Astrology and Palmistry

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तुलसी को हिंदू धर्म में देवी के रूप में पूजा जाता है। पुराणों के अनुसार जिस घर के आंगन में तुलसी होती है वहां कभी अकाल म...
25/12/2016

तुलसी को हिंदू धर्म में देवी के रूप में पूजा जाता है। पुराणों के अनुसार जिस घर के आंगन में तुलसी होती है वहां कभी अकाल मृत्यु या शोक नहीं होता है। जिस घर में तुलसी का पौधा लगा होता है उस घर पर कभी बिजली नहीं गिरती ,माना जाता है कि तुलसी के प्रतिदिन दर्शन और पूजन करने से पाप नष्ट हो जाते हैं तथा मोक्ष की प्राप्ति होती है। भगवान विष्णु जी की पूजा में तुलसी का सर्वाधिक प्रयोग होता है। तुलसी जी की पूजा कर मनुष्य अधिक से अधिक फल पा सकते हैं:
आज 25 दिसंबर यानी तुलसी दिवस है इसलिए बजाए कोई अंग्रेजीयत के त्यौहार क्रिसमस की पींपड़ी बजाने के हम अपनी संस्कृति को याद करें और तुलसी का पूजन करें

महाप्रसाद जननी, सर्व सौभाग्यवर्धिनी
आधि व्याधि हरा नित्यं, तुलसी त्वं नमोस्तुते।।
देवी त्वं निर्मिता पूर्वमर्चितासि मुनीश्वरैः
नमो नमस्ते तुलसी पापं हर हरिप्रिये।।

छविंद्र K.अवस्थी
"राशी" (हस्तरेखा एवं तंत्र समाधान)
7742208700

.....हस्तरेखा विज्ञान में दुर्घटना के बहुत से संकेत होते हैं लेकिन कुछ विशेष संकेतों का अध्ययन करने से हम व्यक्ति के जीव...
25/11/2016

.....हस्तरेखा विज्ञान में दुर्घटना के बहुत से संकेत होते हैं लेकिन कुछ विशेष संकेतों का अध्ययन करने से हम व्यक्ति के जीवन में होने वाली भीषण दुर्घटनाऔ की भविष्यवाणी कर सकते हैं इनके स्पष्ट संकेत शनि पर्वत, हृदय रेखा ,और जीवन रेखा पर निहित होते हैं आज जिन चिन्हों के बारे में मैं आपको बताने जा रहा हूं वे गंभीर दुर्घटनाओं के संकेत होते हैं जिन से व्यक्ति को अधिक अत्यधिक गंभीर चोट अथवा शारीरिक हानि के संकेत मिलते हैं
--शनि पर्वत से यदि कोई रेखा निकलकर मस्तिष्क रेखा को काटती तो ऐसे व्यक्ति के जीवन में भीषण दुर्घटना का संकेत मिलता है
- शनि पर्वत पर अगर किसी भी तरह की ग्रीड का अथवा क्रॉस का निशान हो तो ऐसे व्यक्ति के जीवन के 35 वर्ष के बाद दुर्घटना का प्रबल संकेत होता है
-यदि शुक्र पर्वत अथवा मंगल क्षेत्र से कोई रेखा निकलकर सीधे ही जीवन रेखा को काट दे तो जीवन के उस पड़ाव में एक तीव्र दुर्घटना का संकेत मिलता है
- जीवन रेखा पर कहीं भी द्विप अथवा क्रॉस का निशान दुर्घटना का प्रबल संकेत देता है
- यदि हस्तरेखा में कहीं भी द्रोण दोष हो अथवा पित्र दोष हो तो ऐसी स्थिति में भी बार बार छोटी मोटी दुर्घटनाओं के संकेत मिलते हैं
- इसके अलावा भी अनेक संकेतों से हम दुर्घटना की भविष्यवाणी कर सकते हैं
-तंत्र विज्ञान में बार-बार दुर्घटनाओं से बचाव के लिए कई उपाय हैं जिन से हम ग्रह जनित दुर्घटनाओं की संभावनाओं को रोक सकते हैं

अपनी हस्त रेखा के आकलन एवं समस्या समाधान हेतु संपर्क करें

आचार्य छविंद्र अवस्थी
"राशि" { हस्त रेखीय एवं तंत्र समाधान}
सवाई माधोपुर (Raj.)
मो. 7014809254 (whatsup)

संतानहीनता ज्योतिषीय और तंत्रिकीय विश्लेषण :::::::::::::::::::::::::::;संतान न होना या होकर न रहना सदैव से दम्पतियो के ल...
02/09/2015

संतानहीनता ज्योतिषीय और तंत्रिकीय विश्लेषण
:::::::::::::::::::::::::::;
संतान न होना या होकर न रहना सदैव से दम्पतियो के लिए कष्ट देने वाला रहा है ,हर दंपत्ति संतान चाहता है जिससे उसकी वंश वृद्धि हो सके ,किन्तु बहुतो को यह सौभाग्य नहीं मिल पाता इसके कई कारण होते है ,ज्योतिषीय कारण अर्थात ग्रह स्थितिया ,पारिवारिक स्थितिया अर्थात पित्रादी की स्थिति अथवा दोष किये -कराये का दोष ,शारिरिक् चक्रों में विशिष्ट चक्र की कम सक्रियता अर्थात दैवीय ऊर्जा की कमी ,शारीरिक कमी इसके कारण हो सकते है इनमे शारीरिक कमी को दूर नहीं किया जा सकता किन्तु अन्य को सुधारा जा सकता है यद्यपि अन्य कारण एक -दूसरे से बिलकुल भिन्न होते है ज्योतिषीय रूप से निम्न स्थितिया इसके लिए जिम्मेदार हो सकती है

