Nature Harbal Ayurveda Group

Nature Harbal Ayurveda Group Shere harbal Natural Idea.

17/03/2024

🌹बहाना तो आसान है🌹
❤मगर कमिटमेंट सबके बस की बात नहीं।❤

!! हार्ट अटैक !!हमारे देश भारत में 3000 साल पहले एक बहुत बड़े ऋषि हुये थे, उनका नाम था महाऋषि वागवट जी। उन्होंने एक पुस्...
29/05/2023

!! हार्ट अटैक !!

हमारे देश भारत में 3000 साल पहले एक बहुत बड़े ऋषि हुये थे, उनका नाम था महाऋषि वागवट जी। उन्होंने एक पुस्तक लिखी थी जिसका नाम है अष्टांग हृदयम। (Astang hrudayam)

और इस पुस्तक में उन्होंने बीमारियों को ठीक करने के लिए 7000 सूत्र लिखें थे यह उनमें से ही एक सूत्र है! वागवट जी लिखते हैं कि कभी भी हृदय को घात हो रहा है मतलब दिल की नलियों मे ब्लॉकेज होना शुरू हो रहा है! तो इसका मतलब है कि रक्त (blood) में, अम्लता (acidity) बढ़ी हुई है!

अम्लता आप समझते हैं! जिसको अँग्रेजी में कहते हैं एसिडिटी। अम्लता दो तरह की होती है, एक होती है पेट की अम्लता और एक होती है रक्त (blood) की अम्लता। आपके पेट में अम्लता जब बढ़ती है तो आप कहेंगे कि पेट में जलन सी हो रही है! खट्टी खट्टी डकार आ रही हैं! मुंह से पानी निकल रहा है!

और अगर ये अम्लता (acidity) और बढ़ जाये तो पित्त बनेगा (hyperacidity)! और यही पेट की अम्लता बढ़ते बढ़ते जब रक्त में आती है तो रक्त अम्लता (blood acidity) होती है! और जब रक्त में अम्लता बढ़ती है तो ये अम्लीय रक्त दिल की नलियों में से निकल नहीं पाती और नलियों में ब्लॉकेज कर देता है! तभी हृदय घात होता है इसके बिना हृदय घात नहीं होता।

और ये आयुर्वेद का सबसे बड़ा सच है जिसको कोई डाक्टर आपको नहीं बताता, क्योंकि इसका इलाज सबसे सरल है!

इलाज क्या है?

वागवट जी लिखते हैं कि जब रक्त में अम्लता (acidity) बढ़ गई है तो आप ऐसी चीजों का उपयोग करो जो क्षारीय (alkaline) हैं। आप जानते हैं दो तरह की चीजें होती हैं, अम्लीय और क्षारीय (acidic and alkaline)!

अब अम्ल और क्षार को मिला दो तो क्या होता है?

न्यूट्रल (neutral) होता है सब जानते हैं! तो वागवट जी लिखते हैं कि रक्त की अम्लता बढ़ी हुई है तो क्षारीय (alkaline) चीजें खाओ! तो रक्त की अम्लता (acidity) न्यूट्रल हो जाएगी! और रक्त में अम्लता न्यूट्रल हो गई तो हृदय घात की जिंदगी में कभी संभावना ही नहीं!

ये है सारी कहानी!

अब आप पूछेंगे कि ऐसी कौन सी चीजें हैं जो क्षारीय हैं और हम खायें? आपके रसोई घर में ऐसी बहुत सी चीजें है जो क्षारीय हैं जिन्हें आप खायें तो कभी हृदय घात नहीं आएगा और अगर आ गया है तो दुबारा नहीं आएगा।

यह हम सब जानते हैं कि सबसे ज्यादा क्षारीय चीज क्या हैं और सब घर में आसानी से उपलब्ध रहती हैं, तो वह है लौकी, जिसे दुधी भी कहते हैं। अंग्रेजी में इसे कहते हैं बोटल गॉर्ड (bottle gourd) जिसे आप सब्जी के रूप में खाते हैं! इससे ज्यादा कोई क्षारीय चीज है ही नहीं!

तो आप रोज लौकी का रस निकाल निकाल कर पियो या कच्ची लौकी खाओ! वागवट जी कहते हैं कि रक्त की अम्लता कम करने की सबसे ज्यादा ताकत लौकी में ही है तो आप लौकी के रस का सेवन करें!

कितना सेवन करें?

रोज 200 से 300 मिलीग्राम पियो!

कब पिये?

