Krishna medicose & jiyyo mitra E Clinic Satna

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23/12/2025

खांसी के साथ बलगम आ रहा है? ये 3 बड़ी गलतियां तुरंत बंद करें !
खांसी के साथ अगर बलगम आ रहा है,
तो कुछ आम गलतियां इसे और बढ़ा सकती हैं 👇

❌ दूध, दही और ठंडी चीज़ें
❌ ज़्यादा चीनी और फ्राइड फूड
❌ बिना ज़रूरत एंटीबायोटिक

👉 सही खान-पान और सही जानकारी से
खांसी को naturally control किया जा सकता है।

💬 सही–गलत जानना है?
“डॉ अनुराग पयासी
बीएससी बी ए एम एस

📞 Appointment: 09630388303

23/12/2025

पित्ताशय (Gallbladder) — छोटा अंग, बड़ी भूमिका और पत्थरी का कड़वा सच!

मानव शरीर में पित्ताशय एक छोटा, नाशपाती के आकार का अंग है जो लीवर के ठीक नीचे, पेट के दाहिने हिस्से में स्थित होता है। इसकी लंबाई लगभग 3 से 4 इंच होती है। इसका मुख्य कार्य लीवर द्वारा बनाए गए पित्त (Bile) को संग्रहित करना और जरूरत पड़ने पर आंतों में छोड़ना है।

⚙️ पित्ताशय (Gallbladder) के मुख्य कार्य
पित्त का भंडारण: लीवर लगातार पित्त बनाता है, जिसे गालब्लैडर तब तक संभाल कर रखता है जब तक शरीर को जरूरत न हो。

पाचन में मदद: पित्त वसा (Fat) को छोटे-छोटे टुकड़ों में तोड़ता है (Emulsification), जिससे शरीर विटामिन A, D, E और K को सोख पाता है।

अपशिष्ट का निष्कासन: पित्त के जरिए शरीर बिलीरुबिन जैसे अपशिष्ट पदार्थों को बाहर निकालता है।

⚠️ मुख्य बीमारियाँ और गालब्लैडर स्टोन का सच
पित्ताशय से जुड़ी मुख्य बीमारियाँ इस प्रकार हैं:

पित्ताशय की पत्थरी (Gallstones)

पित्ताशय की सूजन (Cholecystitis)

पित्त नली में रुकावट (Choledocholithiasis)

नली का संक्रमण (Cholangitis)

गॉलस्टोन पैंक्रियाटाइटिस

पित्ताशय का कैंसर

क्या पत्थरी बिना सर्जरी निकल सकती है? किडनी स्टोन पेशाब के जरिए निकल सकते हैं, लेकिन गालब्लैडर की नली (Cystic Duct) बहुत पतली (3-4 mm) होती है। यहाँ से पत्थरी का निकलना लगभग असंभव है। यदि बड़ा पत्थर वहां फंस जाए, तो यह जानलेवा पीलिया या संक्रमण का कारण बन सकता है। यदि पत्थरी बड़ी है या दर्द दे रही है, तो 'लैप्रोस्कोपिक' विधि से पित्ताशय को निकालना ही सबसे सुरक्षित तरीका है।

✅ प्रमाणित बचाव और उपचार
यदि पत्थरी छोटी है या आप इससे बचना चाहते हैं, तो ये तरीके कारगर हैं:

फाइबर युक्त डाइट: फल, सब्जियां और साबुत अनाज पित्त को पतला रखने में मदद करते हैं।

स्वस्थ वसा (Healthy Fats): जैतून का तेल या ओमेगा-3 का सीमित सेवन पित्ताशय को खाली होने के लिए उत्तेजित करता है, जिससे 'स्लज' (कीचड़) नहीं जमता।

हल्दी (Curcumin): यह पित्त के प्रवाह को सुचारू बनाने में मदद करती है।

कॉफी का सेवन: शोध बताते हैं कि सीमित मात्रा में कॉफी पीने से पत्थरी का खतरा कम हो सकता है।

नींबू और गुनगुना पानी: सुबह खाली पेट नींबू पानी पित्त को पतला करता है और नए स्टोन बनने से रोकता है।

त्रिफला चूर्ण: रात को गुनगुने पानी के साथ लेने से पाचन सुधरता है और पित्त संतुलन में आता है।