पुरुष कुंडली के आधार पर संतानहीनता
१-तृतीयेश व् चन्द्रमा केंद्र या त्रिकोण में हो और संतान दायक गृह कमजोर हो तो संतान नहीं होती है ,
२-पंचम भाव में मंगल ,षष्ठ भाव में पंचमेश और सिंह राशिस्थ शनि हो तो संतान नहीं होती है ,
३-लग्नेश व् बुध दोनों १,४,७,१० भाव में हो और संततिकारक ग्रह कमजोर हो तो संतान नहीं होती है ,
४-पंचम भाव में चंद्र तथा अष्टम ,द्वादश भाव मे सभी ग्रह हो तो भी संतान नहीं होती है ,
५-पंचम भाव में गुरु ,चतुर्थ भाव में पाप ग्रह और सप्तम भाव में बुध-शुक्र युति हो तो भी संतान नहीं होती है
स्त्री कुंडली के आधार पर संतानहीनता
१-सप्तम भाव में शुक्र ,दशम भाव में चंद्र तथा चतुर्थ में कोई तीन पाप ग्रह हो तो संतान हीन योग बनता है ,
२-पंचम, षष्ठ, अष्टम, एवं द्वादश में पाप ग्रह होना वंश विच्छेद की निशानी होता है ,
३-लग्न में मंगल ,अष्टम में शनि और पंचम भाव में सूर्य वंश विच्छेद करते है ,
४-पंचमेश या सप्तमेश नीच् राशिगत या अस्त हो ,पुत्रकारक ग्रहों की दृष्टि न हो पाप प्रभावी हो तो भी संतान नहीं होती
५-यदि पंचमेश स्त्री ग्रह हो और वह १,४ ७ अथवा १० भाव में चंद्र ,बुध ,शनि अथवा राहू के साथ बैठा हो तो स्त्री पुत्रहीन होती है
६-लग्न में पाप ग्रह चतुर्थ में चन्द्रमा तथा पंचम में लग्नेश हो और पंचमेश अल्प बलि हो तो वंश नाश हो जाता है ,,
७-यदि पंचम भाव में अकेला चन्द्रमा मृत अवस्था में बैठा हो तो भी संतति की सम्भावना कम हो जाती है
८-लग्न में सूर्य और सप्तम में शनि हो तो संतानहीनता की सम्भावना होती है ,
९-षष्ठ भाव में षष्ठेश ,सूर्य और शनि हो ,चंद्र सप्तम में हो तथा बुध उन्हें न देखता हो तो संतानहीन योग होता है
उपरोक्त ग्रह स्थितियों के अतिरिक्त तांत्त्रिक क्रियाए भी संतानहीनता का कारण बन जाती है यद्यपि बहुत से लोग इसे न समझ पाते है न मानते है ,किन्तु ऐसा होता है ,,कभी कभी लोग दुर्भावनावश किसी स्त्री अथवा पुरुष पर तांत्रिक क्रिया करवा देते है जिससे स्त्रियों की कोख बंध जाती है ,पुरुषो में शुक्राणु की कमी अथवा क्रियाशीलता में असहज परिवर्तन भी वंश वृद्धि काे राेक देता है
यदि काेई भी दम्पत्ति शारिरिक तौर पर स्वस्थ है तथा सन्तान नही हाे रही ताे वे किसी विद्वान हस्तरेखा विशेषग्य या ज्याेतिषि से परामर्श जरूर करै सन्तान प्राप्ति के याेग निश्चित बनैंगे.......
छविन्द्र K अवस्थी
राशी
द हाउस आफ साेल्यूशन्स
7742208700 ( Only whatsup) —

हाथ की रेखाएं औऱ उंगलियौ की बनावट व्यक्ति की आजीविका या व्यवसाय की सटीक जानकारी देती है.......उच्चपद योग:- जिस स्त्री या...
20/08/2015

हाथ की रेखाएं औऱ उंगलियौ की बनावट व्यक्ति की आजीविका या व्यवसाय की सटीक जानकारी देती है.......

उच्चपद योग:- जिस स्त्री या पुरुष के हाथ में सूर्य रेखा मस्तक रेखा से मिलती हो और मस्तक रेखा से गहरी स्पष्ट होकर गुरु क्षेत्र में चतुष्कोण में बदल जाये तो ऐसा व्यक्ति उच्चपदासीन होता है.

पीसीएस या आईएस योग:- जिसके हाथ में सूर्य और गुरु पर्वत उच्च हों और शनि पर्वत पर त्रिशूल का चिन्ह हो चन्द्र रेखा का भाग्य रेखा से सम्बन्ध हो और भाग्य रेखा हथेली के मध्य से आरंभ होकर एक शाखा गुरु पर्वत और दूसरी रेखा सूर्य पर्वत पर जाये तो निश्चय ही यह योग उस जातक के लिये होते है.

विदेश यात्रा योग :- जिस स्त्री या पुरुष के हाथ में जीवन रेखा से निकल कर एक शाखा भाग्य रेखा को काटती हुयी चन्द्र क्षेत्र को रेखा जाये तो वह विदेश यात्रा को सूचित करती है.

भू स्वामी योग:- जिसके हाथ में एक खडी रेखा सूर्य क्षेत्र से चलकर चन्द्र रेखा को स्पर्श करे,मस्तक रेखा से एक शाखा चन्द्र रेखा से मिलकर डमरू का निशान बनाये तो वह व्यक्ति आदर्श नागरिक और भूस्वामी होने का अधिकारी है.

पायलट योग:- जिसके हाथ में चन्द्र रेखा जीवन रेखा तक हो बुध और गुरु का पर्वत ऊंचा हो ह्रदय रेखा को किसी प्रकार का अवरोध नही हो तो वह व्यक्ति पायलट की श्रेणी में आता है.

ड्राइवर योग:- जिसके हाथ की उंगलिया के नाखून लम्बे हों हथेली वर्गाकार हो चन्द्र पर्वत ऊंचा हो सूर्य रेखा ह्रदय रेखा को स्पर्श करे मस्तक रेखा मंगल पर मिले या त्रिकोण बनाये तो ऐसा व्यक्ति छोटी और बडी गाडियों का ड्राइवर होता है.

वकील योग:- जिसके हाथ में शनि और गुरु रेखा पूर्ण चमकृत हो और विकसित हो या मणिबन्ध क्षेत्र में गुरु वलय तक रेखा पहुंचती हो तो ऐसा व्यक्ति कानून का जानकार जज वकील की हैसियत का होता है.

सौभाग्यशाली योग:- जिस पुरुष एक दाहिने हाथ में सात ग्रहों के पर्वतों में से दो पर्वत बलवान हों और इनसे सम्बन्धित रेखा स्पष्ट हो तो व्यक्ति सौभाग्यशाली होता है.