सुबह खाली पेट (टॉयलेट जाने के बाद) पी सकते हैं या नाश्ते के आधे घंटे के बाद पी सकते हैं। इस लौकी के रस को आप और ज्यादा क्षारीय बना सकते हैं। इसमें 7 से 10 पत्ते तुलसी के डाल लो। तुलसी बहुत क्षारीय है, इसके साथ आप पुदीने के 7 से 10 पत्ते मिला सकते हैं। पुदीना भी बहुत क्षारीय है। इसके साथ आप काला नमक या सेंधा नमक जरूर डाले, ये भी बहुत क्षारीय है। लेकिन याद रखें नमक काला या सेंधा ही डाले, वो दूसरा आयोडीन युक्त नमक कभी न डाले। ये आओडीन युक्त नमक अम्लीय है।

तो आप इस लौकी के जूस का सेवन जरूर करें। 2 से 3 महीने की अवधि में आपकी सारी हृदय की ब्लॉकेज को ठीक कर देगा। 21वें दिन ही आपको बहुत ज्यादा असर दिखना शुरू हो जाएगा। कोई आपरेशन की आपको जरूरत नहीं पड़ेगी। घर में ही हमारे भारत के आयुर्वेद से इसका इलाज हो जाएगा और आपका अनमोल शरीर और लाखों रुपए आपरेशन के बच जाएँगे।

सनातन धर्म सर्वश्रेष्ठ है 🙏🙏

09/02/2023

*हमारे स्वास्थ्य संबंधित कुछ महत्वपूर्ण तथ्य:*
से जुड़ी याद रखने योग्य आवश्यक बातें:
1. बीपी: 120/80
2. पल्स: 70 - 100
3. तापमान: 36.8 - 37
4. सांस : 12-16
5. हीमोग्लोबिन: पुरुष -13.50-18
स्त्री- 11.50 - 16
6. कोलेस्ट्रॉल: 130 - 200
7. पोटेशियम: 3.50 - 5
8. सोडियम: 135 - 145
9. ट्राइग्लिसराइड्स: 220
10. शरीर में खून की मात्रा: पीसीवी 30-40%
11. शुगर लेवल: बच्चों के लिए (70-130) वयस्क: 70 - 115
12. आयरन: 8-15 मिलीग्राम
13. श्वेत रक्त कोशिकाएं WBC: 4000 - 11000
14. प्लेटलेट्स: 1,50,000 - 4,00,000

15. लाल रक्त कोशिकाएं RBC: 4.50 - 6 मिलियन.
16. कैल्शियम: 8.6 -10.3 मिलीग्राम/डीएल
17. विटामिन D3: 20 - 50 एनजी/एमएल.
18. विटामिन B12: 200 - 900 पीजी/एमएल.
*वरिष्ठ यानि 40/ 50/ 60 वर्ष वालों के लिए विशेष टिप्स:*
*1- पहला सुझाव:* प्यास न लगे या जरूरत न हो तो भी हमेशा पानी पिएं, सबसे बड़ी स्वास्थ्य समस्याएं और उनमें से ज्यादातर शरीर में पानी की कमी से होती हैं। 2 लीटर न्यूनतम प्रति दिन.
*2- दूसरा सुझाव:* शरीर से अधिक से अधिक काम ले, शरीर को हिलना चाहिए, भले ही केवल पैदल चलकर, या तैराकी या किसी भी प्रकार के खेल से।
*3-तीसरा सुझाव:* खाना कम करो...अधिक भोजन की लालसा को छोड़ दें... क्योंकि यह कभी अच्छा नहीं लाता है। अपने आप को वंचित न करें, लेकिन मात्रा कम करें। प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट आधारित खाद्य पदार्थों का अधिक प्रयोग करें।
*4- चौथा सुझाव:* जितना हो सके वाहनका प्रयोग तब तक न करें जब तक कि अत्यंत आवश्यक न हो. आप कहीं जाते हैं किराना लेने, किसी से मिलने या किसी काम के लिए अपने पैरों पर चलने की कोशिश करें। लिफ्ट, एस्केलेटर का उपयोग करने के बजाय सीढ़ियां चढ़ें।
*5- पांचवां सुझाव* क्रोध छोड़ो, चिंता छोड़ो,चीजों को नज़रअंदाज़ करने की कोशिश करो. विक्षोभ की स्थितियों में स्वयं को शामिल न करें, वे सभी स्वास्थ्य को कम करते हैं और आत्मा के वैभव को छीन लेते हैं। सकारात्मक लोगों से बात करें और उनकी बात सुनें।
*6- छठा सुझाव* सबसे पहले पैसे का मोह छोड़ दे
अपने आस-पास के लोगो से खूब मिलें जुलें हंसें बोलें!पैसा जीने के लिए बनाया गया था, जीवन पैसे के लिए नहीं।
*7-सातवां सुझाव* अपने आप के लिए किसी तरह का अफ़सोस महसूस न करें, न ही किसी ऐसी चीज़ पर जिसे आप हासिल नहीं कर सके, और न ही ऐसी किसी चीज़ पर जिसे आप अपना नहीं सकते।
इसे अनदेखा करें और इसे भूल जाएं।
*8- आठवां सुझाव* पैसा, पद, प्रतिष्ठा, शक्ति, सुन्दरता, जाति की ठसक और प्रभाव;
ये सभी चीजें हैं जो अहंकार से भर देती हैं. विनम्रता वह है जो लोगों को प्यारसे आपके करीब लाती है।
*9- नौवां सुझाव* अगर आपके बाल सफेद हो गए हैं, तो इसका मतलब जीवन का अंत नहीं है। यह एक बेहतर जीवन की शुरुआत हो चुकी है। आशावादी बनो, याद के साथ जियो, यात्रा करो, आनंद लो। यादें बनाओ!
*10- दसवां सुझाव* अपने से छोटों से भी प्रेम, सहानुभूति ओर अपनेपन से मिलें! कोई व्यंग्यात्मक बात न कहें! चेहरे पर मुस्कुराहट बनाकर रखें !
अतीत में आप चाहे कितने ही बड़े पद पर रहे हों वर्तमान में उसे भूल जाये और सबसे मिलजुलकर रहें!

