09/02/2026
✨ नाभि : कुदरत की एक अद्भुत देन ✨
मानव शरीर केवल मांस और हड्डियों का ढांचा नहीं है, बल्कि यह प्रकृति और परमात्मा की एक अत्यंत सूक्ष्म एवं बुद्धिमान रचना है। हमारे शरीर का प्रत्येक अंग किसी न किसी उद्देश्य से जुड़ा है। इन्हीं अंगों में नाभि का विशेष महत्व बताया गया है।
🔹 गर्भ से जीवन की शुरुआत और नाभि
जब शिशु गर्भ में होता है, तब उसका सम्पूर्ण पोषण माँ से जुड़ी नाड़ी (नाल) के माध्यम से होता है, जो नाभि से जुड़ी रहती है। नौ महीनों तक वही नाभि शिशु के लिए भोजन, जल और जीवन का माध्यम बनती है। यही कारण है कि भारतीय मान्यताओं में नाभि को जीवन-केंद्र कहा गया है।
परंपरागत मान्यता यह भी कहती है कि मृत्यु के कुछ समय बाद तक नाभि क्षेत्र में गर्माहट बनी रहती है, क्योंकि यह शरीर का गहन केंद्र होता है।
🔹 नाभि और शरीर का संबंध
आयुर्वेद और योग परंपरा के अनुसार नाभि के आसपास कई नसों, धमनियों और ऊर्जात्मक केंद्रों का संगम होता है। इसे मणिपुर चक्र से जोड़ा जाता है, जो पाचन, ऊर्जा और शरीर की आंतरिक शक्ति से संबंधित माना जाता है।
इसी कारण से हमारे बुज़ुर्ग नाभि क्षेत्र की देखभाल को अत्यंत आवश्यक मानते थे।
🔹 नाभि में तेल लगाने की परंपरा
भारत में पीढ़ियों से यह परंपरा रही है कि नाभि में तेल या घी लगाया जाए। यह कोई तात्कालिक चमत्कार नहीं, बल्कि धीमी, नियमित और सहायक देखभाल का तरीका माना गया है।
लोक-अनुभव के अनुसार नाभि में तेल लगाने से:
शरीर की शुष्कता कम होती है
त्वचा और बालों की प्राकृतिक नमी बनी रहती है
ठंड से होने वाली जकड़न में आराम महसूस हो सकता है
पाचन तंत्र को हल्का बल मिलता है
शरीर में ऊर्जा का संतुलन बना रहता है
🔹 परंपरागत अनुभवों में बताए गए कुछ उपाय
⚪ सामान्य दुर्बलता व रूखी त्वचा
रात को सोने से पहले 3–5 बूंद शुद्ध घी या नारियल तेल नाभि में डालकर हल्के हाथों से चारों ओर फैला दें।
⚪ जोड़ों में जकड़न या घुटनों का दर्द
अरंडी के तेल से नाभि क्षेत्र में नियमित मालिश।
⚪ ठंड, कंपकंपी या नसों की जकड़न
सरसों के तेल से नाभि व आसपास हल्की मालिश।
⚪ त्वचा की देखभाल में सहायक
नीम तेल की कुछ बूंदें, केवल बाहरी प्रयोग के लिए।
👉 ये सभी उपाय लोक-परंपराओं और घरेलू अनुभवों पर आधारित हैं, न कि किसी चिकित्सकीय उपचार का विकल्प।
🔹 समझदारी जरूरी है
आज के समय में कई बीमारियाँ जीवनशैली, खान-पान और उम्र से जुड़ी होती हैं। आँखों की गंभीर समस्या, नसों की बीमारी या कोई भी दीर्घकालिक रोग होने पर डॉक्टर की सलाह अनिवार्य है। वैद कमल कुमार पता कमल पंसारी नजदीक बस स्टैंड सरदूलगढ़ फोन 9041800992