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11/02/2019

पुरुषों में आस्टियोपोरोसिस के लक्षण, इन तरीकों से पहचानें इन्हें

आस्टियोपोरोसिस एक ऐसी बीमारी है जो दीमक की तरह हड्डियों को खोखला बना देती है। वर्तमान समय में यह रोग पुरुषों में इतना आम हो गया है कि हर तीसरा व्यक्ति आस्टियोपोरोसिस का शिकार हो रहा है। अगर आंकड़ों की बात करें तो हमारे देश में हर तीन में से एक पुरुष आस्टियोपोरोसिस से ग्रसित है। वैसे तो इस रोग के बढ़ने के कई कारण हैं लेकिन पुरुषों में टेस्टास्टेरॉन हार्मोन की कमी की वजह से हड्डियों जल्दी कमजोर होती है। अगर इसके लक्षणों की बात करें तो शुरुआत में यह इतने सामान्य होते हैं कि लोगों को समझ ही नहीं आ पाता कि वह आस्टियोपोरोसिस के शिकार हो गए हैं। लेकिन कुछ संकेत ऐसे भी हैं जिन पर अगर आप ध्यान दें तो आपको समझ आ जाएगा कि आप इस रोग के शिकार हो रहे हैं। आज हम आपको आस्टियोपोरोसिस के लक्षण, कारण और इलाज के बारे में बता रहे हैं।

पुरुषों में आस्टियोपोरोसिस के लक्षण
बहुत जल्दी थक जाना और चक्कर आना
सुबह उठते वक्त शरीर में दर्द होना
सुबह के वक्त कमर में दर्द होना
हल्की से चोट लगने पर फ्रैक्चर हो जाना
हड्डियों और मांसपेशियों में हमेशा हल्का दर्द रहना
शरीर के जोडों में जैसे रीढ़, कलाई और हाथ की हड्डी में तेज दर्द होना
पीठ के निचले हिस्से और गर्दन में हल्का सा भी दबाव पड़ने पर तेज दर्द, आदि।