विश्व स्वास्थ्य दिवस की हार्दिक बधाई और ढेर सारी शुभकामनाएं ।🙏🙏🌹🌹

सनातन संस्कार 🚩🚩भोजन से सम्बन्धी कुछ जानकारी।🚩🚩1. पांच अंगो (दो हाथ, दो पैर, मुख) को अच्छी तरह से धो कर ही भोजन करे !2. ...
05/07/2022

सनातन संस्कार

🚩🚩भोजन से सम्बन्धी कुछ जानकारी।🚩🚩

1. पांच अंगो (दो हाथ, दो पैर, मुख) को अच्छी तरह से धो कर ही भोजन करे !

2. गीले पैरों खाने से आयु में वृद्धि होती है !

3. प्रातः और सायं ही भोजन का विधान है ! पूर्व और उत्तर दिशा की ओर मुह करके ही खाना चाहिए !

4. मल मूत्र का वेग होने पर , कलह के माहौल में , अधिक शोर में , पीपल , वट वृक्ष के नीचे , भोजन नहीं करना चाहिए !

5. परोसे हुए भोजन की कभी निंदा नहीं करनी चाहिए !

6. खाने से पूर्व अन्न देवता , अन्नपूर्णा माता का धन्यवाद देते हुए , तथा प्रार्थना करके भोजन करना चाहिए !

7. भोजन बनने वाला...स्नान करके ही शुद्ध मन से , मंत्र जप करते हुए ही रसोई में भोजन बनाये l

8. इर्षा , भय , क्रोध , लोभ , रोग , दीन भाव , द्वेष भाव , के साथ किया हुआ भोजन कभी पचता नहीं है !

9. आधा खाया हुआ फल , मिठाईया आदि पुनः नहीं खानी चाहिए !

10. खाना छोड़ कर उठ जाने पर दुबारा भोजन नहीं करना चाहिए !

11. भोजन के समय मौन रहे !

12. भोजन को बहुत चबा चबा कर खाए !

13. रात्री में भरपेट न खाए !

14. सबसे पहले मीठा , फिर नमकीन , अंत में कडुवा खाना चाहिए !

15. सबसे पहले रस दार , बीच में गरिस्थ , अंत में द्राव्य पदार्थ ग्रहण करे !

16. थोडा खाने वाले को --आरोग्य , आयु , बल , सुख, सुन्दर संतान , और सौंदर्य प्राप्त होता है !

नाभी कुदरत की एक अद्भुत देन हैएक 62 वर्ष के बुजुर्ग को अचानक बांई आँख  से कम दिखना शुरू हो गया। खासकर  रात को नजर न के ब...
23/09/2019

नाभी कुदरत की एक अद्भुत देन है
एक 62 वर्ष के बुजुर्ग को अचानक बांई आँख से कम दिखना शुरू हो गया। खासकर रात को नजर न के बराबर होने लगी।जाँच करने से यह निष्कर्ष निकला कि उनकी आँखे ठीक है परंतु बांई आँख की रक्त नलीयाँ सूख रही है। रिपोर्ट में यह सामने आया कि अब वो जीवन भर देख नहीं पायेंगे।.... मित्रो यह सम्भव नहीं है..
मित्रों हमारा शरीर परमात्मा की अद्भुत देन है...गर्भ की उत्पत्ति नाभी के पीछे होती है और उसको माता के साथ जुडी हुई नाडी से पोषण मिलता है और इसलिए मृत्यु के तीन घंटे तक नाभी गर्म रहती है।
गर्भधारण के नौ महीनों अर्थात 270 दिन बाद एक सम्पूर्ण बाल स्वरूप बनता है। नाभी के द्वारा सभी नसों का जुडाव गर्भ के साथ होता है। इसलिए नाभी एक अद्भुत भाग है।
नाभी के पीछे की ओर पेचूटी या navel button होता है।जिसमें 72000 से भी अधिक रक्त धमनियां स्थित होती है
नाभी में गाय का शुध्द घी या तेल लगाने से बहुत सारी शारीरिक दुर्बलता का उपाय हो सकता है।
1. आँखों का शुष्क हो जाना, नजर कमजोर हो जाना, चमकदार त्वचा और बालों के लिये उपाय...
सोने से पहले 3 से 7 बूँदें शुध्द घी और नारियल के तेल नाभी में डालें और नाभी के आसपास डेढ ईंच गोलाई में फैला देवें।
2. घुटने के दर्द में उपाय
सोने से पहले तीन से सात बूंद अरंडी का तेल नाभी में डालें और उसके आसपास डेढ ईंच में फैला देवें।
3. शरीर में कमपन्न तथा जोड़ोँ में दर्द और शुष्क त्वचा के लिए उपाय :-
रात को सोने से पहले तीन से सात बूंद राई या सरसों कि तेल नाभी में डालें और उसके चारों ओर डेढ ईंच में फैला देवें।
4. मुँह और गाल पर होने वाले पिम्पल के लिए उपाय:-
नीम का तेल तीन से सात बूंद नाभी में उपरोक्त तरीके से डालें।
नाभी में तेल डालने का कारण
हमारी नाभी को मालूम रहता है कि हमारी कौनसी रक्तवाहिनी सूख रही है,इसलिए वो उसी धमनी में तेल का प्रवाह कर देती है।
जब बालक छोटा होता है और उसका पेट दुखता है तब हम हिंग और पानी या तैल का मिश्रण उसके पेट और नाभी के आसपास लगाते थे और उसका दर्द तुरंत गायब हो जाता था।बस यही काम है तेल का।
अपने स्नेहीजनों, मित्रों और परिजनों में इस नाभी में तेल और घी डालने के उपयोग और फायदों को शेयर करिये।
करने से होता है , केवल पढ़ने से नहीं।