जुआरी सट्टेबाज योग:- जिस व्यक्ति की अनामिका उंगली मध्यमा के बराबर की हो तो ऐसा व्यक्ति सट्टेबाज और जुआरी होता है.

चोरी का योग:- जिस पुरुष या स्त्री के हाथ में बुध पर्वत विकसित हो और उस पर जाल बिछा हो तो उसके घर पर बार बार चोरियां हुआ करती है.

पुलिस सेवा का योग:- जिसके हाथ में मंगल पर्वत से सूर्य पर्वत और शनि की उंगली से बीचों बीच कोई रेखा स्पर्श करे तो व्यक्ति सेना या पुलिस महकमें मे नौकरी करता है.

भाग्यहीन का योग:- जिस जातक के हाथ में हथेली के बीच उथली हुयी आयत का चिन्ह हो तो इस प्रकार का व्यक्ति हमेशा चिडचिडा और लापरवाह होता है.

फ़लित शास्त्री योग:- जिस व्यक्ति के गुरु -पर्वत के नीचे मुद्रिका या शनि शुक्र बुध पर्वत उन्नत हों वह ज्योतिषी होता है.

नर्स सेविका योग:- जिस स्त्री की कलाई गोल हाथ पतले और लम्बे हों बुध पर्वत पर खडी रेखायें हों व शुक्र पर्वत उच्च का हो तो जातिका नर्स के काम में चतुर होती है.

नाडी परखने वाला:- जिस व्यक्ति का चन्द्र पर्वत उच्च का हो वह व्यक्ति नाडी का जानकार होता है.

दगाबाज या स्वार्थी योग:- जिसके नाखून छोटे हों हथेली सफ़ेद रंग की हो मस्तक रेखा ह्रदय रेखा में मिलती हो तो ऐसा व्यक्ति दगाबाज होता है,मोटा हाथ और बुध की उंगली किसी भी तरफ़ झुकी होने से भी यह योग मिलता है,बुध की उंगली सबसे छोटी उंगली को बोला जाता है.

विधुर या विधवा योग:- यदि विवाह रेखा आगे चलकर ह्रदय रेखा से मिले या भाग्य रेखा टूटी हो अथवा रेखा पर काला धब्बा हो तो ऐसा जातक विधवा या विधुर होता है.

निर्धन व दुखी योग:- यदि किसी जातक की जीवन रेखा पर जाल बिछा हो तो ऐसा व्यक्ति निर्धन और दुखी होता है.

माता पिता का अभाव योग:- जिस व्यक्ति के हाथ में मणि बन्ध के बाद ही त्रिकोण द्वीप चिन्ह हो तो जातक बाल्यावस्था से माता पिता से दूर या हीन होता है.

जिस जातक की हथेली में तर्जनी और अंगूठा के बीच से मंगल स्थान से जीवन रेखा की तरफ़ छोटी छोटी रेखायें आ रही हों और जीवन रेखा से मिल रही हो तो जातक को बार बार शरीर के कष्ट मिलते रहते है,लेकिन जीवन रेखा के साथ साथ कोई सहायक रेखा चल रही हो तो जातक का भाग्य और इष्ट उन कष्टों से दूर करता रहता है.

जीवन रेखा के गहरे होने से व्यक्ति निर्धन होता है,गहरी होने के साथ लाल रंग की हो तो क्रोधी होता है काले रंग की हो तो कई रहस्य छुपाकर रखता है,और टेडी मेढी हो तो जातक कभी कुछ कभी कुछ करने वाला होता है.

हाथ की रेखाऔ के दाेष के कारण ही व्यक्ति अपने व्यवसाय मै सफल या असफल हाेता है , इन रेखाऔ के परिणाम काे बदला ताे नही जा सकता लेकिन उपचाराै के माध्यम से परिणाम की दिशा बदली जा सकती है.......
छविन्द्र K अवस्थी
राशी कन्सलटैन्सी
द हाउस आफ सौल्युशन्स
7742208700( only whatsup

Manglik dosha:The placement of ‘Mangal’ (Mars) in the horoscope is the main parameter for consideration of ‘Manglik dosh...
26/07/2015

Manglik dosha:

The placement of ‘Mangal’ (Mars) in the horoscope is the main parameter for consideration of ‘Manglik dosha’. A person can be considered ‘Manglik’ if Mars is placed in his/her horoscope in the ‘Lagna’ (Ascendant), the Fourth House, the Seventh House, the Eighth House or the Twelfth House. Some astrologers and astrological texts consider the Second House also for judging ‘Manglik dosha’.

There may be reasons why these Houses have been given importance in match-making. The ‘Lagna’ represents the self. The placement of Mars in the ‘Lagna’ may make a person aggressive and violent. The Second House represents ‘Kutumb’ (immediate family). Placement of Mars in the Second House may cause problems in adjustment with the family. The Fourth House is the House of comforts. Placement of Mars in the Fourth House can mark down family comforts. The Seventh House is the House of marriage and the placement of Mars in the Seventh House may create misunderstandings in marital life. The Eighth House is the House of ‘Ayu’ (longevity) and also the ‘Suhaag Bhava’ (House indicating longevity of marriage). Hence, placement of Mars in this House indicates danger to self as well as spouse. The Twelfth House is the House of marital happiness and placement of Mars in this House is also not considered good.

a) If Mars is placed in the ‘Lagna’, the native may be prone to mental illusions, may have a diseased body, may be courageous but violent and may travel far and wide.

c) If Mars is placed in the Fourth House, the native may have problems from friends, vehicles, fear of fall from vehicles, prone to diseases and general weakness, mother in law creates problem.

d) If Mars is placed in the Seventh House, it may cause several types of sufferings. The native may have problems from enemies, unnecessary worries, body weakness and sorrows produced by attraction to opposite s*x and have less s*xual life and family problems.

e) If Mars is placed in the Eighth House, the native may suffer from eye disease, bad luck, problems due to blood-related diseases and inclination for mean works. Have s*x problems and may also cause general dullness of mind and make the person critical of holy people.

f) If Mars is placed in the Twelfth House, the native may have enmity with friends, eye disease and a restless body. He may indulge in unwise expenses of wealth, may lose self-esteem and suffer from bo***ge and have less s*xual life.

