Mandeep Kaur Ayurvedic Aushadhaalay

Mandeep Kaur Ayurvedic Aushadhaalay आयुर्वेद अपनाए निरोगी काया पायें

26/12/2025

*शीघ्रपतन*

परिचय : बिना सन्तुष्टी के संभोग करते हुए अगर वीर्य स्खलन हो जाये तो उसे शीघ्रपतन कहा जाता है।

कारण : अश्लील वातावरण में रहना, मस्तिष्क की कमजोरी और हर समय सहवास की कल्पना मे खोये रहनाभी यह शीघ्रपतन का कारण बनती है। ज्यादा गर्म मिर्च मसालों व अम्ल रसों से खाद्य-पदार्थो का सेवन करने, शराब पीने, चाय-कांफी का ज्यादा पीना और अश्लील फिल्म देखने वाले, अश्लील पुस्तकें पढ़ने वाले शीघ्रपतन से पीडित रहते हैं।

लक्षण : वीर्य का पतलापन, सहवास के समय स्तंभन (सहवास) शक्ति का अभाव अथवा शीघ्रपतन हो जाना वीर्य का जल्दी निकल जाना।

भोजन तथा परहेज :

दिन में खाने के साथ दूध लें, मौसमी फल, बादाम, प्याज और लहसुन का प्रयोग करें।
दवा के साथ गुड़, मिर्च, तेल, खटाई, मैथुन, और कब्ज पैदा करने वाली चीजों का सेवन नहीं करना चाहिएं पत्नी के साथ सहवास के साथ करते समय यह ध्यान रखें कि वाद-विवाद की उलझनों से दूर रहें।
विभिन्न औषधियों से उपचार-

1. छोटी माई : छोटी माई का चूर्ण 2 से 4 ग्राम की मात्रा में सुबह-शाम खाने से शीघ्रपतन की शिकायत दूर हो जाती है।

2. बरगद : बरगद के दूध की 20 से 30 बूंदे बतासे या चीनी पर डालकर रोज सवेरे खाने से शीघ्रपतन की शिकायत दूर होती है।
3 ग्राम बरगद के पेड़ की कोपलें, 3 ग्राम गूलर के पेड़ की छाल और 6 ग्राम मिश्री सिल पर पीसकर लुगदी बना लें, इसे खाकर ऊपर से 250 मिलीलीटर दूध पीयें, इसे 40 दिन तक खाने से लाभ मिलता है।
बरगद के कच्चे फलों को छाया में सुखाकर पीसकर रख लें। 10 ग्राम को खुराक के रूप में सुबह-शाम गाय के दूध के साथ लेने से स्वप्नदोष और शीघ्रपतन मिट जाता है।
सूर्योदय से पहले बरगद के पत्ते तोड़कर टपकने वाले दूध को एक बताशे में 3-4 बूंद टपकाकर खा लें। एक बार में ऐसा प्रयोग 2-3 बताशे खाकर पूरा करें। हर हफ्ते 2-2 बूंद की मात्रा बढ़ाते हुए 5-6 हफ्ते तक प्रयोग जारी रखें। इसके नियमित सेवन से शीध्रपतन (वीर्य का जल्दी निकल जाना), बलवीर्य वृद्धि के लिए, वीर्य का पतलापन, स्वप्नदोष, प्रमेह (वीर्य दोष) और खूनी बवासीर आदि सभी रोग ठीक हो जाता है।

3. गिलोय : गिलोय का चूर्ण और वंशलोचन को बराबर मिला-पीसकर 2 ग्राम के रूप में खाने से शीघ्रपतन नहीं होता है।

4. कुलिंजन : लगभग डेढ़ ग्राम कुलिंजन का चूर्ण 10 ग्राम शहद में मिलाकर चाटें, ऊपर से गाय के दूध में शहद मिलाकर पी लें इससे शीघ्रपतन नहीं होता है।

5. पीपल : पीपल के पेड़ का फल, जड़, छाल और कोंपल को पीसकर दूध में अच्छी तरह उबाल कर गर्म-गर्म शहद और चीनी मिला कर सुबह-शाम खाने से लाभ होता है।

6. सिरस : सिरस के फूलों का रस 10 मिलीलीटर या 20 मिलीलीटर सुबह-शाम मिश्री मिले दूध के साथ लेने से वीर्य स्तंभन होता है।

7. बबूल : बबूल की फली का चूर्ण 3 से 6 ग्राम सुबह-शाम चीनी मिलाकर खाने से शीघ्रपतन में लाभ होता है।

8. पिण्ड खजूर : पिण्ड खजूर के 5 फल रोज खायें और ऊपर से मिश्री मिला दूध कम से कम 250 मिलीलीटर रोज पियें तो इससे वीर्य गाढ़ा हो जाता है।