*आयुर्वेद में प्राकृतिक चिकित्सा का महत्व**परिचय- आयुर्वेद के अनुसार किसी भी तरह के रोग होने के 3 कारण होते हैं-**1. वात...
26/08/2019

*आयुर्वेद में प्राकृतिक चिकित्सा का महत्व*

*परिचय- आयुर्वेद के अनुसार किसी भी तरह के रोग होने के 3 कारण होते हैं-*

*1. वात:- शरीर में गैस बनना।*

*2. पित्त:- शरीर की गर्मी बढ़ना ।*

*3. कफ:- शरीर में बलगम बनना।*

*नोट:- किसी भी रोग के होने का कारण एक भी हो सकता है और दो भी हो सकता है या दोनों का मिश्रण भी हो सकता है या तीनों दोषों के कारण भी रोग हो सकता है।*



*1. वात होने का कारण*

गलत भोजन, बेसन, मैदा, बारीक आटा तथा अधिक दालों का सेवन करने से शरीर में वात दोष उत्पन्न हो जाता है।
दूषित भोजन, अधिक मांस का सेवन तथा बर्फ का सेवन करने के कारण वात दोष उत्पन्न हो जाता है।

आलसी जीवन, सूर्यस्नान, तथा व्यायाम की कमी के कारण पाचन क्रिया कमजोर हो जाती है जिसके कारण वात दोष उत्पन्न हो जाता है।
इन सभी कारणों से पेट में कब्ज (गंदी वायु) बनने लगती है और यही वायु शरीर में जहां भी रुकती है, फंसती है या टकराती है, वहां दर्द होता है। यही दर्द वात दोष कहलाता है।

*2. पित्त होने का कारण*

पित्त दोष होने का कारण मूल रुप से गलत आहार है जैसे- चीनी, नमक तथा मिर्चमसाले का अधिक सेवन करना।
नशीली चीजों तथा दवाईयों का अधिक सेवन करने के कारण पित्त दोष उत्पन्न होता है।

दूषित भोजन तथा केवल पके हुए भोजन का सेवन करने से पित्त दोष उत्पन्न होता है।

भोजन में कम से कम 75 से 80 प्रतिशत क्षारीय पदार्थ (फल, सब्जियां इत्यादि अपक्वाहार) तथा 20 से 25 प्रतिशत अम्लीय पक्वाहार पदार्थ होने चाहिए। जब इसके विपरीत स्थिति होती है तो शरीर में अम्लता बढ़ जाती हैं और पित्त दोष उत्पन्न हो जाता है।

*3. कफ होने का कारण*

तेल, मक्खन तथा घी आदि चिकनाई वाली चीजों को हजम करने के लिए बहुत अधिक कार्य करने तथा व्यायाम की आवश्यकता होती है और जब इसका अभाव होता है तो पाचनक्रिया कम हो जाती है और पाचनक्रिया की क्षमता से अधिक मात्रा में चिकनाई वाली वस्तुएं सेवन करते है तो कफ दोष उत्पन्न हो जाता है।

रात के समय में दूध या दही का सेवन करने से कफ दोष उत्पन्न हो जाता है।

*वात, पित्त और कफ के कारण होने वाले रोग निम्नलिखित हैं-*

*वात के कारण होने वाले रोग*

अफारा, टांगों में दर्द, पेट में वायु बनना, जोड़ों में दर्द, लकवा, साइटिका, शरीर के अंगों का सुन्न हो जाना, शिथिल होना, कांपना, फड़कना, टेढ़ा हो जाना, दर्द, नाड़ियों में खिंचाव, कम सुनना, वात ज्वर तथा शरीर के किसी भी भाग में अचानक दर्द हो जाना आदि।

