठ एक चम्मच शहद के साथ लेने से उल्टी में शीघ्र आराम मिलता है ।
* नींबू का टुकड़ा काले नमक के साथ अपने मुंह में रखने से आपको उल्टी महसूस नहीं होती है, रुक जाती है ।
* आधा चम्मच पिसे हुए जीरे का पानी के साथ सेवन करने से उल्टियों से शीघ्र छुटकारा मिलता है ।
* एक गिलास पानी में एक चम्मच एप्पल का सिरका डालकर पियें उल्टी में तुरंत आराम मिलेगा ।
* केले, सेब का मुरब्बा और पके केले का सेवन करें दस्त में तुरंत आराम मिलेगा ।
* दस्त आने पर अदरक के टुकड़े को चूसे या अदरक की चाय पियें पेट की मरोड़ भी शांत होती है और दस्त में भी आराम मिलता है ।
* दस्त रोकने के लिए चावल के माड़ में हल्का नमक और काली मिर्च डालकर उसका सेवन करें दस्त रुक जायेंगे ।
* जामुन के पेड़ की पत्तियाँ पीस कर उसमें सेंधा नमक मिला कर 1/4 चम्मच दिन में दो बार लेने से दस्त रुक जाते है ।
* दस्त आने पर दूध और उससे बनी हुई चीजों का सेवन कतई भी ना करें ।
* दस्त आने पर दस्त के साथ शरीर के खनिज वा तरल पदार्थ बाहर निकलते है इनकी कमी पूरी करने के लिए O.R.S का घोल पियें ।

10/05/2023

#आयुर्वेद_के_आठ_अंग

भगवान धन्वन्तरि समुद्र मंथन में रत्नस्वरूप निकले तब उन्होनें यज्ञ में अपना भाग निर्धारित करने के लिए कि मुझे भी यज्ञ का हव्यभाग प्राप्त हो इस भावना से भगवान नारायण से प्रार्थना कि --- तब भगवान ने कहा कि अभी तो सभी देवता यज्ञ के हव्य भाग को आपस में बांट चुके हैं अतः तुम श्रेष्ठता पाने के लिए पुनः जन्म ग्रहण करो ---

" धन्वस्तु दीर्घतपसो विद्वान धन्वन्तरिस्ततः। "
दीर्घतपा के पुत्र धन्व व धन्व से फिर धन्वन्तरि हुऐ ।
और आयुर्वेद को आठ अंगों से युक्त बना दिया ।

👉 कायचिकित्सा :-- काय चिकित्सा शारीरिक रोगों का निदान और उपचार को कहते हैं ।

👉 बालचिकित्सा :-- बाल चिकित्सा में बालकों के रोगों का विचार और उनका उपचार कहा गया है ।

👉 ग्रहचिकित्सा :-- इस में भूत - प्रेत आदि से होने वाली पीडा को समझना और उसका निदान है ।

👉 ऊर्ध्वांगचिकित्सा :-- सिर - नेत्र - कान आदि ऊपर के अंगों के रोग दूर करने की चेष्टा व विधि है ।

👉 शल्यचिकित्सा :-- अस्त्र-शस्त्र के आघात से होने वाले घाव - चीर - फाडकर ठीक करना है ।

👉 दंष्ट्राचिकित्सा :-- सर्पदंश - बिच्छुदंश आदि जंगम और अफीम आदि स्थावर विष दूर करने के उपाय हैं ।

👉 जराचिकित्सा :-- रसायन आदि से बुढापा रोकने या दूर करने के उपाय ।

👉 वृषचिकित्सा :-- वाजीकरण तंत्र को वृषचिकित्सा कहते हैं ।

07/05/2023

पेट की गैस का तुरंत इलाज | गैस बनने से क्या क्या प्राब्लम होती है |

पेट में गैस बनने का कोई एक निश्चित कारण नहीं है बल्कि इसके कई अलग-अलग कारण हो सकते हैं। जैसे कि अधिक समय तक भूखे रहना, तीखा भोजन करना, अधिक मात्रा में भोजन करना,