सेब का सिरका: कुछ अध्ययनों के अनुसार यह पित्त को पतला कर दर्द में राहत दे सकता है।

🤫 दुर्लभ और अज्ञात तथ्य
बिना गालब्लैडर के जीवन: सर्जरी के बाद लीवर सीधे आंत में पित्त छोड़ना शुरू कर देता है और इंसान सामान्य जीवन जी सकता है।

तेजी से वजन घटाना: क्रैश डाइटिंग करने वालों में पत्थरी बनने का खतरा सबसे ज्यादा होता है क्योंकि लीवर अधिक कोलेस्ट्रॉल छोड़ता है।

'4 F' का फॉर्मूला: Female (महिला), Fat (वसा), Forty (40 की उम्र), Fertile (प्रजनन क्षमता)—इन महिलाओं में खतरा पुरुषों से दोगुना होता है।

पित्त रिसाइकिलिंग: पित्ताशय जो पित्त छोड़ता है, उसका 95% हिस्सा शरीर फिर से सोख लेता है। यह 'एंटरोहेपेटिक सर्कुलेशन' दिन में 2 से 10 बार तक हो सकता है।

ऐंटीबायोटिक दवाइयाँ वायरस पर नहीं, सिर्फ़ बैक्टीरिया पर असर करती हैं। इसलिए जब किसी को सर्दी, ज़ुकाम या वायरल बुखार होता...
11/12/2025

ऐंटीबायोटिक दवाइयाँ वायरस पर नहीं, सिर्फ़ बैक्टीरिया पर असर करती हैं। इसलिए जब किसी को सर्दी, ज़ुकाम या वायरल बुखार होता है, तो ऐंटीबायोटिक्स लेने का कोई फायदा नहीं होता। बल्कि अनावश्यक ऐंटीबायोटिक शरीर में “रेज़िस्टेंस” पैदा कर देती है, जिससे भविष्य में असली बैक्टीरियल संक्रमण होने पर दवाइयाँ कम असर करने लगती हैं। यही कारण है कि डॉक्टर केवल तब ही ऐंटीबायोटिक देते हैं जब बैक्टीरिया से लड़ने की ज़रूरत हो। दवा सही बीमारी पर ही काम करती है — वरना नुकसान करती है।

बैक्टीरिया एक सेल वाले जीव होते हैं जिनपर ऐंटीबायोटिक सीधा हमला करके उन्हें मार देती है या बढ़ने से रोक देती है। लेकिन वायरस जीवित सेल में घुसकर उसे ही अपना उत्पादन केंद्र बना लेते हैं, इसलिए उन पर ऐंटीबायोटिक काम नहीं कर सकती। वायरस के लिए “एंटीवायरल” दवाइयाँ होती हैं, जो अलग तरह से काम करती हैं । एवं एंटीबायोटिक का प्रयोग बिना चिकित्सक सलाह के सेवन न करे एवं जितने दिन के लिए लिखा गया हो उतने दिन सेवन करे ।

05/12/2025
डिप्लोपिया क्या है?डिप्लोपिया का अर्थ है एक ही वस्तु के दो प्रतिबिम्ब देखना। यह अस्थायी या स्थायी हो सकता है, और एक आँख ...
30/11/2025

डिप्लोपिया क्या है?

डिप्लोपिया का अर्थ है एक ही वस्तु के दो प्रतिबिम्ब देखना। यह अस्थायी या स्थायी हो सकता है, और एक आँख (मोनोकुलर डिप्लोपिया) या दोनों आँखों (बाइनोकुलर डिप्लोपिया) को प्रभावित कर सकता है।

🔹 प्रकार

1. मोनोक्यूलर डिप्लोपिया

केवल एक आँख में दोहरी दृष्टि

कारण: कॉर्निया संबंधी समस्याएँ, मोतियाबिंद, लेंस का विस्थापन, या अपवर्तक त्रुटियाँ

2. बाइनोक्यूलर डिप्लोपिया

दोहरी दृष्टि केवल तभी होती है जब दोनों आँखें खुली हों

एक आँख बंद होने पर गायब हो जाती है

कारण: आँख की मांसपेशियों में असंतुलन, तंत्रिका पक्षाघात, थायरॉइड नेत्र रोग, आघात

🔹 कारण

आँखों से संबंधित: मोतियाबिंद, केराटोकोनस, दृष्टिवैषम्य, सूखी आँखें

तंत्रिका संबंधी: कपाल तंत्रिका पक्षाघात (III, IV, VI), मल्टीपल स्क्लेरोसिस

मांसपेशियों से संबंधित: मायस्थेनिया ग्रेविस, थायरॉइड रोग, नेत्र रोग

मस्तिष्क संबंधी: स्ट्रोक, ब्रेन ट्यूमर, सिर में चोट ।
कुछ विटामिन्स की कमी जैसे बी 1, बी 12,जिंक इत्यादि

