Homeo Clinic The Neomed

Homeo Clinic The Neomed "The Neomed" is the largest homoeopathy clinics in Rourkela. The clinic aims at reaching to people all over the world.

"The Neomed" extend a helping hand to the needy. Mission is to develop the best world standards with ultra modern facilities. Homeo Clinic "The Neomed" is one of the largest homoeopathy clinics in Rourkela. The clinic aims at reaching homoeopathy to people all over the world. Homeo Clinic "The Neomed" is known to extend a helping hand to the needy and also offer a separate waiting area to celebrity clients and VIPs with complete privacy. Their mission is to develop the best world standards in homoeopathic practise and make them available to their patients. Homeo Clinic "The Neomed" is committed to offering effective, efficient, and ethical homoeopathic treatments for a range of chronic and recurring diseases.

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07/11/2025

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04/03/2023

HEALTH MANTRA: 001.
3 Kilometres of Walking.
3 Litres of Water.
3 Hourly Meals.
------ Dr. Dibanath Neogi ------

25/09/2022
NO VITAMIN SUPPLEMENTS, PLEASE.
05/09/2022

NO VITAMIN SUPPLEMENTS, PLEASE.

None of the multivitamin supplements has proven to prevent heart disease in the general population, but only omega-3 fatty acid supplementation has been found useful in preventing heart attacks in at-risk persons

15/08/2022

ये 10 लक्षण बताते हैं कि आपके शरीर में बढ़ रहा है ब्लड शुगर लेवल, जानिए हाइपरग्लेसेमिया को कंट्रोल करने के उपाय

Hyperglycemia (हाइपरग्लेसेमिया) - डायबिटीज में पैदा होने वाली एक ऐसी स्थिति है, जिसमें ब्लड शुगर लेवल काफी ज्यादा बढ़ जाता है। यह सेहत के लिए नुकसानदेह हो सकता है। जानिए इस स्थिति से कैसे निपटना है।

शरीर में बढ़ रहा है ब्लड शुगर लेवल?
हाइपरग्लेसेमिया को कंट्रोल करने के उपाय:
गलत खानपान की आदत और फिजिकली एक्टिव न होने के कारण डायबिटीज की समस्या बढ़ती जा रही है। डायबिटीज होने के बावजूद जब आप अपने आहार और लाइफस्टाइल में बदलाव नहीं करते, तो यह और भी ज्यादा जोखिम भरा हो सकता है। जिससे हाइपरग्लेसेमिया जैसी स्थिति का सामना करना पड़ सकता है। इस स्थिति में आपका शरीर काफी कम मात्रा में इंसुलिन प्रोड्यूस कर पाता है। जिससे स्वास्थ्य के लिए कई खतरे पैदा हो जाते हैं। इसलिए यह जरूरी है कि आप हाइपरग्लेसेमिया (Hyperglycemia) के कारणों और उसे कंट्रोल करने के उपायों (Tips to control hyperglycemia) के बारे में सब कुछ जानें।

समझिए इंसुलिन की उपोगिता:
इंसुलिन वह हार्मोन है, जो शुगर को ब्लड में ट्रांसफर करता है। यदि शरीर में इंसुलिन की मात्रा कम हो जाए, तो ग्लूकोज और शुगर ब्लड में अच्छी तरह नहीं घुल पाते। जिससे ब्लड शुगर लेवल हाई हो जाता है। यह समस्या ज्यादातर डायबिटीज के मरीजों में तब देखने को मिलती है, जब वे लगातार अपनी सेहत की लापरवाही करते हैं।

हाइपरग्लेसेमिया, यानी कि बॉडी में ब्लड शुगर लेवल बढ़ने पर नजर आने वाले लक्षण।
यदि आपको भी डायबिटीज है, तो ऐसे लक्षण नजर आते ही बिना इंतजार किए डॉक्टर से मिलकर सलाह लें।

