Bliss Yoga Centre

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*महानारायण तेल: जोड़ों और नसों का आयुर्वेदिक रक्षक — दर्द पर प्रकृति की निर्णायक जीत*घुटनों का दर्द, कमर जकड़न, गर्दन की...
07/01/2026

*महानारायण तेल: जोड़ों और नसों का आयुर्वेदिक रक्षक — दर्द पर प्रकृति की निर्णायक जीत*

घुटनों का दर्द, कमर जकड़न, गर्दन की अकड़न और नसों की कमजोरी आम समस्या बन चुकी है। दर्द न सिर्फ शरीर को थकाता है, बल्कि मनोबल भी तोड़ देता है। ऐसे में आयुर्वेद का एक प्राचीन, परखा हुआ और आज भी उतना ही प्रभावी समाधान है — महानारायण तेल। यह केवल एक तेल नहीं, बल्कि वात रोगों के लिए संजीवनी माना जाता है।

#महानारायण तेल क्या है?

महानारायण तेल एक शास्त्रोक्त आयुर्वेदिक तैल है, जिसका वर्णन भैषज्य रत्नावली, चरक संहिता और शारंगधर संहिता जैसे ग्रंथों में मिलता है। इसका उपयोग विशेष रूप से वात दोष शमन, जोड़ों के दर्द, नसों की कमजोरी, गठिया और थकान में किया जाता है।

आयुर्वेद में इसे “बल्य, स्निग्ध और वातहर” बताया गया है।

महानारायण तेल किन-किन द्रव्यों से बनता है?

यह तेल एक-दो नहीं, बल्कि 50 से अधिक आयुर्वेदिक औषधियों से तैयार होता है। इसके प्रमुख घटक हैं:

तिल का तेल (Sesame Oil) – आधार द्रव्य, वातशामक

अश्वगंधा – नसों और मांसपेशियों को बल देता है

शतावरी – स्नायुओं को पोषण

दशमूल – सूजन और दर्द में प्रभावी

बला – कमजोरी और कंपन में उपयोगी

यष्टिमधु (मुलेठी) – सूजन कम करता है

चंदन, अगरु, देवदारु – शीतलता और रक्तसंचार बढ़ाने वाले

गोदुग्ध और गोघृत – गहराई तक पोषण पहुंचाने वाले

👉 यही कारण है कि इसे “बहु-द्रव्य सिद्ध तैल” कहा जाता है।

दर्द में महानारायण तेल कैसे काम करता है?

महानारायण तेल का प्रभाव केवल ऊपर-ऊपर नहीं, बल्कि त्वचा के रोमछिद्रों से होकर नसों और जोड़ों तक पहुंचता है।

🔬 कार्यविधि (Working Mechanism):

वात दोष को शांत करता है

सूखी नसों और जोड़ो में स्निग्धता लाता है

रक्तसंचार को बढ़ाता है

मांसपेशियों की जकड़न खोलता है

तंत्रिका तंत्र (Nervous System) को शांत करता है

👉 यही कारण है कि नियमित अभ्यंग (तेल मालिश) से दर्द की जड़ पर काम होता है।

महानारायण तेल के सिद्ध (Proved) लाभ

✔️ गठिया (Arthritis) में दर्द और सूजन में राहत
✔️ कमर दर्द, सायटिका और सर्वाइकल में उपयोगी
✔️ नसों की कमजोरी और झनझनाहट में लाभ
✔️ फ्रैक्चर के बाद की जकड़न में सहायक
✔️ वृद्धावस्था में जोड़ों की लचीलापन बढ़ाता है
✔️ थकान और शरीर टूटने में अत्यंत प्रभावी

महानारायण तेल का सही उपयोग कैसे करें?

