05/02/2023
💥बसंत ऋतु और वमन कर्म💥
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↪️ आयुर्वेद में वर्णित वमन चिकित्सा वसंत ऋतु ( फरवरी-मार्च) में करने का विधान है | आयुर्वेद में किसी भी पंचकर्म के पूर्व, शरीर को पूर्व कर्म से तैयार किया जाता है | पूर्व कर्मों से मतलब शरीर में स्थित लीन दोषों को चलायमान कर शाखा (हाथ पैर आदि) से कोष्ठ (Gastro Intestinal Tract) में लाने का एक तरीका है | इन कर्मों के रूप में शरीर को कुछ दिन औषधि युक्त तेल की मालिश की जाती है एवं स्वेदन या भाप पेटी में बैठा कर भाप दी जाती है, और साथ ही आपकी पाचन शक्ति के अनुसार आपको घृत या तेल (स्नेह) पिलाया जाता है | जब आपका शरीर अच्छे से स्नेहित हो जाता है तो 1 से 2 दिन स्नेह विश्राम मतलब जो आपको स्नेह पिलाया गया है वह और बेहतर रूप से शरीर मैं स्थिति लीन दोषों को कोष्ठ में ले आए इस क्रिया हेतु उसे समय दिया जाता है, इसके पश्चात आपको अगले दिन प्रातः सुबह मुख्य कर्म के रूप में वमन क्रिया की जाती है जिसमें आपको पेट भर कर दूध, कोष्ण जल, मुलेठी फांट या अन्य कोई द्रव दिया जाता है, साथ ही वामक औषधि दी जाती है, जिसके फलस्वरूप सुखद रूप से उल्टियां होती हैं और इन उल्टीयों के साथ में आपके शरीर में स्थित विकृत कफ और पित्त दोष बाहर आता है, जिसके पश्चात आपको 6 से 7 दिन खाने का विशेष विधान करवाकर वमनकर्म को पूर्ण रूप से संपन्न किया जाता है |
↪️ विकृत कफ और पित्त में आप उन सभी तत्वों का समावेश कर सकते हैं जिनके कारण रोग उत्पत्ति मानी जाती है | उदाहरण के तौर पर थायराइड रोग में T3 T4 TSH का घटना या बढ़ना मुख्य कारण माना जाता है, यह क्यों होता है क्योंकि आपकी अंत स्रावी ग्रंथियां कार्य करने में सक्षम नहीं रहती और अपने प्राकृत कर्म से विमुख हो जाती हैं | पंचकर्म द्वारा ग्रंथियों की शुद्धि के पश्चात यह व्यवस्थित कार्य करने में सक्षम हो पाए इसकी पूर्ण रूप से चिकित्सा की जाती है |
↪️ इस क्रिया से जुड़े आपके मन में कई प्रश्न आ रहे होंगे जैसे घी तेल पीने से शरीर में चर्बी का अंश तो नहीं बढ़ेगा या मोटापा तो नहीं आएगा इस हेतु मैं यह बताना चाहूंगा कि जिन लोगों को चर्बी का अंश (lipids) बढ़ा हुआ है ऐसे रोगियों में यह क्रिया विशेष फायदेमंद है और इस क्रिया की यह कार्मुकता को सिद्ध करने हेतु हम हमारे यहां पर रोगियों का पहले और बाद में लिपिड प्रोफाइल करवाते हैं |
↪️ इसके अलावा इस से कोई हानि तो नहीं है जिस तरह किसी भी मशीन या घर की सफाई करने से कभी भी किसी भी प्रकार का घाटा नहीं होता है वैसे ही आयुर्वेद में वर्णित किसी भी पंचकर्म क्रिया से कभी भी कोई हानि नहीं होती बस शर्त कितनी है कि आप अपने वैद्य की बात मानें |
↪️ यह क्रिया प्रायः सभी लोग स्वास्थ्य लाभ हेतु करवा सकते हैं बाकी यह क्रिया विशेषता थायराइड, डायबिटीज, सोरायसिस, ल्यूकोडरमा, पीसीओडी, लड़कियों में समय से महीना ना आना, किसी भी प्रकार की एलर्जी की समस्या जैसे सुबह के समय छींके आना या शरीर में खुजली रहना, hyperacidity आदि रोगों में विशेष लाभदायक है |
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डॉ. सुनील कुमार गुप्ता ,
BAMS, PGD-PK-IMS-BHU
आयुर्वेद एवं पंचकर्म चिकित्सा विशेषज्ञ
[ श्वास रोग (दमा), उदर रोग, शुगर, ब्लडप्रेशर, सायटिका, गर्दन दर्द, कमर दर्द, जोडों का दर्द, लकवा, सर दर्द एवं मानसिक रोग ]
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पता :-
SDM आयुर्वेदिक चिकित्सालय एवं पंचकर्मा सेंटर
गुडबडी चौराहा शाहगंज जौनपुर
उत्तर प्रदेश
MOB 9074784174
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