SDM Ayurvedic Chikitshalaya Evam Panchakarma Center

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Gastro, Neuro, Skin & Geriatric MedicineSDM Ayurvedic Chikitshalaya Evam Panchakarma Center Dr-Sunil Kumar Gupta
21/08/2024

Gastro, Neuro, Skin & Geriatric Medicine
SDM Ayurvedic Chikitshalaya Evam Panchakarma Center Dr-Sunil Kumar Gupta

15/07/2024

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Result on 14th day from pure classical Ayurvedic treatment
05/03/2024

Result on 14th day from pure classical Ayurvedic treatment

Power of panchakarma :-
14/02/2023

Power of panchakarma :-

05/02/2023

♦️ #बसंत_ऋतु_और_वमन_कर्म ♦️
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आयुर्वेद ग्रंथो मे ्म कफ दोष के निष्कासन के लिए संकेत दिया गया है । कफ दोष बसंत ऋतु (फरवरी-मार्च) में बढ़ता है इसलिए बढ़े हुये कफ दोष को वमन प्रक्रिया के द्वारा शरीर से बाहर निकाला जाता है।

↪️ ्म विशेष रूप से #कफ और ित्त दोष से पीड़ित रोग जैसे -
👉 #ब्रोंकीयल_अस्थमा (श्वास रोग)
👉 #साइनस
👉 #डायबिटीज
👉 #हाइपर_एसिडिटी
👉 #थायरोईड (T3, T4, TSH)
👉 #कोलेस्ट्रोल
👉 #मोटापा
👉 #त्वचा_रोग ( #सोरियासिस, #ल्यूकोडरमा)
👉 #एलर्जी_की_समस्या जैसे सुबह के समय छींके आना या #शरीर_में_खुजली_रहना.....आदि रोगो में
विशेष लाभदायक है |

↪️ यह क्रिया प्रायः सभी लोग स्वास्थ्य लाभ हेतु करवा सकते हैं !
#पंचकर्म आयुर्वेद के उपचार का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है । आयुर्वेद रोग निवारक एवं परिरक्षक चिकित्सा है, आयुर्वेद का स्वास्थ के साथ मजबूत संबंध है और कहा भी गया हे की मौसमी (ऋतु) परिवर्तन जैवीक प्रणालियों को प्रभावित करेगा जिसमे मौसम की उत्तेजना के फलस्वरूप शरीर मे दोष बढ़ेगें और बढ़े हुये दोषों को शरीर से बाहर निकालने के लिए पंचकर्म अति आवश्यक एवं श्रेष्ठ है।

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डॉ. सुनील कुमार गुप्ता
BAMS, PGD-PK-IMS-BHU
[पंचकर्म चिकित्सा विशेषज्ञ]
पता :-
💥SDM आयुर्वेदिक चिकित्सालय एवं पंचकर्मा सेंटर 💥
गुडबडी चौराहा शाहगंज जौनपुर
(उत्तर प्रदेश)
Mob 9074784174

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💥आयुष चिकित्सक :- 💥
जीवक आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज एण्ड हॉस्पिटल रिसर्च सेन्टर चंदौली
(उत्तर प्रदेश)
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05/02/2023