हल्का गुनगुना करके प्रभावित स्थान पर मालिश करें

रात को सोने से पहले प्रयोग अधिक लाभकारी

सर्दियों में रोज़, गर्मियों में 3–4 दिन में एक बार

मालिश के बाद हल्की भाप या गुनगुना स्नान लाभ बढ़ाता है

दुर्लभ लेकिन सत्य तथ्य (Rare & Unknown Facts)

🔹 महानारायण तेल केवल दर्द नहीं, वातजन्य अनिद्रा में भी लाभ देता है
🔹 आयुर्वेद में इसे प्रसवोत्तर स्त्रियों के लिए विशेष रूप से अनुशंसित किया गया है
🔹 यह तेल वृद्धावस्था में कंपन (Tremors) कम करने में सहायक है
🔹 नियमित अभ्यंग से शरीर की Ojas शक्ति बढ़ती है
🔹 यह तेल केवल बाहरी नहीं, बल्कि मानसिक तनाव से उत्पन्न दर्द में भी असर दिखाता है

आयुर्वेदिक दृष्टिकोण

“स्नेहोऽनिलं हन्ति बलं पुष्णाति देहिनाम्।”
अर्थ: स्नेह (तेल) वात को नष्ट करता है और शरीर को बल प्रदान करता है।

निष्कर्ष

महानारायण तेल आधुनिक पेनकिलर नहीं, बल्कि दर्द के कारण पर काम करने वाली आयुर्वेदिक विरासत है। जहां रसायन दर्द को दबाते हैं, वहीं यह तेल शरीर को पुनः संतुलन की ओर ले जाता है। नियमित, सही और धैर्यपूर्ण प्रयोग से यह तेल जीवन को फिर से सहज, सक्रिय और दर्दमुक्त बना सकता है !

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23/12/2025








सरल आसन - गुणों की खान सेतुबन्ध आसन

योग किसी भी आयु में किया जा सकता है। इतना ही नहीं योग से आयु संबंधी समस्याओं पर भी नियंत्रण रखा जा सकता है। जानिए इस विचार को सेतुबंध आसन कैसे सिद्ध करता है। बढ़ती उम्र के साथ-साथ वृद्धावस्था तक पहुँचते-पहुँचते पाचन शक्ति का कमज़ोर होना, स्नायु प्रणाली का असंतुलित/अनियंत्रित होना, श्वास लेने में दिक्कत, विसर्जन क्रिया, रक्त्त संचार ठीक से न होना ऐसे सत्य हैं। जिनसे बच पाना असंभव नहीं तो मुश्किल आवश्यक है।

वृद्धावस्था में रक्त्त संचार ठीक रहे, हड्डियों-जोड़ों में लचक बनी रहे, पाचन क्रिया, श्वसन प्रणाली ठीक ढंग से काम करती रहे, दिल, दिमाग ठीक सुचारू रूप से काम करते रहें इन सब के लिये प्रतिदिन आवश्यक है कि इंसान अपने बहुमूल्य जीवन के कुछ क्षण योग को ज़रूर समर्पित करे।

योग में बहुत आसन हैं जिन्हें सहजता व क्षमतानुसार किये जाने से जीवन सुखमय बनाया जा सकता है।

हम आज जिस आसन के बारे में बताने जा रहे हैं उसका नाम है ‘‘सेतुबन्ध’’। संस्कृत के शब्द सेतु का हिन्दी अर्थ है ‘‘पुल’’ व बन्ध का अर्थ जोड़ना-बान्धना। जिस प्रकार पुल के माध्यम से कठिन रास्तों को पार किया जा सकता है। ठीक उसी तरह सेतु बन्ध आसन भी हमें कई प्रकार की शारीरिक व मानसिक कठिनाईयों से आसानी से पार करा देता है।

आसन एवं गुणकारी सेतुबन्धासन हर उम्र के स्त्री - पुरुष के लिये लाभकारी है। विधिः-

समतल भूमि पर चद्दर या मैट बिछा पीठ के बल लेट जायें।

बाज़ु सीधी कमर के पास, हथेलियाँ ज़मीन मी तरफ व अंगुलियाँ पैरों की ओर रखें।

दोनों घुटनों को मोड़ते हुये पैरों को नितम्बों के बराबर फासला बनाये रखें।

हाथों को ज़मीन की तरफ हल्का दबाते हुये नितम्ब, कमर व पीठ को यथाशक्ति ऊपर की तरफ उठायें।

