प्रेम की संस्कारशाला

प्रेम की संस्कारशाला Yoga meditation spiritual health treatment

29/01/2026

"जब मन नहीं होता, फिर भी रिश्तों के लिए करना पड़ता है"

इंसान अकेला नहीं जीता। उसका जीवन रिश्तों से जुड़ा होता है माता-पिता, पति-पत्नी, बच्चे, भाई-बहन, दोस्त, समाज। कई बार हम काम नहीं, बल्कि रिश्तों के लिए ऐसे फैसले लेते हैं जो हमारा मन नहीं चाहता। उस समय हम खुद को पीछे रख देते हैं और रिश्ते को आगे।

मान लीजिए कोई बेटा अपने माता-पिता की खुशी के लिए ऐसा करियर चुन लेता है जो उसका सपना नहीं है। मन रोज़ कहता है, “मैं कुछ और करना चाहता था”, लेकिन वह चुपचाप वही करता रहता है। बाहर से सब ठीक लगता है, पर भीतर एक खालीपन बन जाता है।

रिश्तों में “हाँ” कहना, जब मन “न” कह रहा हो

रिश्तों में सबसे ज्यादा तकलीफ तब होती है जब इंसान मन के खिलाफ हाँ कह देता है।

किसी की बात से सहमत हो जाना, जबकि दिल नहीं मानता

किसी गलत व्यवहार को सह लेना, सिर्फ रिश्ता बचाने के लिए

अपनी तकलीफ को दबा देना, ताकि सामने वाला दुखी न हो

जैसे पति-पत्नी के रिश्ते में एक साथी कुछ ऐसा करता है जो दूसरे को चोट पहुँचाता है। सामने वाला मन में बहुत कुछ कहना चाहता है, पर चुप रह जाता है। वह सोचता है, “बात बढ़ेगी, रिश्ता टूट जाएगा।” उस दिन रिश्ता तो बच जाता है, लेकिन मन टूट जाता है।

काम हो जाने के बाद रिश्तों में पैदा होने वाला पछतावा

जब इंसान मन मारकर कोई बात सह लेता है या कोई फैसला कर लेता है, तब बाद में पछतावा आता है।
मन पूछता है
“मैंने खुद की बात क्यों नहीं रखी?”
“क्या मेरी भावनाओं की कोई कीमत नहीं?”

जैसे कोई दोस्त बार-बार आपका अपमान करता है और आप हँसकर बात टाल देते हैं। उस समय आप दोस्ती निभा लेते हैं, लेकिन घर आकर वही बात दिमाग में घूमती रहती है। सीने में बोझ सा लगने लगता है।

रिश्तों में घुटन: जो दिखती नहीं

रिश्तों की घुटन सबसे खतरनाक होती है, क्योंकि वह बाहर से दिखाई नहीं देती। लोग कहते हैं
“सब ठीक तो है, फिर परेशानी क्या है?”

लेकिन भीतर इंसान घुट रहा होता है।
वह हँसता है, बातें करता है, रिश्ते निभाता है पर मन भारी रहता है।
धीरे-धीरे उसे उन्हीं लोगों के बीच अकेलापन महसूस होने लगता है, जिनके लिए उसने खुद को छोड़ा था।

अतीत में उलझा हुआ मन और रिश्ते

रिश्तों में लिए गए गलत या मजबूरी वाले फैसले मन को बार-बार अतीत में ले जाते हैं।

“उस दिन मैंने चुप क्यों रह लिया?”

