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एम्स ऋषिकेश आई बैंक ने पार किया 1246 नेत्रदान का आंकड़ा कई दृष्टिबाधितों को मिलेगी नई रोशनीबीते दिवस दिवंगत सुरेंद्रवती,...
13/04/2026

एम्स ऋषिकेश आई बैंक ने पार किया 1246 नेत्रदान का आंकड़ा
कई दृष्टिबाधितों को मिलेगी नई रोशनी

बीते दिवस दिवंगत सुरेंद्रवती, सुदेश कुमारी एवं राहुल पंवार के परिजनों ने उनके प्रियजनों के निधन के उपरांत उनकी आंखें दान कर मानवता की मिसाल पेश की। इन आई डोनेशन के साथ ही अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), ऋषिकेश के आई बैंक में अब तक नेत्रदान का आंकड़ा 1246 हो गया है। इस नेक पहल से छह से आठ दृष्टिबाधित व्यक्तियों को पुनः दृष्टि मिलने का मार्ग प्रशस्त हुआ है।

एम्स की कार्यकारी निदेशक प्रोफेसर (डॉ.) मीनू सिंह ने इस पुनीत कार्य के लिए दानदाता परिवारों की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे प्रेरणादायक कदम समाज में नेत्रदान के प्रति जागरूकता बढ़ाते हैं और अन्य लोगों को भी इस दिशा में आगे आने के लिए प्रेरित करते हैं। उन्होंने इस उपलब्धि के लिए ऋषिकेश आई बैंक, एम्स की टीम को भी बधाई दी।

एम्स ऋषिकेश के नेत्र रोग विभागाध्यक्ष प्रोफेसर (डॉक्टर) संजीव कुमार मित्तल ने बताया कि सुरेंद्रवती (85 वर्ष, निवासी उग्रसेन नगर) के पुत्र अनुराग भारद्वाज, सुदेश कुमारी (79 वर्ष, निवासी गंगा नगर) के पुत्र राजेश जुनेजा तथा राहुल पंवार (29 वर्ष, निवासी रायवाला) के भाई विक्रम सिंह ने नेत्रदान की प्रक्रिया में सक्रिय सहयोग किया।

सभी परिवारों ने एम्स आई बैंक के साथ समन्वय स्थापित कर यह कार्य सफलतापूर्वक संपन्न कराया।

उन्होंने यह भी बताया कि हर आयु वर्ग का व्यक्ति नेत्रदान कर सकता है, चाहे वह चश्मा पहनता हो या उसने मोतियाबिंद की सर्जरी कराई हो।
प्रो. मित्तल के मुताबिक नेत्रदान की प्रक्रिया लगभग 15 मिनट की सरल प्रक्रिया में संपन्न होती है, जिसमें कॉर्निया को सुरक्षित रूप से निकालकर संरक्षित किया जाता है।

आई बैंक की चिकित्सा निदेशक डॉ. नीति गुप्ता के अनुसार प्राप्त कुल 1246 कॉर्निया में से 61% ऋषिकेश, 22% हरिद्वार, 3% देहरादून, 1% रुड़की, 8% उत्तराखंड के अन्य क्षेत्रों तथा 5% देश के अन्य शहरों से प्राप्त हुए हैं।

निदेशक प्रोफेसर (डॉ.) मीनू सिंह ने समाज में नेत्रदान को बढ़ावा देने में विभिन्न संस्थाओं एवं समाजसेवियों के योगदान की विशेषरूप से सराहना की। इनमें सुप्रयास कल्याण संस्थान के डॉ. सत्या नारायण एवं डॉ. शिवम शर्मा, लायंस क्लब ऋषिकेश के गोपाल नारंग, देह दान समिति, हरिद्वार के सुभाष चंद्र, मुस्कान फाउंडेशन की नेहा मलिक तथा मारवाड़ी महिला सम्मेलन (ऋषिकेश शाखा) की नूतन अग्रवाल शामिल हैं।

इसके अतिरिक्त समाजसेवी अनिल कक्कड़, संगीता आनंद (ऋषिकेश), अनिल अरोड़ा, समीर चावला, अशोक कालरा (हरिद्वार), विवेक अग्रवाल, हरदीप सिंह (देहरादून) तथा सीमा जैन (रुड़की) द्वारा नेत्रदान जागरूकता में किए गए प्रयासों को भी सराहा गया।

