Harbal Annira House

Harbal Annira House A part of GurukulVANYA , Fully residential Boy's and girls School, Delhi Public School, khidarpura, Jafarpur Deoria Road, Muzaffarpur 843107

रोज सुबह दिन की शुरुआत डिटॉक्स वॉटर से।सभी की रेसिपी साथ में पोस्ट हैंI🥃दानामेथी का पानी एक गिलास पानी में 1 चम्मच दानाम...
16/08/2025

रोज सुबह दिन की शुरुआत डिटॉक्स वॉटर से।
सभी की रेसिपी साथ में पोस्ट हैंI
🥃दानामेथी का पानी
एक गिलास पानी में 1 चम्मच दानामेथी मिला कर रात को भिगो के रख देI सुबह मैथी के साथ पानी को 2-3 मिनट उबालेI गैस बंद कर दे और कुछ देर बाद पानी छान लेI गुनगुना दानामेथी पानी पिएI स्वाद के लिए नींबू का रस मिला सकते हैI
नोट- दाना मेथी को सब्जी बनाने में इस्तेमाल कर सकते हैI sanaz_swad

🥃बेहद कारगर हल्दी, दालचीनी का काढ़ा
सामग्री -
1 चम्मच अजवायन
1 टुकड़ा अदरक
1 छोटा देसी हल्दी का टुकड़ा
1 छोटा टुकड़ा दालचीनी
1/2 चम्मच नींबू का रस
विधि - एक पैन में डेढ गिलास पानी गरम करे I उसमें हल्दी, अदरक, दालचीनी को कुट कर डाल दे। 5 मिनट तक पकने दे और गैस बंद कर देI 2 मिनट कवर कर के रख दे। कप में छान ले और नींबू का रस मिला देI बेहद फायदेमंद काढा तैयार हैI सुबह खाली पेट पीएI sanaz_swad

🥃सौंफ का पानी
एक गिलास पानी में 1 चम्मच सौंफ मिला कर रात को भिगो के रख देI सुबह सौंफ के साथ पानी को 2-3 मिनट उबालेI गैस बंद कर दे और कुछ देर बाद पानी छान लेI गुनगुना सौंफ पानी पिएI स्वाद के लिए नींबू का रस मिला लेI sanaz_swad

🥃अजवाइन पानी
विधि-
1 गिलास पानी में 1 चम्मच अजवाइन मिला कर रात को भिगो के रख देI सुबह अजवाइन के साथ पानी को 2-3 मिनट उबालेI गैस बंद कर दे और कुछ देर बाद पानी छान लेI गुनगुना अजवाइन पानी पिएI स्वाद के लिए नींबू का रस मिल सकते हैI ऐसे ही रोज अलग-अलग बदल- बदल कर डिटॉक्स वॉटर बनाए और सुबह खाली पेट पिएI कभी जीरा, धनिया, मेथीदाना, सौंफ , नीबू पानी, चिया बीज वगैरह I
सब के अपने अलग-अलग फायदे हैं...मेरे दिन की शुरुआत रोज डिटॉक्स वॉटर से ही होती हैI

15/08/2025

यह जो पत्थर के बने बर्तन आप देख रहे हैं यह पत्थर सिर्फ जैसलमेर के पास एक गांव में मिलते हैं और इस पत्थर की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इन पत्थर के बर्तनों में आप दूध गर्म करके डालेंगे तो अपने आप इन में दही जम जाता है

असल में पहले के जैन लोग दूध में जामन डालकर दही नहीं बनाते थे क्योंकि उनका मानना था कि जामन में जीव होते हैं तो जैन लोग इन्हीं पत्थरों में दही बना कर खाते थे ...वैज्ञानिकों ने रिसर्च करके पाया कि यह एक फॉसिल पत्थर है और इन पत्थरों में लैक्टो बैक्टीरिया पाया जाता है

