Yogic LifeStyle And Health

Yogic LifeStyle And Health Certified Yoga Teacher, Healthy Diet & LifeStyle Coach, Touch With Ayurveda & Natural LifeStyle

अच्छी सलाहों को मानना स्वयं की योग्यता बढ़ाना है।।🙏🙏
26/05/2025

अच्छी सलाहों को मानना स्वयं की योग्यता बढ़ाना है।।🙏🙏

योग सिर्फ पढ़ने या रिसर्च करने की चीज़ नहीं, बल्कि उसे जीने की कला है। जब हम योगिक जीवनशैली को अपने रोज़मर्रा के जीवन मे...
18/05/2025

योग सिर्फ पढ़ने या रिसर्च करने की चीज़ नहीं, बल्कि उसे जीने की कला है। जब हम योगिक जीवनशैली को अपने रोज़मर्रा के जीवन में अपनाते हैं, तभी असली लाभ सामने आता है। अनावश्यक रूप से जानकारी इकट्ठा करने से बेहतर है कि आप योग का अभ्यास करें, उसका अनुभव लें और जीवन को संतुलित, स्वस्थ और आनंदमय बनाएं।
Yoga is not something to be endlessly researched, it is meant to be lived. True benefits come only when we practice and integrate yogic principles into our daily life. Don’t just read about wellness—experience it, live it, and transform your life

#योगसाधना #योगिकजीवनशैली #स्वस्थजीवन #योगकाअभ्यास

18/05/2025

CM दी योगशाला – पंजाब सरकार की अनोखी पहल | सेहत के लिए संजीवनी

पंजाब सरकार द्वारा शुरू किया गया CM दी योगशाला प्रोजेक्ट जन-कल्याण के लिए एक बेहतरीन पहल है। इस योगशाला में लोगों को निःशुल्क योग अभ्यास सिखाया जा रहा है, जिससे उन्हें कई रोगों से राहत मिल रही है।

बहुत से लोगों ने बताया कि उन्हें कमर दर्द (Back Pain), मधुमेह (Diabetes), उच्च रक्तचाप (High BP), थायराइड (Thyroid), अस्थमा (Asthma), तनाव (Stress), और चिंता (Anxiety) जैसी समस्याओं में बहुत लाभ हुआ है।

यह पहल पंजाब को स्वस्थ और खुशहाल बनाने की दिशा में एक मजबूत कदम है।
आइए, जुड़ें CM दी योगशाला से और अपने जीवन में स्वास्थ्य और स्फूर्ति लाएं!

The CM di Yogshala project launched by the Punjab Government is a wonderful initiative for public welfare. In this Yogshala, people are being taught free yoga practices, which are providing relief from various health issues.

Many individuals have reported significant improvement in conditions like back pain, diabetes, high blood pressure, thyroid, asthma, stress, and anxiety through regular yoga practice.

This initiative is a strong step towards building a healthier and happier Punjab.
Come, join CM di Yogshala and bring health and vitality into your life!

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गर्मी में गन्ने का रस पीना शरीर को ठंडक देता है, तुरंत ऊर्जा पहुंचाता है और लू से बचाता है। यह पाचन ठीक रखता है, पेशाब स...
15/05/2025

गर्मी में गन्ने का रस पीना शरीर को ठंडक देता है, तुरंत ऊर्जा पहुंचाता है और लू से बचाता है। यह पाचन ठीक रखता है, पेशाब साफ करता है और खून की गर्मी (रक्त पित्त) को शांत करता है। इसलिए गर्मी के मौसम में यह बहुत फायदेमंद होता है।

गन्ने का रस स्वाद में मीठा और असर में ठंडा होता है। यह मृदु रेचक यानी हल्के तरीके से पेट साफ करने वाला होता है। यह भारी (गुरु), चिकना (स्निग्ध), शरीर को बल देने वाला (बृहण), कफ और मूत्र को बढ़ाने वाला, शुक्र वर्धक (वृष्य), और रक्त पित्त को शांत करने वाला होता है। इसका स्वाद और पाचन दोनों मीठे (मधुर रस और मधुर विपाक) होते हैं। गन्ने का रस शरीर को ठंडक, ताकत और ताजगी देता है।

योगी रमन शर्मा

अगर आप जीवन में किसी भी क्षेत्र में सफलता पाना चाहते हैं – चाहे वो योग हो, साधना हो, या कोई भी व्यक्तिगत लक्ष्य – तो ये ...
13/05/2025

अगर आप जीवन में किसी भी क्षेत्र में सफलता पाना चाहते हैं – चाहे वो योग हो, साधना हो, या कोई भी व्यक्तिगत लक्ष्य – तो ये 5 मूलभूत सिद्धांत आपको अपनाने होंगे:

1. समर्पण – बिना पूरी तरह से समर्पित हुए कोई भी साधना पूर्ण नहीं होती।

2. गंभीरता – लक्ष्य को लेकर आपका दृष्टिकोण गंभीर और ईमानदार होना चाहिए।

3. धैर्य और योजना – जल्दबाज़ी नहीं, बल्कि धैर्यपूर्वक एक स्पष्ट योजना के साथ आगे बढ़ें।

4. सत्य और वास्तविकता का ज्ञान – भ्रम से नहीं, सत्य से जुड़िए।

5. संकल्प शक्ति – एक अडिग संकल्प ही आपको मार्ग में स्थिर रखता है।

इन पांच बातों को अपने जीवन में उतारिए और देखिए कैसे आपका मार्गदर्शन भीतर से ही होने लगता है।

#योगिक_जीवन की ओर पहला कदम आज ही उठाइए।

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25/02/2025

गैस, अपच, एसिडिटी? आपकी पाचन अग्नि जिम्मेदार हो सकती है!

खाना सही से पच नहीं रहा? वजह जानिए!

क्या आपने कभी सोचा है कि हमारा शरीर भोजन से ऊर्जा कैसे प्राप्त करता है? यह सब संभव होता है पाचन अग्नि के कारण। आयुर्वेद में इसे शरीर की मूल ऊर्जा का स्रोत माना गया है। अगर यह अग्नि संतुलित रहती है, तो हमारा शरीर स्वस्थ और ऊर्जावान रहता है। लेकिन अगर यह कमजोर हो जाए, तो अपच, गैस, एसिडिटी और सुस्ती जैसी समस्याएँ होने लगती हैं।
आयुर्वेद में जिस जठराग्नि की बात की जाती है, उसे आधुनिक विज्ञान में पाचन शक्ति या मेटाबॉलिज्म कहा जाता है। यह पेट में मौजूद गैस्ट्रिक जूस, एंजाइम्स और हाइड्रोक्लोरिक एसिड के सही संतुलन पर निर्भर करता है। जब यह संतुलन बिगड़ता है, तो पाचन तंत्र कमजोर हो जाता है, जिससे पोषक तत्वों का अवशोषण भी सही से नहीं हो पाता।
कैसे काम करती है पाचन अग्नि:
जब हम भोजन करते हैं, तो हमारा पेट गैस्ट्रिक जूस छोड़ता है, जिससे खाना टूटकर छोटे-छोटे अणुओं में बदल जाता है। इसके बाद, आंतों में मौजूद एंजाइम्स और बैक्टीरिया इसे और अधिक पचाकर शरीर को ऊर्जा और पोषण प्रदान करते हैं।
अगर पाचन अग्नि कमजोर हो जाए तो—खाना देर से पचेगा, जिससे गैस, भारीपन और कब्ज होगी।
अगर पाचन अग्नि बहुत तेज हो जाए तो— एसिडिटी, सीने में जलन और अल्सर जैसी समस्याएँ हो सकती हैं।
पाचन अग्नि यानी गैस्ट्रिक जूस और एंजाइम्स का संतुलन हमारे स्वास्थ्य के लिए बहुत जरूरी है। जब यह सही रूप से काम करती है, तो शरीर ऊर्जावान और स्वस्थ बना रहता है, लेकिन अगर इसमें असंतुलन आ जाए, तो कई स्वास्थ्य समस्याएँ उत्पन्न हो सकती हैं।
आपकी पाचन अग्नि कैसी है? क्या आपको कभी अपच, गैस या एसिडिटी की समस्या होती है? हमें कमेंट में बताइए!

