04/10/2025
क्लीवलैंड की वेस्टर्न रिज़र्व यूनिवर्सिटी के डॉ. विलियम टी. कॉर्लेट ने यह तस्वीर खींची थी। इसमें चेचक (Smallpox) से ठीक हुए एक मरीज को दिखाया गया है। चेचक के दाग हमेशा के लिए रह जाते थे। (तस्वीर लगभग 1900 के आसपास की है।)
चेचक मानव इतिहास की सबसे घातक बीमारियों में से एक थी। सदियों में इसने करोड़ों लोगों की जान ले ली। जो लोग बच जाते थे, उनके चेहरे और शरीर पर गहरे, स्थायी गड्ढेदार निशान रह जाते थे। ये निशान ज़िंदगी भर बीमारी की याद दिलाते रहते थे।
20वीं सदी की शुरुआत तक, मेडिकल रिसर्च और पढ़ाई में फोटोग्राफी का इस्तेमाल बढ़ने लगा था। डॉक्टर कॉर्लेट जैसे चिकित्सक मरीजों की तस्वीरें लेते थे ताकि बीमारी को बेहतर समझ सकें और भावी डॉक्टरों को सिखा सकें। उस समय चेचक का टीकाकरण शुरू तो हो चुका था, लेकिन जहाँ टीकाकरण कम हुआ, वहाँ अब भी इसके प्रकोप देखे जाते थे। चेचक से बचकर निकलने वालों के चेहरे और शरीर पर बने दाग समाज में बदनामी और मानसिक तकलीफ़ का कारण भी बन जाते थे।
लेकिन खास बात यह रही कि सौ साल से भी कम समय में इंसान ने टीके की मदद से चेचक को पूरी तरह मिटा दिया। 1980 में विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने चेचक के खात्मे की आधिकारिक घोषणा की।
इस तस्वीर को केवल एक मरीज की कहानी न मानें, यह इंसानियत की उस बड़ी जीत की भी निशानी है जिसमें विज्ञान ने इतिहास की सबसे खतरनाक बीमारियों में से एक पर हमेशा के लिए विजय पाई — और उन पीढ़ियों की याद भी है जिनके चेहरे पर यह बीमारी अपने दाग छोड़ गई थी।