इन्हें हाबुर का पत्थर कहते है . हाबुर जैसलमेर के पास एक गांव का नाम है

15/08/2025
भुंई आंवला (वानस्पतिक नाम: Phyllanthus niruri) अथवा भुंई आमला अथवा भूआमलकी एरन्ड कुल का लगभग 1.5 फीट से 2 फीट ऊंचा एक वर...
26/07/2025

भुंई आंवला (वानस्पतिक नाम: Phyllanthus niruri) अथवा भुंई आमला अथवा भूआमलकी एरन्ड कुल का लगभग 1.5 फीट से 2 फीट ऊंचा एक वर्षीय पौधा होता है जो बरसात के समय खेतों में खरपतवार के रूप में स्वयंमेव उगता दिखाई देता है। यद्यपि आंवला की तुलना में यह पौधा बहुत छोटा होता है परन्तु आवंला के पौधे जैसे पत्तों तथा पत्तों के पीछे छोटे-छोटे आंवला जैसे फल लगने के कारण संभवतया इसको जमीन का आंवला अथवा 'भुंई आमला' कहा जाता है। अधिकांशतः बंजर जमीनों के साथ-साथ खेतों में वर्षा ऋतु में खरपतवार के रूप में उगने वाले पौधे भुंई आमला। यह जड़ी-बूटी पाचन एंजाइमों को उत्तेजित करती है, एसिडिटी से राहत दिलाती है, और सूजन और कब्ज से राहत दिलाती है। इसमें हल्के रेचक गुण भी होते हैं।
उपयोग विधि: भोजन से पहले भुई आंवला के ताजे पत्ते चबाएं या इसका रस पिएं।

नारी डेस्क: कभी-कभी जब डॉक्टर दवाओं और इलाज से उम्मीद छोड़ देते हैं, तो कुछ लोग अपनी राह खुद चुनते हैं और चमत्कारी नतीजे...
19/05/2025

नारी डेस्क: कभी-कभी जब डॉक्टर दवाओं और इलाज से उम्मीद छोड़ देते हैं, तो कुछ लोग अपनी राह खुद चुनते हैं और चमत्कारी नतीजे पाते हैं। ऐसी ही एक अद्भुत कहानी सामने आई है, जहां एक व्यक्ति ने कैंसर को हराने के लिए न तो कीमोथेरेपी और न ही रेडिएशन लिया, बल्कि उन्होंने प्रकृति का सहारा लिया और चमत्कारिक तरीके से कैंसर को हराया।

कैंसर का पता चला, डॉक्टरों ने कीमो की सलाह दी
52 साल के इस व्यक्ति को ल्यूकेमिया (रक्त कैंसर) और लिंफोमा (लसीका ग्रंथि का कैंसर) का पता चला। डॉक्टरों ने तुरंत कीमोथेरेपी और रेडिएशन शुरू करने की सलाह दी, लेकिन उन्होंने कुछ अलग करने का फैसला किया।

प्राकृतिक उपचार की शुरुआत
इस व्यक्ति ने "प्राकृतिक उपचार" की शुरुआत की, जिसमें उन्होंने ठंडे पानी में तैराकी और जंगल में समय बिताने को शामिल किया। उन्होंने 4°C के बर्फीले पानी में 187 मील (लगभग 300 किलोमीटर) तैराकी की। इसके अलावा, हर हफ्ते एक रात जंगल में बिताने का फैसला किया। उनका मानना था कि शरीर में खुद ही रोग से लड़ने की क्षमता होती है, बस उसे सही वातावरण और मानसिकता की जरूरत होती है।

चमत्कारी नतीजे
पहली बार जब उन्होंने ठंडी नदी में तैराकी की, तो उनका ब्लड टेस्ट हुआ और ल्यूकेमिया गायब हो चुका था। 10 महीने तक जंगल में समय बिताने के बाद लिंफोमा भी पूरी तरह से ठीक हो गया। उनके कैंसर विशेषज्ञ डॉक्टर भी यह देखकर हैरान रह गए और उन्होंने कहा, "अगर मैंने खुद उनका टेस्ट नहीं किया होता, तो मुझे विश्वास नहीं होता कि उन्हें कभी कैंसर था!"