ब्लड शुगर लेवल बढ़ने पर नजर आने वाले 10 लक्षण:
1. बिना शारीरिक गतिविधियों में भाग लिए थकान और बेचैनी महसूस होना।

2. सांस लेने में तकलीफ होना और घबराहट महसूस होना।

3. चिड़चिड़ापन महसूस करना।

4. बार-बार पेशाब लगने की समस्या।

5. बहुत छोटे अंतराल पर प्यास लगना।

6. उल्टी जैसा महसूस होते रहना।

7. इंफेक्शन और एलर्जी होना इसके साथ ही इनका लंबे समय तक बना रहना।

8. यूरिनरी इनफेक्शन होना और खुजली होते रहना।

9. आंखों की दृष्टि का कमजोर होना और धुंधलापन नजर आना।

10. अचानक से वजन में गिरावट आना

क्या हैं डायबिटीज में हाइपरग्लेसेमिया होने के कारण:
1. जब आपका शरीर नेचुरल इंसुलिन को प्रभावी तरीके से प्रयोग नहीं कर पाता।

2. आपका शरीर कार्बोहाइड्रेट की मात्रा को बॉडी इंसुलिन बैलेंस नहीं कर पाती। इस कंडीशन में भी हाइपरग्लेसेमिया होने की संभावना बनी रहती है।

3. जब आपकी डायबिटीज मेडिसिन और अन्य इंसुलिन डोज आपके ब्लड शुगर लेवल को नियंत्रित नहीं कर पाते।

4. यदि आपको डायबिटीज है और आप शारीरिक रूप से सक्रिय नहीं हैं, तो यह स्थिति पैदा हो सकती है।

5. इमोशनल और मेंटल स्ट्रेस भी आपकी इस समस्या का कारण बन सकता है।

6. फिजिकल स्ट्रेस जैसे कि कोल्ड एंड कफ, फ्लू, इन्फेक्शन इत्यादि होने से हाइपरग्लेसेमिया की स्थिति पैदा होने की संभावना बनी रहती है।

7. जब आप किसी अन्य हेल्थ कंडीशन को लेकर स्टेरॉइड्स ले रही होती हैं।

8. यदि आप प्रेगनेंट हैं तो जेस्टेशनल डायबिटीज होने से भी यह स्थिति पैदा हो सकती है।

हाइपरग्लेसेमिया से बचने के उपाय:

1. शारीरिक गतिविधियों में भाग लें – खुद को जितना हो सके उतना फिजिकली एक्टिव रखने की कोशिश करें। नियमित रूप से एक्सरसाइज करने की आदत बनाएं और योगा सेशन में भाग ले सकते हैं। यह आपके ब्लड शुगर लेवल को नियंत्रित रखता है, और हाइपरग्लेसेमिया जैसी स्थिति उत्पन्न होने की संभावना को कम कर देता है।

2. खानपान की आदतों को संतुलित रखें – एक उचित खानपान लेना बहुत जरूरी है। साथ ही अपने आहार से जुड़ी जरूरी जानकारी रखने की कोशिश करें। इसके साथ ही डॉक्टर की सलाह से एक डायबिटीज मील प्लान जरूर तैयार करें।

3. हेल्दी वेट मेंटेन करें – ऐसी परिस्थिति से बचने के लिए एक हेल्दी वेट मेंटेन करना बहुत जरूरी है। इसके लिए संतुलित खानपान और शारीरिक रूप से सक्रिय रहना बहुत जरूरी है।

4. धूम्रपान न करें – ब्लड शुगर लेवल को मेंटेन रखने और हाइपरग्लेसेमिया जैसी स्थिति को पैदा होने से रोकने के लिए धूम्रपान को बिल्कुल नजरअंदाज करें। यदि आप स्मोकिंग नहीं करते हैं, तो बहुत अच्छी बात है। परंतु यदि आपको स्मोकिंग की आदत है तो इसे फौरन छोड़ना उचित रहेगा।