9. कतीरा गोंद : कतीरा गोंद 1 से 2 चम्मच चूर्ण रात में सोते समय पानी में भिगो दें। सवेरे मिश्री या शक्कर को मिलाकर शर्बत की तरह रोज घोंटकर खाने से वीर्य की मात्रा, गढ़ापान और स्तम्भन शक्ति की वृद्धि होती है।

10. असगन्ध नागौरी : असगन्ध नागौरी का चूर्ण 1 चम्मच और 3 कालीमिर्च के चूर्ण को मिलाकर रोज रात को सोते समय खाने से शीघ्रपतन और वीर्य सम्बन्धी सारे रोग दूर होते हैं।

11. उड़द : अंकुरित उड़द की दाल में मिश्री या शक्कर को डालकर कम से कम 58 ग्राम की मात्रा में रोज खाने से शीघ्रपतन दूर होता है।
उड़द के बेसन को घी में हल्का भूनकर रख लें। लगभग 50 ग्राम रोज मिश्री मिले दूध को उबालकर रोज रात में सेवन करने से वीर्य और नपुंसकता (नामर्दी) से सम्बन्धी रोग दूर हो जाते हैं।

12. शकरकन्द : सूखी शकरकन्द को कूट छानकर चूर्ण तैयार करें, फिर उसे घी और चीनी की चाशनी में डालकर हलवा तैयार करके इस हलवे को खाने से वीर्य गाढ़ा होता है।

13. कौंच : कौंच के बीजों की गिरी का चूर्ण और खसखस के बीजों का चूर्ण 4 या 6 ग्राम लेकर चूर्ण को फांट या घोल के रूप में सेवन करने से शीघ्रपतन में लाभ होता है।
कौंच के बीज का चूर्ण, तालमखाना और मिसरी, तीनों बराबर मात्रा में लेकर कूट-पीस कर चूर्ण बनाकर सुबह-शाम 3-3 ग्राम चूर्ण खाकर, ऊपर से दूध पीना शीघ्रपतन में लाभदायक होता है।
कौंच की जड़ लगभग 1 अंगुल लम्बी मुंह में दबाकर सहवास करने से शीघ्रपतन में लाभ होता है।

14. वंशलोचन : वंशलोचन, सतगिलोय 10-10 ग्राम पीसकर 1-1 ग्राम सुबह-शाम शहद के साथ सेवन करने से शीघ्रपतन में आराम मिलता है।

15. बहुफली : बहुफली 50 ग्राम पीसकर 5 ग्राम सुबह पानी से प्रयोग करें।

16. काले तिल : काले तिल 50 ग्राम अजवायन 25 ग्राम पीसकर इसमें 75 ग्राम खांड को मिलाकर 5-5 ग्राम की मात्रा में सुबह-शाम पानी के साथ सेवन करने से लाभ होता है।

17. ब्रह्मदण्डी : ब्रह्मदण्डी, बहुफली 50-50 ग्राम कूट छानकर इसमें 100 ग्राम खांड को मिलाकर 10 ग्राम को खुराक के रूप में सुबह पानी के साथ सेवन करें।
ब्रह्मदण्डी, बहुफली, बीजबन्द, पलंग तोड 50-50 ग्राम कूट छान कर इस में 100 ग्राम खांड़ मिलाकर 10-10 ग्राम को दिन में सुबह-शाम दूध या पानी के साथ सेवन करने से शीघ्रपतन के रोगी को लाभ होगा।

18. बिदारीकन्द : बिदारीकन्द, गोखरूदेसी 50-50 ग्राम कूटछानकर 5-5 ग्राम खांड़ को मिलाकर दूध के साथ सुबह और शाम सेवन करें।

19. लाजवन्ती : लाजवन्ती के बीज 75 ग्राम पीस कर इसमें 75 ग्राम खांड मिलाकर 5-5 ग्राम को सुबह-शाम खांड मिले कम गर्म दूध के साथ लें।

20. मूसली सिम्बल : मूसली सिम्बल 60 ग्राम कूटी छनी में खांड 60 ग्राम मिलाकर 6-6 ग्राम पानी या दूध से सुबह-शाम लें।

आप भी अगर ऐसे किसी रोग से ग्रस्त है तो आज ही परामर्श ले बिना किसी संकोच के आयुर्वेद में हर रोग का इलाज संभव है बस जरूरत है तो एक पहल करने की

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वैद्य मनदीप कौर
नामधारी देसी दवाखाना
रतिया
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22/12/2025

*संजीवनी नास्ते के नियमित सेवन कर आरोग्य बनने*

*संजीवनी नास्ता*

*ये है 4 औषधियों का संजीवनी नाश्ता जो 100 वर्षों तक जवां बनाकर सभी रोगों से दूर रखेगी, जरूर पढ़े!!*

