23/04/2025
सिद्ध मार्ग | सिद्धा दी योगशाला | सिद्धाश्रम धाम
Healing | Protection | Meditation | Day – 133
"ध्यान वो दीपक है, जो भीतर के अंधेरे को जला देता है।"
आज 133वें दिन हम एक और अंतर्यात्रा पर निकलते हैं —
जहाँ न शोर है, न कोई शंका — सिर्फ मौन की ऊर्जा है।
ध्यान की यही शक्ति है:
जो मन को निर्विचार करती है और आत्मा को ब्रह्म से जोड़ती है।
आज की कथा: "सूरज और दीपक"
एक बार एक दीपक सूर्य से बोला,
"हे सूर्यदेव! आपकी रौशनी के सामने मेरी क्या बिसात?"
सूर्य मुस्कराया और बोला,
"लेकिन जब मैं अस्त हो जाता हूँ, तब तुम्हारा ही प्रकाश अंधकार को हराता है।"
दीपक चुप हो गया — उसे अपनी भूमिका समझ में आ गई।
संदेश:
हर साधक अपने भीतर एक दीपक है।
भले ही वह सूर्य न बने, पर किसी की रात्रि को प्रकाश जरूर दे सकता है।
आज का ध्यान सत्र एक आह्वान है —
– अपने अंदर के दीपक को प्रज्वलित करने का,
– अपनी ऊर्जा को दिशा देने का,
– और उस मौन में उतरने का जहाँ आत्मा नृत्य करती है।
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सिद्धाश्रम चेतना
— आचार्य नरेंद्र
सनातन सप्तर्षि परंपरा के एक जीवित योगी
Siddh Marg | Siddha Di Yogshala | Siddhashram Dham