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07/02/2022
1एचआईवीएचआईवी एक यौन संचारित रोग है, हालांकि यह एड्स से अलग है। एचआईवी के शुरुआती स्‍टेज में इसका पता नहीं चल पाता है और...
15/09/2018

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एचआईवी
एचआईवी एक यौन संचारित रोग है, हालांकि यह एड्स से अलग है। एचआईवी के शुरुआती स्‍टेज में इसका पता नहीं चल पाता है और व्‍यक्ति को इलाज करवाने में देर हो जाती है।

एचआईवी
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थकान
लगातार थकान रहना एचआईवी का लक्षण हो सकता है। अगर किसी व्‍यक्ति को पहले से ज्‍यादा थकान हो रही हो या हर समय उसे थकान का अहसास होता हो, तो उसे इसे गंभीरता से लेना चाहिए। यह एचआईवी का शुरुआती लक्षण हो सकता है।

थकान
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मांशपेशियों में खिंचाव
बिना कोई भारी-भरकम काम किए ही मांसपेशियों में थकान होना भी एचआईवी का लक्षण हो सकता है। आप कोई भी कड़ा शारीरिक काम नहीं करते, लेकिन हमेशा आपकी मांसपेशियां तनावग्रस्‍त और अकड़ी रहती हैं। तो इसे मामूली न समझें। यह एचआईवी का लक्षण हो सकता है।

मांशपेशियों में खिंचाव
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जोड़ों में दर्द व सूजन
उम्र के साथ-साथ जोड़ों में दर्द व सूजन होना सामान्‍य माना जाता है, लेकिन कहीं यह समय से पहले हो जाए, तो इस पर सोचने की जरूरत है। इसे हल्‍के में लेने की भूल न करें। यह एचआईवी का इशारा हो सकता है।

जोड़ों में दर्द व सूजन
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गला पकना
अगर आप पर्याप्‍त मात्रा में पानी पीते, तो आपको गला पकने की शिकायत हो सकती है। लेकिन, किसी व्‍यक्ति का गला अगर पर्याप्‍त मात्रा में पानी पीने के बाद भी पक रहा है, तो आपको इस पर विचार करने की जरूरत है। दरअसल, बिना किसी कारण गले में भयंकर खराश और पकन महसूस हो, तो यह एचआईवी का इशारा हो सकता है।

गला पकना
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सिर दर्द
अगर आपके सिर में हर समय दर्द रहता हो, यह दर्द अगर सुबह-शाम कम हो जाए और दिन में बढ़ जाए, तो यह एचआईवी का लक्षण हो सकता है।

सिर दर्द
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वजन कम होना
एचआईवी से ग्रस्‍त मरीज का वजन अचानक कम नहीं होता, रोजाना शरीर पर कुछ असर पड़ता रहता है। इससे वजन में कमी आती रहती है। अगर बीते दो महीनों में बिना किसी कोशिश के भी आपका वजन कम हो रहा है, तो आपको अपनी जांच करवानी चाहिए।

वजन कम होना
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रेशैज होना
त्‍वचा पर रेशेज किसी संक्रमण के कारण भी हो सकते हैं। लेकिन, शरीर में हल्‍के लाल रंग के चकत्ते पड़ना या रेशैज होना भी एचआईवी का लक्षण हो सकता है।

रेशैज होना
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बेवजह तनाव होना
थोड़ा बहुत तनाव होना सामान्‍य है। लेकिन, बिना किसी कारण के तनाव होना, जरा-जरा सी बात रोना आना, भी एचआईवी की ओर इशारा करता है।

बेवजह तनाव होना
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सूखी खांसी
बिना भयंकर खांसी के भी कफ बना रहना। लेकिन कफ में खून न आना। हमेशा मुंह का स्‍वाद बिगड़ा रहना आदि भी एचआईवी के लक्षण हो सकते हैं। इसके साथ ही हर समय मतली आना या फिर खाना खाने के तुरंत बाद उल्‍टी होना भी शरीर में एच आई वी के वायरस के संक्रमण का इशारा करते हैं।

सूखी खांसी
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जुकाम
यूं तो जुकाम किसी भी मौसम में हो सकता है लेकिन अगर आपको बार-बार अनुकूल मौसम में भी नाक बहते रहने की समस्‍या परेशान कर रही हैं तो यह भी एचआईवी का इशारा हो सकता है।

ब्‍लड कैंसर के पीछे ये कारण हो सकते हैं जिम्‍मेदारMar 28,2012   ब्‍लड कैंसर की कोशिकायें धीरे-धीरे रक्‍त में फैलती जाती ...
16/05/2018