*पित्त के कारण होने वाले रोग*

पेट, छाती, शरीर आदि में जलन होना, खट्टी डकारें आना, पित्ती उछलना (एलर्जी), रक्ताल्पता (खून की कमी), चर्म रोग (खुजली, फोड़े तथा फुन्सियां आदि), कुष्ठरोग, जिगर के रोग, तिल्ली की वृद्धि हो जाना, शरीर में कमजोरी आना, गुर्दे तथा हृदय के रोग आदि।

*कफ के कारण होने वाले रोग*

बार-बार बलगम निकलना, सर्दी लगना, श्वसन संस्थान सम्बंधी रोग (खांसी, दमा आदि), शरीर का फूलना, मोटापा बढ़ना, जुकाम होना तथा फेफड़ों की टी.बी. आदि।



*वात से पीड़ित रोगी का प्राकृतिक चिकित्सा से उपचार*

*आहार चिकित्सा*

वात से पीड़ित रोगी को अपने भोजन में रेशेदार भोजन (बिना पकाया हुआ भोजन) फल, सलाद तथा पत्तेदार सब्जियों का अधिक प्रयोग करना चाहिए।

मुनक्का अंजीर, बेर, अदरक, तुलसी, गाजर, सोयाबीन, सौंफ तथा छोटी इलायची का भोजन में अधिक उपयोग करना चाहिए जिसके फलस्वरूप रोग जल्दी ही ठीक हो जाता है।

रोगी व्यक्ति को प्रतिदिन सुबह के समय में लहसुन की 2-4 कलियां खानी चाहिए तथा अपने भोजन में मक्खन का उपयोग करना चाहिए इसके फलस्वरूप वात रोग जल्दी ही ठीक हो जाता है।

*उपवास*

वात रोग से पीड़ित रोगी को सबसे पहले कुछ दिनों तक सब्जियों या फलों का रस पीकर उपवास रखना चाहिए तथा इसके बाद अन्य चिकित्सा करनी चाहिए।

*पित्त से पीड़ित रोगी का प्राकृतिक चिकित्सा से उपचार*

*आहार चिकित्सा*

पित्त रोग से पीड़ित रोगी को प्रतिदिन सब्जियों तथा फलों का रस पीना चाहिए।

पित्त रोग से पीड़ित रोगी को भूख न लग रही हो तो केवल फलों का रस तथा सब्जियों का रस पीना चाहिए और सलाद का अपने भोजन में उपयोग करना चाहिए। इसके फलस्वरूप उसका रोग जल्दी ही ठीक हो जाता है।
रोगी व्यक्ति को पूरी तरह स्वस्थ होने तक बिना पका हुआ भोजन करना चाहिए।

पित्त रोग से पीड़ित रोगी को खट्टी, मसालेदार, नमकीन चीजें तथा मिठाईयां नहीं खानी चाहिए क्योंकि इन चीजों के सेवन से पित्त रोग और बिगड़ जाता है।

पित्त के रोगी के लिए गाजर का रस पीना बहुत ही लाभकारी होता है, इसलिए रोगी को प्रतिदिन सुबह तथा शाम के समय में कम से कम 1 गिलास गाजर का रस पीना चाहिए।

अनार, मुनक्का, अंजीर, जामुन, सिंघाड़ा, सौंफ तथा दूब का रस पीना पित्त रोगी के लिए बहुत ही लाभकारी होता है।

पित्त रोग से पीड़ित रोगी को सुबह के समय में लहसुन की 2-4 कलियां खाने से बहुत लाभ मिलता है।

सोयाबीन तथा गाजर का सेवन प्रतिदिन करने से वात रोग जल्द ही ठीक होने लगता है।

*कफ से पीड़ित रोगी का प्राकृतिक चिकित्सा से उपचार*

*आहार चिकित्सा*

कफ के रोग से पीड़ित रोगी को प्राकृतिक चिकित्सा के दौरान सबसे पहले चिकनाई वाले पदार्थ, दूषित भोजन, तली-भुनी चीजों आदि का सेवन नहीं करना चाहि क्योंकि इन चीजों का उपयोग कफ रोग में बहुत हानिकारक रहता है।

कफ से पीड़ित रोगी को दूध तथा दही वाले पदार्थों का सेवन नहीं करना चाहिए क्योंकि इन चीजों के सेवन से रोगी की स्थिति और भी गंभीर हो जाती है।

कफ रोग से पीड़ित रोगी को दूध नही पीना चाहिए और अगर उसका मन दूध पीने को करता है तो दूध में सोयाबीन डालकर सेवन करना चाहिए।