इस स्थिति में आधा मिनट से एक मिनट तक रुकें व श्वास छोड़ते हुये धीरे-धीरे वापिस आयें। इस क्रम को 5 बार दोहरायें व तत्पश्चात् कुछ देर शवासन करें।

लाभः-

रक्त्त संचार बेहतर होता है।

सिर दर्द व कमर दर्द के लिये उत्तम, तनाव एवं अनिद्रा दूर करने में उपयोगी।

पाचन शक्ति बढ़ाता है।

मस्तिष्क शान्त रहता है।

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21/12/2025

21/12/2025

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20/12/2025

*सुबह खाली पेट डालें गुड़ खाने की आदत, शरीर की इन 6 समस्याओं से मिलेगा छुटकारा*

सुबह खाली पेट गुड़ का सेवन करने से पाचन से जुड़ी परेशानी दूर होती है। साथ ही कई अन्य समस्याओं से बचाव किया जा सकता है।
आयुर्वेद में गुड़ का इस्तेमाल औषधी के रूप में किया जाता है। इसके सेवन से शरीर की खई परेशानी होती है। यह चीनी का एक बेहतर विकल्प हो सकता है। ऐसे में चीनी से होने वाली समस्याओं से राहत दिलाने में गुड़ काफी लाभकारी हो सकता है। इसमें कई तरह के विटामिंस और मिनरल्स पाए जाते हैं, तो शरीर की कई परेशानी दूर करने में लाभकारी हो सकता है। कई हेल्थ एक्सपर्ट खाली पेट गुड़ का सेवन करने की सलाह देते हैं। खाली पेट गुड़ का सेवन करने से पचन को मजबूती मिलती है। साथ ही इससे शरीर में खून की कमी से भी राहत मिल सकता है। आज इस लेख में हम खाली पेट गुड़ का सेवन ( Jaggery Health benefits) करने के फायदों के बारे में जानेंगे।
खाली पेट गुड़ खाने के फायदे ( Eating Jaggery Empty Stomach )
1. पाचन को मजबूती
खाली पेट गुड़ का सेवन करने से वजन को कंट्रोल किया जा सकता है। साथ ही इससे पाचन को मजबूती मिलती है। दरअसल, इसमें फुक्रोज होता है, जो पाचन और कब्ज जैसी समस्याओं को कंट्रोल करने में प्रभावी हो सकता है। साथ ही इसके नियमित रूप से सेवन करने से शरीर में पाचन के एंजाइम एक्टिव होते हैं। इससे पेट फूलने जैसी परेशानी कम होती है।

2. शरीर में लाए एनर्जी
गुड़ का सेवन करने से शरीर को कार्बोहाइड्रेट प्राप्त होता है। इससे शरीर को भरपूर रूप से एनर्जी मिलती है। गुड़ का सेवन करने से शरीर में लंबे समय तक हो रही थकान दूर होती है। सुबह-सुबह गुड़ खाने से शरीर को एनर्जी मिलती है।

3. आयरन की कमी करे दूर
गुड़ में आयरन, फोलेट जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं, जो शरीर में रेल ब्लड सेल्स को कम करने में प्रभावी हो सकता है। खाली पेट नियमित रूप से गुड़ का सेवन करने से शरीर में आयरन की कमी को दूर किया जा सकता है।

4. जोड़ों में दर्द से छुटकारा
सुबह गुड़ का सेवन करने से जोड़ों में दर्द की परेशानी को दूर किया जा सकता है। यह गठिया में होने वाली अन्य समस्याओं से राहत दिलाने में प्रभावी है। दरअसल, सुबह के समय गुड़ खाने से शारीरिक और हड्डियों की संचरना बेहतर होती है, जिससे जोड़ों में होने वाले दर्द और सूजन की परेशानी को कम करता है।