🔹 लक्षण

दो ओवरलैपिंग या अगल-बगल की छवियाँ देखना

सिरदर्द

आँखों में तनाव

दोहरी दृष्टि को कम करने के लिए सिर को झुकाना दृष्टि
बीमार सा लगना
कमजोरी

🔹 प्रबंधन

किसी विशेषज्ञ नेत्र चिकित्सा परामर्श
के बाद
अंतर्निहित कारण का उपचार (जैसे, मोतियाबिंद की सर्जरी, अपवर्तक त्रुटि का सुधार)

छवियों को संरेखित करने के लिए प्रिज्म चश्मा

आँखों पर पट्टी बाँधना (अस्थायी राहत)

भेंगापन सर्जरी (लगातार मांसपेशियों में असंतुलन के
लिए)
और आज के परिवेश में सबसे महत्वपूर्ण मोबाइल और टेलीविजन का उपयोग कम करे ( स्क्रीन टाइम )

अचानक होने पर तत्काल चिकित्सा सहायता (संभावित स्ट्रोक या तंत्रिका संबंधी समस्या)
कुछ जांच भी करनी पर सकती है । जैसे सीटी स्कैन या एम आर आई , और रेटीना जांच आदि ।

डॉ अनुराग पयासी
बीएससी,बी ए एम एस ,सी एच डबलू , ए एल एस, आई टी एल एस
अल्टरनेटिव एवं हॉलिस्टिक हेल्थ केयर प्रैक्टिशनर
कृष्णा मेडिकोज एवं जियो मित्र ई क्लिनिक शॉप नो 2 आदित्य मेरिज गार्डन महादेवा रोड धवारी
096303 88303

केला—जिसे आयुर्वेद में कदली फल कहा गया है—भारत के सबसे प्राचीन और श्रेष्ठ पोषक फलों में से एक है। यह सिर्फ एक फल नहीं, ब...
28/11/2025

केला—जिसे आयुर्वेद में कदली फल कहा गया है—भारत के सबसे प्राचीन और श्रेष्ठ पोषक फलों में से एक है। यह सिर्फ एक फल नहीं, बल्कि एक ऊर्जा-पोषण-उपचार त्रिवेणी है। आयुर्वेद के अनुसार कदली फल मधुर, गुरु, शीतल, बल्य, पित्त-शामक, वात-नाशक और ओज-वर्धक होता है। यही कारण है कि इसे “सर्वगुण सम्पन्न फल” कहा गया है।

यह अत्यधिक सस्ता, आसानी से उपलब्ध और हर आयु-समूह के लिए सुरक्षित माना जाता है। खासकर बच्चों, छात्रों, एथलीट्स, बुजुर्गों, कमजोर व्यक्तियों, एनीमिया और पाचन की कमजोरी वाले लोगों के लिए #केला प्रकृति का तुरंत ऊर्जा देने वाला सुपरफूड है।

🟡 #कदली फल (Banana) Ayurveda में क्यों खास?
1️⃣ तुरंत ऊर्जा का स्रोत

केला में ग्लूकोज़, फ्रुक्टोज, सुक्रोज जैसे प्राकृतिक शर्कराएँ होती हैं, जो तुरंत ऊर्जा देती हैं। इसलिए इसे smart energy booster कहा जाता है।
आयुर्वेद कहता है—
✦ “मधुर-रस बलं ददाति”—मधुर रस शरीर को शक्ति देता है।

2️⃣ पित्त शांत करने का प्राकृतिक उपाय

केला अपने “शीत-वीर्य” गुण के कारण पेट की जलन, अम्लपित्त और एसिडिटी को शांत करता है।
जो लोग चाय, कॉफी या मसालेदार भोजन से जलन महसूस करते हैं—वे प्रतिदिन 1 केला खाने से आराम पा सकते हैं।