Meaning: If only one partner is Manglik or Mars is in the ‘Lagna’, Fourth House, Seventh House, Eighth House or the Twelfth House of the horoscope, then he/she can be a cause of death for the other(spouse).
But there are some way to prevant these fault in mangal dosh nivaran process ....you can ride of from manglik dosh.

Chhavindra K.Avasthi
Rashi Consultancy
The house of solution
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वास्तुशास्त्र में मनी प्लांट एक प्रगतिकारक पौधा माना जाता है मनी प्लांट का पौधा घर में लगाने से घर में धन का आगमन बढ़ता ...
05/07/2015

वास्तुशास्त्र में मनी प्लांट एक प्रगतिकारक पौधा माना जाता है मनी प्लांट का पौधा घर में लगाने से घर में धन का आगमन बढ़ता और सुख-समृद्धि में इजाफा होता है।
मान्यता के कारण बहुत से लोग अपने घरों में मनी प्लांट का पौधा लगाते हैं। लेकिन मनी प्लांट को लगाने के बाद भी धनागमन में कोई अंतर नहीं होता है बल्कि कई बार आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ता है। इसका कारण वास्तु विज्ञान में बताया गया है।
वास्तु विज्ञान के अनुसार हर पौधे के लिए एक
दिशा निर्धारित है।
अगर उचित दिशा में पेड़-पौधा लगाते हैं
तो वातावरण की सकारात्मक उर्जा का लाभ
मिलता है। लेकिन गलत दिशा में वृक्षारोपण करने से
लाभ की बजाय नुकसान होने लगता है। वास्तु
विज्ञान में मनी प्लांट का पौधा लगाने के लिए
आग्नेय दिशा यानी दक्षिण-पूर्व को उत्तम
माना गया है। आग्नेय दिशा के देवता गणेश जी हैं
और प्रतिनिधि ग्रह शुक्र है। गणेश जी अमंगल
का नाश करते हैं और शुक्र सुख-समृद्धि का कारक
होता है।
बेल और लता का कारक शुक्र होता है इसलिए
आग्नेय दिशा में मनी प्लांट लगाने इस
दिशा सकारात्मक प्रभाव प्राप्त होता है। मनी प्लांट
के लिए सबसे नकारात्मक दिशा ईशान यानी उत्तर
पूर्व को माना गया है। इस दिशा में मनी प्लांट
लगाने पर धन वृद्धि की बजाय आर्थिक नुकसान
हो सकता है।
ईशान का प्रतिनिधि ग्रह बृहस्पति है। शुक्र से
संबंधित चीज इस दिशा में होने पर हानि होती है।
वास्तु विज्ञान के अनुसार उत्तर पूर्व दिशा के लिए
सबसे उत्तम तुलसी का पौधा होता है। इसलिए ईशान
दिशा में मनी प्लांट लगाने की बजाय चाहें
तो तुलसी लगा सकते हैं।
दरअसल मनीप्लांट मूलतः दक्षिणपूर्व एशिया मूल
का पौधा है। इसकी पत्तियां सदा हरी रहतीं हैं। ये
तने पर एकान्तर क्रम में लगी होती हैं और हृदय
जैसी आकृति वाली होती हैं।
मनी प्लांट की सबसे बड़ी खासियत यह है कि घर
हो या आंगन यह प्लांट कहीं भी आसानी से लग
जाता है। साथ ही यह केवल पानी में
भी लगाया जा सकता है और इसके रखरखाव के लिए भी ज्यादा मेहनत भी नहीं करनी पड़ती है। इसे घर के अंदर व बाहर दोनों जगह ही रखा जा सकता है।

छविन्द्र अवस्थी
राशी कन्सलटैन्सी
7742208700 ( Only Whatsup)

Mantra for kaalsarp dosh nivaranKaal Sarpa Yog Mantra::**Kaal sarp yog is an astrological sequence positioning of the pl...
19/11/2014

Mantra for kaalsarp dosh nivaran

Kaal Sarpa Yog Mantra::**
Kaal sarp yog is an astrological sequence positioning of the planets in the horoscope, in which all the planets are placed between Ketu & Rahu, Rahu and Ketu are two points on the zodiac, which are known in English as the North and South Nodes.

It is assumed that the planets do not give all the advantages to the native that the planets are limited between two nodes. Astrological science gives some Hindu Mantras that are beneficial to mitigate the negative effects. Here are some helpful Mantras that are chanted to cure the problem.

ll नवनाग स्तोत्र ll
अनन्तं वासुकिं शेषं पद्मनाभं च कम्बलं
शन्खपालं ध्रूतराष्ट्रं च तक्षकं कालियं तथा
एतानि नव नामानि नागानाम च महात्मनं
सायमकाले पठेन्नीत्यं प्रातक्काले विशेषतः
तस्य विषभयं नास्ति सर्वत्र विजयी भवेत
ll इति श्री नवनागस्त्रोत्रं सम्पूर्णं ll
Navnag Stotra
Anant vasunki sensh padmanabha che Kambal
Sankhpal dhutrashtra che takshak kalia tatha
Atayni nav namani naganam che mahatman
Sayamkale patenitya sarvatra vijaye bhavat
ll Iti shree navnag stotra sampurnam llनाग गायत्री मंत्र
ॐ नव कुलाय विध्महे विषदन्ताय धी माहि
तन्नो सर्प प्रचोदयात ll
Nag Gayatri Mantra
Om nav kulaye vidhmahe vishdantaye dhee mahi
tanno sarp prachodayat ll

As human beings we need money to lead our life comfortably. To earn money we need a job or profession or we should invol...
03/11/2014

As human beings we need money to lead our life comfortably. To earn money we need a job or profession or we should involve into some business. Such career related issues are clearly represented by the Fate Line in our hands. By observing the Fate Line in both the palms, we can assess when we get the job, when there will be a promotion, when there will be a change in our career and how our earnings will be from time to time. The normal course of the Fate Line is shown in Fig1. It generally starts any where from the base of the palm and ascends towards the Mount of Saturn under the middle finger.

Nature of the Fate Line:

The Fate Line should be in thick brown color. It should be deep and narrow as if it is cut by a blade. It should not have any breaks (gaps). It should not be cut by any horizontal lines in its course. Such a Fate Line is considered as best one. A person bestowed with such a Fate Line will enjoy career progress and good income all through his life.