“काश मैंने सच बोल दिया होता”

वर्तमान में बैठे-बैठे पुरानी बातें याद आती हैं। सामने वाला कुछ कह भी नहीं रहा होता, फिर भी मन पुरानी चोटों को महसूस करता रहता है। यही वजह है कि रिश्ता होते हुए भी दूरी महसूस होने लगती है।

इस पीड़ा की सच्चाई

सच्चाई यह है कि इंसान रिश्ते खराब होने के डर से बहुत कुछ सह लेता है। वह सोचता है कि त्याग करना ही प्रेम है। लेकिन हर त्याग प्रेम नहीं होता, कुछ त्याग खुद को खो देना भी होता है।

उस समय इंसान जो करता है, वह उसके डर, संस्कार और परिस्थितियों से निकलता है। यह उसकी कमजोरी नहीं, उसकी इंसानियत है।

रिश्तों में सीख क्या है

रिश्ते निभाना जरूरी है, लेकिन खुद को मिटाकर नहीं।
अगर मन बार-बार भारी हो रहा है, तो वह कोई संकेत देता है।
रिश्ते तब ही सच्चे होते हैं जब उनमें अपनी बात कहने की जगह हो।

मन नहीं होते हुए भी रिश्तों के लिए किया गया हर काम इंसान के भीतर एक कहानी छोड़ जाता है। कुछ कहानियाँ सीख बन जाती हैं, और कुछ बोझ।
जरूरत इस बात की है कि हम खुद से यह सवाल करें...
“क्या मैं इस रिश्ते में खुद के साथ ईमानदार हूँ?”

क्योंकि रिश्ते वही टिकते हैं जहाँ इंसान सिर्फ निभाता नहीं, जी भी पाता है।

26/12/2025

मैं बहुत ज़्यादा लोगों के संपर्क से बचता हूँ। ये कोई घमंड नहीं है, न ही किसी से नाराज़गी। बस ये मेरी सहज प्रवृत्ति है। मुझे भीड़ में रहकर खुद को खो देना कभी अच्छा नहीं लगा। जितने लोग उतनी बातें, उतने दिखावे, उतनी अपेक्षाएँ और इन्हीं के बीच अक्सर मैं खुद से दूर होता चला जाता हूँ। इसलिए मैंने धीरे-धीरे दूरी चुन ली, शोर से नहीं बल्कि उस अनावश्यक उलझन से जो भीतर की शांति छीन लेती है।

मुझे अकेले रहना पसंद है, क्योंकि अकेलेपन में मैं अपने सबसे करीब होता हूँ। वहाँ मुझे किसी भूमिका में ढलना नहीं पड़ता, किसी को प्रभावित करने की ज़रूरत नहीं होती। मैं जैसा हूँ, वैसा रह सकता हूँ। अपने विचारों के साथ बैठना, अपनी थकान को सुनना, अपनी चुप्पी को महसूस करना ये सब मुझे ज़िंदा होने का एहसास देता है। अकेलापन मेरे लिए खालीपन नहीं, बल्कि आत्म-संवाद है।

मैं काम से काम रखता हूँ, क्योंकि मैंने देखा है कि ज़रूरत से ज़्यादा संबंध अक्सर बोझ बन जाते हैं। हर किसी की ज़िंदगी में झाँकना या अपनी ज़िंदगी सबके सामने खोल देना मुझे कभी रास नहीं आया। सीमित दायरा, सीमित बातचीत और साफ़ रिश्ते यही मुझे सुकून देते हैं। मुझे हर किसी का दोस्त बनने का शौक नहीं है, न ही हर मुस्कान के पीछे अपनापन ढूँढने की आदत। कई बार लोग इसे मेरा घमंड समझ लेते हैं, कुछ लोग अजीब कह देते हैं, तो कुछ को लगता है मैं टूट चुका हूँ। लेकिन सच्चाई ये है कि मैं खुद को संभालना सीख गया हूँ। बहुत लोगों के बीच रहकर भी अकेला महसूस करना मैंने देखा है, और खुद के साथ रहकर पूर्ण होना भी। मैंने दूसरा रास्ता चुना है।

मेरी चुप्पी में उदासी नहीं है, बस चयन है। मेरी दूरी में नफ़रत नहीं है, बस आत्म-रक्षा है। मैं कम बोलने लगा हूँ, मुझे रिश्तों की भीड़ नहीं चाहिए, मुझे उन गिने-चुने पलों की ज़रूरत है जहाँ सांस लेना भारी न लगे। शायद मैं सबकी तरह नहीं हूँ, और होने की कोशिश भी नहीं करता। मुझे अपने छोटे से दायरे में रहना अच्छा लगता है।