 #चिलबिल (Holoptelea integrifolia).........हमारे प्रदेश के अधिकतर जिलों में चिलबिल के हजारों पेड़ देखने को मिल जायेंगे,,प...
17/03/2025

#चिलबिल (Holoptelea integrifolia).........
हमारे प्रदेश के अधिकतर जिलों में चिलबिल के हजारों पेड़ देखने को मिल जायेंगे,,पर दुर्भाग्य देखो की आज युवा पीढ़ी इसका सही नाम तक नही जानती....।
चिरोल चिलबिल एक औषधीय वृक्ष है,इसे,चिरबिल्व,चिरोल,बन्दर की रोटी तो कुछ क्षेत्रों में इसे बंदर पापड़ी या बंदर बाटी का पेड़ भी कहा जाता है..... इस वृक्ष के फल भी पत्तियों के समान दिखाई पड़ते हैं,जो बंदरो को काफी प्रिय है.......यह फल ऐसा है लगता है कि दो पत्तियों के बीच एक बीज को फँसा दिया गया हो....।
चिरबिल्व को गुजरात, मध्यप्रदेश और राजस्थान में इसे चरेल ,चिरोल कहा जाता है..... इस के अलावा इसे कान्जो, वाओला, कांजू, बन चिल्ला, चिलबिल, सिलबिल, चिरबिल्व (संस्कृत) आदि नामों से जाना जाता है...।
इस में जनवरी फरवरी माह में पुष्प खिलते हैं।

यह बहुत से औषधीय गुणों से संपन्न वृक्ष है और संपूर्ण भारत में पाया जाता है.......इस पेड़ की छाल का उपयोग गठिया की चिकित्सा के लिए प्रभावी स्थान पर लेप कर के किया जाता है.....इस की छाल का अन्दरूनी उपयोग आंतों के छालों की चिकित्सा के लिए किया जाता है......सूखी छाल गर्भवती महिलाओं के लिए ऑक्सीटॉकिक के रूप में गर्भाशय के संकुचन को प्रभावित करने के लिए किया जाता है जिस से प्रसव आसानी से हो सके.......पत्तियों को लहसुन के साथ पीस कर दाद, एक्जीमा आदि त्वचा रोगों में रोग स्थल पर लेप के लिए प्रयोग किया जाता है........पत्तियों को लहसुन और काली मिर्च के पीस कर गोलियाँ बनाई जाती हैं और एक गोली प्रतिदिन पीलिया के रोगी को चिकित्सा के लिए दी जाती है..... लसिका ग्रन्थियों की सूजन में इस की छाल का लेप प्रयोग में लिया जाता है.......... छाल के लेप का उपयोग सामान्य बुखार में रोगी के माथे पर किया जाता है.... सफेद दाग के रोग में इसकी छाल का लेप दागों पर किया जाता है...।
चिरोल से जुड़ी कोई जानकारी हो तो अवश्य साझा करें।

जीरा जो एक सामान्य मसाला है, न केवल खाने का स्वाद बढ़ाता है बल्कि स्वास्थ्य के लिए भी बहुत फायदेमंद होता है. अगर आप रात ...
09/02/2025

जीरा जो एक सामान्य मसाला है, न केवल खाने का स्वाद बढ़ाता है बल्कि स्वास्थ्य के लिए भी बहुत फायदेमंद होता है. अगर आप रात को सोने से पहले जीरा पानी पीते हैं, तो यह आपके शरीर के लिए कई लाभकारी साबित हो सकता है.

जीरा पानी के नियमित सेवन से कई आम समस्याओं का समाधान मिल सकता है. इस लेख में जानें कि रात को सोने से पहले जीरा पानी पीने से कौन-कौन सी समस्याएं दूर हो सकती हैं-

पाचन तंत्र में सुधार

अगर आपको पेट में ऐंठन, गैस, या अपच की समस्या होती है, तो जीरा पानी पीने से राहत मिलती है. जीरा शरीर में पाचन एंजाइमों को सक्रिय करता है, जिससे भोजन का पाचन बेहतर होता है. इसके अलावा, यह पेट की सूजन और एसिडिटी जैसी समस्याओं को भी कम करता है.