Timing on the Fate Line:

The timing on the Fate Line is shown in the Fig1. Take 5 years at the base of the palm. When Fate Line crosses the Head Line, it should be reckoned as 35th year of the person. At the Heart Line, the age of the person should be taken as 55th year. At the Mount of Saturn where Fate Line ends, the age indicates 75th year. Accordingly, divide the Fate Line and mark the periods with 5 years duration.

Straight and long Fate Line:

A straight and long Fate Line starts at the base of the palm and ends at the Mount of Saturn. It will not have any breaks or gaps. [Fig 2] This Fate Line assures continuous income for the person till the end of his life. The person is active and earning even in his old age. .........whatsaap contact..7742208700

ब्रम्हांड का न्यायधीश एवं प्रकृति का दंड नायक ग्रह शनि रविवार को अपनी चाल बदलेगा। शनि ग्रह उच्च राशि तुला को छोड़कर शत्र...
02/11/2014

ब्रम्हांड का न्यायधीश एवं प्रकृति का दंड नायक ग्रह शनि रविवार को अपनी चाल बदलेगा। शनि ग्रह उच्च राशि तुला को छोड़कर शत्रु राशि वृश्चिक में प्रवेश करेगा। इस राशि मेँ शनि का निवास पूर्ण ढाई वर्ष तक रहेगा ज्योतिषविदों के मुताबिक शनि अस्त होकर राशि परिवर्तन करेंगे।

शनि के राशि परिवर्तन के साथ ही कन्या राशि से साढ़े साती हटेगी, तो धनु राशि वालों को साढ़े साती का प्रभाव शुरू हो जाएगा। इनके अलावा तुला व वृश्चिक में साढ़ेसाती यथावत रहेगी। इसी तरह ढैया में चल रहे मीन ओर कर्क अब मुक्त हो जाएंगे। अब मेष और सिंह राशि वालों को ढैया शुरू हो जाएगी।
शनि, शनिवार को दोपहर बाद 4 बजकर 2 मिनट पर अस्त हो चुका। शनि एक माह अस्त रहेगा। आज रविवार को शनि रात्रि 8.55 बजे राशि परिवर्तन करेगा। शनि अस्त होने से ये सीधे प्रभावित नहीं करेगा। शनि का प्रभाव 5 दिसंबर के बाद ही दिखेगा।


बनेगा द्वि द्वादश योग : शनि के वृश्चिक राशि में प्रवेश करते ही मंगल से द्वि द्वादश योग बनेगा। इस योग के कारण अग्निकांड, रेल दुर्घटना, यान दुर्घटना जैसी घटनाएं संभावित होंगी। ये योग 27 नवंबर तक रहेगा। वृषचिक राशी चूंकी शत्रु राशी हे इसलिए ये आमजन को प्रभावित कर सकता है। अस्त शनि से इसमें राहत भी मिलेगी।

किस राशि पर कौनसा पाया

सोने का पाया : मेष, कन्या, कुंभ
प्रभाव : सोने का पाया दौड़ धूप की अधिकता वाला होता है। इन राशी वालो को अनावश्यक यात्रा करनी पड़ सकती हे वेवाहिक जीवन मेँ कटुता आ सकती हे तथा फिजूल खर्ची आ सकती है.. यदी आप सरकारी सेवा मेँ हे तो स्थानांतरण हो सकता हे इस राशि की महिलाएँ स्वांस एवम छाती के रोग से ग्रसित हो सकती है गुर्दे एवम मूत्र रोग से प्रभावित लोगोँ को ये बीमारी अधिक परेशान कर सकती हैे महिलाओं को गर्भाशय से संबंधित रोग हो सकतै हे तथा पुरुषो को नेत्र संबंधी रोग परेशान कर सकते है
उपाय:= उक्त राशी के लोग शनि के कुप्रभाव से बचने के लिए शनिवार के दिन ३पाव काली उडद का दान करेँ एवम शनिवार के दिन शरीर पर तेल आदि एवम सृंगार सामग्री का उपयोग ना करेँ एवम शनिवार के दिन घर मेँ महिलाएँ पाैछा लगाते समय पानी मेँ कुछ तिल्ली के तेल की बूंदे अवश्य डाले

तांबे का पाया : वृष, सिंह और धनु
प्रभाव : तांबे का पाया कभी श्रेष्ठ कभी अशुभ मिलाजुला प्रभाव देता है। इन राशियोँ के लोग संतान पक्ष से चिंतित रहेंगे तथा सामाजिक अवसराे पर कही कही अपमान सहना पड सकता हे इसके अतिरिक्त शुभ फल मे परिवार मेँ उत्सव आदि का अवसर आसकता हे तथा नए पारिवारिक रिश्तो की बुनियाद रखी जा सकती हे विद्यार्थी खासतौर पर ये ध्यान रखेँ की किसी व्यसन अथवा गलत संगत का त्याग करें
उपाय:= प्रत्येक शनिवार दक्षिण मुखी हनुमान जी के मंदिर मेँ जाकर उनके दांए पैर के नीचे एक नारियल एवम जायफल चडाकर आवे शनि के प्रकोप से शांति मिलेगी तथा शुभ फल प्राप्त होंगे

चांदी का पाया : मिथुन, तुला और मकर
प्रभाव : चांदी के पाए से मान-सम्मान और सुख समृद्धि को बढ़ाता है। सामाजिक प्रतिष्ठा मेँ बढ़ोतरी होगी तीर्थ यात्रा के योग बन सकते हैे एवम रुका हुआ धन प्राप्त हो सकता हे वर्ष भर शनि के अच्छे प्रभाव आपको देखने को मिलेंगे
उपाय:= इस राशि के लोग शनि का ओर अधिक लाभ लेने के लिए शनिवार के दिन अपने पास कोई भी काला वस्त्र या रुमाल रखेँ लेकिन पेरोै मेँ काले जूते कदापि न पहनै..