गैस बनाने वाले भोज्य पदार्थ का सेवन करना जैसे ही राजमा, छोला आदि। तनाव में रहना, अल्कोहल का अधिक सेवन करना, भोजन ठीक से हजम नहीं होना। इस तरह की समस्याएं गैस बनने का कारण हो सकती हैं।

उदर रोग कैसे होते हैं?
जठराग्नि की मन्दता के कारण वातादि दोष या मूत्र-पुरीष (गुदा द्वार द्वारा निष्कासित मल) मल बढ़ जाते हैं, जिसके कारण अनेक प्रकार के रोग उत्पन्न होने लग जाते और विशेषकर उदर रोग होते हैं। अग्नि के मंद हो जाने पर जब दोषयुक्त भोजन किया जाता है, तब भोजन का ठीक से पाचन न होने से दोषों का संचय होने लगता है।

वह दोषसंचय प्राणवायु, जठराग्नि और अपानवायु को दूषित कर ऊपर तथा नीचे के मार्गों को रोक देता है एवं त्वचा और मांस के बीच में आकर कुक्षि (पेट) में सूजन बनाकर उदर रोग उत्पन्न करता है।

पेट में जलन, पेट फूलना और वात बनने का आयुर्वेदिक उपचार

आइये अब जानते हैं कुछ ऐसे घरेलू और आयुर्वेदिक उपचार जिनके प्रयोग से उदर रोग जैसे पेट दर्द, पेट में जलन, गैस बनना बंद हो जाएगा।

अजवाइन और सौंफ
अजवाइन, सौंफ, काला नमक 10-10 ग्राम, काली मिर्च 5 ग्राम बारीक कूट-छानकर 200 ग्राम ताजे पानी से लें, पेट फूलना ठीक हो जाएगा।

हींग
हींग को पानी में मिलाकर नाभि पर लेप करने से पेट में गैस दूर हो जाती है। आप हींग का प्रयोग सब्जी में भी कर सकते हैं, इससे पाचन तंत्र अच्छा होता है और खाया पिया जल्दी हजम हो जाता है।

त्रिफला
त्रिफला, अजवाइन, काला नमक 50-50 ग्राम, काली मिर्च एक तोला, घीग्वार के छोटे-छोटे टुकड़े करके मिटटी के बर्तन में 15 दिन तक धूप में रखें। नमक सेंधा 30 ग्राम मिलाएं, दवा तैयार है। पेट में गैस, कब्ज़, भूख न लगना आदि के लिए 2 टुकड़े गर्म पानी के साथ दिन में दो बार खाना खाने के बाद लें। पेट के रोग दूर होंगे। पेट का फूलना, जी मचलाना, खट्टी डकार आना बंद होगा, गैस को ठीक करेगा।

पेट में गैस बनने के कारण और लक्षण, भोजन करने के बाद पेट क्यों फूलता है?, पेट फूलने पर किन चीजों का सेवन नहीं करना चाहिए? इन सभी प्रश्नों का उत्तर जानना चाहते हैं तो गूगल पर सर्च करें "पेट में जलन, पेट फूलना और वात बनने का आयुर्वेदिक उपचार-चरक संहिता" इसके बाद gharelunuskhe वेबसाइट पर जाएँ। यहाँ आपको सभी प्रश्नों के उत्तर डिटेल में मिल जाएंगे।

परिचय - एसिडिटी होने पर कई बार आपको भोजन नली या फिर सीने से नीचे की ओर जलन की समस्या होती है।

पेट में गैस, सीने में जलन और अपच की दिक्कत हो तो समझ लीजिए यह एसिडिटी है।
एसिडिटी यानि की अम्ल पित्त, जिसमें खाना पचाने वाले रसायन का स्त्राव या तो बहुत ज्यादा होता है या बहुत कम। एसिडिटी को चिकित्सा की भाषा में गैस्ट्रोइसोफेजियल रिफलक्स डिजीज (Gastroesophageal Reflux Disease) कहते हैं।
कई बार एसिडिटी के कारण व्यक्ति को सीने में दर्द (Chest Pain) की शिकायत भी हो सकती है। यदि यह तकलीफ बार- बार हो रही हो तो यह गंभीर समस्या बन जाती है। एसिडिटी के कारण कई बार भोजन, भोजन नली से सांस की नली में भी पहुंच जाता है जिससे खांसी या सांस लेने संबंधी (Respiratory) समस्या भी हो सकती है। इतना ही नहीं एसिडिटी की समस्या बढ़ने पर खट्टे पानी के साथ मुंह में खून भी आ सकता है।