05/12/2025

मैंने दुनिया को छोड़कर एकांत का दामन थामा, क्योंकि मैं उन अनगिनत लोगों की ख़ुशामद करते-करते थक गया, जो विनम्रता को कमज़ोरी, दया को कायरता, और अहंकार को शक्ति समझते हैं।

~ खलील जिब्रान

05/12/2025

ऋषिकेश की पावन धरती और माँ गंगा की दिव्य धारा का आशीर्वाद इतना अलौकिक है कि उसकी महिमा की कल्पना भी नहीं की जा सकती। योग-साधना और आध्यात्मिक अभ्यास करने वाले सभी साधकों के लिए यह भूमि पवित्र ऊर्जा, शांति और प्रेरणा से परिपूर्ण है।
माँ गंगा की कृपा आपकी आस्था को दृढ़ बनाए, आपके आध्यात्मिक मार्ग को प्रकाशमय करे और आपके जीवन को और अधिक सुंदर, सशक्त और मंगलमय बनाए।
आप सभी के लिए हृदय से अनगिनत शुभकामनाएँ और प्रार्थनाएँ।

मैं बदला नहीं लेना चाहता नहीं प्रयास करता हूं…क्योंकि प्रतिशोध मेरे स्वभाव का आभूषण नहीं। मैं एक सरल, सहज, निर्विकार- हू...
01/12/2025

मैं बदला नहीं लेना चाहता नहीं प्रयास करता हूं…क्योंकि प्रतिशोध मेरे स्वभाव का आभूषण नहीं। मैं एक सरल, सहज, निर्विकार- हूँ जो क्रोध को अग्नि बनाकर नहीं,खामोशी को शस्त्र बनाकर जितना पसंद करता

लोग मेरी चुप्पी को अक्सर मेरी कमजोरी समझ बैठते हैं,।जब मेरे भीतर का विश्वास टूटता है,मैं शोर नहीं करता हूं,विवाद नहीं करत बस धीरे से, नीरवता में,अपने मन का अंतिम द्वार बंद कर देत हूँ।
क्योंकि मेरे शांत हो जाने का अर्थ सिर्फ़ थकान नहीं,
बल्कि गहरे अंत का उद्घोष (ऐलान) है।

यह वह नाज़ुक क्षण होता है जब मेरा स्नेह,मेरी सहनशीलता और मेरा विश्वास एक मौन विराम में स्थिर हो जाता है। मेरी शांति…मेरी पराजय नहीं,मेरी मुक्ति होती है और जिस दिन मैं सचमुच शांत हो जाऊँ समझ लेना,रिश्ता अपने अंतिम पृष्ठ पर पहुँच चुका है और मैंने उसे बिना आहट अंतिम पूर्ण विराम दे दिया है।

01/12/2025

वर–वधू को पावन आशीर्वाद मंगलकामना

🌸मङ्गलम् भगवान विष्णुः, मङ्गलम् गरुणध्वजः। मङ्गलम् पुण्डरी काक्षः, मङ्गलाय तनो हरिः॥🌸

🌸“ॐ सर्व मंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके।
शरण्ये त्र्यम्बके गौरी, नारायणि नमोऽस्तुते॥”🌸

“🌸ॐ दम्पत्योः श्रीयं लभेताम्, आयुरारोग्यवर्धनम्।
सौख्यं सौभाग्यमारोग्यं, चिरंजीवित्वमेव च॥”🌸

🌸 नव दंपति पर वृंदावन बिहारी लाल जी की कृपा राधा रानी की कृपा सदैव बनी रहे जय श्री राधे

01/12/2025

🌸आज इजिप्ट देश में आयोजित पावन विवाह समारोह में निरंजन पीठाधीश्वर, श्रोत्रिय ब्रह्मनिष्ठ,
परमपूज्य आचार्य महामंडलेश्वर श्री श्री 1008 डॉ स्वामी कैलाशानंद गिरि जी महाराज अपने दिव्य कृपा-प्रभाव से पधारे और वर–वधू को मंगल आशीर्वचन प्रदान किए।🌸