*आज हम आपको ऐसे भोजन के बारे में बताने जा रहें है, जिसको अगर संजीवनी भी कहा जाए तो ग़लत नहीं होगा। बल बुद्धि और वीर्य बढाने में ये रामबाण है। इसके सेवन से आप खांसी जुकाम से लेकर कैंसर तक आप हर बीमारी से बच सकते हैं। ये भोजन स्वस्थ व्यक्ति को निरोगी बनाये रखता है, कमजोरों को शक्तिशाली, बच्चों को चैंपियन, बूढों को जवान, और जवानो को 100 वर्ष तक जवान बना कर रखता है। इसके फायदे अनगिनत हैं। आइये जाने चार चम्मच गेंहू के दाने , 2 चम्मच मूँग,2चम्मच चना और एक चम्मच मेथी दाना से बना ये संजीवनी भोजन।*

*चार चम्मच गेंहू के दाने, 2 चम्मच मूँग 2 चम्मच चना और एक चम्मच मेथी दाना ले कर चार पांच बार अच्छी तरह साफ़ जल से धो लीजिये। इस के बाद एक गिलास पानी में डालकर चौबीस घंटे रखें। फिर इनको पानी से निकालकर एक मोटे गीले कपडे में बांधकर अंकुरित होने के लिए चौबीस घंटे तक हवा में लटका दीजये। गर्मियों में बीच बीच में पानी के छींटे मारते रहें।*

*जिस पानी में गेंहू के दाने, मूँग दाने और मेथी दानो को भिगोया था उस पानी में आधा निम्बू निचोड़ कर दो ग्राम सौंठ का चूर्ण डाल दीजिये। इसमें दो चम्मच शहद घोलकर सुबह खाली पेट लें। यह पेय बहुत शक्तिवर्धक, पाचक, और सफुर्तिदायक होता है। इसको संजीवनी पेय कहते हैं।*

*अभी जो गेंहू के दाने ,मूँग और मेथी के दाने अंकुरण के लिए लटकाए थे, जब उनमे अंकुर फूट जाए (औसतन गर्मियों में चौबीस या अड़तालीस घंटों में अंकुरित हो जाते हैं) इनको सुबह नाश्ते में पीसी काली मिर्च और सेंधा नमक बुरककर खूब चबा चबा कर खाएं। इस नाश्ते को संजीवनी नाश्ता कहते हैं। जो व्यक्ति अंकुरित अन्न को चबा ना सके वो इसको ग्राइंड कर के इसका लाभ लें। अन्यथा उनको ऊपर पानी तक ही सीमित रहना पड़ेगा।*

*जिन लोगों में खून की कमी है, ब्लड शुगर है (डायबिटीज), कफ़ की अधिक समस्या है, अस्थमा का प्रकोप है, शरीर कमज़ोर है, मोटापा अधिक है, कमजोरी रहती है, पूरा दिन आलस रहता है, खून में धक्के जमे हुए है, कमज़ोर दृष्टि है, नपुंसकता है, शीघ्रपतन की समस्या है, कैंसर, हृदय रोगों, लीवर के रोगों, किडनी के रोगों के लिए, स्त्रियों के श्वेत प्रदर और रक्त प्रदर में, बच्चों के मानसिक और शारीरिक* *विकास के लिए, खिलाडियों के लिए ऊर्जावान, यौवन को बरक़रार रखने वाला, चेहरे को कश्मीरी सेब जैसा खिला रखने वाला, 100 वर्ष तक भी निरोगी रखने वाला चमत्कारिक भोजन है। इसको हर आयु का व्यक्ति खा कर रक्त में जवानी का अहसास कर सकता है। कुल मिला कर इसको सर्व रोगों के लिए एक दवा कहा जा सकता है।*

*अंकुरण के लिए बढ़िया से बढ़िया अनाज का उपयोग करना चाहिए, और गर्मियों में जहाँ अंकुरण एक दो दिन में हो जाता है, वहीँ सर्दियों में यह 3 से 4 दिन ले सकता है। इसलिए धैर्य रखें। और हर रोज़ आप ये नाश्ता कर सकें। इस लिए जब तक अंकुरण फूटे नहीं, तब तक हर रोज़ नया गेंहू , मूँग और मेथीदाना अंकुरित करते रहें। इस से तीन चार दिनों के बाद आपको निरंतर अंकुरित नाश्ता मिलना शुरू हो जायेगा !*

बच्चे से बुजुर्ग तक सबकी सेहत का खजानाआज ही ऑर्डर करे
20/12/2025

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09/12/2025

सबको पता होना चाहिए – आंवला ही है, जबरदस्त इम्युनिटी बढ़ाने का सबसे सस्ता और असरदार उपाय!
आज के समय में...
बदलती जीवनशैली,
गलत खानपान,
तनाव,
नींद की कमी और
प्रदूषण ने हमारी रोग-प्रतिरोधक क्षमता को बहुत कमजोर कर दिया है।
यही वजह है कि सर्दी, खांसी, बुखार, थकान, कमजोरी और बार-बार बीमार पड़ने की समस्या आम हो गई है।
ऐसे में अगर आप चाहते हैं कि शरीर अंदर से मजबूत बने और बीमारियाँ आपसे दूर रहें, तो आपको अपने जीवन में आँवला जरूर शामिल करना चाहिए।

रोज़ 1 आँवला खाएँ या उसका रस पिएँ...
आँवला को आयुर्वेद में “रसायन फल” कहा गया है। यह विटामिन-C, आयरन, कैल्शियम, फाइबर और शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर होता है। यही कारण है कि इसे इम्युनिटी का राजा कहा जाता है।

आँवला खाने के अद्भुत फायदे:...