एसिडिटी के कारण ।

मसालेदार एवं चटपटा खाना ज्यादा खाना इसका कारण बन सकता है।
खाने को ठीक से न चबाना।
पर्याप्त मात्रा में पानी न पीना।
खान-पान में अनियमितता।
धूम्रपान और शराब का ज्यादा सेवन ।

एसिडिटी के लक्षण
मतली और उल्टीयों का होना।
पेट में गैस बनना या पेट का ठिल होना।
छाती में जलन होना।
खाना या खट्टा पानी (एसिड) मुंह में आ जाना।
खट्टी डकारें आना।
कभी-कभी छाती में दर्द हो सकता है।

1.पीलिया का घरेलू उपचार।

गाजर को खाने से कोन कोन से फायदे होते है।

एसिडिटी या गैस से बचने के लिए ये सावधानियां बरतें।

ज्यादा तला-भुना या मसालेदार खाना न खाएं।
खाना समय से खाएं और खाकर कुछ देर टहलें, तुरंत सोएं नहीं।
कोल्डड्रिंक या अन्य आर्टिफिशियल पेय न लें।
चाय-कॉफी कम से कम पीएं।
पानी ज्यादा से ज्यादा से पीएं।

घर पर एसिडिटी का इलाज

छाछ (Buttermilk) - छाछ पीने से भी एसिडिटी में बहुत राहत मिलती है। छाछ में पेट की अम्लता को संतुलित करने के लिए लैक्टिक एसिड होता है। उपचार के लिए मेथी के दानों को पानी के साथ मिलाकर पेस्ट बना लें। इस पेस्ट को एक गिलास छाछ में मिलाकर पिएं।

इससे पेट का दर्द भी ठीक होगा और गैस से भी राहत मिलेगी। साथ ही, एसिडिटी भी खत्म होगी। स्वाद बढ़ाने और बेहतर परिणाम के लिए इस छाछ में काला नमक और काली मिर्च भी मिलाई जा सकती है।
जीरा (Cumin) - जीरा भी एक बेहतरीन एसिड न्यूट्रालाइजर (Acid Neutralizer) है जो एसिडिटी को कम करता है। इसके साथ ही पाचन शक्ति को बढ़ाकर पेट दर्द से भी राहत देता है।

उपचार के लिए जीरा को भूनकर उसका पाउडर बनाएं। इस पाउडर को खाना खाने के बाद एक गिलास पानी में मिलाकर पिएं। जीरा पाउडर को छाछ में मिलाकर भी पिया जा सकता है।
अदरक (Ginger) - अदरक में पेट की अम्लता से लड़ने के गुण होते हैं जो एसिडिटी से राहत देते हैं। उपचार के लिए खाने के बाद अदरक का एक छोटा टुकड़ा मुंह में रखकर चबाएं। या फिर एक कप पानी में अदरक को कुचलकर डालें और उबालें। इस पानी को छनकर पिएं।
सौंफ (Fennel) - सौंफ खाने को पचाने में सहायता करती है और गैस को दूर रखती है। हर रोज खाना खाने के बाद सौंफ को मुंह में रखकर चबाएं। सौंफ के साथ मिश्री भी मिलाई जा सकती है।

ऐसा करने से एसिडिटी से राहत मिलती है।
तुलसी के पत्ते (Basil Leaves) - तुलसी के पत्ते आपको तुरंत एसिडिटी, गैस और उल्टी से राहत दे सकते हैं। उपचार के लिए कुछ तुलसी के पत्ते चबा कर खाएं। इसके अलावा तुलसी के कुछ पत्ते पानी में उबालकर, उस पानी को छान लें। गुनगुना रहने पर शहद मिलाकर पिएं।