इस उपलब्धि के पीछे ऋषिकेश आई बैंक, एम्स की समर्पित टीम का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा है, जो 24×7×365 निरंतर सेवाएं प्रदान कर रही है। टीम में आई बैंक मैनेजर महिपाल चौहान तथा परामर्शदाता सह तकनीशियन बिंदिया भाटिया, संदीप गुसाईं, पवन सिंह एवं आलोक सिंह का योगदान सराहनीय रहा।

एम्स ऋषिकेश आई बैंक की यह उपलब्धि न केवल संस्थान के लिए गर्व का विषय है, बल्कि समाज में नेत्रदान के प्रति जनजागरूकता और सहभागिता बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम भी है,

13/04/2026

एम्स ऋषिकेश आई बैंक ने पार किया 1246 नेत्रदान का आंकड़ा

कई दृष्टिबाधितों को मिलेगी नई रोशनी

ऋषिकेश (आशीष कुकरेती) 12 अप्रैल बीते दिवस दिवंगत सुरेंद्रवती, सुदेश कुमारी एवं राहुल पंवार के परिजनों ने उनके प्रियजनों के निधन के उपरांत उनकी आंखें दान कर मानवता की मिसाल पेश की। इन आई डोनेशन के साथ ही अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), ऋषिकेश के आई बैंक में अब तक नेत्रदान का आंकड़ा 1246 हो गया है। इस नेक पहल से छह से आठ दृष्टिबाधित व्यक्तियों को पुनः दृष्टि मिलने का मार्ग प्रशस्त हुआ है।

एम्स की कार्यकारी निदेशक प्रोफेसर (डॉ.) मीनू सिंह ने इस पुनीत कार्य के लिए दानदाता परिवारों की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे प्रेरणादायक कदम समाज में नेत्रदान के प्रति जागरूकता बढ़ाते हैं और अन्य लोगों को भी इस दिशा में आगे आने के लिए प्रेरित करते हैं। उन्होंने इस उपलब्धि के लिए ऋषिकेश आई बैंक, एम्स की टीम को भी बधाई दी।

एम्स ऋषिकेश के नेत्र रोग विभागाध्यक्ष प्रोफेसर (डॉक्टर) संजीव कुमार मित्तल ने बताया कि सुरेंद्रवती (85 वर्ष, निवासी उग्रसेन नगर) के पुत्र अनुराग भारद्वाज, सुदेश कुमारी (79 वर्ष, निवासी गंगा नगर) के पुत्र राजेश जुनेजा तथा राहुल पंवार (29 वर्ष, निवासी रायवाला) के भाई विक्रम सिंह ने नेत्रदान की प्रक्रिया में सक्रिय सहयोग किया।

सभी परिवारों ने एम्स आई बैंक के साथ समन्वय स्थापित कर यह कार्य सफलतापूर्वक संपन्न कराया।

उन्होंने यह भी बताया कि हर आयु वर्ग का व्यक्ति नेत्रदान कर सकता है, चाहे वह चश्मा पहनता हो या उसने मोतियाबिंद की सर्जरी कराई हो।
प्रो. मित्तल के मुताबिक नेत्रदान की प्रक्रिया लगभग 15 मिनट की सरल प्रक्रिया में संपन्न होती है, जिसमें कॉर्निया को सुरक्षित रूप से निकालकर संरक्षित किया जाता है।

आई बैंक की चिकित्सा निदेशक डॉ. नीति गुप्ता के अनुसार प्राप्त कुल 1246 कॉर्निया में से 61% ऋषिकेश, 22% हरिद्वार, 3% देहरादून, 1% रुड़की, 8% उत्तराखंड के अन्य क्षेत्रों तथा 5% देश के अन्य शहरों से प्राप्त हुए हैं।

निदेशक प्रोफेसर (डॉ.) मीनू सिंह ने समाज में नेत्रदान को बढ़ावा देने में विभिन्न संस्थाओं एवं समाजसेवियों के योगदान की विशेषरूप से सराहना की। इनमें सुप्रयास कल्याण संस्थान के डॉ. सत्या नारायण एवं डॉ. शिवम शर्मा, लायंस क्लब ऋषिकेश के गोपाल नारंग, देह दान समिति, हरिद्वार के सुभाष चंद्र, मुस्कान फाउंडेशन की नेहा मलिक तथा मारवाड़ी महिला सम्मेलन (ऋषिकेश शाखा) की नूतन अग्रवाल शामिल हैं।