5. ब्लड प्रेशर करे कंट्रोल
गुड़ में पोटैशियम और सोडियम पाया जाता है, जो शरीर में एसिड को कम करने में प्रभावी होता है। साथ ही इससे रेड ब्लड सेल्स स्वस्थ रहते हैं। रोजाना सुबह के समय 1 टुकड़ा गुड़ खाने से ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करने में मदद मिलती है।

6. पीरियड्स की परेशानी करे दूर
सुबह गुड़ का सेवन करने से पीरियड्स में होने वाली समस्याओं को कम किया जा सकता है। यह शरीर के दर्द और ऐंठन को कम करने में प्रभावी है। साथ ही यह ब्लड फ्लो को भी बेहतर करता है। ऐसे में पीरियड्स के दौरान सुबह के समय गुड़ का सेवन आपके लिए प्रभावी हो सकता है।

19/12/2025

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17/12/2025

17/12/2025

*मुलेठी – एक ऐसा नाम जिसे सुनते ही ज़बान पर मिठास सी घुल जाती है,,,,,।*

❤️
यह केवल स्वाद में ही नहीं, बल्कि अपने शीतल, बलवर्धक, रोगनाशक और संजीवनी गुणों के कारण प्राचीन आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति में एक प्रतिष्ठित स्थान रखती है।

मुलेठी की जड़ में इतनी औषधीय शक्तियां समाई हुई हैं कि इसे आयुर्वेद में कई उपचारों की मूल औषधि माना गया है। चलिए जानते हैं इस ‘मिठास भरे चमत्कार’ के अनसुने तथ्य और घर में आज़माए जाने वाले आयुर्वेदिक उपाय।

अज्ञात तथ्य,,,,,,,,,,
1. वात-पित्त का संतुलन बनाए,,,,
मुलेठी शीतल होती है और पित्त को शांत करती है, लेकिन विशेष बात यह है कि यह वात को भी नियंत्रित करती है।

2. धूम्रपान छोड़ने में सहायक,,,,,,
मुलेठी की डंडी को चबाने से धूम्र की लत धीरे-धीरे कम होती है। यह तृप्ति देती है और गले को राहत भी।

3. स्त्री रोगों में उपयोगी,,,,,,
मुलेठी को शतावरी व अशोक के साथ लिया जाए तो यह स्त्रीजनित हार्मोनल असंतुलन, मासिक धर्म की अनियमितता और गर्भाशय की दुर्बलता में चमत्कारी है।


4. स्वर (Voice) को सुंदर बनाए,,,,,
मुलेठी गायक, वक्ता और शिक्षकों के लिए अमृत समान है। स्वर को मधुर, स्पष्ट और ताकतवर बनाती है।

5. शरीर में प्राकृतिक स्टेरॉइड का निर्माण बढ़ाए,,,,,
मुलेठी की जड़ में उपस्थित ‘ग्लायसिरिज़िन’ (Glycyrrhizin) शरीर में कॉर्टिसोल हार्मोन के समान कार्य करता है, जिससे तनाव में राहत और सूजन में कमी आती है।

6. त्वचा रोगों में उपयोगी,,,,,,,
मुलेठी में मेलानिन निर्माण नियंत्रित करने की क्षमता होती है। इसका पाउडर दही या एलोवेरा के साथ चेहरे पर लगाने से झाइयां, मुंहासे, काले धब्बे दूर होते हैं।

घर में अपनाएं ये आयुर्वेदिक घरेलू नुस्खे,,,,,,
✅ 1. गला बैठा है या खांसी है ?
उपाय:

1/2 चम्मच मुलेठी चूर्ण + 1 चम्मच शहद

दिन में दो बार सेवन करें।
👉 लाभ: गले को शीतलता, बलगम शमन, स्वर सुधार

✅ 2. गैस्ट्रिक या अल्सर की समस्या
उपाय:

मुलेठी चूर्ण को दूध में मिलाकर उबालें।

रोज़ सुबह खाली पेट पिएं।

👉 लाभ: अम्लपित्त, जलन, गैस व पेट दर्द में लाभ..