यह भी एसिडिटी के लिए अच्छा उपाय है।
नींबू (Lemon) - आधा कप गरम पानी में कुछ बूंदें नींबू निचोड़ लें। अब इस गरम नींबूपानी में आधा चम्मच बेकिंग सोडा मिलाएं और इस घोल को पिएं। यह आपको हार्टबर्न से आराम दिलाएगा।
डॉक्टर पाठक जी रामगढ़ झारखण्ड।

05/05/2023

--------: स्तन रोग के कारण :-------
दूध पिलाने वाली स्त्री, गर्भवती स्त्री या फिर दूध न पिलाने वाली स्त्रीयों के रक्त और मज्जा के दूषित होने से, ' स्तन रोग ' होते है । स्तन रोग स्त्रियों में ही होते है , कन्याओं में नही होते है । क्योंकि कन्याओं की धमनियां रूकी हुयी होती है ।
" धमन्यः संवृत द्वाराः कन्यानां स्तनसंश्रिताः।
दोषा वसरणास्तासां न भवन्ति स्तनामयः ।। "
प्रसूता और गर्भवती स्त्रियों की धमनियां स्वभाव से ही खुल जाती है । इसलिए, उनमें से दूध निकलता है ।
स्तन रोग पांच प्रकार के होते है -------
1- वात जन्य। 2- पित्त जन्य। 3- कफ जन्य। 4- सन्निपात जन्य । 5- आगुन्तक ( चोट लगने से , जो रोग होते है , उन्हें आगुंतक कहते है )।
स्वच्छता का ध्यान न रखने पर, होने वाले स्तन रोग -----
* प्रसव के बाद स्तनों के, दूध अधिक आने के कारण।
* नलिका छिद्र बंद होने पर।
* स्तन के अग्र भाग चटकने या दरार पड़ने पर छूत का रोग लगने का भय बन जाता है ।
इन्हीं सभी कारणों से स्तन रोग उत्पन्न होते है ।
स्तन पीडा़ के उपचार -------
(1) इंद्र्याण की जड़ को पानी या बैल का मूत्र में घिस कर लेप लगाने से, स्तनों की दर्द और सूजन तुरंत मिट जाती है ।
(2) स्तनों में खुजली, फोडा़, गांठ या सूजन हो जाने पर, फूल की थाली में 100 बार मक्खन को पानी से धोएं और इस धुलें मक्खन में सिंदुर और मुर्दासन बारीक करके मिला दें और मक्खन में अच्छी प्रकार फेंट लें। इस लेप को लगाने से स्तन की गांठ, सूजन और घाव ठीक हो जाते है ।
(3) हल्दी और घीग्वार की जड़ को पीसकर स्तनों पर लगाने से, स्तन रोगों में लाभदायक है ।
(4) " कुमारिकारसैलेंपो हरिद्रारजसान्वितः।
कवोष्णः स्तन शोथस्य नाशनः सर्व सम्मताम्।। "
अर्थात, घीग्वार के रस में , हल्दी डालकर लेपकर दें। स्तन की सूजन में तुरंत लाभ होता है ।डॉक्टर पाठक जी रामगढ़ झारखण्ड। 6201026200

05/05/2023

*🌹नाभि खिसकना, नाभि टलना, धरण डिगना, (Naval Displacemt) का घरेलू उपचार🌹*

🌷इस समस्या के कारण पाचन संबंधी व अन्य कई विकार बने रहते हैं, लाख कोशिशों के बावजूद भी इन विकारों को काबू करना मुश्किल रहता है जब तक कि नाभि अपने स्थान पर वापिस ना आ जाए...

*🌷क्या है नाभि टलना...?*

दरअसल हम सभी की नाभि के बीचों-बीच ह्रदय-स्पंदन (धड़कन) महसूस की जानी चाहिए, कई कारणों से यह अपने स्थान से खिसक जाती है एवं फिर धड़कन इधर-उधर महसूस की जाती है...

*🌷नाभि का टलना कैसे चेक करें...?*

नाभि अपने स्थान पर है या नहीं यह आप संलग्न चित्र के तरीके से भी चेक कर सकते हैं, सीधे खड़े होकर यदि दोंनो हाथों की कनिष्ठा(सबसे छोटी उंगली) छोटी-बड़ी हैं
या
समतल जगह लेटने पर दोनों पैरो के अंगूठे छोटे बड़े हैं तो नाभि अपने स्थान से खिसकी हुई है...