▪️ रोग-प्रतिरोधक क्षमता तेजी से बढ़ती है
▪️ सर्दी-खांसी और वायरल से बचाव होता है
▪️ पेट साफ रहता है और पाचन मजबूत होता है
▪️ खून की कमी दूर होती है
▪️ बाल झड़ना, सफेद होना कम होता है
▪️ त्वचा में प्राकृतिक निखार आता है
▪️ आंखों की रोशनी मजबूत होती है
▪️ दिल और लिवर स्वस्थ रहते हैं
▪️ शरीर की कमजोरी दूर होती है

आँवला लेने का सही तरीका:...

✔️ सुबह खाली पेट 1 ताजा आँवला चबाकर करें
✔️ या 20–30 ml आँवले का रस गुनगुने पानी के साथ पिएँ
✔️ चाहें तो शहद मिलाकर भी सेवन कर सकते हैं

💡 सिर्फ 30 दिन लगातार आँवला खाने से आप खुद फर्क महसूस करेंगे। न बार-बार बीमार पड़ेंगे, न कमजोरी रहेगी और न ही थकान हावी होगी।

⚠️ जरूरी सलाह:
अगर आप किसी गंभीर बीमारी से पीड़ित हैं, गर्भवती हैं या कोई नियमित दवा लेते हैं, तो उपयोग से पहले योग्य आयुर्वेदाचार्य की सलाह जरूर लें।

01/12/2025

देसी चाय (मसाला चाय) के कई स्वास्थ्य लाभ हैं, जिनमें एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर होना, पाचन में सुधार, प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करना और तनाव कम करना शामिल है। यह हृदय स्वास्थ्य को बढ़ावा देने, सूजन को कम करने और वजन घटाने में भी मदद कर सकती है।

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27/09/2025

गठिया, जोड़ो के दर्द का आयुर्वेदिक उपचार

06/09/2025

🌿 *दाद (फंगल इंफेक्शन) का आयुर्वेदिक समाधान* 🌿

🌿 दाद क्या है?
दाद एक प्रकार का त्वचा रोग है, जिसे आयुर्वेद में कुष्ठ रोग की श्रेणी में माना गया है। यह त्वचा पर लाल, गोलाकार चकत्तों के रूप में फैलता है जिनमें खुजली, जलन और कभी-कभी पपड़ी भी बनती है। कारण – अस्वच्छता, पसीना आना और गंदगी, दूषित आहार, अत्यधिक खट्टा, मीठा व तैलीय भोजन,
धूल-मिट्टी, संक्रमण, कमजोर प्रतिरोधक क्षमता, अधिक तनाव और असंयमित दिनचर्या।

🌿औषधि योग (दाद नाशक चूर्ण)
नीम पत्तों का चूर्ण
25ग्राम
हरिद्रा चूर्ण 25ग्राम
त्रिफला चूर्ण 25ग्राम
खदिर चूर्ण 25 ग्राम
मंजीष्ठा चूर्ण 25 ग्राम

सभी को मिलाकर बारीक चूर्ण बना लें।

2–3 ग्राम चूर्ण सुबह-शाम गुनगुने जल के साथ लें।

✅ यह चूर्ण रक्त को शुद्ध करता है, त्वचा रोगों को दूर करता है और दाद-खुजली को जड़ से मिटाता है।

🌿 सहायक औषधि
☘️ *पंचतिक्त घृत गुग्गुलु* 2–2 गोली दिन में दो बार
☘️ *खदिरारिष्ट* 15–20मल बराबर जल के साथ, दिन में 2 बार
☘️ *नीम घन वटी* 1–1 गोली दिन में दो बार
☘️ *मंजीष्ठा चूर्ण* 2 ग्राम शहद के साथ, दिन में 2 बार

🌿बाहरी उपाय
☘️ नीम के पत्तों को उबालकर उस पानी से स्नान करें
☘️हल्दी और सरसों के तेल का लेप दाद वाली जगह पर लगाएँ
☘️ नारियल तेल में कपूर मिलाकर प्रभावित स्थान पर दिन में 2–3 बार लगाएँ

🚫 परहेज
❌ तैलीय, मसालेदार और फास्ट फूड
❌ बहुत अधिक खट्टा, दही व अचार
❌ गंदगी और पसीने से भरे कपड़े पहनना
❌ खुजली वाली जगह पर नाखून न चलाएँ