3️⃣ पाचन शक्ति के लिए अमृत समान

इसमें मौजूद घुलनशील फाइबर (pectin) मल त्याग को नियन्त्रित करता है।
— कब्ज में राहत
— दस्त में स्थिरता
— आंतों का पोषण
केला दोनों स्थितियों में लाभकारी माना जाता है।

4️⃣ हड्डियों और मांसपेशियों के लिए संजीवनी

केले में पोटैशियम, मैग्नीशियम और विटामिन B6 अच्छी मात्रा में होते हैं।
✔ मांसपेशियों के खिंचाव रोकता है
✔ हड्डियों को मजबूत करता है
✔ शरीर में इलेक्ट्रोलाइट संतुलन बनाए रखता है

🍌 कदली फल के Top 10 आयुर्वेदिक लाभ और घरेलू नुस्खे

हर नुस्खा 3–4 पंक्तियों में, प्रमाणिक और उपयोगी:

⭐ 1. पाचन सुधारने वाला कदली + काला नमक

हल्की गैस, कब्ज या अपच हो तो केले पर चुटकीभर काला नमक डालकर खाएँ।
यह आमपित्त को शांत करता है और अग्नि को संतुलित करता है।

⭐ 2. तुरंत ऊर्जा के लिए Banana Milk Shake (बिना शक्कर)

थकावट, कमजोरी और एनीमिया में केला + हल्का गुनगुना दूध अद्भुत बल देता है।
यह मांसपेशियों के लिए श्रेष्ठ पोषक माना जाता है।

⭐ 3. अल्सर और जलन में केला + मिश्री

केले के साथ थोड़ा मिश्री लेने से पेट की जलन तुरंत शांत होती है।
यह पेट की आंतरिक परत को soothing effect देता है।

⭐ 4. ब्लड प्रेशर नियंत्रित—केला + नारियल पानी

दोनों पोटैशियम-समृद्ध हैं, जिससे हाई BP में वरदान जैसे काम करते हैं।
प्रतिदिन सुबह यह संयोजन प्राकृतिक दवा की तरह असर करता है।

⭐ 5. वायरल कमजोरी में Banana + शहद

शहद और केला मिलकर शरीर में ओज बढ़ाते हैं और रोग प्रतिरोधक क्षमता सुधारते हैं।

⭐ 6. नींद न आने में केला + गर्म दूध

केले में ट्रिप्टोफैन और दूध में मेलाटोनिन—दोनों मिलकर गहरी नींद लाते हैं।
तनाव और दिमाग की थकान मिटाने में श्रेष्ठ योग।

⭐ 7. खून की कमी में Banana + तिल

तिल के कैल्शियम और केले के फोलेट मिलकर खून की गुणवत्ता सुधारते हैं।
महिलाओं और छात्रों के लिए अत्यंत लाभकारी।

⭐ 8. एथलीट्स के लिए Banana Electrolyte Drink

केला + नींबू पानी + चुटकी सेंधा नमक = 100% प्राकृतिक स्पोर्ट्स ड्रिंक।
थकान को तुरंत दूर करता है।

⭐ 9. त्वचा चमकाने के लिए Banana Face Pack

पका केला + दही मिलाकर चेहरे पर लगाएँ।
त्वचा को नमी, निखार और softness देता है।

⭐ 10. आंतों की सफाई में Banana Morning Detox

सुबह खाली पेट 1–2 केले खाने से आंतों की सफाई होती है।
यह प्रकृति का gentle cleansing formula है।

🍌 कब नहीं खाना चाहिए केला? (महत्वपूर्ण सलाह)

✔ रात में देर से
✔ बहुत गाढ़े बलगम वाले लोगों को सावधानी
✔ बहुत अधिक मात्रा में खाने से heaviness

🌟 केले के Rare, Unknown but True Ayurveda Facts

🔸 केला गर्भवती महिलाओं के लिए गर्भ-पोषण फल माना गया है।
🔸 आयुर्वेद के अनुसार केला फल “हृदय को स्थिरता देने वाला फल” है।
🔸 यह शरीर में सेरोटोनिन प्राकृतिक रूप से बढ़ाता है, जिससे मूड अच्छा होता है।
🔸 केले के पत्ते प्राचीन काल में भोजन परोसने के लिए इसलिए उपयोग होते थे क्योंकि इनमें एंटीबैक्टीरियल गुण पाए जाते हैं।

