Homoeopathic Treatment

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14/07/2020

जेन्शियाना चिराता या स्वैर्टिया चिराता (चिराता) Gentiana Chirata or Swairtia Chirata (Chirata)
परिचय-
जेन्शियाना चिराता औषधि को किसी भी तरह के बुखार को रोकने के लिए या दूर करने के लिए बहुत उपयोगी माना जाता है। इसके अलावा भूख न लगना, एसिडिटी, जिगर का सही तरीके से काम न करना, पेट में गैस बनना आदि रोगों में भी ये औषधि लाभकारी मानी जाती है। विभिन्न रोगों के लक्षणों के आधार पर जेन्शियाना चिराता औषधि का उपयोग-
मन से सम्बंधित लक्षण-
हर समय मन में लेटे रहने की इच्छा होना, दिमाग का सही तरीके से काम ना करना जैसे लक्षणों में रोगी को जेन्शियाना चिराता औषधि देने से लाभ होता है।
सिर से सम्बंधित लक्षण -
सिर में ठण्डक सी महसूस होना, कनपटियों में हल्का-हल्का सा दर्द होना, जो धीरे-धीरे पूरे सिर में फैल जाता है आदि लक्षणों के आधार पर रोगी को जेन्शियाना चिराता औषधि का प्रयोग कराने से आराम आता है।
कान से सम्बंधित लक्षण -
कानों के अन्दर अजीब सी गुदगुदी सी महसूस होना जैसे लक्षण प्रकट होने पर रोगी को जेन्शियाना चिराता औषधि देने से लाभ होता है।
गले से सम्बंधित लक्षण -
गले के अन्दर बहुत तेज सा दर्द होना जो गर्म पानी पीने से कम हो जाता है, सूखी तंग करने वाली खांसी जैसे लक्षणों में जेन्शियाना चिराता औषधि का सेवन लाभदायक रहता है।
जीभ से सम्बंधित लक्षण -
जीभ पर पीले रंग की पतली सी परत जम जाना, जीभ का भारी लगना, बोलने में परेशानी होना आदि जीभ के रोगों के लक्षणों में रोगी को जेन्शियाना चिराता औषधि का प्रयोग कराने से आराम आता है।
पेट से सम्बंधित लक्षण -
पेट का फूल जाना, दाएं तरफ के गुर्दे में दर्द होना, बढ़े हुए जिगर और प्लीहा में दर्द होना, रोगी का मन ऐसा करना जैसे कि मांस और मक्खन आदि खाना, ये लक्षण अगर किसी व्यक्ति में नज़र आते है तो उसे जेन्शियाना चिराता औषधि का सेवन कराने से लाभ होता है।
पेशाब से सम्बंधित लक्षण -
पेशाब का रंग खून की तरह का होना, पेशाब करते समय पेशाब की नली में जलन होना आदि लक्षणों के आधार पर रोगी को जेन्शियाना चिराता औषधि देने से आराम आता है।
पुरूष से सम्बंधित लक्षण -
संभोग क्रिया करते समय अपने साथी को पूरी तरह से सन्तुष्ट ना कर पाना, लिंग में से हर समय थोड़ा-थोड़ा वीर्य निकलते रहना जैसे लक्षणों में रोगी को जेन्शियाना चिराता औषधि खिलाने से लाभ मिलता है।
बाहरीय अंग से सम्बंधित लक्षण -
शरीर के बाहर के अंगों में बहुत तेज दर्द होना, टांगों का बहुत ज्यादा कमजोर हो जाना, चलते समय परेशानी होना जैसे लक्षणों के आधार पर रोगी को जेन्शियाना चिराता औषधि का सेवन कराने से लाभ होता है।
बुखार से सम्बंधित लक्षण -
रोगी को काफी दिनो तक ठण्ड के साथ बुखार होने और गर्मी के कारण उल्टी होना, बुखार के बाद बहुत ज्यादा पसीना आना, बहुत तेज प्यास का लगना जैसे लक्षणो में जेन्शियाना चिराता औषधि का प्रयोग लाभदायक रहता है।
मात्रा-
रोगी को जेन्शियाना चिराता औषधि का मूलार्क या 3 से छठी शक्ति तक देना चाहिए।

07/06/2020

एडोनिस वर्नेलिस (Adonis Vernalis)