ब्‍लड कैंसर के पीछे ये कारण हो सकते हैं जिम्‍मेदार
Mar 28,2012

ब्‍लड कैंसर की कोशिकायें धीरे-धीरे रक्‍त में फैलती जाती हैं।
ल्‍यूकीमिया, लिम्‍फोमा और मल्‍टीपल मायलोमा हैं इसके प्रकार।
बुखार, चक्‍कर आना, रात में पसीना होना हैं इसके लक्षण।
रेडियेशन, कीमोथेरेपी, केमिकल्‍स आदि के कारण होता है।
ब्लड कैंसर कोशिकाओं में उत्पवरिवर्तन के कारण शुरू होता है जो कि खून या अस्थि मज्जा (बोन मैरो) में होता है। यह खून में धीरे-धीरे फैलती है। रक्त कैंसर की ये कोशिकाएं समाप्त नहीं होती हैं, बल्कि और गंभीर हो जाती हैं। रक्त कैंसर के तीन प्रमुख रूप होते हैं : ल्यूकेमिया, लिम्फोमा और मल्टीपल मायलोमा। रक्त कैंसर किसी भी उम्र में हो सकता है लेकिन 30 साल के बाद रक्त कैंसर होने का खतरा ज्यादा होता है। ब्लड कैंसर होने पर हड्डियों और जोडों में दर्द होने लगता है। बुखार आना, चक्कार आना, बार-बार संक्रमण, रात को पसीना और वजन कम होना रक्त कैंसर के प्रमुख लक्षण हैं।

blood cancer in Hindi

रोग-प्रतिरोधक क्षमता का कम होना
ब्लड कैंसर होने का सबसे प्रमुख कारण शरीर की रोग-प्रतिरोधक (इम्यून सिस्टम) क्षमता का कम होना है। कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली कैंसर के फैलने का कारण होती है। शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली कमजोर होने के कारण शरीर में अन्य रोग जैसे गठिया या अर्थराइटिस हो जाता है जो कि ब्लड कैंसर को बढने में मदद करता है।



रेडिएशन के संपर्क में आना
एक्सर-रे या अन्य रेडिएशन किरणों के संपर्क में आने से रक्त कैंसर होता है। सीटी-स्कैन और रेडिएशन थेरेपी भी ब्लड कैंसर होने के खतरे को बढाते हैं। रेडिएशन की तेज किरणें ब्लड कैंसर के खतरे को दुगना कर देती हैं। रेडिएशन द्वारा किरणें ब्लड सेल्स में प्रवेश करके स्वस्थ कोशिकाओं को समाप्त कर देती हैं जिससे ब्लड कैंसर होता है।

कीमोथेरेपी
कीमोथेरेपी कराने के बाद रक्त कैंसर होने का खतरा बढ जाता है। लीवर कैंसर या ब्रेस्ट कैंसर का कीमोथेरेपी से इलाज कराने के बाद रक्त कैंसर होने का खतरा बढ जाता है, क्योंकि कीमोथेरेपी की दवाएं कैंसर के सेल्स और अन्य सेल्स (जैसे – खून और बाल के सेल्स में) में अंतर नहीं कर पाते हैं।

केमिकल्स के संपर्क में आना
आज का वतावरण बहुत ही प्रदूषित है जिसमें वातावरण में कई प्रकार के हनिकारक केमिकल मिले हुए हैं। कीटनाशकों (मच्छर और कॉक्रोच मारने की दवा) और नाइट्रेटयुक्त पानी का प्रयोग करने से ब्लंड कैंसर होने का खतरा बढता है। पेट्रोल और सिगरेट के धुएं से भी ब्लड कैंसर होने का खतरा होता है।

संक्रमण
एचआइवी व एड्स से ग्रस्त होने पर ब्लड कैंसर होने का खतरा बढ जाता है। क्योंकि एड्स का संक्रमण खून में ज्यादा होता है। इसके अलावा अगर आपको अन्य बीमारियां भी हैं तो उसके संक्रमण से रक्त कैंसर होने का खतरा रहता है।

blood cancer in Hindi

आनुवांशिक
अगर घर में किसी को रक्त कैंसर है तो उसके बच्चे को भी कैंसर होने का खतरा बना रहता है। ब्लड कैंसर शरीर में धीरे-धीरे कई सालों में फैलता है। इसलिए इसका प्रभाव घर में अन्य लोगों को खासकर बच्चों को ज्यादा हाता है।