💥बसंत ऋतु और वमन कर्म💥
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↪️ आयुर्वेद में वर्णित वमन चिकित्सा वसंत ऋतु ( फरवरी-मार्च) में करने का विधान है | आयुर्वेद में किसी भी पंचकर्म के पूर्व, शरीर को पूर्व कर्म से तैयार किया जाता है | पूर्व कर्मों से मतलब शरीर में स्थित लीन दोषों को चलायमान कर शाखा (हाथ पैर आदि) से कोष्ठ (Gastro Intestinal Tract) में लाने का एक तरीका है | इन कर्मों के रूप में शरीर को कुछ दिन औषधि युक्त तेल की मालिश की जाती है एवं स्वेदन या भाप पेटी में बैठा कर भाप दी जाती है, और साथ ही आपकी पाचन शक्ति के अनुसार आपको घृत या तेल (स्नेह) पिलाया जाता है | जब आपका शरीर अच्छे से स्नेहित हो जाता है तो 1 से 2 दिन स्नेह विश्राम मतलब जो आपको स्नेह पिलाया गया है वह और बेहतर रूप से शरीर मैं स्थिति लीन दोषों को कोष्ठ में ले आए इस क्रिया हेतु उसे समय दिया जाता है, इसके पश्चात आपको अगले दिन प्रातः सुबह मुख्य कर्म के रूप में वमन क्रिया की जाती है जिसमें आपको पेट भर कर दूध, कोष्ण जल, मुलेठी फांट या अन्य कोई द्रव दिया जाता है, साथ ही वामक औषधि दी जाती है, जिसके फलस्वरूप सुखद रूप से उल्टियां होती हैं और इन उल्टीयों के साथ में आपके शरीर में स्थित विकृत कफ और पित्त दोष बाहर आता है, जिसके पश्चात आपको 6 से 7 दिन खाने का विशेष विधान करवाकर वमनकर्म को पूर्ण रूप से संपन्न किया जाता है |

↪️ विकृत कफ और पित्त में आप उन सभी तत्वों का समावेश कर सकते हैं जिनके कारण रोग उत्पत्ति मानी जाती है | उदाहरण के तौर पर थायराइड रोग में T3 T4 TSH का घटना या बढ़ना मुख्य कारण माना जाता है, यह क्यों होता है क्योंकि आपकी अंत स्रावी ग्रंथियां कार्य करने में सक्षम नहीं रहती और अपने प्राकृत कर्म से विमुख हो जाती हैं | पंचकर्म द्वारा ग्रंथियों की शुद्धि के पश्चात यह व्यवस्थित कार्य करने में सक्षम हो पाए इसकी पूर्ण रूप से चिकित्सा की जाती है |

↪️ इस क्रिया से जुड़े आपके मन में कई प्रश्न आ रहे होंगे जैसे घी तेल पीने से शरीर में चर्बी का अंश तो नहीं बढ़ेगा या मोटापा तो नहीं आएगा इस हेतु मैं यह बताना चाहूंगा कि जिन लोगों को चर्बी का अंश (lipids) बढ़ा हुआ है ऐसे रोगियों में यह क्रिया विशेष फायदेमंद है और इस क्रिया की यह कार्मुकता को सिद्ध करने हेतु हम हमारे यहां पर रोगियों का पहले और बाद में लिपिड प्रोफाइल करवाते हैं |
↪️ इसके अलावा इस से कोई हानि तो नहीं है जिस तरह किसी भी मशीन या घर की सफाई करने से कभी भी किसी भी प्रकार का घाटा नहीं होता है वैसे ही आयुर्वेद में वर्णित किसी भी पंचकर्म क्रिया से कभी भी कोई हानि नहीं होती बस शर्त कितनी है कि आप अपने वैद्य की बात मानें |
↪️ यह क्रिया प्रायः सभी लोग स्वास्थ्य लाभ हेतु करवा सकते हैं बाकी यह क्रिया विशेषता थायराइड, डायबिटीज, सोरायसिस, ल्यूकोडरमा, पीसीओडी, लड़कियों में समय से महीना ना आना, किसी भी प्रकार की एलर्जी की समस्या जैसे सुबह के समय छींके आना या शरीर में खुजली रहना, hyperacidity आदि रोगों में विशेष लाभदायक है |

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डॉ. सुनील कुमार गुप्ता ,
BAMS, PGD-PK-IMS-BHU
आयुर्वेद एवं पंचकर्म चिकित्सा विशेषज्ञ
[ श्वास रोग (दमा), उदर रोग, शुगर, ब्लडप्रेशर, सायटिका, गर्दन दर्द, कमर दर्द, जोडों का दर्द, लकवा, सर दर्द एवं मानसिक रोग ]
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पता :-
SDM आयुर्वेदिक चिकित्सालय एवं पंचकर्मा सेंटर
गुडबडी चौराहा शाहगंज जौनपुर
उत्तर प्रदेश
MOB 9074784174
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20/01/2023

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