✅ जीवनशैली सुझाव
✔ प्रतिदिन स्नान करें और शरीर को स्वच्छ रखें
✔ ढीले व सूती कपड़े पहनें
✔ अधिक पानी पिएँ और रक्त शुद्ध करने वाले फल-सब्ज़ियाँ खाएँ (जैसे – गाजर, खीरा, नींबू)
✔ प्राणायाम और ध्यान से मानसिक तनाव कम करें

🌿 नियमित 2–3 माह तक आयुर्वेदिक औषधि और उचित आहार-विहार से दाद की समस्या जड़ से समाप्त हो जाती है और त्वचा स्वस्थ व साफ बनी रहती है।

31/07/2025

*हर माँ अपने व अपने बहन बेटियों को जीवन मे ये कुछ आदत डालवा दें जीवन मे कभी भी गर्भाशय व मासिकधर्म का रोग नहीं होगा*

*मासिकधर्म के दिनों मे भी व अभी भी जब तक मासिक धर्म न आये तब तक एक कप पानी मे आधा चम्मच घी मिलाकर जरूर पियें*

*प्रतिदिन सुबह एक लीटर पानी मे एक चम्मच अजवायन 10 लौंग कुटकर खूब उबालकर इस पतीले को बाल्टी मे रख उस बाल्टी के किनारे तौलिया लपेटकर उसपर 10 मिनट बैठ कर गुप्तानगो को भाप दें*

*बाजारू प्लास्टिक युक्त पैड का प्रयोग न कर नारी सुरक्षा सैनेट्री नैपकिन का उपयोग करें, जब तक मासिकधर्म नहीं आता तब तक भी प्रतिदिन सुबह से रात तक ,रात से सुबह तक इस पैड के नीले हरे रंग के हिस्से पर 2 3 चम्मच पानी डालकर गिलाकर कर पहनें*

*कभी भी मासिकधर्म को आगे पीछे करने वाले अप्रकृतिक औषधियों का सेव न करें*

*शाम को पेडू (राइट ओवेरी गर्भाशय लेफ्ट ओवेरी ) की 3 मिनट मे अरंड तेल से मसाज करें (राइट ओवेरी गर्भाशय लेफ्ट ओवेरी ) को 3 3 मिनट गरम पानी की बोतल से सिकाई करें*

*आज से 15 दिन सुबह अलसी के बीज का आधा चम्मच पानी से , शाम को कद्दू के बीज , 16 वें दिन से सुबह तिल व शाम को सूरजमुखी के बीज का सेवन करें*

👌👌 *हजारों बहनो द्वारा आजमाया हुया कारगर उपाय मेथी अजवायन किलौंजी कालातिल सौंठ मूली के बीज गाजर के बीज बथुआ के बीज जो जो उपलब्ध हो जाये आसानी से उन सभी को लेकर बराबर मात्रा में लेकर पाउडर बना ले व इस पाउडर का एक से दो चम्मच एक गिलास पानी में इतना उबाले की पानी चौथाई रहे व गुड़ मिलाकर सुबह शाम पिये इसे तब तक अपनाना है जब तक मासिकधर्म आ न जाए व मासिक धर्म आने के बाद एक दो दिन तक सेवन करना है इस उपाय से वर्षो से रुका मासिकधर्म भी नियमित हो जाता है व मासिकधर्म के समय गर्म पानी मे घी मिलाकर जरूर पीये मासिकधर्म के समय शारीरिक सभी प्रकार के दर्द से मुक्ति हेतु* *इस उपाय को अपनाकर अनेकों बहनों ने अपने मोटापे व कब्ज गैस शारीरिक दर्द जैसी समस्यायों से भी मुक्त हुई है*👌👌

या

*आधा आधा चम्मच सौफ हाउबेर को एक गिलास पानी मे चौथाई रहने तक उबालकर छानकर 2 चम्मच वजूरी शर्बत मिलाकर पिलाएं सुबह व शाम*

या

*आधा आधा चम्मच मुरमुकी (बीजाबोल) व हाउबेर को एक गिलास पानी मे चौथाई रहने तक उबालकर छानकर 4 चम्मच वजूरी शर्बत मिलाकर पिलाएं सुबह व शाम पीने से वो रुका मसिकधर्म खुलकर आ जाता है जो किसी दवा औषधि से नहीं आ रहा हो*

वैद्य मनदीप कौर
नामधारी देसी दवाखाना एंड योग सेंटर
रतिया
6283021266

27/07/2025

*अमृतधारा - एक दिव्य औषधि*

अमृतधारा को घर में बनाने का पूरा फार्मूला अमृतधारा घर का वैद्य यह एक ऐसी दिव्य औषधि है जो हर घर मे अवश्य होनी चाहिये। जो बच्चे से लेकर बूढ़े तक काम आती है।

आयुर्वेदिक घरेलू औषधियों में अमृतधारा का अपना विशेष स्थान हैं। साधारण सी दिखने वाली औषधि रोगग्रस्तों के लिए वरदान है।

अमृतधारा ऐसी हर्बल आयुर्वेदिक दवा है जो जीवन रक्षक है. हालांकि ये बाजार में भी मौजूद है लेकिन इसे आसानी से घर पर बनाया जा सकता है.