परिचय-
हृदय के लिए एडोनिस वर्नेलिस औषधि बहुत अधिक लाभदायक है। यह औषधि विशेषकर आमवात या इनफ्लुएंजा रोग या गुर्दे में सूजन के बाद, जब हृदय की पेशियों में चर्बी (फेट्टी डेजनिरेशन) हो जाती है तो एडोनिस वर्नेलिस औषधि बहुत लाभकारी है जिसके उपयोग से कई प्रकार के रोग ठीक हो जाते हैं।
यह औषधि नाड़ी की गति को नियमित करती है और हृदय की सिकुड़ने की शक्ति को भी बढ़ाती है तथा पेशाब की मात्रा को बढ़ाती है। हृदय में पानी भर जाने (कारडीएक ड्रोप्सी) के रोग को ठीक करने में यह औषधि बहुत उपयोगी है।
हृदय में अधिक कमजोरी होना, हृदय की कार्य करने की गति कम हो जाना तथा नाड़ी की गति कम हो जाना, छाती में पानी भरना, जलोदर रोग आदि रोगों को ठीक करने में एडोनिस वर्नेलिस औषधि बहुत उपयोगी है।
एडोनिस वर्नेलिस औषधि निम्नलिखित लक्षणों के रोगियों के रोग को ठीक करने में उपयोगी हैं-
सिर से सम्बन्धित लक्षण :- सिर में हल्कापन महसूस होना, सिर में दर्द का असर सिर के पिछले भाग से होते हुए कनपटियों से लेकर आंखों तक होना, उठते समय सिर को जल्दी-जल्दी घुमाने से या लेटते समय सिर में चक्कर आने लगता है, कानों में भनभनाहट की आवाज महसूस होती हो, खोपड़ी कसी हुई महसूस हो रही हो तथा आंखें फैली हुई हो आदि लक्षणों से पीड़ित रोगी का उपचार करने के लिए एडोनिस वर्नेलिस औषधि का उपयोग करना चाहिए।
मुंह से सम्बन्धित लक्षण :- मुंह लसलसा हो गया हो, जीभ गन्दी और पीली पड़ गई हो और जीभ में दर्द हो रहा हो तथा जलन हो रही हो और ऐसा महसूस हो रहा हो जैसे जीभ जल गई हो, ऐसे रोगी का उपचार करने के लिए एडोनिस वर्नेलिस औषधि का उपयोग करना फायदेमन्द होता है।
मूत्र से सम्बन्धित लक्षण :- पेशाब में तेलकण तैरते दिखाई दे रहे हों तथा उसमें कुछ अन्न के सामान कण तैरते हुए दिखाई दे रहे हों तो इस प्रकार के लक्षण को दूर करने के लिए एडोनिस वर्नेलिस औषधि का उपयोग करना लाभदायक होता है।
आमाशय से सम्बन्धित लक्षण :- तेज भूख लग रही हो, पेट में भारीपन महसूस होना, बेहोश होना तथा घर से बाहर जाने पर कुछ आराम मिल रहा हो तो ऐसे रोग को ठीक करने के लिए एडोनिस वर्नेलिस औषधि का उपयोग करना उचित होता है।
श्वास संस्थान से सम्बन्धित लक्षण :- सांस लेने की इच्छा बार-बार हो रही हो, छाती पर कोई भारी बोझा रखने जैसा अहसास हो रहा हो तो इस लक्षणों को दूर करने के लिए एडोनिस वर्नेलिस औषधि का उपयोग लाभकारी है।
नींद से सम्बन्धित लक्षण :- रोगी को बेचैनी हो रही हो तथा इसके साथ-साथ भयानक (डरावनी) सपने आ रहे हों तो ऐसे रोगी के रोग को ठीक करने के लिए एडोनिस वर्नेलिस औषधि का उपयोग करना चाहिए।
शरीर के बाहरी अंगों से सम्बन्धित लक्षण :- गर्दन में दर्द हो रहा हो, रीढ़ की हड्डी में अकड़न तथा दर्द हो रहा हो तो रोग को ठीक करने के लिए एडोनिस वर्नेलिस औषधि का उपयोग करना फायदेमन्द होता है।
हृदय रोग से सम्बन्धित लक्षण :- महाधमनी (एरोटीक) से आने वाले रक्त (खून) के वापसी में बहाव होना तथा द्विक्पर्दी (मिटरल), महाधमनी की सूजन (महाधमनी में सूजन), चर्बी होना (फेटी हर्ट), हृदय के अन्दरूनी भाग में सूजन (एण्डोकारडीटिस), हृदय में घाव के कारण सूजन (पेरीकोरडीटिस), हृदय के अगले भाग में दर्द होना, धड़कन में कष्ट तथा सांस लेने में परेशानी होना, शिरारक्त का अधिक संचित होना, दमा रोग, हृदय के भाग में चर्बी होना, हृदय के पेशियों में दर्द होना (माइकरडीटिस), हृदय की कार्य करने की गति अनियमित होना, हृदय में सिकुड़न तथा सिर में चक्कर आना, नाड़ी की गति तेज होना तथा अनियमित रूप से चलना। इन सभी रोगों को ठीक करने के लिए एडोनिस वर्नेलिस औषधि का उपयोग लाभकारी है।
एडोनिस वर्नेलिस औषधि का अन्य औषधियों से सम्बन्ध :- एडोनिस वर्नेलिस औषधि हृदय के कार्य शक्ति को बल प्रदान करता है तथा पेशाब की मात्रा को तेज करता है। चौथाई ग्रेन प्रतिदिन लेने पर या प्रथम दशमलव अवपेषण की 2 ग्रेन से 5 ग्रेन तक की मात्रा का उपयोग करने से धमनियों में दबाव बढ़ती है तथा धमनी प्रसार (डेस्टोल) भी बढ़ती है, इस औषधि के फलस्वरूप शिराओं में भरे हुए अधिक रक्त की मात्रा घट जाती है। इस प्रकार के लक्षण को दूर करने में डिजिटैलिस औषधि का उपयोग अच्छा है लेकिन इसका बार-बार उपयोग करने से अधिक लाभ नहीं होता है। इसलिए डिजिटैलिस, कैटेलिस, कनैवलेरिया तथा स्टोफैंयस औषधि से एडोनिस वर्नेलिस औषधि की तुलना कर सकते हैं।
मात्रा :-
एडोनिस वर्नेलिस औषधि की मूलार्क की 5 से 10 बून्दें का प्रयोग करना चाहिए।

14/11/2018

अगर बुखार मे पॅलेटलेटस़ कम रह जाये तो carica Q+ tinosporaQ दे

07/11/2018

जब बुखार ठीक ना हो रहा हो तो एक बार
gentiana chirata ज़रूर दें लाभ होगा

14/03/2018

अगर सायटिका के दर्द में जब सभी दवाओं के प्रयोग के बाद भी अगर फायदा न मिले तो एक बार nyctanthus Q का प्रयोग करके जरूर देखें लाभ अवश्य होगा

26/02/2018

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