21/02/2026
رمضان المبارک रमजान के पवित्र अवसर पर अपने देशवासियो के नाम एक पैग़ाम —
रमज़ान का पैग़ाम: रहमत सबके लिए, फ़ज़्ल सब पर
ख़ुदा का फ़ैज़ आम है। रहमत आम है। सलामती सब पर हो।
उसकी रहमत किसी एक क़ौम, किसी एक मुल्क या किसी एक ज़माने तक महदूद नहीं।
क़ुरआन में अल्लाह तआला फ़रमाता है:
“ऐ लोगो! हमने तुम्हें एक मर्द और एक औरत से पैदा किया…”
(Quran, सूरह अल-हुजुरात 49:13)
और एक और मुक़ाम पर:
“ऐ लोगो! अपने रब की इबादत करो जिसने तुम्हें और तुमसे पहले लोगों को पैदा किया…”
(Quran, सूरह अल-बक़रह 2:21)
यानी पैग़ाम किसी एक गिरोह के लिए नहीं — “या अय्युहन्नास” — ऐ इंसानों! सब के लिए।
1️⃣ किस पारा और आयत में?
यह इंसानियत की बराबरी और रहमत-ए-आम का मज़मून:
पारा 26, सूरह अल-हुजुरात, आयत 13
पारा 1, सूरह अल-बक़रह, आयत 21
इन आयतों में साफ़ ऐलान है कि रब की रहमत और पैग़ाम तमाम इंसानों के लिए है।
2️⃣ अल्लाह की रहमत — बराबर बरसती है
सूरज सब पर बराबर उगता है।
बारिश खेत देखकर नहीं बरसती कि यह किस मज़हब का है।
हवा सांस लेते वक्त पहचान नहीं पूछती।
फल, फूल, अनाज, मेवे — यह सब उसकी इनायत के तोहफ़े हैं।
आम, खजूर, अनार, गेहूं, जौ — हर मुल्क में कुछ न कुछ ऐसी नेमतें मौजूद हैं जो वहां के मौसम और लोगों के मिज़ाज के मुताबिक़ हैं।
3️⃣ इंसानी जिस्म — एक जैसी बुनियाद
तिब्ब (चाहे वह यूनानी हो, आयुर्वेद हो या आधुनिक विज्ञान) यह मानता है कि
इंसान का जिस्म बुनियादी तौर पर एक ही निज़ाम पर चलता है —
दिल सबका धड़कता है,
ख़ून सबकी रगों में दौड़ता है,
दर्द सबको होता है,
और राहत सबको सुकून देती है।
यही तो रब की हिकमत है —
जिस्मानी निज़ाम में एकरूपता, ताकि रहमत भी सबके लिए एक जैसी हो।
4️⃣ मौसम, दुख, अकल — सब में एकरूपता
सर्दी सबको लगती है।
गर्मी सबको तपाती है।
भूख सबको लगती है।
और समझने की अकल — हर इंसान को दी गई है।
रमज़ान में जब हम रोज़ा रखते हैं, तो भूख हमें याद दिलाती है कि
रहमत का दरवाज़ा सबके लिए खुला है —
मगर एहसास और शुक्र अदा करना हमारा काम है।
🌿 तिब्ब और रब का रिश्ता
रब ने पहले मर्ज़ पैदा किया,
फिर उसके इलाज के लिए ज़मीन में जड़ी-बूटियां, फल, सब्ज़ियां और मेवे उगाए।
खजूर से इफ़्तार — यह सिर्फ़ सुन्नत नहीं, बल्कि तिब्बी हिकमत भी है।
शहद — क़ुरआन में इसे शिफ़ा कहा गया।
पानी — जिंदगी की अस्ल बुनियाद।
यानी रब की रहमत सिर्फ़ रूहानी नहीं, जिस्मानी भी है।
वह दुआ भी देता है, दवा भी देता है।
वह इबादत भी सिखाता है, सेहत का निज़ाम भी देता है।
📜 आज का पैग़ाम
इस रमज़ान में
नफ़रत कम करें,
शुक्र ज़्यादा करें।
याद रखिए —
अल्लाह ने किसी एक क़ौम पर एहसान नहीं किया,
उसकी रहमत “रब्बुल आलमीन” है — सारे जहानों के लिए।
रमज़ान मुबारक।
अल्लाह हम सब पर अपनी रहमत और करम की बारिश जारी और सारी रखे अमीन। राव असगर सहारनपुर 9358385096
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