✅ 3. तनाव या अनिद्रा
उपाय:

मुलेठी + अश्वगंधा + शंखपुष्पी का सम मिश्रण

एक चम्मच रात को सोने से पहले दूध के साथ

👉 लाभ: मानसिक शांति, नींद में सुधार

✅ 4. त्वचा पर दाग या धब्बे
उपाय:

मुलेठी पाउडर + दूध या गुलाबजल

15 मिनट चेहरे पर लगाएं, फिर धो लें

👉 लाभ: साफ, चमकदार और दाग-धब्बों रहित त्वचा

✅ 5. मौसमी सर्दी-जुकाम
उपाय:

मुलेठी + तुलसी + अदरक + शहद की काढ़ा

👉 लाभ: प्रतिरक्षा बढ़े, गला साफ हो, जुकाम नियंत्रित हो

आयुर्वेद में मुलेठी का विशेष उल्लेख,,,,,,,,,,
चरक संहिता में मुलेठी को “कंठ्य”, “रसायन” और “वृष्य” कहा गया है। इसका मतलब –

कंठ्य: जो गले के रोगों को ठीक करे..

रसायन: जो शरीर में नई ऊर्जा व कोशिकाएं बनाए

वृष्य: जो प्रजनन शक्ति को बढ़ाए....

सुश्रुत संहिता में इसे नेत्रज विकार, अग्निमांद्य, हृदय रोग और श्वास रोग में विशेष उपयोगी माना गया है।

सावधानियाँ (Precautions),,,,,,,,,,,
उच्च रक्तचाप वाले व्यक्ति सीमित मात्रा में लें

लंबे समय तक अत्यधिक सेवन से जलन या BP बढ़ सकता है

गर्भवती महिलाएं चिकित्सक की सलाह पर ही लें

निष्कर्ष,,,,,,,,,
मुलेठी एक सरल, सस्ती लेकिन अत्यंत शक्तिशाली औषधि है। चाहे वह गले की खराश हो, तनाव हो या पाचन की समस्या – यह हर घर के आयुर्वेदिक बॉक्स में होनी ही चाहिए।
जिस तरह से शहद में सबको जोड़ने की शक्ति है, वैसे ही मुलेठी भी एक ‘मधुर चमत्कार’ है जो शरीर, मन और त्वचा – तीनों को संवारने में सहायक है।

15/12/2025
29/11/2025

*खाने के बाद कुछ लोग गुड़ जरूर खाते हैं. बड़े बुजुर्ग मिठाई और चॉकलेट्स नहीं बल्कि गुड़ खाकर सेहतमंद रहते थे. जानिए खाने के बाद गुड़ खाने की सलाह क्यों दी जाती h

दादी-नानी के जमाने में लोग खाना खाने के बाद गुड़ जरूर खाते थे, लेकिन अब मार्केट में न जाने कितनी तरह की मीठी चीजें मिलने लगी हैं. यही वजह है कि आजकल के लोग न तो खुद गुड़ खाना पसंद करते हैं और न ही बच्चों को खिलाते हैं. हालांकि घर के बड़े-बुजुर्ग आज भी खाने के बाद गुड़ खाने की सलाह देते हैं. खाना खाने के बाद गुड़ का सेवन करने से कई फायदे मिलते हैं. गुड़ खाने में मीठा और काफी स्वादिष्ट होता है. इससे शरीर में आयरन की कमी पूरी होती है. खाने के बाद गुड़ खाने से पाचन में मदद मिलती है. इसके अलावा स्वास्थ्य संबंधी कई बीमारियों को भी गुड़ दूर भगाता है.
खाने के बाद क्यों खाते हैं गुड़
वैसे तो आप कभी भी गुड़ खा सकते हैं, लेकिन खाने के बाद गुड़ खाने से पाचन तंत्र मजबूत बनता है. इससे भोजन को पचाने में आसानी होती है. गुड़ में आयरन, कैल्शियम, फास्फोरस, पोटैशियम और विटामिन सी जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं. जो लोग रोजाना गुड़ खाते हैं उनका पेट स्वस्थ रहता है और चेहरे पर ग्लो भी आता है. बच्चों और बुजुर्गों को गुड़ जरूर खाना चाहिए.