अमृतधारा अमृत के समान है। यह अनेक बीमारियों की अनुभूत घरेलू दवा है। इसे आयुर्वेदिक घरेलू औषधियों में अपना विशेष स्थान प्राप्त हैं। साधारण सी दिखने वाली यह औषधि रोगियों के लिए वरदान है। यह औषधि शरीर में पहुंचते ही इतनी जल्दी असर दिखाती है कि रोगी का रोग दूर होकर राहत मिलती है। यह अनेकों बीमारियों की अनुभूत घरेलू दवा है। इसकी मुख्य विशेषता यही है कि इसका शरीर पर कोई विषाक्त प्रभाव नहीं पड़ता।

#अमृतधारा_क्या_है ?

*अमृत धारा आयुर्वेद की एक बहुत ही जानी - मानी औषधि है जो कई बीमारियों को आसानी से उपचार कर देती है । बदलते मौसम , गर्मी की तपन , लु , धूल भरी हवाओं , खान - पान में गड़बड़ी के कारण सिरदर्द , उल्टी , अपच , हैजा , दस्त , बुखार , शरीर में दर्द , अजीर्ण जैसे रोग घेर लेते हैं । ऐसे में आयुर्वेदिक औषधि अमृतधारा इन रोगों में रामबाण की तरह सहायक हो सकती है । इस दवा की दो - चार बूढे एक कप सादे पानी में डालकर पीने मात्र से ही तुरन्त लाभ मिलता है । सिरदर्द हो , जहरीला ततैया काट ले तो इसे लगाते मात्र से ठीक हो जाता है । गले के दर्द व सूजन में गरारे करने पर तुरंत लाभ मिलता है । यह दवा पूरे परिवार के लिए लाभदायक है क्योंकि यह पूर्ण प्राकृतिक हैं ।*

#अमृतधारा_कैसे_बनती_है ?
1) पुदिना सत्व 500 ग्राम
2) अजवायन सत्व 500 ग्राम
3) भीमसेनी कापुर। 500 ग्राम

यह तीन चीजे आप पंसारी (जड़ी बूटी वाला दुकानदार ) से अलग अलग लाये
किसी कांच की बड़े मुंह वाली लेकर उसमे ये तीनो एकत्र डाल दीजिये।
कुछ देर में ही उसका पानी जैसा बन जायेगा और यही है अमृतधारा इसे 1 ग्लास पानी मे सिर्फ 4 बूंद डालना है।

#अमृतधारा_के_फायदे :-

*1 - अमृतधारा कई बीमारियों में दी जाती हैं , जैसे बदहजमी , हैजा और सिर - दर्द ।

*2 - #बदहजमी - थोड़े से पानीमें तीन - चार बूंद अमृतधारा की डालकर पिलाने से बदहजमी , पेटदर्द , दस्त , उलटी ठीक हो जाती है । चक्कर आने भी ठीक हो जाते हैं ।

*3 - #हैजा - एक चम्मच प्याजके रसमें दो बूंद अमृतधारा डालकर पीने से हैजा में फायदा होता है।

*4 . #सिरदर्द - अमृतधाराकी दो बूंद ललाट और कान के आस - पास मसलने से सिरदर्द को फायदा होता है।

*5 - #छाती_का_दर्द - मीठे तेल में अमृतधारा मिलाकर छाती पर मालिश करने से छातीका दर्द ठीक हो जाता है।

*6 - #जुकाम - इसे सूंघने से सांस खुलकर आता है तथा जुकाम ठीक हो जाता है।

*7 - #मुह_के_छाले - थोडे से पानीमें एक - दो बूद अमृतधारा डालकर छालों पर लगानेसे फायदा होता है।

*8- #दांत_दर्द - अमृतधारा की 2 बून्द रुई के सहारे रखने से दन्त शूल नस्ट होता है।

*9- #खाँसी_दमा_क्षयरोग :- 4 5 बून्द गुनगुने पानी में सुबह शाम पीने से नस्ट होता है*

*10- #हृदय_रोग- आंवले के मुरब्बे पर 2 3 बून्द डालकर खाने से*

*11- #पेट_दर्द- बताशे पर 2 बून्द अमृतधारा डालकर खाने से उदर शूल नस्ट होता है*

*12- #मन्दाग्नि-भोजन के बाद 2 3 बून्द सादे पानी में मिलाकर पीने से मन्दाग्नि दूर होती है*