*🌷दूसरा:-*

चटाई इत्यादि लेकर समतल जगह पर रोगी सीधे लेटें, एक धागा लेवें, नाभि के मध्य से दोनों निप्पल्स(स्तन) की दूरी दूसरे व्यक्ति से नापने को कहें, यदि यह दूरी कम ज्यादा है तो नाभि अपने स्थान पर नहीं है...

*🌷तीसरा:-*

चटाई इत्यादि लेकर समतल जगह पर रोगी सीधे लेटें, दूसरे व्यक्ति को नाभि के बीचों-बीच उंगलीयों के माध्यम से दवाब देकर धड़कन(ह्रदय स्पंदन) चेक करने को कहें, यदि धड़कन बीचों-बीच की इधर-उधर मिल रही है तो नाभि टली हुई है...

*🌷वापिस अपने स्थान पर नाभि को कैसे लावें...?*

पेट को हल्का दवाब देकर चेक करें, क्या यह दुखता है एवं क्या सख्त है...?

यदि दुखना और सख्त होना नहीं है तो सुबह खाली पेट(फ्रेश होने के बाद)समतल जगह पर लेटें, लेटकर बर्फ का कटोरा नाभि पर रखें, बर्दाश्त होने तक रखा रहने देवें...

*🌷यदि पेट सख्त है तो...*

रात को सोते समय इस प्रकार की रोटी बनवाए जो एक तरफ से कच्ची हो, अर्थात एक तरफ अग्नि पर पकाई ना गई हो, उस रोटी में कच्ची वाली तरफ सरसों या तिल तेल उपलब्धता अनुसार लगावें व वह रोटी नाभि को सेंटर में रखकर किसी पुराने कपड़े से पेट पर बाँध लेवें, सुबह खोल देवें, 2- 4- 6 रातों तक पेट मुलायम होने तक यह प्रक्रिया करें,

*🌷पेट मुलायम होने पर....*

सुबह खाली पेट(फ्रेश होने के बाद)समतल जगह पर सीधा लेटें, लेटकर बर्फ का कटोरा नाभि पर रखें, बर्दाश्त होने तक रखा रहने देवें...

(1 से 4 दिन आवश्यकतानुसार यह प्रक्रिया दोहरावें जब तक नाभि स्थान पर ना आ जावे)

(उपरोक्त के अलावा भिन्न-भिन्न जगहों पर भिन्न लोग भिन्न प्रकार से सेट करते हैं, योगासन वगेरा की भी मदद ली जाती है, उपरोक्त विधि सरल है व आप स्वम कर सकते हैं इसलिए लिखा है)

🌷नाभि जल्दी से ना टले इसके लिए नाभि अपने स्थान पर सेट होने के बाद काला धागा(ताबीज वाला) दोंनो पैरों के अंगूठों में बाँध लेवें, कई लोग धागे की बजाय चाँदी या लोहे के छल्ले भी पैरों के अंगूठो में डलवा लेते हैं...

🌷अधिक वजन उठाने से बचें, यदि उठाना पड़े तो झटके से ना उठावें...

🌷सुबह ज्यादा देर खाली पेट ना रहें...

🌷ऊँचे-नीचे में पैर पड़ने व झटका लगने से बचें...

🌷सुपाच्य भोजन करें...