🟢 निष्कर्ष

केला सच में प्रकृति का सबसे सम्पूर्ण, सरल, सुलभ और शक्तिदायक फल है।
आयुर्वेद इसे न सिर्फ भोजन बल्कि “बलेय और ओज-वर्धक औषधि” कहता है।

अगर इसे सही समय, सही मात्रा और सही संयोजन के साथ लिया जाए तो यह—
✦ पाचन
✦ ऊर्जा
✦ रक्त
✦ मांसपेशियाँ
✦ दिल
✦ मस्तिष्क
सबकी सेहत को उन्नत करता है।

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20/11/2025

ऑनलाइन (टेलीमेडिसिन)परामर्श के लिए संपर्क करे 963388303
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मधुमेह एक ऐसी स्थिति है जिसमें रक्त शर्करा (ग्लूकोज) का स्तर बहुत अधिक हो जाता है, क्योंकि शरीर पर्याप्त इंसुलिन नहीं बन...
14/11/2025

मधुमेह एक ऐसी स्थिति है जिसमें रक्त शर्करा (ग्लूकोज) का स्तर बहुत अधिक हो जाता है, क्योंकि शरीर पर्याप्त इंसुलिन नहीं बनाता या उसका सही उपयोग नहीं करता। सावधानी के तौर पर, स्वस्थ आहार लें, नियमित व्यायाम करें, रक्त शर्करा के स्तर की नियमित जांच करें और अपने डॉक्टर से परामर्श करते रहें।
मधुमेह क्या है?
मधुमेह एक दीर्घकालिक बीमारी है जिसमें शरीर भोजन से मिली शर्करा (ग्लूकोज) को ऊर्जा के रूप में इस्तेमाल नहीं कर पाता।
ऐसा इसलिए होता है क्योंकि अग्न्याशय पर्याप्त इंसुलिन नहीं बना पाता या शरीर की कोशिकाएं इंसुलिन के प्रति प्रतिक्रिया नहीं करतीं।
इंसुलिन रक्त शर्करा को कोशिकाओं में ले जाने का काम करता है, लेकिन इसके बिना, शर्करा रक्त में जमा हो जाती है और समय के साथ गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं पैदा कर सकती है, जैसे हृदय रोग, गुर्दे की क्षति और आंखों की समस्याएं।
क्या सावधानी रखनी चाहिए?
स्वस्थ आहार:
संतुलित और पौष्टिक भोजन लें।
साबुत अनाज, फल, सब्ज़ियां और प्रोटीन को अपनी डाइट में शामिल करें।
मीठे पेय, प्रोसेस्ड फूड, सफेद चावल और ब्रेड जैसी चीजों का सेवन सीमित करें।
नियमित व्यायाम:
नियमित रूप से शारीरिक गतिविधि करें।
व्यायाम रक्त शर्करा को नियंत्रित करने में मदद करता है।
नियमित जांच:
अपने रक्त शर्करा के स्तर की नियमित रूप से निगरानी करें।
डॉक्टर के पास नियमित जांच के लिए जाएं और सलाह के अनुसार अपने मूत्र की भी जांच कराएं।
अन्य सावधानियां:
धूम्रपान से बचें और शराब का सेवन सीमित करें।
अपने वजन को नियंत्रित रखें।
अपनी दवाओं को डॉक्टर के निर्देशानुसार ही लें।
अपने पैरों और आंखों का विशेष ध्यान रखें और किसी भी समस्या के लिए तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
और पैरों में हल्की चोट भी लगे तो उसका ध्यान रखे नहीं आपके पैर भी काटने पर सकते है अपना शुगर 120 तक कंट्रोल रखे और जांच करें ।

ऑस्टियोमाइलाइटिस (Osteomyelitis) एक हड्डी का संक्रमण है, जो आमतौर पर बैक्टीरिया या फंगस के कारण होता है। यह या तो रक्तप्...
12/11/2025