लोहे का पाया : कर्क, वृश्चिक और मीन
प्रभाव : लोहे का पाया शारीरिक रूप से रोग पीढ़ा और धनहानि को बढ़ाता है। इन राशि के लोगोँ को एक वर्ष तक बहुत अधिक समस्या रह सकती हे अनावश्यक धन का उपयोग व खर्च हो सकता हे तथा परिवार जनोँ एवम स्वयं को रोग आदि हो सकते हे तथा किसी भी तरह की मुकदमे वाजी आदि का संकट भी आ सकता हे
उपाय : साढ़ेसाती और ढैया वालों को शनिवार को सप्त धान्य का दान, शनिवार को पीपल व शनि की पूजा के साथ तेलाभिषेक करें और तेल का दीप जलाएं।
विस्तृत जानकारी के लिए whatsapp नंबर 7742208700 पर केवल लिखित संपर्क कर सकते हैं!

धन तेरस हेतु साधनामित्रो यह साधना आपको धन तेरस की शाम को ७ से ९ के मध्य करना है.आसन वस्त्र पीले हो,आपका मुख उत्तर की और ...
21/10/2014

धन तेरस हेतु साधना

मित्रो यह साधना आपको धन तेरस की शाम को ७ से ९ के मध्य करना है.आसन वस्त्र पीले हो,आपका मुख उत्तर की और हो.स्नान कर आसन पर बैठे और सामने बाजोट रखकर उस पर पिला वस्त्र बिछा दे.अब वस्त्र पर हल्दी से रंजीत अक्षत की एक ढेरी बना दे.इस पर एक सुपारी हल्दी से रंजीत कर स्थापित करे.अब सर्व प्रथा गुरु गणपति पूजन संपन्न करे.तत्पश्चात सुपारी का कुबेर मानकर पूजन करे.पूजन सामान्य ही करना है.शुद्ध घृत का दीपक प्रज्वलित करे.पीले पुष्प अर्पित करे.संभव हो तो केसरिया भात का भोग अर्पित करे,यदि यह संभव न हो तो.कोई भी मिष्ठान्न अर्पित करे.अब अपनी दरिद्रता नाश हेतु आप यह संकल्प कर रहे है ऐसा संकल्प ले.इसके पश्चात निम्न मंत्र की स्फटिक,रुद्राक्ष,अथवा मुंगमाला से २१ माला जाप करे.

ॐ यक्षराज धनाध्यक्षाय कुबेराय नमः सकल दारिद्र्य नाशय नाशय,सकल ऐश्वर्यं देहि देहि धन धन धन कुबेराय नमः

Om Yakshraaj Dhanadhyakshaay Kuberaay Namah Sakal Daridrya Naashay Naashay Sakal Aishwaryam Dehi Dehi Dhan Dhan Dhan kuberaay Namah

जाप के पश्चात अग्नि प्रज्वलित कर घृत और श्वेत तील के द्वारा २११ आहुति प्रदान करे.और दरिद्रता नाश की प्रार्थना करे.प्रसाद पुरे परिवार को दे.अगले दिन वस्त्र,अक्षत और सुपारी शिव मंदिर में अर्पित कर दे.......cK.Avasthi

चंद्रमा के उपाय :-चन्द्रमा मनसो जातश्चक्षोः सूर्यो अजायत ।श्रोत्राद्वायुश्च प्राणश्च मुखादग्निरजायत ॥नाभ्या आसीदन्तरिक्ष...
16/10/2014