इसके अतिरिक्त समाजसेवी अनिल कक्कड़, संगीता आनंद (ऋषिकेश), अनिल अरोड़ा, समीर चावला, अशोक कालरा (हरिद्वार), विवेक अग्रवाल, हरदीप सिंह (देहरादून) तथा सीमा जैन (रुड़की) द्वारा नेत्रदान जागरूकता में किए गए प्रयासों को भी सराहा गया।

इस उपलब्धि के पीछे ऋषिकेश आई बैंक, एम्स की समर्पित टीम का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा है, जो 24×7×365 निरंतर सेवाएं प्रदान कर रही है। टीम में आई बैंक मैनेजर महिपाल चौहान तथा परामर्शदाता सह तकनीशियन बिंदिया भाटिया, संदीप गुसाईं, पवन सिंह एवं आलोक सिंह का योगदान सराहनीय रहा।

एम्स ऋषिकेश आई बैंक की यह उपलब्धि न केवल संस्थान के लिए गर्व का विषय है, बल्कि समाज में नेत्रदान के प्रति जनजागरूकता और सहभागिता बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम भी है।

ग्लूकोमा (नेत्र जनित काला मोतियाबिंद) : पहचान एवं निदानअखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान, ऋषिकेश के नेत्र रोग विभागाध्यक्...
12/03/2026

ग्लूकोमा (नेत्र जनित काला मोतियाबिंद) : पहचान एवं निदान

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान, ऋषिकेश के नेत्र रोग विभागाध्यक्ष डॉ. संजीव कुमार मित्तल जी ने बताया कि ग्लूकोमा एक गंभीर नेत्र रोग है, जो धीरे-धीरे दृष्टि को स्थायी रूप से प्रभावित कर सकता है। प्रारंभिक अवस्था में इसके लक्षण स्पष्ट नहीं होते, इसलिए इसे अक्सर “साइलेंट विज़न थिफ” भी कहा जाता है।

उन्होंने विशेष रूप से 40 वर्ष से अधिक आयु के लोगों को नियमित नेत्र जांच कराने की सलाह दी। समय पर पहचान, नियमित जांच और उचित उपचार के माध्यम से ग्लूकोमा से होने वाली दृष्टि हानि को काफी हद तक रोका जा सकता है। समाज में जागरूकता बढ़ाना इस रोग की रोकथाम के लिए अत्यंत आवश्यक है।

https://youtu.be/YuQ5v2kokRs?si=HVAQdTVIbrU3DRZw

एम्स ऋषिकेश में 42 वर्षीय रघु पासवान ने अंगदान से 5 को दिया नया जीवनऋषिकेश। मृत्यु को जीवन का अंत कहा गया है, लेकिन विज्...
25/01/2026

एम्स ऋषिकेश में 42 वर्षीय रघु पासवान ने अंगदान से 5 को दिया नया जीवन
ऋषिकेश। मृत्यु को जीवन का अंत कहा गया है, लेकिन विज्ञान ने अब इसे एक नया आयाम भी दे दिया है। 42 वर्षीय रघु पासवान की जिंदगी के मामले में यह बात सच साबित भी हुई है। एम्स ऋषिकेश में ब्रेन डेड घोषित किए जाने के बाद रघु के कैडेवरिक ऑर्गन डोनेशन से देश के तीन बड़े अस्पतालों में भर्ती पांच गंभीर मरीजों को नया जीवन मिलने जा रहा है, जबकि दो दृष्टिहीनों को उनकी आंखों से रोशनी मिलेगी।

मूल रूप से बिहार के रहने वाले और पेशे से राजमिस्त्री रघु पासवान हाल ही में एक दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल हो गए थे। हालत नाजुक होने पर उन्हें एम्स ऋषिकेश में भर्ती कराया गया, जहां इलाज के दौरान वह नॉन-रिवर्सिबल कोमा में चले गए। सभी चिकित्सकीय प्रयासों के बावजूद जब कोई न्यूरोलॉजिकल रिकवरी नहीं हुई, तो विशेषज्ञ डॉक्टरों की समिति ने उन्हें ब्रेन डेड घोषित कर दिया।