ऑस्टियोमाइलाइटिस (Osteomyelitis) एक हड्डी का संक्रमण है, जो आमतौर पर बैक्टीरिया या फंगस के कारण होता है। यह या तो रक्तप्रवाह के माध्यम से फैल सकता है या घाव से सीधे हड्डी में प्रवेश कर सकता है। इसका मुख्य उपचार एंटीबायोटिक दवाओं के ज़रिए किया जाता है, और गंभीर मामलों में सर्जरी की भी आवश्यकता हो सकती है।
ऑस्टियोमाइलाइटिस का इलाज
एंटीबायोटिक दवाएं: संक्रमण के प्रकार के आधार पर डॉक्टर एंटीबायोटिक्स निर्धारित करते हैं। गंभीर मामलों में, यह दवाएं कई हफ्तों तक नस के माध्यम से दी जा सकती हैं, जिसके बाद मौखिक एंटीबायोटिक दवाएं दी जाती हैं।
सर्जरी: यदि संक्रमण गंभीर है या हड्डी को स्थायी नुकसान हुआ है, तो संक्रमित हिस्से को हटाने के लिए सर्जरी की आवश्यकता हो सकती है।
अन्य दवाएं: दर्द और सूजन को कम करने के लिए डॉक्टर दर्द निवारक और मल्टीविटामिन भी लिख सकते हैं।
धूम्रपान छोड़ना: धूम्रपान से ठीक होने की प्रक्रिया धीमी हो सकती है, इसलिए धूम्रपान छोड़ना उपचार में सहायक होता है।
स्वस्थ जीवनशैली: उपचार के दौरान स्वस्थ और पौष्टिक आहार लेना और उन गतिविधियों से बचना महत्वपूर्ण है जो संक्रमित हड्डी पर दबाव डालती हैं।
ज़रूरी बातें
ऑस्टियोमाइलाइटिस के लक्षणों को पहचान कर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना ज़रूरी है, क्योंकि अगर इसका इलाज न किया जाए तो यह हड्डी को स्थायी रूप से नुकसान पहुंचा सकता है । जिससे उस अंग को काट कर अलग भी करना पड़ सकता है।

फाइब्रोस्कैन एक गैर-आक्रामक(नॉन इनवेसिव), अल्ट्रासाउंड-आधारित परीक्षण है जो लिवर की कठोरता और वसा (फाइब्रोसिस और स्टेटोस...
12/11/2025

फाइब्रोस्कैन एक गैर-आक्रामक(नॉन इनवेसिव), अल्ट्रासाउंड-आधारित परीक्षण है जो लिवर की कठोरता और वसा (फाइब्रोसिस और स्टेटोसिस) को मापता है। यह लिवर की क्षति का मूल्यांकन करने के लिए किया जाता है, और इसके फायदों में लिवर की बीमारी की प्रगति की निगरानी करना, बायोप्सी जैसे आक्रामक परीक्षणों की तुलना में अधिक सुरक्षित विकल्प प्रदान करना और तत्काल परिणाम देना शामिल है।
फाइब्रोस्कैन क्या है?
यह एक गैर-आक्रामक (Non-invasive) जांच है, जिसका मतलब है कि इसमें त्वचा को काटा या सुई नहीं लगाई जाती है।
यह अल्ट्रासाउंड तकनीक का उपयोग करके लिवर की कठोरता को मापता है।
लिवर में किसी भी तरह की क्षति या निशान (फाइब्रोसिस) के कारण वह कठोर हो जाता है, और फाइब्रोस्कैन इसकी कठोरता को मापता है।
यह लिवर में वसा की मात्रा (स्टेटोसिस) का भी आकलन कर सकता है।
इसके फायदे
गैर-आक्रामक: लिवर बायोप्सी की तुलना में यह एक सुरक्षित विकल्प है, जिसमें कोई आक्रामक प्रक्रिया शामिल नहीं है।
त्वरित और दर्द रहित: यह एक तेज और दर्द रहित प्रक्रिया है, जिससे तत्काल परिणाम मिलते हैं।
लिवर की क्षति का आकलन: यह फाइब्रोसिस (लिवर में निशान) और स्टेटोसिस (लिवर में वसा) की गंभीरता को निर्धारित करने में मदद करता है।
निगरानी में सहायक: यह लिवर की बीमारी (जैसे हेपेटाइटिस, फैटी लिवर और सिरोसिस) की प्रगति की निगरानी करने में मदद करता है।
सूचित निर्णय लेने में मदद: यह डॉक्टरों को लिवर की स्थिति के आधार पर उचित उपचार और स्वास्थ्य निर्णय लेने में मदद करता है।

Address

Near Maruti Patrol Pump Infront Of Aditya Marriage Garden Mahadeva Road , Dhawari Satna
Satna
485001

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