*13- #कमजोरी- 10 ग्राम देशी गाय के मख्खन 5 ग्राम शहद व 2 3 बून्द अमृतधारा सुबह शाम सेवन से कमजोरी दूर होती है*

*14- #हिचकी- 2 3 बून्द सीधे जीभ पर लेने के बाद आधे घण्टे तक कुछ भी सेवन न करने से हिचकी नस्ट हो जाती है*

*15- #खुजली-10 ग्राम निम तेल में 5 बून्द अमृतधारा मिलाकर लगाने से खुजली नस्ट हो जाती है*

*16 - #मधुमक्खी_के_काटने_पर - ततैया , बिच्छू, भंवरा या मधुमक्खी के काटने की जगहपर अमृतधारा मसलने से दर्द में राहत मिलती हैं ।*

*17 - #बिवाई - दस ग्राम वैसलीनमें चार बूंद अमृतधार मिलाकर , शरीर के हर तरह दर्दपर मालिश करने दर्द में फायदा होता है । फटी बिवाई और फटे होंठों पर लगानेसे दर्द ठीक हो जाता है तथा फटी चमडी जुड़ जाती है ।*

*18 - #यकृत_की_वृद्धि - अमृतधारा को सरसों के चौगुने तेल में मिलाकर जिगर - तिल्ली पर मालिश करने से यकृत की वृद्धि दूर होती है ।*

* #अमृतधारा_के_नुकसान ( दुष्प्रभाव ) : अधिक मात्रा में लेने पर दस्त का कारण बन सकता है । -कुछ लोगों को इसके उपयोग के कारण चक्कर आ सकते है । सावधानियां पयोग करने से पहले चिकित्सक की सलाह आवश्यक है

अपने शरीर को किसी भी प्रकार की बीमारी से मुक्त करने के लिए आयुर्वेदिक उपचार अपनाएं।

#स्वस्थ रहना है तो भारतीय चिकित्सा पद्धति को अपनाना ही होगा अन्यथा एक बार एलोपैथी चिकित्सा के चक्कर में फंसे तो बिमारियों के जाल से निकलना मुश्किल होगा
अमृतधारा आप हमारे केंद्र से भी मंगवा सकते हैं।

नामधारी देसी दवाखाना
रतिया
6283021266

अगर आपके बच्चे की हाइट कम रह गई है तो आप भी जरूर इस्तेमाल करे बौना नाशक पाउडर
12/07/2025

अगर आपके बच्चे की हाइट कम रह गई है तो आप भी जरूर इस्तेमाल करे बौना नाशक पाउडर

07/07/2025

कमरदर्द, जोड़ो का दर्द, खून की कमी, शारिरिक कमजोरी का घरेलू उपाय!
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सुबह खाली पेट नीचे बताये गए मिश्रण में से चार दाने किशमिश खाना स्वास्थ के लिए बहुत फायदेमंद होता है क्योंकि किशमिश में बहुत ऐसे तत्व होते है जो हमारे शरीर के लिए बहुत गुणकारी होते हैं शायद आप जानते होंगे की किशमिश के सेवन से रक्त, कमज़ोरी आदि तथा ओज की मात्रा बढ़ती है जो कि आपकी सेहत के लिए काफी फायदेमंद होती है।

किशमिश में भरपूर मात्रा में आयरन, पोटेशियम, कैल्शियम, मैग्नीशियम और फाइबर पाया जाता है। साथ ही इसमें दूध में मौजूद हर तत्व पाया जाता है। आज हम आपको एक ऐसा नुस्खा बताने जा रहे है जिसका सेवन करने से शारीरिक शक्ति के साथ कमर दर्द, जोड़ों के दर्द, खून की कमी को दूर करने में भरपूर मददगार है।

आवश्यक सामग्री

किशमिश 100 ग्राम,
शहद 100 ग्राम और
मिश्रण बनाने की विधि

किसी बर्तन में शहद और किशमिश को डालकर इस तरह हिलाएं की मधु (शहद) और किशमिश में अच्छी तरह भीग जाय और फिर इस मिश्रण को एक काँच के जार में कार्क या ढ़क्कन लगाकर दो दिन के लिए छोड़ दे। दो दिन बाद आपकी चमत्कारी औषधि तैयार है।

सेवन का तरीका और इस मिश्रण के फायदे

अब आप इसमें से जब भी किशमिश को निकाले थोडा हिला ले ताकि आपस में सभी मिल जाय और चार दाने किशमिश निकालकर सुबह खाली पेट रोजाना सेवन करें इसके लगातार सेवन करने से शारीरिक शक्ति बढती है, अगर कमर दर्द की शिकायत हो तो ठीक हो जाता है खून की कमी और जोड़ों के दर्द आदि दूर कर शारीरिक एनर्जी मिलती है।

शरीर को शक्तिशाली बनाना :