5. अल्कोहल की मात्रा सीमित करें – अल्कोहल आपके शरीर में ब्लड शुगर लेवल की मात्रा को बढ़ा देता है। इसके साथ ही यह लो ब्लड शुगर लेवल का भी कारण हो सकता है। इसलिए एक सीमित मात्रा में ही अल्कोहल का सेवन करें। यदि आप इसे पूरी तरह अनदेखा कर सकते हैं, तो यह और भी ज्यादा फायदेमंद रहेगा।

28/07/2022

High Cholesterol के लक्षण दिखते हैं शरीर के इन हिस्सों पर, इस तरह पहचानें कॉलेस्ट्रोल के शुरुआती Warning Signs
High Cholesterol Symptoms: शरीर में कॉलेस्ट्रोल की मात्रा बढ़ने पर कुछ संकेत दिखने लगते हैं जिन्हें शुरुआत में ही पहचान लेना बेहतर है. लेख में जानिए कौनसे वॉर्निंग साइन हैं जिनसे सचेत रहने की जरूरत है.
खास बातें .......
शरीर में कई कारणों से कॉलेस्ट्रोल लेवल बढ़ सकता है.
कॉलेस्ट्रोल की बड़ी हुई मात्रा इस तरह पहचानें.
पैरों पर भी नजर आते हैं कॉलेस्ट्रोल के शुरुआती लक्षण.
High Cholesterol Symptoms: शरीर किसी भी बीमारी की चपेट में आता है तो अलग-अलग अंगों पर उसके लक्षण दिखाई देने लगते हैं. बिलकुल इसी तरह शरीर में कॉलेस्ट्रोल लेवल (Cholesterol Level) बढ़ने पर अलग-अलग लक्षण व संकेत नजर आने लगते हैं. आइए जानते हैं वे कौनसे वार्निंग साइन (Warning Signs) हैं जिनसे आपको सचेत रहने की जरूरत है और जिन्हें देखते ही आपको अपने कॉलेस्ट्रोल लेवल्स की जांच करवाना चाहिए जिससे आपको समस्या बढ़ने से पहले ही पता चल जाए और आप जरूरी इलाज शुरू कर सकें.

हाई कॉलेस्ट्रोल के लक्षण और संकेत |
High Cholesterol Signs And Symptoms

पैरों पर असर:
शरीर में कॉलेस्ट्रोल की मात्रा बढ़ने पर पैरों में नंबनेस (Numbness) महसूस होने लगती है यानी कोई हलचल महसूस नहीं होती और हर समय पैर सोया-सोया नजर आता है. साथ ही, पैरों में झनझनाहट महसूस हो सकती है और पैर हर वक्त ठंडे लगने लगते हैं।

पैरों में दर्द:
पैरों की नसों तक भी कॉलेस्ट्रोल के कारण सही तरह से रक्तसंचार नहीं होता है ना ही ऑक्सीजन ठीक तरह से पहुंच पाता है। ऐसे में पैरों में तेज दर्द उठने लगता है।

पीले नाखून:
कॉलेस्ट्रोल का असर नाखूनों में भी नजर आने लगता है। शरीर में बढ़ा हुए कॉलेस्ट्रोल नसों को अवरुद्ध करने लगता है जिससे शरीर के अलग-अलग हिस्सों तक खून कम पहुंचता है। इसका प्रभाव नाखूनों पर भी पड़ता है और उनके अंदर गहरी लकीरें पड़ने लगती हैं. साथ ही, नाखूनों पर पीले, पतले और गहरे ब्राउन रंग की लकीरें भी नजर आने लगती हैं जो ज्यादातर नाखूनों की सीध में होती हैं।

बरतें ये सावधानियां .......
शरीर में कॉलेस्ट्रोल की मात्रा ना बढ़े इसके लिए कुछ सावधानियां बरतनी बेहद जरूरी हैं।
धूम्रपान की आदत छोड़ दें। यह दिल की बीमारियों और स्ट्रोक (Stroke) के खतरे को बढ़ाता है।
उन चीजों का सेवन करें जिनमें प्राकृतिक रूप से फैट की मात्रा कम हो।
सैचुरैटेड फैट की अत्यधिक मात्रा वाले फूड्स से परहेज करें.
रोजाना एक्सरसाइज करना भी सेहत के लिए अच्छा है।

अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें।

Allium Sativa.
20/05/2022

Allium Sativa.