कफ रोग से पीड़ित रोगी को ताजे आंवले का रस प्रतिदिन सुबह के समय में पीना चाहिए जिसके फलस्वरूप उसका रोग जल्दी ही ठीक हो जाता है। यदि आंवले का रस न मिल रहा हो तो सूखे आंवले को चूसना चाहिए।

मुनक्का, कच्ची पालक, अंजीर तथा अमरूद का सेवन कफ रोग में बहुत अधिक लाभदायक होता है।

अदरक, तुलसी, अंजीर तथा सोयाबीन का कफ रोग में प्रयोग करने से रोगी को बहुत आराम मिलता है।

लहसुन तथा शहद का प्रयोग भी कफ रोग में लाभदायक होता है और इससे रोगी का कफ रोग जल्दी ही ठीक हो जाता है।

"🙏🏻करें योग, रहें निरोग "🙏🏻

साइटिका
01/05/2019

साइटिका

यूरिक एसिड को नियंत्रित रखने के  उपाय
29/04/2019

यूरिक एसिड को नियंत्रित रखने के उपाय

इस दीपोत्सव पर आप व आपके परिवार को सुख, समृद्धि, शांति एवं अपार खुशियों के साथ मन की शांति प्राप्त हो और आप सभी का जीवन ...
07/11/2018

इस दीपोत्सव पर आप व आपके परिवार को सुख, समृद्धि, शांति एवं अपार खुशियों के साथ मन की शांति प्राप्त हो और आप सभी का जीवन रोशनी से जग-मग हो। इन्ही मंगल कामनाओं के साथ आप व आप के परिवार को दीपावली की हार्दिक शुभकामनाए !

सियाटिका के दर्द को देँ ऐसे शिकस्तसियाटिका नर्व (नाड़ी) शरीर की सबसे लंबी नर्व होती है। यह नर्व कमर की हड्डी से गुजरकर ज...
20/07/2018

सियाटिका के दर्द को देँ ऐसे शिकस्त

सियाटिका नर्व (नाड़ी) शरीर की सबसे लंबी नर्व होती है। यह नर्व कमर की हड्डी से गुजरकर जांघ के पिछले भाग से होती हुई पैरोँ के पिछले हिस्से मेँ जाती है। जब दर्द इसके रास्ते से होकर गुजरता है, तब ही यह सियाटिका का दर्द कहलाता है। होलिस्टिक मेडिसिन के तहत इस मर्ज का स्थायी समाधान संभव है।

लक्षण

* कमर के निचले हिस्से मेँ दर्द के साथ जाँघ व टांग के पिछले हिस्से मेँ दर्द।

* पैरोँ मेँ सुन्नपन के साथ मांसपेशियोँ मेँ कमजोरी का अनुभव।

* पंजोँ मेँ सुन्नपन व झनझनाहट।

बचाव

* प्रतिदिन सामान्य व्यायाम करेँ।

* वजन नियंत्रण मेँ रखेँ।

* पौष्टिक आहार ग्रहण करेँ।

* रीढ़ की हड्डी को चलने-फिरने और उठते-बैठते समय सीधा रखेँ।

* भारी वजन न उठाएं।

होलिस्टिक समाधान

सामान्य रूप से यदि मरीज की उम्र बहुत अधिक नहीँ है, तो इस बीमारी को ठीक करना आसान होता है। मर्ज के शुरूआती दौर मेँ गर्म पैक, आराम और दर्दनाशक गोली का सेवन उपयोगी है।

डीप हीट थेरैपी

बीमारी पुरानी होने पर यह थेरैपी लाभप्रद है। इसके तहत गर्म पानी के प्रयोग से या अरंडी के तेल का गर्म पैक लगाने से मांसपेशियां शिथिल होती हैँ।

काइरोप्रैक्टिक चिकित्सा

मांसपेशियोँ के शिथिल होने पर व्यायाम करना जरूरी होता है। इससे विभिन्न स्थितियोँ मेँ मरीज का शरीर सुचारू रूप से गति करता है। इस प्रक्रिया से नर्व पर दबाव समाप्त हो जाता है और धीरे-धीरे दर्द जाता रहता है।

रीढ़ की कसरत

नर्व पर दबाव समाप्त होने पर रीढ़ की हड्डी के व्यायाम मांसपेशियोँ को मजबूत बनाते हैँ। इससे बीमारी के पुनः होने की संभावना समाप्त हो जाती है।

पोषक तत्व

आहार मेँ विटामिन सी, ई, बीटा कैरोटिन (हरी सब्जियोँ व फलोँ मेँ) और कैल्शियम का सेवन उपयोगी है। कैल्शियम दूध मेँ पर्याप्त मात्रा मेँ पाया जाता है। इसी तरह कान्ड्राइटिन सल्फेट व ग्लूकोसामीन (इन पोषक तत्वोँ की गोलियाँ दवा की दुकानोँ पर उपलब्ध हैँ) का सेवन भी लाभप्रद है। वहीँ आइसोफ्लेवान (सोयाबीन मेँ मिलता है) और विटामिन बी12 (बन्दगोभी व ऐलोवेरा मेँ) आदि का पर्याप्त मात्रा मेँ प्रयोग करने से ऊतकोँ (टिश्यूज) का पुःन निर्माण होता है।