एम्स की कार्यकारी निदेशक प्रो. मीनू सिंह के निर्देशन में चिकित्सकों की टीम ने परिजनों से संपर्क कर अंगदान के प्रति काउंसलिंग की। इस काम में ऋषिकेश के मेयर शंभू पासवान ने भी व्यक्तिगत रुचि लेते हुए परिवार को इस मानवीय निर्णय के लिए प्रेरित किया। परिजनों की सहमति के बाद कैडेवरिक ऑर्गन डोनेशन की प्रक्रिया सफलतापूर्वक पूरी की गई।

लिहाजा, कहना होगा, कि रघु पासवान भले ही अब इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन उनके दान किए गए अंगों के जरिए वे कई परिवारों में उम्मीद, रोशनी और जीवन की धड़कन बनकर हमेशा जीवित रहेंगे।

ग्रीन कॉरिडोर बना लाइफलाइन

अंगों को तय समय पर गंतव्य अस्पतालों तक पहुंचाने के लिए उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश और दिल्ली के 9 जिलों की पुलिस के सहयोग से ग्रीन कॉरिडोर बनाया गया। एम्स ऋषिकेश से जौलीग्रांट एयरपोर्ट, फिर दिल्ली और चंडीगढ़ तक विशेष ट्रैफिक व्यवस्था कर अंगों को सुरक्षित पहुंचाया गया।

डॉक्टरों और समन्वय टीम की भूमिका

इस पूरी प्रक्रिया में न्यूरो सर्जन डॉ. रजनीश अरोड़ा, डॉ. संजय अग्रवाल, डॉ. रोहित गुप्ता, डॉ. अंकुर मित्तल, डॉ. करमवीर, डॉ. नीति गुप्ता, डॉ. मोहित धींगरा, डॉ. लोकेश अरोड़ा, डॉ. आशीष भूते और डॉ. आनंद नागर की अहम भूमिका रही। ट्रांसप्लांट कोऑर्डिनेटर देशराज सोलंकी, डीएनएस जीनू जैकब, पीआरओ डॉ. श्रीलोय मोहंती और डीएमएस डॉ. रवि कुमार ने नोटो सहित विभिन्न एजेंसियों के साथ समन्वय कर प्रक्रिया को सफल बनाया।

एम्स ऋषिकेश में दूसरा कैडेवरिक अंगदान

एम्स ऋषिकेश में यह कैडेवरिक ऑर्गन डोनेशन का दूसरा सफल मामला है। इससे पहले 2 अगस्त 2024 को हरियाणा के 25 वर्षीय कांवड़िये के अंगदान से भी कई लोगों को जीवनदान मिला था।

किन्हें मिला जीवनदान

पीजीआई चंडीगढ़ के 3 मरीजों को किडनी, लीवर और पैंक्रियाज

एम्स दिल्ली के 1 मरीज को किडनी

आर्मी हॉस्पिटल (आरआर) दिल्ली के 1 मरीज को हृदय

नेत्रदान के तहत दोनों कॉर्निया एम्स आई बैंक में सुरक्षित, 2 दृष्टिहीनों को मिलेगी रोशनी

दिनांक 02/01/2026 आयोजित नेत्रदान जागरूकता एवं नेत्र जाँच शिविर के अवसर पर श्री स्वामी अजरानंद अंध विद्यालय, हरिद्वार मे...
04/01/2026

दिनांक 02/01/2026 आयोजित नेत्रदान जागरूकता एवं नेत्र जाँच शिविर के अवसर पर श्री स्वामी अजरानंद अंध विद्यालय, हरिद्वार में नेत्रहीन बच्चों के साथ हुआ संवाद अत्यंत प्रेरणादायक रहा।
उनकी सकारात्मक सोच, आत्मविश्वास और सजीव मुस्कान ने सभी को भावविभोर कर दिया।
इस संवाद ने हमें संवेदनशीलता, सेवा और सहयोग के वास्तविक महत्व का बोध कराया।
इस प्रकार के आयोजन समाज में जागरूकता बढ़ाने के साथ-साथ मानवता की भावना को भी सुदृढ़ करते हैं।

डॉ सत्यनारायण शर्मा जी, डॉ शिवम शर्मा जी एवं सम्पूर्ण सुप्रयास टीम, हरिद्वार,आप सभी को **एम्स ऋषिकेश आई बैंक परिवार** की...
11/10/2025