गुड़ खाने के फायदे
1- पाचन में मदद करे- खाना खाने के बाद रोजाना गुड़ खाने से पाचन तंत्र मजबूत बनता है इससे पेट में गैस, बदहजमी और अपच की समस्या नहीं होती. गुड़ में पाए जाने वाले पोषक तत्व भोजन को पचाने में सहायता करते हैं. जो लोग खाने के बाद कुछ मीठा खाते हैं उन्हें अन्य चीजों की बजाय गुड़ खाना चाहिए.
2- हड्डियों को बनाए मजबूत- गुड़ खाने से शरीर को भरपूर कैल्शियम मिलता है. इससे हड्डियां मजबूत बनती हैं. बच्चों को गुड़ जरूर खिलाना चाहिए. खाने के बाद रोजाना गुड़ खाने से मांसपेशियों का भी दूर हो जाता है.
3- खून की कमी दूर- गुड़ आयरन का अच्छा सोर्स है. शरीर में खून की कमी को दूर करने के लिए गुड़ जरूर खाएं. इससे लाल रक्त कोशिकाएं बढ़ती है. हीमोग्लोबिन बढ़ाने के लिए भी गुड़ खाना चाहिए. गुड़ खाने से तुरंत एनर्जी भी मिल जाती है. भोजन के बाद गुड़ खाने से शरीर एक्टिव बनता है.
4- वजन घटाए- खाने के बाद गुड़ खाने से मोटापा भी कम होता है. गुड़ में भरपूर पोटैशियम पाया जाता है जो मेटाबॉलिज्म तेज बनाता है. खाने के बाद गुड़ खाने से काफी देर तक कुछ खाने की इच्छा नहीं होती है. वहीं गुड़ चीनी और अन्य मीठी चीजों के मुकाबले ज्यादा अच्छा है.
5- इम्यूनिटी बढ़ाए- गुड़ में जिंक और विटामिन सी भी पाया जाता है. जिससे इम्यूनिटी मजबूत बनती है. रोजाना गुड़ खाने से इम्यून सिस्टम मजबूत होता है. इससे शरीर बीमारियों से दूर रहता है. गुड़ खाने से शरीर में गर्मी बनी रहती है और सर्दी जुकाम का खतरा कम होता है.

29/11/2025

*Methidana - मेथी दाना*

MethiSeeds भारत की रसोई में मसालों की थाली अधूरी है अगर उसमें मेथी दाना न हो। यह छोटे-छोटे पीले दाने न सिर्फ स्वाद बढ़ाते हैं बल्कि आयुर्वेद में इन्हें स्वास्थ्य का अमृत कहा गया है। प्राचीन ग्रंथों में मेथी का उल्लेख अग्नि दीपक, बल्य, वात-कफ नाशक और स्तन्यवर्धक के रूप में मिलता है। यही कारण है कि आज भी दादी-नानी से लेकर आधुनिक आयुर्वेदिक चिकित्सक तक इसे प्राकृतिक औषधि मानते हैं।

📖 आयुर्वेद में मेथी का वर्णन

आयुर्वेद के अनुसार मेथी का रस कषाय-तिक्त (कड़वा-तीखा), गुण गुरु और स्निग्ध, वीर्य उष्ण और विपाक कटु माना गया है। इसका प्रभाव मुख्य रूप से वात और कफ दोष को संतुलित करने में होता है।

चरक संहिता में मेथी को दीपन (भूख बढ़ाने वाला) और पाचन (भोजन पचाने वाला) बताया गया है।