WISH YOU ALL, HAPPY AND HEALTHY.
07/04/2022

WISH YOU ALL, HAPPY AND HEALTHY.

05/01/2022

अगर आप समय से पहले बूढ़ा होना नहीं चाहते हैं तो कुछ बुरी आदतों को देर होने से पहले ही छोड़ दें. जानिए उनके बारे में...
हमारे जीवन का आखिरी पड़ाव बुढ़ापा ही होता है। लेकिन ये भी सच है कि कोई भी इंसान बूढ़ा होना नहीं चाहता। इस दौरान आपकी शारीरिक ताकत गिरने लगती है। रंग-रूप भी कम होने लगता है और कई बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। हेल्थ एक्सपर्ट्स कहते हैं कि कुछ गलत आदतें कम उम्र में ही बूढ़ा बना देती हैं। अगर आप समय से पहले बूढ़ा होना नहीं चाहते हैं, तो इन अस्वस्थ आदतों को देर होने से पहले ही छोड़ दें।
बुरी आदतों के कारण आप कम उम्र में ही सफेद बाल, कमजोर हड्डियां, डायबिटीज-हाई ब्लड प्रेशर जैसी गंभीर बीमारियां, आंखों की कमजोर रोशनी आदि कई समस्याओं से जूझ सकते हैं। अगर आपने इन गलत आदतों को छोड़ दिया तो लंबे समय तक शरीर को जवानी की तरह स्वस्थ रख पाएंगे।

स्मोकिंग और ड्रिंकिंग जल्द छोड़ दें----
अधिक मात्रा में शराब का सेवन और स्मोकिंग करना भी आपको समय से पहले बूढ़ा बनाता है। क्योंकि, जहां स्मोकिंग से दिल के रोग, फेफड़ों के रोग शरीर को कमजोर कर देते हैं। वहीं, शराब शरीर व त्वचा को ड्राई बनाकर झुर्रियों, डिहाइड्रेशन का कारण बनती है। जिससे शरीर की उम्र ज्यादा दिखने लगती है।

1. जंक फूड खाना----
अगर आप जंक फूड का सेवन करते हैं, तो समय से पहले आपको बुढ़ापा घेर सकता है। हेल्थ एक्सपर्ट्स कहते हैं कि कुछ लोग हरी सब्जियां, फल, बीन्स, सूखे मेवा जैसे हेल्दी फूड को छोड़कर जंक फूड का सेवन करते हैं, यही आदत शरीर में विटामिन सी, विटामिन बी, विटामिन ए, आयरन, मैग्नीशियम आदि पोषक तत्वों की कमी कर सकता है। जिससे शरीर का स्वास्थ्य गिरने लगता है और बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।

2. अधिक मीठी चीजों का सेवन करना----
जिन लोगों को ज्यादा मीठा खाने की आदत होती है, उनमें ब्लड शुगर बढ़ने के कारण कम उम्र में ही डायबिटीज की समस्या हो जाती है। वहीं, अत्यधिक मीठा या चीनी खाने से शरीर पर चर्बी चढ़ने लगती है और स्किन ढीली हो सकती है। ये सभी समस्याएं समय से पहले बूढ़ा बनाने के लिए काफी हैं।

3. कम पानी पीने की आदत----
हेल्थ एक्सपर्ट्स इस बात पर हमेशा जोर देते हैं कि शरीर और स्किन को जवान बनाए रखने के लिए पर्याप्त पानी पीना बहुत जरूरी है। क्योंकि, कम मात्रा में पानी पीने से स्किन ड्राई होने लगती है और विभिन्न शारीरिक अंगों की कार्यक्षमता भी घटने लगती है। इसके अलावा, कम पानी पीने से शरीर से टॉक्सिन्स नहीं निकल पाते हैं और शरीर को अंदर व बाहर से नुकसान पहुंचाते हैं।