उम्र बढना
बच्चों की तुलना में ज्यादा उम्र के लोगों को रक्त कैंसर होने की ज्यादा संभावना होती है। रक्त कैंसर 30 साल या उससे अधिक होने पर होता है। रक्त कैंसर के मरीज नौजवानों की तुलना में बूढे लोग ज्यादा हैं।

धूम्रपान
धूम्रपान करने से शरीर के अंदर निकोटीन प्रवेश करता है जो कि कई प्रकार के कैंसर के लिए उत्तररदायी होता है। धूम्रपान और तंबाकू का सेवन भी रक्त कैंसर के लिए उत्तरदायी होते हैं।

मानव शरीर की आहार नली आंत एक अहम हिस्सा होती है, जो हमारे पेट से गुर्दे तक फैली हुई होती है और इसके दो भागों में बांटा ग...
10/12/2017

मानव शरीर की आहार नली आंत एक अहम हिस्सा होती है, जो हमारे पेट से गुर्दे तक फैली हुई होती है और इसके दो भागों में बांटा गया है छोटी आंत और बड़ी आंत। मानव शरीर में छोटी आंत को पाचननांत्र, मध्यांत्र और क्षुद्रंत्र में विभाजित किया जाता है और बड़ी आंत को अंधात्र और बृहदान्त्र में बांटा गया है।
आंत की संरचना
हमारे शरीर में दो आंत होते हैं। ऐसा भी बोल सकते हैं कि आंत को दो भागों में विभाजित किया जाता है। जो छोटी आंत होती है वह भूरे – बैंगनी रंग की होती है और इस आंत का व्यास लगभग 35 मिलीमीटर तक का होता है और इसकी औसत लंबाई 6 से 7 मीटर तक की होती है। बड़ी आंत का रंग लाल होता है और यह छोटी आंत की अपेक्षा मोटी होती है, जिसकी लंबाई लगभग 1.5 मीटर तक होता है। आकार और उम्र के अनुसार मानव में अलग-अलग आकार की आंतें होती है।
आंत का कार्य
ल्यूमेन वह है जहां से हमारा पचा हुआ भोजन होकर गुजरता है और जहां से पोषक तत्व अवशोषित होते हैं। हमारी दोनों आंतें संपूर्ण आहार नली के साथ समान्य सरंचना का एक हिस्सा होती हैं और यह कई परतों से बनी हुई होती है। जब ल्यूमेन अंदर से बाहर की ओर आती है तो यह सद्दश प्रतीत होती है। ग्रथिल एपिथिलियम में आहार नली के साथ कोशिकाएं भी होती है। ये भोजन के मार्ग को चिकना करती है साथ में पाचन एंजाइम से सुरक्षा प्रदान करती है। विली मुकोसा के आच्छादन होते हैं और यह दुग्ध वाहिनी निहित होने के साथ आंत इस सतही क्षेत्र को बढ़ाने में सहायक होते हैं जो लसीका प्रणाली से साथ जुड़े हुए होते हैं। इसकी अगली परत पेशीय मुकोसा की होती है, जो एक कोमल मांसपेशी की परत होती है। यह हमारी आहार नली के साथ सतत क्रमाकुंचन और कार्यप्रणाली के चर्म बिंदु पर मदद करती है।
उपमुकोसा में तंत्रिकाएँ जैसे मेसनर का प्लेक्सस रक्त नलिका और श्लेषजन के साथ लोचदार फाइबर होता है, जो हमारी बढ़ी हुई क्षमता के साथ बढ़ती है। लेकिन साथ में हमारी आंत के आकर को बनाएं रखती है। इसके आसपास पेशीय एक्सटर्न होती है जो हमारी पची हुई सामग्री को आहार नली से बाहर निकालने में मदद करती है।अंत में सेरोसा होता है जो संयोजक टिश्यू से बना हुआ होता है तथा श्लेष्मा में आवृत होता है। इससे अन्य टिश्यू से आंत पर होने वाले घर्षण को रोका जा सकता है। बड़ी आंत में कई जीवाणु होते हैं जो मानव द्वारा विखंडित न कर पाने वाले अणुओं के साथ कार्य करते हैं। ये जीवाणु हमारी आंत के अंदर गैस को पैदा करने का काम करते हैं, जो विलोपन होने पर उदर वायु के रूप में गुदा के माध्यम से हमारे शरीर से बाहर निकल जाती है।
आंत में होने वाले रोग
हमारी आंत में होने वाले रोग इस प्रकार से है
1. आंतो में सूजन 2. आन्त्रावरोध 3. इलिटिस क्षुद्रांत्र का सूजन 4. बह्दान्त्र थोथ 5. कोहन का रोग 6. उदर गह्वर (पेट की गुहा)।

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