नींद में सुधार

रात को सोने से पहले जीरा पानी पीने से शरीर को आराम मिलता है और नींद में सुधार होता है. जीरा पानी के सेवन से शरीर की तंत्रिकाओं को शांति मिलती है और मस्तिष्क में तनाव कम होता है, जिससे गहरी और आरामदायक नींद आती है.

वजन घटाने में मदद

जीरा पानी का सेवन वजन घटाने में भी सहायक हो सकता है. यह शरीर के मेटाबॉलिज्म को तेज करता है और कैलोरी बर्न को बढ़ावा देता है. जीरा पानी से शरीर में पानी की मात्रा भी बाहर निकलती है, जिससे सूजन कम होती है और वजन घटाने में मदद मिलती है.

ब्लड शुगर को कंट्रोल करें

जीरा पानी का सेवन डायबिटीज के मरीजों के लिए भी फायदेमंद हो सकता है. यह शरीर में इंसुलिन के लेवल को कंट्रोल करता है और ब्लड शुगर के लेवल को स्थिर बनाए रखता है.

त्वचा को साफ और चमकदार बनाता है

जीरा पानी में एंटीऑक्सीडेंट्स होते हैं, जो शरीर से हानिकारक तत्वों को बाहर निकालने में मदद करते हैं. यह ब्लड सर्कुलेशन को बेहतर बनाता है और त्वचा को साफ और चमकदार बनाए रखता है. इसके अलावा, जीरा पानी में एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं जो मुंहासे और अन्य त्वचा की समस्याओं को कम करने में मदद करते हैं.

गिलोय का काढ़ा कैसे बनाते हैं?गिलोय की वयस्क बेल (लता) जिसका रंग हरा न हो, व उस पर सफेद रंग की पतली परत बन चुकी हो, उसी क...
09/02/2025

गिलोय का काढ़ा कैसे बनाते हैं?
गिलोय की वयस्क बेल (लता) जिसका रंग हरा न हो, व उस पर सफेद रंग की पतली परत बन चुकी हो, उसी का उपयोग किया जाता है।

गिलोय काढ़ा के लिए सामग्री :-
सादा साफ पीने का पानी - दो कप
गिलोय लता के एक-एक इंच के टुकड़े - 5
पिसी हल्दी - एक चम्मच
अदरक का टुकड़ा - 2 इंच
तुलसी के पत्ते - 6 या 7
गुड - 20 ग्राम (कडवाहट कम करने हेतु)
बनाने का तरीका :-
सबसे पहले एक पैन में 2 कप पानी को मीडियम आंच पर उबलने के लिए रख दें।
अब इसमें बाकी सभी सामग्री को डालें और गिलोय भी डाल दें, अब धीमी आंच पर इसे पकने दें।
जब पानी आधा रह जाए और सभी चीजें अच्छे से पक जाएं तो गैस बंद कर दें।
4 किसी कपड़े या छन्नी से इसे छानकर कप में डालें और चाय की तरह पीएं।
गिलोय का काढ़ा की पीने योग्य मात्रा :-
गिलोय का काढ़ा प्रतिदिन एक कप या आधा कप दो बार से ज्यादा नहीं पीना चाहिए।

एक कप से ज्यादा मात्रा में काढ़ा पीने से आपको नुकसान भी हो सकते हैं।

अगर आप किसी बीमारी से ग्रसित हैं तो आपको डॉक्टर की परामर्श के बाद ही इसे पीना चाहिए।

गर्भवती महिलाएं, नवजात बच्चों को काढ़ा देने से पहले भी चिकित्सक की सलाह लें, ऐसे लोगों को ये काढ़ा पीने से लो ब्लड प्रेशर और ऑटो इम्यून बीमारियों का खतरा हो सकता है।