4. शारीरिक गतिविधि न के बराबर होना----
कम उम्र में बूढ़ा होने से बचने के लिए शारीरिक गतिविधि करना बहुत जरूरी है। अक्सर लोग शारीरिक गतिविधि और जिम को एक जैसा मान लेते हैं. शारीरिक गतिविधि का मतलब है कि आप दैनिक कार्य में चलने-फिरने, उठने-बैठने, स्ट्रेचिंग, सीढ़ी चढ़ना आदि जैसे कार्य करते हों। जरूरी नहीं कि आप जिम जाकर वजन ही उठाएं। शारीरिक गतिविधि ना करने से मसल्स कमजोर होने लगती हैं और मोटापे जैसी समस्या आ जाती है।

5. कम नींद लेना----
जो लोग कम नींद लेते हैं, वो भी कम उम्र में ही बूढ़े बन सकते हैं। क्योंकि, नींद के दौरान हमारी मसल्स, सेल्स और स्किन खुद को रिपेयर करती हैं। लेकिन अपर्याप्त नींद लेने के कारण उन्हें ये कीमती वक्त नहीं मिल पाता है और उनका स्वास्थ्य गिरता रहता है।

28/12/2021

40 की उम्र के बाद ज्यादातर लोग अपना लेते हैं ये 5 अनहेल्‍दी आदतें, कहीं आप भी तो नहीं इनमें शामिल?
40 की उम्र के बाद आप भी ये 5 अनहेल्‍दी आदतों के श‍िकार हैं तो आज ही इन्‍हें छोड़ दें, जानें नुकसान।

40 की उम्र के बाद आपको अपनी सेहत का खास ख्‍याल रखने की जरूरत होती है। आज के समय में 40 और उससे ऊपर की उम्र के लोगों के ल‍िए कॉर्ड‍ियोवैस्‍कुलर बीमार‍ियों का खतरा बढ़ गया है, इसका कारण है अनहेल्‍दी आदतें। अगर आप भी अनहेल्‍दी आदतें जैसे, कसरत न करना या गलत पॉश्‍चर में बैठना आदि के श‍िकार हैं, तो आपको भी 40 की उम्र के बाद शारीर‍िक समस्‍याओं का सामना करना पड़ सकता है।
40 की उम्र के बाद गलत आदतों का श‍िकार होने से क‍िडनी फेल‍ियर और मेंटल हेल्‍थ का ग‍िरना भी शुरू हो जाता है, इसल‍िए आपको खास ख्‍याल रखने की जरूरत है।
इस लेख में हम उन 5 आदतों की बात करेंगे, ज‍िन्‍हें आपको तुरंत छोड़ देना चाह‍िए।

1) 40 की उम्र के बाद वर्कआउट न करना (Avoiding workout after 40s)
अगर आप 40 की उम्र के बाद वर्कआउट को अवॉइड कर रहे हैं तो आपको बता दें क‍ि हर उम्र में आपके के ल‍िए कसरत जरूरी होती है। इस उम्र में आपको हर द‍िन योग, मेड‍िटेशन और वर्कआउट को अपने रूटीन में शाम‍िल रखना चाह‍िए। वर्कआउट न करने के कारण आप मोटापे का श‍िकार हो सकते हैं, आपको कॉर्ड‍ियोवैस्‍कुलर ड‍िसीज होने का खतरा बढ़ सकता है इसल‍िए कसरत से बॉडी को फ‍िट और हेल्‍दी रखें।