डॉ सत्यनारायण शर्मा जी, डॉ शिवम शर्मा जी एवं सम्पूर्ण सुप्रयास टीम, हरिद्वार,

आप सभी को **एम्स ऋषिकेश आई बैंक परिवार** की ओर से हार्दिक सम्मान और अनंत साधुवाद। आपने समय रहते हमसे संपर्क कर नेत्रदान जैसे परम पुण्य कार्य को सफलतापूर्वक संपन्न किया, यह न केवल आपकी चिकित्सा कौशल की महानता का परिचायक है, बल्कि मानवता की सेवा में आपकी प्रतिबद्धता का भी अद्भुत प्रमाण है।

मैं अपनी टीम के डॉक्टर अनिरुद्ध शर्मा जी एवं कुशल तकनीशियन श्री संदीप जी का भी हृदय से आभार व्यक्त करता हूँ, जिन्होंने शीघ्र और सफलतापूर्वक कॉर्निया रिकवरी कर इस पुण्य कर्म को पूर्णता प्रदान की।

साथ ही, मैं उस पुण्यात्मा पाठक परिवार का भी अत्यंत धन्यवाद और श्रद्धांजलि अर्पित करना चाहता हूँ, जिन्होंने इस दुःखद घड़ी में आगे आकर समाज के लिए एक नई मिसाल कायम की। अपने प्रियजन का नेत्रदान कर, उन्होंने न केवल उसकी आत्मा को अमरता प्रदान की, बल्कि समाज में एक उज्ज्वल संदेश भी फैलाया। ऐसे परोपकारी परिवारों को बारम्बार नमन और कृतज्ञता। 🙏🙏🙏🙏💐💐

**टीम ऋषिकेश आई बैंक सदैव आपकी सेवा में तत्पर है।**

एक बार पुनः आप सभी का दिल से धन्यवाद एवं शुभकामनाएँ।
भगवान आपकी सभी कार्यों में सदैव सफलता और स्वास्थ्य प्रदान करें।

1. नेत्रदान का महत्व:यह दृष्टि-बाधित लोगों को जीवन वापस देता है। एक दानकर्ता दो कॉर्नियल दृष्टि-बाधित व्यक्तियों को दृष्...
26/08/2025

1. नेत्रदान का महत्व:
यह दृष्टि-बाधित लोगों को जीवन वापस देता है।
एक दानकर्ता दो कॉर्नियल दृष्टि-बाधित व्यक्तियों को दृष्टि प्रदान कर सकता है।
2. प्रक्रिया के बारे में जानकारी:
नेत्रदान केवल मृत्यु के बाद ही किया जा सकता है, जीवित रहते नहीं।
यह पूरी आँख का दान नहीं है, बल्कि केवल बाहरी पारदर्शी परत कॉर्निया का दान है।
मृत्यु के 6 घंटे के भीतर कॉर्निया निकाला जाना चाहिए।
3. क्या दान कर सकते हैं:
मोतियाबिंद, निकट/दूर दृष्टि दोष या सामान्य बीमारी वाले व्यक्ति भी नेत्रदान कर सकते हैं।
दान के लिए कॉर्निया के समग्र स्वास्थ्य पर निर्भर करता है।
4. आम भ्रांतियाँ और तथ्य:
भ्रांति: नेत्रदान के बाद चेहरा विकृत हो जाता है। तथ्य: यह सच नहीं है, और प्रक्रिया केवल कॉर्निया पर की जाती है।
भ्रांति: केवल युवा ही नेत्रदान कर सकते हैं। तथ्य: विभिन्न आयु वर्ग के लोगों के कॉर्निया का उपयोग किया जा सकता है।

🌟 **A Vision of Hope – 1100 Corneas Donated!** 🌟With immense pride and gratitude, we celebrate a remarkable milestone — ...
31/07/2025

🌟 **A Vision of Hope – 1100 Corneas Donated!** 🌟

With immense pride and gratitude, we celebrate a remarkable milestone — **Rishikesh Eye Bank has successfully reached 1100 cornea donations!** 👁️💖

This achievement is not just a number — it’s **1100 lives gifted with the light of sight**, and countless families given new hope. Every donor has become a silent hero, proving that even in passing, one can give the most precious gift — the gift of vision.

Let this inspire us all: **"You don’t have to be a doctor to save lives. You just need the will to donate."** 🙌

✅ One decision can restore someone’s world from darkness to light.
✅ One pledge can turn your legacy into a lifelong blessing.