गिलोय की काढे के लिए योग्य बेल 👇👇

Root Any Branch with This Natural Rooting Hormone! Just 2 Ingredients and 100% Natural... 🌱Make a homemade rooting hormo...
26/01/2025

Root Any Branch with This Natural Rooting Hormone! Just 2 Ingredients and 100% Natural... 🌱

Make a homemade rooting hormone with just two ingredients: sweet potato and rice. This natural trick speeds up the rooting process for propagated cuttings. Sweet potato provides potassium and phosphorus, essential for root development, while rice is packed with minerals, starches, and hormones that stimulate plant growth.

**Ingredients:**
1 sweet potato
1 cup of uncooked rice
1 liter of water

**How to Make:**
1. Slice the sweet potato and put it in a blender.
2. Add the uncooked rice and water, then blend well.
3. Strain the mixture and pour the liquid into a container.
4. Place the plant cutting in the solution for 30 days.

After this period, the cutting will have rooted and be ready for planting. 🌿

25/01/2025



लौकी सूप: लौकी का सूप जल्दी वजन कम करने में मदद करता है. ...

पालक सूप: पालक का सूप वजन कम करने में अच्छा रोल निभाता है. ...

गाजर सूप: गाजर का सूप भी काफी पौष्टिक होता है, साथ ही ये वजन कम करने में भी काफी कारगर है. ...
कद्दू-लहसुन सूप: कद्दू और लहसुन मिक्स सूप भी वेट लॉस के लिए बेहतर ऑप्शन है. ...

मिलावट के जहर से बचे, बाजार से पैकेट बंद पीसे मसाले बिल्कुल नहीं खरीदें। घर में बनाएं खड़े मसालों से किचन किंग मसाला,किच...
25/01/2025

मिलावट के जहर से बचे, बाजार से पैकेट बंद पीसे मसाले बिल्कुल नहीं खरीदें। घर में बनाएं खड़े मसालों से किचन किंग मसाला,
किचन किंग मसाला एक मिश्रण है, जिसमें विभिन्न मसालों का संतुलित अनुपात होता है। यह स्वाद में तीव्र और खुशबूदार होता है, जो भारतीय व्यंजनों को विशेष बनाता है।

आवश्यक सामग्री

6 बड़ी इलायची
12 छोटी हरी इलायची
1 चम्मच सहजीरा
1 चम्मच सोंठ पाउडर
2 बड़े चम्मच काली मिर्च
2 बड़े चम्मच मेथी
2 चम्मच सौंफ
1/2 छोटा चम्मच जायफल
दालचीनी का 1 टुकड़ा
2 जावित्री
12 लौंग
2 स्टार ऐनीज़
2 बड़े चम्मच जीरा
4 चम्मच धनिया
8-10 कश्मीरी मिर्ची
2 बड़े चम्मच उड़द दाल
2 बड़े चम्मच चना दाल
2 बड़े चम्मच राई (पीली)
2 तेज पत्ते
2 बड़े चम्मच कसूरी मेथी
1/2 छोटा चम्मच हल्दी पाउडर
1 चम्मच काला नमक
1 चम्मच नमक
1 चम्मच अमचूर पाउडर

बनाने की विधि -

नमक और हल्दी को छोड़कर सभी सूखे मसालों को पैन में 5-6 मिनिट तक भून लीजिए ।

धीमी आंच पर भूनकर खड़े मसालों को ठंडा करके,मिक्सर में बारीक पीस लीजिये ।

आखिर में हल्दी और नमक डालकर पीसे, एक एयर टाइट जार में स्टोर करें।

हर तरह की ग्रेवी और सब्जियों को जायकेदार बनाने के लिए किचन किंग मसाला का इस्तेमाल करें ।।

Address

Deoria Jagarpur Main Road, 843107
Rupnarayanpur
843120

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+917667272360

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