2) गलत पॉश्‍चर में बैठना (Wrong posture)
अगर आपका पॉश्‍चर गलत है तो हो सकता है क‍ि 40 की उम्र के बाद आपको हड्ड‍ियों में दर्द या मांसपेश‍ियों में ऐंठन की समस्‍या हो। गलत पॉश्‍चर में बैठने की आदत के कारण आगे चलकर स्‍पाइन की समस्‍या भी हो सकती है। आपको स्‍पाइन की एक्‍सरसाइज करनी चाह‍िए, कोश‍िश करें क‍ि दर्द होने पर डॉक्‍टर से संपर्क कर सकते हैं और फ‍िजियोथैरेपी की सहारा भी ले सकते हैं।

3) धूम्रपान करना (Smoking)
अगर आप धूम्रपान करते हैं, तो 40 की उम्र के बाद ये समस्‍या आपको कई बीमार‍ियों का श‍िकार बना सकती है। रेस्‍प‍िरेटरी ऑर्गन के ल‍िए धूम्रपान नुकसानदायक होता है और हार्ट की बीमार‍ियों का खतरा 40 के बाद बढ़ जाता है। ज‍िसका ध्‍यान रखते हुए आपको धूम्रपान अवॉइड करना चाह‍िए।

4) 40 की उम्र के बाद ब्रेन एक्‍सरसाइज न करना (Avoiding brain exercise after 40s)

40 की उम्र के बाद अगर आप ब्रेन एक्‍सरसाइज अवॉइड करते हैं तो आप आगे चलकर एल्‍जाइमर्स या कमजोर याद्दाश के श‍िकार हो सकते हैं। आपको पज़ल्स सॉल्‍व करना या अन्‍य ब्रेन एक्‍सरसाइज को करते रहना चाह‍िए। आप उन एक्‍टीव‍िटीज को रूटीन में शाम‍िल करें, ज‍िससे आपका ब्रेन का लेवल ऊपर जाए जैसे आप क्रॉसवॉर्ड सॉल्‍व कर सकते हैं।

5) ब्‍लड प्रेशर मॉन‍िटर न करना (Avoiding blood pressure monitoring)
अगर आप समय-समय पर अपना ब्‍लड प्रेशर मॉन‍िटर नहीं करते हैं, तो भी आपको 40 की उम्र के बाद समस्‍या आ सकती है। बीपी के मरीजों को अपना ब्‍लड प्रेशर समय-समय पर मॉन‍िटर करते रहना चाह‍िए। बीपी बढ़ने के कारण आगे चलकर क‍िडनी में द‍िक्‍कत हो सकती है। बीपी नॉर्मल न होने के कारण आगे चलकर क‍िडनी फेल‍ियर की समस्‍या भी हो सकती है इसल‍िए बीपी की जांच समय-समय पर करते रहें।

40 की उम्र के बाद इन आदतों को रूटीन में शाम‍िल करें (Healthy habits to follow after 40s)
रोजाना कसरत करें ज‍िसमें कॉर्ड‍ियो, जॉग‍िंग, योगा, मेड‍िटेशन को शाम‍िल करें।
फैट, घी, बटर, ट्रांस फैट को पूरी तरह से अवॉइड करें।
खाने में दूध, दही, सोया, ग्रीन वेज‍िटेबल को शाम‍िल करें।
रोजाना 7 से 8 ग‍िलास पानी का सेवन करें।
आपको उम्र बढ़ने के साथ अपने लक्षणों पर और गौर करने की जरूरत होती है, क‍िसी तरह के दर्द या अंदरूनी चोट के लक्षणों को नजरअंदाज न करें और तुरंत डॉक्‍टर के पासकर जाकर जांच करवाएं।