Join the movement. Be someone’s vision.
**Pledge to donate your eyes today.**

Together, let's aim higher, dream bigger, and keep the light of sight alive for all. 💫

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हमें यह बताते हुए खुशी हो रही है कि ऋषिकेश आई बैंक ने 1,000 कॉर्निया का दान सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है! यह उपलब्धि कार्...
25/12/2024

हमें यह बताते हुए खुशी हो रही है कि ऋषिकेश आई बैंक ने 1,000 कॉर्निया का दान सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है! यह उपलब्धि कार्यकारी निदेशक महोदया, हमारे एचओडी सर, चिकित्सा निदेशक महोदया, रेजिडेंट डॉक्टरों, सामाजिक कार्यकर्ता, उत्तराखंड पुलिस, एम्स के सभी सहायक कर्मचारियों, एलवीपीईआई टीम, समर्पित सहयोगियों और अधिकांश लोगों के अटूट समर्थन के कारण ही संभव हुआ है। महत्वपूर्ण रूप से, समर्पित दाता परिवार है। आपका योगदान दृष्टि बहाल कर रहा है और जीवन बदल रहा है। आइए जरूरतमंदों तक आशा और प्रकाश फैलाते हुए इस प्रेरक यात्रा को जारी रखें।

धन्यवाद!🙏🙏💐💐

25/11/2024

25 नवम्बर, 2024,

उत्तराखण्ड क्रांन्ति दल के पूर्व अध्यक्ष दिवंगत त्रिवेन्द्र सिंह पंवार का उनके परिजनों ने मृत्यु उपरांत एम्स ऋषिकेश में नेत्रदान कराया। नेत्रदान के प्रति जागरुक लोगों के इस प्रयास से दो नेत्रहीन लोगों का जीवन रोशन हो सकेगा और वह ईश्वर की बनायी हुई इस दुनिया को देख सकेंगे।

एम्स की कार्यकारी निदेशक प्रोफेसर (डॉ.) मीनू सिंह ने नेत्रदान जैसे महादान के इस पुनीत कार्य के लिए दिवंगत उक्रांद नेता के भाई सम्राट पंवार, यशपाल पंवार व पवन सिंह की सराहना की। उन्होंने कहा कि इससे अन्य लोगों को भी नेत्रदान के संकल्प की प्रेरणा लेनी चाहिए। एम्स ऋषिकेश के नेत्र रोग विभाग के कार्यवाहक विभागाध्यक्ष प्रोफेसर अजय अग्रवाल ने बताया कि त्रिवेन्द्र सिंह पंवार का रविवार की रात सड़क हादसे में असामयिक निधन हो गया। उनके निधन के बाद भाई सम्राट पंवार ने अपने दिवंगत प्रियजन का नेत्रदान कराया। उनके सहयोगी उत्तराखण्ड क्रांति दल की टीम के सदस्यों ने बताया कि दिवंगत पंवार ने जीते जी जन सेवा में बहुत योगदान दिया तथा जाने के बाद भी अपनी आंखों से दो नेत्रहीन लोगों का जीवन रोशन कर गए। एम्स आई बैंक की ओर से बताया गया कि इस नेत्रदान महादान के लिए एम्स पुलिस चौकी प्रभारी श्री बिनेश कुमार, श्री मुकेश जोशी व श्री अशोक कुमार का विशेष योगदान रहा। गौरतलब है कि ऋषिकेश आई बैंक (एम्स) को स्थापना के बाद से अब तक 979 कॉर्निया प्राप्त हुए हैं। जिनमें से अधिकांश कॉर्निया जरुरतमंद लोगों को प्रत्यारोपित किए जा चुके हैं।

39 वें नेत्रदान जागरूकता पखवाड़े के अंतर्गत जागरुकता गतिविधियों को जारी रखते हुए आज नेत्र विज्ञान विभाग द्वारा नेत्रदान ...
06/09/2024

39 वें नेत्रदान जागरूकता पखवाड़े के अंतर्गत जागरुकता गतिविधियों को जारी रखते हुए आज नेत्र विज्ञान विभाग द्वारा नेत्रदान जागरूकता के लिए आस्थापथ पर वॉकथॉन का आयोजन किया गया। रैली में एम्स ऋषिकेश के संकायगण, नर्सिंग समुदाय और रेजिडेंट्स डॉक्टर के साथ-साथ ऋषिकेश के रेड राइडर्स और मॉर्निंग वॉकिंग समूहों ने भाग लिया। रैली को माननीय निदेशक महोदया प्रोफेसर मीनू सिंह ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।

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