🌸पूज्य गुरुजी अपने अत्यंत प्रिय शिष्य श्री नरेश जी के पुत्र के विवाह अवसर पर विशेष रूप से इजिप्ट पधारे, और अपनी करुणा–कृपा से संपूर्ण वातावरण को आध्यात्मिक आनंद से अभिभूत कर दिया।🌸

🌸पूज्य गुरुजी ने वर–वधू को पावन आशीर्वाद देते हुए मंगलकामना की—

🌸मङ्गलम् भगवान विष्णुः, मङ्गलम् गरुणध्वजः। मङ्गलम् पुण्डरी काक्षः, मङ्गलाय तनो हरिः॥🌸

तथा सुप्रसन्न होकर आशीर्वाद स्वरूप दिव्य मंत्रोच्चार किया-

🌸“ॐ सर्व मंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके।
शरण्ये त्र्यम्बके गौरी, नारायणि नमोऽस्तुते॥”🌸

🌸पूज्य गुरुजी ने विवाह संस्कार की दिव्यता पर प्रकाश डालते हुए नवविवाहित दंपत्ति के लिए यह आशीर्वचन भी प्रदान किया—🌸

“🌸ॐ दम्पत्योः श्रीयं लभेताम्, आयुरारोग्यवर्धनम्।
सौख्यं सौभाग्यमारोग्यं, चिरंजीवित्वमेव च॥”🌸

🌸इस पावन अवसर पर दुबई सहित विश्व के विभिन्न देशों से पधारे श्रद्धालु गुरुजी के दर्शन कर स्वयं को धन्य करते रहे।
पूरे समारोह में गुरुजी की दिव्य उपस्थिति से भक्ति, शांति और सौहार्द का सुंदर संगम स्थापित हुआ।🌸

17/11/2025

एक बेहद लंबी और गंभीर बीमारी के बीचों बीच 2018 में। हालांकि कुछ बीमारियां ख़त्म तो हो जाती हैं पर अपनी खुरचन छोड़ जाती हैं। आप उस खुरचन का स्वाद आए-बघाए चखते रहते हैं।
फिर उसकी आदत हो जाती है।
पर आप उससे जूझते भी हैं और हर बार उससे लड़ कर उबरने के विरले ढंग भी ढूंढते रहते हैं और जीते रहते हैं।
बस जीने का जज़्बा विराट होना चाहिए!
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अकेले जीनी है ज़िन्दगी ये अब मैंने जान ली है तन्हाइयों से लड़ने की अब मैंने भी ठान ली है। 💪🏼💫🌟 चलता रहेगा हंसना सीखो
06/11/2025

अकेले जीनी है ज़िन्दगी ये अब मैंने जान ली है
तन्हाइयों से लड़ने की अब मैंने भी ठान ली है। 💪🏼💫🌟 चलता रहेगा हंसना सीखो

07/09/2025
29/08/2025

मोहब्बत करने वालों में ये झगडा डाल देती है,
सियासत दोस्ती की जड में मट्ठा दाल देती है.!!

तवायफ की तरह अपनी गलतकारी के चेहरे पर,
हुकूमत मंदिर और मस्जिद का पर्दा डाल देती है.!!

हुकूमत मुंहभराई के हुनर से खूब वाकिफ है,
ये हर कुत्ते के आगे शाही टुकडा डाल देती है.!!

कहां की हिजरतें कैसा सफर कैसा जुदा होना,
किसी की चाह पैरों पर दुपट्टा डाल देती है.!!

ये चिडिया भी मेरी बेटी से कितनी मिलती जुलती है,
कहीं भी शाखे गुल देखे तो झूला डाल देती है.!!

भटकती है हवस दिन रात सोने की दुकानों में,
गरीबी कान छिदवाती है तिनका डाल देती है.!!

~मुनव्वर राना साहब ✍️✍️

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