28/12/2021

Lachesis Mutus (Proving):
The first trituration and first dilution in alcohol of the snake-poison Trigonocephalus lachesis was made by Hering on July 28, 1828. The first cases were published in the Archives in 1835. In 1837 this remedy was introduced into our materia medica." I quote from Hering's Guiding Symptoms, vol. vi., of which Lach. occupies nearly one hundred pages, and comprises the substance of a monograph he was compiling at the time of his death to celebrate the fiftieth anniversary of the introduction of the remedy into the materia medica. To the genius and the heroism of Hering the world owes this remedy and many another of which this has been the forerunner. When Hering's first experiments were made he was botanising and zoologising on the Upper Amazon for the German Government. Except his wife, all those about him were natives, who told him so much about the dreaded Surukuku that he offered a good reward for a live specimen. At last one was brought in a bamboo box, and those who brought it immediately fled, and all his native servants with them. Hering stunned the snake with a blow on the head as the box opened, then, holding its head in a forked stick, he pressed its venom out of the poison bag upon sugar of milk. The effect of handling the virus and preparing the lower attenuations was to throw Hering into a fever with tossing delirium and mania─much to his wife's dismay. Towards morning he slept, and on waking his mind was clear. He drank a little water to moisten his throat, and the first question this indomitable prover asked was: "What did I do and say?" His wife remembered vividly enough. The symptoms were written down, and this was the first instalment of the proving of Lachesis. The natives crept back one by one next day, and were astonished to find Hering and his wife alive. The snake grows to seven feet and upwards in length, has fangs nearly an inch long, a reddish brown skin marked along the back with blackish brown rhomboidal spots. Nearly all the provings of Lachesis were made with the 30th and higher attenuations.
The four grand characteristics of Lach. are: (1) < By sleep. (2) Excessive sensitiveness of the surface with intolerance of touch or constriction. (3) Left-sidedness, and the direction left to right: symptoms begin on the left side and either remain there or proceed to the right. (4) > From the onset of a discharge. There is headache > as soon as nasal catarrh comes on. Uterine pains > as soon as me**es appear. The other side of this is < from non-appearance of an expected discharge, and it is this which is the foundation of the appropriateness of Lachesis to the climacteric state.

ACONITUM NAPELLUS.COMMON NAMES: Common Aconite. Monkshood. Wolfsbane. HABITAT: Moist pastures and waste places in mounta...
05/12/2021

ACONITUM NAPELLUS.

COMMON NAMES: Common Aconite. Monkshood. Wolfsbane.

HABITAT: Moist pastures and waste places in mountainous districts, Central and Southern Europe, Russia, Scandinavia, and Central Asia.

N. O. Ranunculaceæ.
Preparation: Tincture of whole plant with root when beginning to flower.

DISEASES: Adenitis. Amaurosis. After effects of Anger. Apoplexy. Asthma. Blindness. Bronchitis. Cardiopathies. Catalepsy. Catheter fever. Chicken-pox. Cholera. Cholera infantum. Cold. Coldness. Consumption. Convulsions. Cough. Croup. Cystitis. Dengue fever. Dentition. Diarrhea. Dropsy. Dysentery. Dysmenorrhea. Otitis. Enteritis. Erythema nodosum. Eye diseases. Fear psychosis. Fever. After effects of Fright. . Glossitis. Gonorrhea. Hemorrhages. Hemorrhoids. Headache. . Hip-joint, disease. Hodgkin's disease. Hyperpyrexia. Incontinence. Influenza. Insomnia. Jaundice. Labour. Lactation. Laryngitis. Liver. Lumbago. Mania. Measles. Meningitis. Menstruation. Miliaria. Miscarriage. Mumps. Musculoskeletal diseases. Myelitis. Nephritis. Neuralgia. Numbness. Esophagitis. Odontalgia. Olfactory disorders. Orchitis. Paralysis. Peritonitis. Phlegmasia alba dolens. Pleurisy. Pleurodynia, Pneumonia. Pregnancy. Puerperal fever. Purpura. Quinsy. Remittent fever. Roseola. Scarlatina. Stiff-neck. Stomatitis. Strep Throat. Tetanus. Tetany. Thirst. Traumatic fever. Urethritis, stricture. UTI. Uterine prolapse. After effects of Vaccination. Vertigo. Whooping-cough. Yawning. Yellow fever.

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Rourkela
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