चंद्रमा के उपाय :-

चन्द्रमा मनसो जातश्चक्षोः सूर्यो अजायत ।
श्रोत्राद्वायुश्च प्राणश्च मुखादग्निरजायत ॥
नाभ्या आसीदन्तरिक्षं शीर्ष्णो द्यौः समवर्तत ।
पद्भ्यां भूमिर्दिशः श्रोत्रात्तथा लोकान् अकल्पयन्
॥ यजु० ३१।१२-१३ ॥
चन्द्रमा का मन से घनिष्ठ सम्बन्ध है. इसीलिए समस्त
प्राणियों के लिए मानसिक सुख शान्ति का प्रभाव
कारक ग्रह चन्द्रमा माना गया है. चन्द्रमा एक जलीय
ग्रह है. चन्द्रमा कर्क राशि का स्वामी है. यह वृष
राशि में शुभ और वृश्चिक राशि में अशुभ फल देता है
यदि यह अशुभ ग्रहों कि युति में है तो मन में अनेक
विध्वंसक विचार जन्म लेते है. यदि शुभ ग्रहों के साथ है
तो शुभ विचारों की उत्पत्ति होती है.
चन्द्र ग्रह उत्तर-पश्चिम दिशाओं का प्रतिनिधित्व
करता है. चन्द्र का भाग्य रत्न मोती है. चन्द्र ग्रह
का रंग श्वेत, चांदी माना गया है.
चन्द्र का शुभ अंक 2, 11, 20 है.
जन्म कुंडली में चन्द्रमा यदि अपनी ही राशि में
या मित्र, उच्च राशि षड्बली ,शुभ ग्रहों से दृष्ट
हो तो चन्द्रमा की शुभता में वृद्धि होती है. जन्म
कुण्डली में चंद्रमा यदि मजबूत एवं बली अवस्था में
हो तो व्यक्ति समस्त कार्यों में सफलता पाने
वाला तथा मन से प्रसन्न रहने वाला होता है. पद
प्राप्ति व पदोन्नति, जलोत्पन्न, तरल व श्वेत
पदार्थों के कारोबार से लाभ मिलता है.
चन्द्र का प्रभाव :- यह शरीर में बाईं आंख, गाल, मांस,
रक्त बलगम, वायु, स्त्री में दाईं आंख, पेट, भोजन नली,
गर्भाशय, अण्डाशय, मूत्राशय. चन्द्र कुण्डली में
कमजोर या पिडित हो, तो व्यक्ति को ह्रदय रोग,
फेफडे, दमा, अतिसार, दस्त गुर्दा, बहुमूत्र, पीलिया,
गर्भाशय के रोग, माहवारी में अनियमितता, चर्म
रोग, रक्त की कमी, नाडी मण्डल, निद्रा, खुजली,
रक्त दूषित होना, फफोले, ज्वर, तपेदिक, अपच, बलगम,
जुकाम, सूजन, जल से भय, गले की समस्याएं, उदर-पीडा,
फेफडों में सूजन, क्षयरोग. चन्द्र प्रभावित [7:23PM, 10/16/2014] Manish: व्यक्ति बार-बार विचार बदलने वाला होता है.
चन्द्रमाँ का दान वस्तु :- चावल, दूध, चांदी, मोती,
दही, मिश्री, श्वेत वस्त्र, श्वेत फूल या चन्दन. इन
वस्तुओं का दान सोमवार के दिन सायंकाल में
करना चाहिए. जिनकी कुंडली में चन्द्र अशुभ हो ऐसे
लोग चंद्र की शुभता लेने के लिए माता, नानी, दादी,
सास एवं इनके पद के समान
वाली स्त्रियों का आशीर्वाद ले
सभी भावों के अनुसार उपाय
प्रथम भाव में स्थित चन्द्रमा के उपाय
1:- वट बृक्ष की जड़ में पानी डालें.
2:- चारपाई के चारो पायो पर चांदी की कीले
लगाऎं
3:-शरीर पर चाँदी धारण करें.
4:-व्यक्ति को देर रात्रि तक नहीं जागना चाहिए।
रात्रि के समय घूमने-फिरने तथा यात्रा से
बचना चाहिए।
5:-पूर्णिमा के दिन शिव जी को खीर का भोग
लगाएँ,
द्वितीय भाव में स्थित चन्द्रमा के उपाय
1:- मकान की नीव में चॉदी दबाएं.
2:- माता का आशीर्वाद लें.
तृतीय भाव में स्थित चन्द्रमा का उपाय
1:- चांदी का कडा धारण करें.
2: पानी ,दूध, चावल का दान करे़.
चतुर्थ भाव में स्थित चन्द्रमा का उपाय
1:- चांदी, चावल व दूध का कारोबार न करें.
2:- माता से चांदी लेकर अपने पास रखे व माता से
आशिर्वाद लें.
3:-घर में किसी भी स्थान पर पानी का जमाव न
होनें पाए।
पचंम भाव में स्थित चन्दमा के उपाय
1:- ब्रह्मचर्य का पालन करें.
2:- बेईमानी और लालच ना करें, झूठ बोलने से परहेज
करें.
3:-11 सोमवार नियमित रूप से 9 कन्यावों को खीर
का प्रसाद दें।
4:- सोमवार को सफेद कपडे में चावल, मिशरी बांधकर
बहते पानी में प्रवाहित करें.
छटे भाव में स्थित चन्द्रमा के उपाय
1:- श्मशान में पानी की टंकी या हैण्डपम्प लगवाएं.
2:- चांदी का चोकोर टुकडा़ अपने पास रखें.
3:- रात के समय दूध ना पीयें.
4:- माता -सास की सेवा करें.
सप्तम भाव में स्थित चन्द्रमा के उपाय
1:- पानी और दूध का व्यापार न करें.
2:- माता को दुख ना पहुचाये.
अष्टम भाव में स्थित चन्द्रमा के उपाय
1) श्मशान के नल से पानी लाकर घर मे रखें.
2) छल-कपट
[7:23PM, 10/16/2014] Manish: 2) छल-कपट से परहेज करें.
3) बडे़-बूढो का आशीर्वाद लेते रहें.
4) श्राद्ध पर्व मनाते रहे.
5) कुएं के उपर मकान न बनाएं.
6) मन्दिर में चने की दाल चढायें.
7) व्यभिचार से दूर रहे.
नवम भाव में स्थित चन्द्रमा के उपाय
1:- धर्म स्थान में दूध और चावल का दान करे
2:- मन्दिर में दर्शन हेतु जाएं.
3:-बुजुर्ग स्त्रियों से आशीर्वाद प्राप्त
करना चाहिए।
दशम भाव में स्थित चन्द्रमा के उपाय
1:- रात के समय दूध का सेवन न करें.
2:- मुफ्त में दवाई बांटें.
3:- समुद्र, वर्षा या नदी का पानी घर में रखें.
एकादश भाव में स्थित चन्द्रमा के उपाय
1:- भैरव मन्दिर में दूध चढायें.
2:- सोने की सलाई गरम करके उसको दूध में ठण्डा करके
उस दूध को पियें.
3:- दूध का दान करें.
द्वादश भाव में स्थित चन्द्रमा के उपाय
1:- वर्षा का पानी घर में रखें.
2:- धर्म स्थान या मन्दिर में नियमित सर झुकाए .
क्या न करें :-
ज्योतिषशास्त्र में जो उपाय बताए गये हैं उसके अनुसार
चन्द्रमा कमज़ोर अथवा पीड़ित होने पर
व्यक्ति को रात्रि में दूध नहीं पीना चाहिए. सफ़ेद
वस्त्र धारण नहीं करना चाहिए और चन्द्रमा से
सम्बन्धित रत्न नहीं पहनना चाहिए.
जब चन्द्र की दशा में अशुभ फल प्राप्त
हो तो चन्द्रमा के मन्त्रों का जाप करे या जाप
कराये :-
चन्द्रमाँ का बीज मंत्र है :-
ॐ स्रां स्रीं स्रौं स: चन्द्रमासे नम: (जप
संख्या 11000)
चन्द्रमाँ का वैदिक मंत्र है :-
” ॐ दधिशंखतुषाराभं क्षीरोदार्णवसम्भवम । भाशिनं
भवतया भाम्भार्मुकुट्भुशणम।। ”..........colobrated by Pt. Manish kumar()))(((((( cK. Avasthi

अंग फड़कने का महत्व..अंगों के फड़कने से भी शुभ-अशुभ की सूचना मिलती है.प्रत्येक अंग की एक अलग ही महत्ता है, एक अलग ही विश...
16/10/2014