सुबह के समय लगभग 25 से 30 दाने किशमिश को गर्म पानी से धोकर साफ कर लें और फिर इसे कच्चे दूध में डाल दें। आधे या एक घंटे बाद किशमिशों को दूध के साथ गर्म करके खाएं और ऊपर से दूध पी लें। इससे शरीर में खून बढ़ता है, ठंडक दूर होती है, पुरानी बीमारी, अधिक कमजोरी और बदहजमी दूर होती है।

किशमिश के 7 अन्य फायदे :

इम्यूनिटी : किशमिश में वे सभी पोषक तत्व पाए जाते हैं जो इम्यूनिटी बढ़ाने में सहायक होते हैं। ठण्ड में प्रतिदिन इसका सेवन करने से बैक्टीरिया और इंफेक्शन (संक्रमण) से लड़ने में सहायता मिलती है।

एनीमिया : किशमिश में आयरन प्रचुर मात्रा में पाया जाता है। प्रतिदिन पानी में भीगे हुए किशमिश खाने से शरीर में खून बढ़ता है और इस प्रकार एनीमिया से बचाव होता है।

उर्जा : किशमिश में उपस्थित फ्रक्टोस और ग्लूकोज़ बहुत अधिक मात्रा में उर्जा प्रदान करते हैं। अत: सीमित मात्रा में इसका सेवन करने से कमजोरी नहीं आती और वज़न भी बढ़ता है।

पोषक तत्व : किशमिश खाने से ब्लड बनता है, वायु, पित्त और कफ दोष दूर होता है और यह हृदय के लिये बहुत लाभकारी होती है। किशमिश ऊर्जा और अन्य आवश्यक पोषक तत्वों का एक समृद्ध स्रोत हैं।

कब्ज : किशमिश खाने से कब्ज के मरीजों को आराम मिलता है। अगर आपके घर में किसी को कब्ज है तो उसे किशमिश जरूर खिलाये।

वजन बढ़ाए : वजन बढ़ाने के लिए भी किशमिश का सेवन किया जाता है. उम्र के हिसाब से अगर आपका वजन कम है तो किशमिश खाये जल्दी ही आपका वजन बढ़ने लगेगा।

खून की कमी : शरीर में खून की कमी को दूर करने के लिए भी किशमिश खायी जाती है. किशमिश में विटामिन बी काम्प्लेक्स पाया जाता है तो शरीर में खून की मात्रा को बढ़ाता है।

18/06/2025

*हाथ से कूट कर तैयार किया गया त्रिफला के लाभ एवं प्रयोग*

त्रिफला अर्थात हरड़,बहेड़ा एवं आंवला का विशेष मिश्रण।
समस्त आयुर्वेदिक ग्रंथों के अनुसार जो-जो लाभ माता के स्तनपान से हमे बचपन में मिलता है वही लाभ हमे हरड़ के सेवन से मिलता है।
बहेड़ा भी गुणों का भंडार है।
हमारे चिकित्सक वैज्ञानिकों ने एवं ग्रंथों ने आंवला को फलो का राजा बताया है। आंवला की व्याख्या सूरज को दीपक दिखना जैसा है।

त्रिफला दीपन पाचन में सुधार, कब्ज से राहत दिलाता है। वजन घटाने, और आंखों के स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद है।
यह शरीर से अतिरिक्त वसा और विषाक्त पदार्थों को निकालने में मदद करता है, जिससे वजन कम करने में सहायता मिलती है।
त्रिफला आंखों की रोशनी में सुधार करने और विभिन्न नेत्र रोगों से बचाता है।
त्रिफला में एंटीऑक्सीडेंट और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं, जो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में मदद करते हैं।
त्रिफला मधुमेह, मूत्र संबंधी समस्याओं, और त्वचा रोगों में भी लाभकारी है।

त्रिफला का उपयोग:
त्रिफला का उपयोग विभिन्न तरीकों से किया जा सकता है, जैसे:
त्रिफला चूर्ण को गुण गुना पानी, शहद, सेंधा या काला नमक एवं घी के साथ मिलाकर लिया जा सकता है।
त्रिफला को पानी में उबालकर काढ़ा बनाकर भी पिया जा सकता है।
त्रिफला का रस:
त्रिफला का रस निकालकर भी पिया जा सकता है।
प्रयोग:-
गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं को त्रिफला का सेवन वैद्य के निगरानी में करना चाहिए ।
जिन लोगों को दस्त या पेट खराब है, उन्हें त्रिफला का सेवन नहीं करना चाहिए। त्रिफला रेचक एवं पोषक प्रदान करता है।

निष्कर्ष:
त्रिफला एक शक्तिशाली आयुर्वेदिक मिश्रण है जो कई स्वास्थ्य लाभों के लिए जाना जाता है। इसका नियमित सेवन पाचन में सुधार, वजन घटाने, और आंखों के स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद हो सकता है।

आपकी बहन बेटी मनदीप कौर
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