*प्रतिदिन नाभि में सरसों तेल, घी, पंचगव्य इत्यादि लगावें...*

*🌹

05/05/2023

कमर और पेट कम करने के 11 उपाय |
बढ़ा हुआ पेट और कमर कम करने के उपाय

किन फिर भी उनके शरीर की चर्बी कम नहीं होती है। ऐसे में आप कुछ टिप्स को अपनाकर जल्दी से परफेक्ट फिगर पा सकती हैं(बढ़ा हुआ पेट कम करने के घरेलू उपाय) आज हम आपको 10 ऐसे दमदार नुस्खे बताएंगे जो आपके पेट की बढ़ी हुई चर्बी को कम करने के साथ-साथ आपकी कमर को भी पतला करेंगे।

पेट की चर्बी कैसे घटाएं: महिलाओं का पेट कम करने के उपाय

1. चीनी कम खाएं
चीनी के अधिक सेवन से वजन बढ़ने लगता है। जो लोग अपने शरीर की चर्बी कम करना चाहते हैं। (पेट और जांघ की चर्बी कम करने के उपाय) उन्हें उन चीजों का सेवन कम करना चाहिए जिनमें शुगर की मात्रा अधिक हो। कम मात्रा में मीठा खाने से धीरे-धीरे चर्बी कम होगी।

2. ग्रीन टी पिएं
पेट की चर्बी कम करने के लिए दिन में कम से कम 2 बार ग्रीन टी का सेवन करें। इसे पीने से शरीर में जमा फैट 16 गुना ज्यादा बर्न होता है। हरे रंग में कैटेचिन नामक यौगिक मेटाबॉलिज्म को बढ़ाने का काम करता है।

3. अधिक पानी पीना
मोटापा कम करने के लिए अपनी लाइफस्टाइल में थोड़ा सा बदलाव करें। (कमर और पेट कम करने की एक्सरसाइज) दिन की शुरुआत गुनगुने पानी में शहद, नींबू पानी आदि से करें। इन्हें पीने से शरीर से विषैले पदार्थ आसानी से निकल जाएंगे। इससे वजन भी तेजी से कम होता है। कम से कम 10 से 15 गिलास पानी पिएं।
4. हर रोज हरी सब्जियां खाएं
हरी सब्जियां विटामिन और खनिजों से भरपूर होती हैं। जो शरीर के लिए काफी फायदेमंद होते हैं। (
पानी से भरपूर ये सब्जियां तेजी से वजन कम करती हैं। खीरा और पत्ता गोभी का सेवन करने से कुछ ही दिनों में आपका मोटा पेट अंदर हो जाएगा।

5. ज़ोर-जोर से हंसना
पेट की चर्बी कम करने का सबसे आसान तरीका है हंसना। हंसने से शरीर में रोग नहीं होते हैं और पेट में चर्बी भी जमा नहीं होती है। दिन में जितनी बार हो सके हंसें।

6. नाश्ते में अंडे का सफेद भाग खाएं
अंडे का सफेद भाग खान से चर्बी कम करने लगता है। पेट की चर्बी कम करने के लिए रोजाना नाश्ते में अंडे की सफेदी का सेवन करें। इसे खाने से शरीर को भरपूर ऊर्जा मिलेगी और मोटापा भी कम होगा।

7. दलिया खाने की योजना बनाएं
परफेक्ट बॉडी पाने के लिए नाश्ते में दलिया खाना शुरू कर दें। इसमें भरपूर मात्रा में फाइबर पाया जाता है। (बेल्ली फैट कम करने के उपाय) जो मोटापा कम करने में मददगार है। दलिया खाने से शरीर में एनर्जी बनी रहती है।

8. पपीता खाओ
पेट और कमर की चर्बी कम करने के लिए पपीते का सेवन करें। पपीता खाने के कुछ ही दिनों में शरीर में जमा चर्बी कम होने लगेगी।

9. भोजन करते समय चबाकर खाये
भोजन को ठीक से चबाकर चबाकर खाएं। चबाना- चबाने से खाना आसानी से पच जाता है। अधिक भोजन करने से पेट के आसपास अतिरिक्त चर्बी जमा नहीं होती है। कुछ ही दिनों में पेट की चर्बी कम करने के लिए जितना हो सके चबाकर खाएं।

10. तनाव कम करे
तनाव के कारण शरीर की चर्बी बढ़ती है। फैट कम करने के लिए जितना हो सके कम से कम स्ट्रेस लें। जब भी आप तनाव महसूस करें तो अलोम-विलोम शब्द ही करना शुरू करें।

28/04/2023

अस्थमा से परेशान हैं तो संपर्क करें डॉक्टर पाठक जी रामगढ़ झारखण्ड ।6201026200

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