अंग फड़कने का महत्व..
अंगों के फड़कने से भी शुभ-अशुभ की सूचना मिलती है.प्रत्येक अंग की एक अलग ही महत्ता है, एक अलग ही विशेषता है और उनकी फड़कन का एक अलग ही अर्थ होता है.अंगों के फड़कने का महत्व प्राचीन समय से ही चला आ रहा है.प्रत्येक शास्त्र या विश्व का कोई भी व्यक्ति इस विज्ञान से थोडा बहुत परिचित है तथा घर परिवार या समाज में सभी इसके फल को जानते है.
आँख सबसे अधिक फड़कती है लोग शुभ-अशुभ जानने के लिए व्याकुल रहते है.दायीं आँख ऊपर की ओर के फलक में फड़कती है तो धन,कीर्ति आदि की वृद्धि होती है.नौकरी में पदोन्नति होती है नीचे का फलक फड़कता है तो अशुभ होने की संभावना रहती है.
बाँयी आँख का उपरी फलक फड़कता है तो दुश्मन से और अधिक दुश्मनी हो सकती है.नीचे का फलक फड़कता है तो किसी से बेवजह बहस हो सकती है और अपमानित होना पड़ सकता है.
बाँयी आँख की नाक की ओर का कोना फड़कता है जिसका फल शुभ होता है.पुत्र प्राप्ति की सूचना मिल सकती है.या किसी प्रिय व्यक्ति से मुलाक़ात हो सकती है.
दांयी आँख फड़कती है तो यह शुभ फलदायक होता है.लेकिन अगर किसी स्त्री की दांयी आँख फड़कती है तो उसे अशुभ माना जाता है.
दोनों आँखे एक साथ फड़कती हो तो चाहे वह स्त्री की हो या पुरुष की, उनका फल एक जैसा ही होता है. किसी बिछुड़े हुए अच्छे मित्र से मुलाक़ात हो सकती है.
दांयी आँख पीछे की ओर फड़कती है तो इसका फल अशुभ होता है. बाँयी आँख ऊपर की और फड़कती हो तो इसका फल शुभ होता है.स्त्री की बाँयी आँख फड़कती हो तो शुभ फल होता है.
कंठ गला तेज गति से फड़कता है तो स्वादिष्ट और मनपसंद भोजन मिलता है.किसी स्त्री का कंठ फड़कता है तो उसे गले आभूषण प्राप्त होता है.
कंठ का बांया भाग फड़कता है तो धन की उपलब्धि कराता है.किसी स्त्री के कंठ के निचले हिस्से का फड़कना कम मूल्य के आभूषणों की प्राप्ति की सूचना देता है.कंठ का उपरी भाग फड़कता है तो सोने की माला मिलने की संभावना बड जाति है.कंठ की घाटी के नीचे फड़कन होती है तो किसी हथियार से घायल होने की संभावना रहती है.
सिर के बाँयी ओर के हिस्से में फड़कन हो तो इसे बहुत ही शुभ माना गया है.आने वाले दिनों में यात्रा करनी पड़ सकती है. यदि आपकी यात्रा बिजनेस से सम्बंधित है तो ज्यादा नहीं तो थोडा बहुत लाभ अवश्य होगा.आपके सिर के दांयी ओर के हिस्से में फड़कन है तो यह शुभ फलदायक स्थिति है आपको धन,किसी राज सम्मान, नौकरी में पदोंन्नती, किसी प्रतियोगिता में पुरस्कार, लाटरी में जीत,भूमि लाभ आदि की प्राप्ति हो सकती है.
आपके सिर का पिछला हिस्सा फड़कता है तो समझ लीजिए आपका विदेश जाने का योग बन रहा है.और वंहा आपको धन की प्राप्ति भी होने वाली है.लेकिन अपने देश में लाभ की कोई संभावना नहीं है आपके सिर के अगले हिस्से में फड़कन हो रही है तो यह स्थिति स्वदेश या परदेश दोनों में ही धन मान प्राप्ति का कारण बन सकती है.
आपका सम्पूर्ण सिर फड़क रहा है तो यह सबसे अधिक शुभ स्थिति है आपको दुसरे का धन मिल सकता है,मुकद्दमे में जीत हो सकती है.राजसम्मान मिल सकता है.या फिर भूमि की प्राप्ति हो सकती है.
सम्पूर्ण मूँछो में फड़कन है तो इसका फल बहुत ही शुभ माना गया है इससे दूध,दही,घी,धन धान्य का योग बनता है.अगर आपकी मूंछ का दांया हिस्सा फड़कता है तो इसे शुभ समझना चाहिए. आपकी बाँयी मूंछ फड़कती है तो आपका किसी से बहस या झगड़ा हो सकता है.
आपके तालू में फड़कन है तो यह आर्थिक लाभ का शुभ संकेत है.दांया तालू में फड़कन है तो यह बिमारी की सूचना दे रहा है.बांये तालू में फड़कन है तो आप किसी अपराध में जेल जा सकते है.
आपके दांये कंधे में फड़कन में फड़कन है तो आपको धन, सम्मान और बिछुड़े हुए भाई से मिलाप हो सकता है.बांया कंधा फड़क रह है तो रक्त विकार या वात सम्बन्धी विकार उत्पन्न हो सकते है.
आपके दांये घुटने में फड़कन है तो आपको सोने की प्राप्ति हो सकती है.और यदि दांये घुटने का निचला हिस्सा फड़क रहा है तो यह शत्रु पर विजय हासिल करने का संकेत है.आपके बांये घुटने का निचला हिस्सा फड़क रहा है तो आपके कार्य पूरा होने की संभावना बड जाति है.बांये घुटने का उपरी हिस्सा फड़क रहा है तो इसका फल कुछ नहीं होता है.
आपके पेट में फड़कन है तो यह अन्न की समृद्धि की सूचना देता है.यदि पेट का दांया हिस्सा फड़क रहा है तो घर में धन दौलत की वृद्धि होगी सुख और खुशहाली बडती है.अगर आपके पेट का बांया हिस्सा फड़कता है तो धन समृद्धि धीमी गति से बडती है वैसे यह शुभ नहीं है. पेट का उपरी भाग फड़कता है तो यह अशुभ होता है.लेकिन पेट के नीचे का भाग फड़कता है तो स्वादिष्ट भोजन की प्राप्ति होती है.
पीठ दांयी ओर से फड़क रही है तो धन धान्य की वृद्धि हो सकती है लेकिन पीठ के बांये भाग का फडकना ठीक नहीं होता है.मुकद्दमे में हार या किसी से झगड़ा हो सकता है.बाँयी पीठ में फड़कन धीमी हो तो परिवार में कन्या का जन्म होना संभव है और फड़कन तेज हो तो अपरिपक्व यानि समय से पहले ही प्रसव हो सकता है.पीठ का उपरी हिस्सा फड़क रहा हो तो धन की प्राप्ति होती है और पीठ का निचला हिस्सा फड़कता है तो बहुत से मनुष्यों की प्रशंसा मिलने की संभावना रहती है.........cK.Avasthi

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