05/05/2026
जीवन की रफ्तार एकदम अपने सुनियोजित रास्ते पर होती है, आप और हम अक्सर तैयारियां करते हैं , योजनायें बनाते हैं ; ऐसा करेंगे , वैसा करेंगे फिर ऐसा होगा , फिर ए होगा | कई बार हम लोग प्रकृती से गच्चा खा जाते हैं , बेबस और असहाय से नजर आते हैं |
गोमती मुझसे करीब 3 साल छोटा था | हमारा बचपन खासकर गर्मियों का साथ मे बीता था | बचपन से ही बहुत शांत था| गांव मे आम ताकने का जो रिवाज था उसमे सभी बच्चे अपना आम ताकने और दूसरे का पीटने की जुगाड मे रहते थे , रात मे भी कई बार आम चोरी की जाती थी , मै खुद कई बार इन सब मे शामिल रहता पर कभी भी गोमती इन मे सामिल नही था |
उसका एक आम का पेड था "सिन्दुरा " नाम का , वो बहुत बड़ा स्वादिष्ट और सिन्दूरी रंग मे फलता था | उसके बब्बा (जमादार ) जब आम ताकते तो चिडियों और गिलहरियों के लिये भी हिम्मत ना होती आम तक पहुचने की , पर जब हम गोमती से आम मांगते तो वो जल्दी ही हमारी अनुनय विनय स्वीकार कर लेता |
पिछले 1 साल से वो हमारे साथ परिवार की तरह रहता था , बच्चे भी उसे के साथ घूले मिले रहते, वो उनको स्कूल लाता ले जाता और हम बेफिक्र | कुछ भी मंगाना हो हमेशा हाजिर | परिवार का एक बहुत ज़रूरी हिस्सा और मैडम का सारथी | कहीं जाओ कोई सवाल नही , कोई अलग से ड़ीमांड नही |
गोमती हमारे पास से 8 बजे घर गया , 12 बजे खबर आई गोमती नही रहा , हमे यकीन नही हुआ ...हम रातभर खुद को और बीनू को समझा नही सके , उसका 12 साल का बेटा चितकार उठा , उसकी मा बदहवास सी हो गई , उसकी पत्नी चीखने लगी | मेरे पास आंसुओं के सिवा कोई शब्द ना थे , एक ज़िन्दागी अचानक खत्म हुई थी जैसे कोई बरगद गिरा हो और उसपर निवासरत चिडियों का शोर उसे उठाने के विलाप कर रहा हो | पर बरगद अब गिर चुका था , कभी ना उठने के लिये |
आज मेरा जन्मदिन है और बिडंबना देखिये आज गोमती की तेरवीं है , ए कैसा रिवाज है एक माँ ज़िसके मुह मे एक निवाला नही जा रहा वही बैठकर लोग रसगुल्ला खाना चाह रहे हैं |
मेरे दोस्त तुम हमेशा हमारे दिल मे रहोगे , और तुम्हारे परिवार के लिये जो भी मुझसे हो सकेगा मै करूँगा🙏🙏🙏🙏,
विनम्र श्रधांजली 🙏🙏