परिणाम

मरीज की उम्र यदि बहुत अधिक नहीँ है और उसकी डिस्क कई हिस्सोँ मेँ टूटी नहीँ है, तो उपर्युक्त चिकित्सा औसतन 2 से 3 महिने मेँ आश्चर्यजनक परिणाम देती है।
मित्रों से मेरी विनती है इस पोस्ट को शेयर करे और आगे बढ़ाए.ताकी पूरा भारत स्वास्थ हो।

24/01/2018

पथरी ,,,,

पथरी के लक्षण व घरेलु इलाज,,,,

पथरी एक बहुत आम समस्या हो गई है, जो किसी भी उम्र के लोगों को हो सकती है. जिसमें किडनी स्टोन तो सबसे ज्यादा लोगों को होता है. यूरिन में मौजूद केमिकल यूरिक एसिड, फोस्फोरस, कैल्शियम, ओक्सालिक एसिड मिलकर पथरी बना देते है. आज हम आपको इस पोस्ट में पथरी के इलाज के बारे में बताएँगे जो एकदम सरल और प्रभावी भी है पथरी औरतों की अपेक्षा मर्दों में तीन गुना अधिक पाई जाते है और ज़्यादातर पथरी 20 से लेकर 30 साल तक के लोगों में देखने को मिलते है अगर आप जानना चाहते हैं के पथरी के लक्षण क्या होते हैं और इसका इलाज कैसे संभव है तो इस पोस्ट को अंत तक पढ़िए. आजकल हर 5 वे इन्सान को ये बीमारी है. किडनी स्टोन वैसे ज्यादातर किडनी में ही होती है, लेकिन कुछ केस में ये मूत्रमार्ग या गाल ब्लाडर में भी होता है

पथरी होने के कारण

1- अगर आप सामान्य से कम पानी पीते है तो आपको पेशाब कम होता है जिस कारण यह खनिज और लवण पेशाब के रास्ते बाहर न जाकर किडनी में जमा हो जाते हैं। अगर आप पर्याप्त मात्रा में पानी पीते है पर अगर आपको अधिक पेशाब / पसीने होने से शरीर में पानी कम होता है तब भी पथरी हो सकता हैं

2- कई लोगो का कहना होता है की वे भरपूर पानी पीते है फिर भी उन्हें पथरी कैसे हो जाती हैं। किडनी की पथरी का रोकथाम करने के लिए सिर्फ भरपूर पानी पिने से लाभ नहीं होता है। आपको शरीर के विषैले तत्वों को पेशाब के रास्ते से बाहर भी निकालना होता हैं। आज कल कई लोग अपने व्यवसाय के कारण लम्बे समय तक पेशाब को रोककर रखते है और इस कारण जमा हुए पेशाब में खनिज और लवण जमा होकर पथरी निर्माण कर देते हैं।

3- यूरिन में केमिकल की अधिकता

4- शरीर में मिनिरल की कमी

5- डीहाईड्रीशन

6- विटामिन डी की अधिकता

7- डाइट का गड़बड़ाना

8- जंक फ़ूड का अधिक सेवन

पथरी के लक्षण

पेट के निचले हिस्से में आपको पथरी के लक्षण देखने को मिलते हैं मतलब टुंडी से नीचे और गुप्तांग के ठीक ऊपर के हिस्से में इसका दर्द होता है और ये दर्द कभी बहुत तेज़ होता है तो कभी धीरे धीरे और ये दर्द कभी कुछ देर के लिए होता है और कभी कभी बहुत लम्बे समय तक लगातार बन रहता है बीच बीच में इस दर्द में थोड़ी रहत भी रोगी को मिलती रहती है. पथरी के लक्षण का एक और रूप देखने को मिलता है जिसमे रोगी को उल्टी होनेकी शिकायत या जी मचलाने लगता है

पेशाब में जलन और दर्द, पेशाब करने में तकलीफ होना और बून्द-बून्द पेशाब होना, पेशाब के साथ रक्त आना

अंडकोषों में दर्द, जी मचलाना, उलटी, पथरी के साथ पेशाब में संक्रमण होने पर कपकपी लगना, पेशाब में जलन, बदन दर्द, बुखार और कमजोरी जैसे लक्षण भी नजर आते हैं

पथरी का घरेलु उपचार

1- अनार
अनार के दाने व जूस दोनों किडनी स्टोन को बाहर निकालने में सहायक है. 1 अनार के दाने या 1 गिलास अनार के जूस को रोज पियें. आपको ये ज्यादा पसंद ना हो तो आप इसके कुछ दाने सलाद में खा सकते है. इसके अलावा 1 tbsp अनार के दाने को पीस कर पेस्ट बना लें, अब इसे उबले काले चने के साथ खाएं, या उसका सूप बनाकर पियें. ये शरीर के अंदर ही स्टोन को नष्ट कर देता है