सुश्रुत संहिता में इसे शूलहर (दर्द निवारक) और वातहर कहा गया है।

भावप्रकाश निघंटु में मेथी को स्तन्यवर्धक (दूध बढ़ाने वाला), वात-कफ शमन और शक्ति वर्धक के रूप में वर्णित किया गया है।

👉 यानी आयुर्वेद में मेथी दाना सिर्फ एक मसाला नहीं बल्कि एक सम्पूर्ण औषधि है।

💎 मेथी दाना के पोषक तत्व

आधुनिक विज्ञान भी मानता है कि मेथी दाना पोषक तत्वों का खजाना है। इसमें पाया जाता है –

प्रोटीन और फाइबर की भरपूर मात्रा

आयरन, कैल्शियम और मैग्नीशियम

विटामिन A, C, B6 और फोलिक एसिड

एंटीऑक्सीडेंट और अमीनो एसिड

यही कारण है कि यह पाचन से लेकर हार्मोन संतुलन और हड्डियों तक के लिए फायदेमंद है।

🏠 घरेलू नुस्ख़े और प्रयोग विधि
1. पाचन शक्ति बढ़ाने में

रातभर भिगोए हुए मेथी दाने सुबह खाली पेट खाने से #पाचनशक्ति मज़बूत होती है और गैस, एसिडिटी कम होती है।

2. मधुमेह में उपयोगी

गर्म पानी में भिगोकर मेथी के दाने खाने से #ब्लडशुगर नियंत्रित रहता है। यह इंसुलिन संवेदनशीलता बढ़ाता है।

3. जोड़ों के दर्द में

मेथी दाने को भूनकर पाउडर बना लें। रोज़ सुबह गुनगुने पानी के साथ एक चम्मच लेने से #जोड़ोंकादर्द और सूजन कम होती है।

4. बालों की देखभाल में

मेथी दाने को पीसकर दही में मिलाएँ और बालों में पैक लगाएँ। यह #डैंड्रफ दूर करता है और बाल मज़बूत बनाता है।

5. स्तनपान कराने वाली माताओं के लिए

मेथी दाना का सेवन दूध की मात्रा बढ़ाता है। आयुर्वेद में इसे स्तन्यवर्धक कहा गया है।

6. वजन घटाने में सहायक

भिगोए हुए मेथी दाने सुबह सेवन करने से पेट देर तक भरा रहता है और #वजनकम करने में मदद मिलती है।

7. त्वचा रोगों में लाभकारी

मेथी दाने का पेस्ट चेहरे पर लगाने से #पिंपल्स और दाग-धब्बे कम होते हैं।

8. महिलाओं के हार्मोनल संतुलन में

मेथी दाना पीसी हुई गुड़ के साथ खाने से पीरियड्स की अनियमितता और #हार्मोनल असंतुलन कम होता है।

🍵 मेथी दाना का उपयोग कैसे करें?

मेथी पानी: रातभर भिगोए दाने सुबह पानी सहित सेवन करें।

मेथी पाउडर: भुनी हुई मेथी पीसकर चूर्ण बना लें और दही या शहद के साथ लें।

मेथी का तेल: बालों में लगाने और त्वचा रोगों में उपयोगी।

मेथी की सब्ज़ी/अचार: रोज़ाना भोजन में शामिल करने से भी लाभ होता है।

⚠️ सावधानियाँ

अत्यधिक मात्रा में मेथी का सेवन दस्त और पेट दर्द कर सकता है।

गर्भवती महिलाओं को चिकित्सक की सलाह से ही प्रयोग करना चाहिए।

ब्लड शुगर बहुत कम होने वाले मरीज बिना सलाह के न लें।

📌 निष्कर्ष

मेथी दाना हर घर में मौजूद वह औषधीय खजाना है, जो छोटी से छोटी बीमारी से लेकर बड़ी समस्याओं तक में असरदार है। आयुर्वेद में इसका वर्णन इसे और अधिक महत्वपूर्ण बना देता है। बस इसे सही मात्रा और सही तरीके से प्रयोग करें, और पाएँ स्वास्थ्य, सुंदरता और स्फूर्ति।

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