23/02/2025

त्रिदोष की अवस्थाएँ: सही समय पर सही संतुलन | आयुर्वेदिक ज्ञान
दिन, रात और भोजन में त्रिदोष का असर!
आयुर्वेद में त्रिदोष – वात, पित्त और कफ – का संतुलन बहुत महत्वपूर्ण होता है। ये तीनों दोष अलग-अलग समय, अवस्था और परिस्थितियों में प्रमुखता से प्रभाव डालते हैं।
नंबर 1. आयु के अनुसार त्रिदोष की अवस्थाओं में कफ बाल्यावस्था में अधिक होता है, जिससे शरीर की वृद्धि और पोषण होता है।
युवावस्था में पित्त का प्रभाव अधिक रहता है, जिससे ऊर्जा, पाचन शक्ति और कार्यक्षमता बढ़ती है।
वृद्धावस्था में वात का प्रभाव बढ़ जाता है, जिससे शरीर में शुष्कता, कमजोरी और गतिशीलता आती है।
नंबर 2. दिनचर्या में त्रिदोष की अवस्थाओं में सुबह के समय कफ प्रधान होता है, इसलिए यह समय शारीरिक स्थिरता और ताजगी का होता है।
दोपहर के समय पित्त अधिक होता है, जिससे पाचन और ऊर्जा उच्चतम स्तर पर होती है।
शाम को वात का प्रभाव बढ़ता है, जिससे शरीर में हल्कापन और गतिविधि बढ़ती है।
नंबर 3. रात्रि में त्रिदोष की अवस्थाओं में रात्रि के प्रारंभ में कफ प्रभावी रहता है, जिससे नींद आती है।
मध्य रात्रि में पित्त सक्रिय होता है, जो शरीर की आंतरिक प्रक्रियाओं को नियंत्रित करता है।
सुबह के अंतिम पहर में वात बढ़ जाता है, जिससे जागने की प्रवृत्ति होती है।
नंबर 4. भोजन के संदर्भ में त्रिदोष की अवस्थाओं में भोजन के तुरंत बाद कफ अधिक होता है, जिससे शरीर को पोषण मिलता है।
पाचन प्रक्रिया के दौरान पित्त सक्रिय रहता है, जिससे भोजन का सही तरीके से पाचन होता है।
पाचन के बाद वात प्रभावी होता है, जिससे शरीर हल्का और ऊर्जावान महसूस करता है।
त्रिदोष को समझकर हम अपनी दिनचर्या और आहार-विहार को संतुलित कर सकते हैं, जिससे बेहतर स्वास्थ्य और मानसिक शांति प्राप्त हो सकती है।

17/02/2025

शरीर में रोग क्यों होते हैं? जानिए कारण और समाधान

क्या आप जानते हैं कि शरीर में विमारियां क्यों होती है? इसके दो प्रमुख कारण होते हैं—External और Internal।

External Factors –
Polluted Air, गंदा पानी, मिलावटी भोजन, Virus और Bacteria शरीर पर नकारात्मक प्रभाव डालते हैं। W.H.O के अनुसार, Air Pollution हर साल लाखों लोगों में Respiratory Diseases का कारण बनता है।

Internal Factors –
One. Unhealthy Diet – Junk Food और Nutritional Deficiency से Immune System कमजोर हो जाता है। Excessive Processed Food शरीर में Chronic Inflammation को बढ़ाता है, जिससे Heart Disease और Diabetes का खतरा बढ़ता है।
Two. Negative Thoughts – Anxiety और Stress शरीर में Toxic Hormones बढ़ाते हैं। Studies के अनुसार, लंबे समय तक Stress Cortisol Level बढ़ाकर Immune System को कमजोर करता है।
Three. Irregular Lifestyle – Late-Night Sleeping और Lack of Exercise सेहत बिगाड़ती है। Research के अनुसार, Poor Sleep Metabolism को धीमा करता है और Obesity, Depression जैसी समस्याओं का कारण बनता है।

इसके लिए अब क्या करें? इसके लिए Healthy Diet, Positive Thinking और Yoga अपनाएं। Regular Exercise से Endorphins बढ़ते हैं, जो Stress कम करने में मदद करते हैं।

Stay Healthy, Stay Happy! हमें फॉलो करें।

14/02/2025

रस धातु की कमजोरी? जानें इससे कैसे दूर करें थकान और रोग

नमस्कार! क्या आपको थकान, कमजोरी या बार-बार बुखार हो रहा है? इसका कारण रस धातु की कमजोरी हो सकती है। रस धातु शरीर की पहली और सबसे महत्वपूर्ण धातु है, जो ऊर्जा, पोषण और रोग प्रतिरोधक क्षमता को बनाए रखती है।

अगर गलत खानपान, तनाव, या कमजोर पाचन हो, तो रस धातु दूषित हो जाती है। इससे शरीर में टॉक्सिन्स बढ़ जाते हैं, जिससे इम्यूनिटी कमजोर होती है और बार-बार बुखार, सर्दी-जुकाम, थकान, त्वचा संबंधी रोग और बाल झड़ने की समस्या हो सकती है।

इसे सुधारने के लिए संतुलित और सुपाच्य आहार लें—आंवला, घी, अनार, त्रिफला और नारियल पानी। योग, प्राणायाम और ध्यान से तनाव कम करें और अच्छी नींद लें। वैज्ञानिक रूप से, सही पोषण और मानसिक शांति से रस धातु मजबूत होती है। स्वस्थ रहें, खुश रहें!

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