2- तुलसी
तुलसी किडनी की कोई भी बीमारी के लिए बहुत अच्छी औषधि है साथ ही ये शरीर के पुरे ओरगंस को भी स्वस्थ रखता है. 1 tbsp तुलसी का रस व शहद को मिलाएं, इसे रोज सुबह कुछ महीने तक पियें. अगर आपको शहद नहीं पसंद तो आप सिर्फ तुलसी का रस पी लें. इसके अलावा आप तुलसी की कुछ पत्तियां भी चबा सकते है. इसके अलावा आप तुलसी वाली चाय बनाकर पी सकते है, इसके लिए आप तुलसी की कुछ पत्तियां पानी में उबालें, उसमें 1 tsp शहद मिलाकर पियें

3- नींबू का रस और जैतून का तेल
नींबू का रस और जैतून का तेल का मिश्रण, गुर्दे की पथरी के लिए सबसे इफेक्टिव नेचरल उपचार मे से एक है. पथरी का पहला लक्षण होता है दर्द का होना. दर्द होने पर 60 ML नींबू के रस मे उतनी ही मात्रा मे ऑर्गॅनिक जैतून का तेल मिलाकर सेवन करने से आराम मिलता है. नींबू का रस और जैतून का तेल पूरे हेल्थ के लिए अच्छा रहता है और आसानी से मिल भी जाता है

4- अजवाइन
अजवाइन एक महान यूरीन ऐक्ट्यूऐटर है और किडनी के लिए टॉनिक के रूप में काम करता है-किडनी में स्‍टोन के गठन को रोकने के लिए अजवाइन का इस्‍तेमाल मसाले के रूप में या चाय में नियमित रूप से किया जा सकता है

5- प्‍याज*
प्‍याज में भी पथरी नाशक तत्‍व होते है इसका प्रयोग कर आप किडनी में स्‍टोन से निजात पा सकते है लगभग 70 ग्राम प्‍याज को पीसकर और उसका रस निकाल लें और सुबह खाली पेट प्‍याज के रस का नियमित सेवन करें इससे भी पथरी छोटे-छोटे टुकडे होकर निकल जाती है

6- विनेगर
एप्पल विनेगर किडनी स्टोन को डीसोल्व कर देता है. लेकिन इसमें क्षार के गुण होते है, जो खून व यूरिन को इफ़ेक्ट करता है. 1 कप गुनगुने पानी में 2 tbsp विनेगर व 1 tbsp शहद मिलाएं. दिन में 1-2 बार इसे पियें

7- गेहूं की बाली
नेचुरल तरीके से किडनी स्टोन दूर करने के लिए गेहूं की बाली का रस पीना अच्छा होता है. आप गेहूं की बाली का रस निकाल लें, 1 गिलास रस में 1 tsp नीम्बू व 1 tsp शहद मिलाएं. इसे दिन में 2-3 बार पियें. इसमें मैग्नीशियम, पोटेशियम, आयरन, विटामिन B व अमीनो एसिड होता है

8- राजमा
राजमा में फाइबर की बहुत अधिकता होती है. राजमा किसी भी तरह के स्टोन को नष्ट कर देता है. राजमा को भिगो कर उसको उबाल लें, इस पानी को ठंडा कर लें व इसे दिन में कई बार पियें, इससे दर्द भी कम होता है. राजमा के पानी को 24 घंटो के अंदर ही उपयोग कर लें. आप राजमा को सब्जी व सूप में भी उपयोग कर सकते है

9- केला
केला भी पथरी की समस्‍या से निपटने के लिए एक अच्छा उपाय है केला खाना चाहिए क्‍योंकि इसमें विटामिन बी 6 होता है विटामिन बी 6 ऑक्जेलेट क्रिस्टल को बनने से रोकता और तोड़ता है साथ ही विटामिन बी-6, विटामिन बी के अन्य विटामिन के साथ सेवन करना किडनी में स्‍टोन के इलाज में काफी मददगार होता है शोध के मुताबिक विटामिन-बी की 100 से 150 मिलीग्राम दैनिक खुराक गुर्दे की पथरी की चिकित्सीय उपचार में बहुत फायदेमंद हो सकता है

10- करेला
करेला वैसे तो बहुत कड़वा होता है और आमतौर पर लोग इसे कम पसंद करते है परन्‍तु पथरी में यह रामबाण की तरह काम करता है करेले में मैग्‍नीशियम और फॉस्‍फोरस नामक तत्‍व होते हैं जो पथरी को बनने से रोकते हैं

पथरी के दर्द में इंसान तड़प उठता है। यह दर्द अचानक से हो सकता है। इसलिए सही समय पर किया गया परहेज और इन उपायों का प्रयोग करने से इस भयंकर दर्द से बचा जा सकता है। पथरी रोगी को अधिक से अधिक पानी पीते रहना चाहिए। कोशिश करें भोजन को सावधानी से खायें। पथरी किसी भी उम्र में हो सकती है।

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