आस्टिओपरोसिस के कारण
टेस्टास्टेरॉन हार्मोन पुरुषों में ही पाया जाता है, अनियमित दिनचर्या और खतरनाक बीमारियों के चलते पुरुषों में इसकी कमी हो जाती है। टेस्‍टोस्‍टेरॉन की कमी के चलते हड्डियों में खनिजों का घनत्व यानी बीएमडी कम हो जाता है, इसके कारण ही अधिक उम्र के पुरुषों की हडिृडयों के टूटने की संभावना बढ़ जाती है।
अगर किसी के परिवार में आस्टिओपरोसिस का इतिहास है, तो सामान्‍य व्‍यक्ति की तुलना में उसे यह रोग होने का खतरा अधिक होता है। शोध यह भी साबित करते है कि कुछ क्षेत्र-विशेष के लोगों को यह रोग होने का खतरा अधिक होता है। भारोपीय और एशियाई क्षेत्र के लोगों में अफ्रीकन अमेरिकन और हिस्‍पेनिक लोगों के मुकाबले ऑस्‍टेपोरिसिस अधिक देखा गया है।
ऑस्टियोपोरोसिस की समस्‍या उम्रदराज पुरुषों को अधिक होती है। 50 की उम्र के बाद पुरुषों में इस बीमारी के होने की संभावना बढ़ जाती है। दरअसल 50 की उम्र के बाद पुरुषों की हड्डी का घनत्‍व कम होने लगता है जिसके कारण हड्डियां कमजोर होने लगती हैं और पुरुष इसकी चपेट में आ जाते हैं।
आस्टिओपरोसिस का एक बड़ा कारण हमारी जीवनशैली भी हो सकती है। आप क्‍या खाते हैं, पीते हैं और कैसा जीवन जीते हैं, इन सब बातों का ऑस्‍टोपोर‍ोसिस के होने से सीधा संबंध होता है। अगर आपके आहार में पर्याप्‍त कैल्शियम, विटामिन डी और जरूरी पोष्‍ज्ञक तत्‍व जैसे फास्‍फोरस और मैग्‍नीशियम न हों, तो इससे आपकी हड्डियों को मिलने वाले पोषण में कमी आती है। इन पोषक तत्‍वों की कमी से आपकी अस्थियां कमजोर हो सकती हैं, क्‍योंकि उनकी सेहत के लिए ये सभी तत्‍व बेहद जरूरी होते हैं।
कैल्सियम और विटामिन डी की कमी से भी ऑस्टियोपोरोसिस होने की संभावना बढ़ जाती है। हड्डियों को मजबूत बनाने के लिए कैल्सियम और विटामिन डी की आवश्‍यकता होती है। अगर शरीर में इनकी कमी हुई तो पुरुष आसानी से ऑस्टियोपोरोसिस की चपेट में आ सकते हैं। 50 की उम्र के बाद पुरुषों को नियमित रूप से मिग्रा कैल्सियम का सेवन करना चाहिए।
निष्‍क्रिय जीवनशैली भी ऑस्‍टोपोरोसिस का कारण बन सकती है। आपको रोजाना व्‍यायाम अथवा किसी प्रकार की शारीरिक गतिविधि जरूर करनी चाहिए। इसके साथ ही अगर आप वेट ट्रेनिंग एक्‍सरसाइज, जैसे वेट लिफ्टिंग, पुश-अप्‍स आदि, कर सकें तो आपके लिए अच्‍छा होगा। इसके साथ ही आपको दौड़, पैदल चलना और एरोबिक्‍स जैसी कसरत करनी चाहिए। इससे भी आपके बॉन मॉस में बढ़ोत्तरी होती है।
धूम्रपान का सेवन फेफड़ों के साथ-साथ हड्डियों के लिए भी हानिकारक है। तंबाकू के सेवन से हड्डियों का घनत्‍व कम होता है। इसलिए किसी भी प्रकार के धूम्रपान से बचें। इसके साथ ही कुछ आहार आपकी हड्डियों पर बुरा असर पड़ता है। धूम्रपान और अल्‍कोहल का अधिक सेवन भी आपके शरीर और हड्डियों के लिए अच्‍छा नहीं। इससे आपका अस्थि घनत्‍व कम होता है और हड्डियां कमजोर हो जाती हैं। प्रोटीन का अत्‍यधिक सेवन और कैफीन का जरूरत से ज्‍यादा सेवन भी हड्डियों के लिए अच्‍छा नहीं होता। ये सब तत्‍व मिलकर भी ऑस्‍टोपोरोसिस की वजह बन सकते हैं।
कुछ दवायें भी आपकी हड्डियों को कमजोर बना सकती हैं। कुछ दवायें आपकी हड्डियों पर नकारात्‍मक असर डालने में महत्‍वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। खासतौर पर अगर आप किसी गंभीर बीमारी के लिए लंबे समय से दवायें ले रहे हैं, तो इसका आपकी अस्थियों पर गहरा असर पड़ सकता है। रहेयूमेटायड अर्थराइटिस अथवा अस्‍थमा आदि के लिए ली जाने वाली दवायें अस्थियों को प्रभावित कर सकती हैं। इन दवाओं की उच्‍च मात्रा आपको नुकसान पहुंचा सकती हैं। इन दवाओं के दुष्‍प्रभावों के बारे में अपने डॉक्‍टर से जरूर बात करें।

आस्टियोपोरोसिस से बचाव
अगर आस्टियोपोरोसिस का जल्दी पता चल जाए और समय पर इसका इलाज शुरू कर दिया जाए, तो भविष्य में होने वाले फ्रेक्चर के जोखिम को कम किया जा सकता है। हालांकि अब तक ओस्टियोपोरोसिस को पूरी तरह से ठीक नहीं किया जा सकता। इसलिए यदि समय रहते आस्टियोपोरोसिस के इलाज में ध्यान दिया जाए तो इस बीमारी के होने की आशंका को टाला जा सकता है। वैसे ऑस्टियोपोरोसिस से बचने के लिए डॉक्टर शुरू से ही यानी 30 की उम्र के बाद खाने में कैल्शियम और विटामिन डी मात्रा अधिक बढ़ाने की सलाह देते हैं।

27/01/2019

कहीं आप दिल की बीमारी के लक्षणों को एसिडिटी या गैस तो नहीं समझ रहे? जानें अंतर

क्या आपको अक्सर सीने में जलन या हल्के दर्द की समस्या रहती है? क्या आप भी इस समस्या को एसिडिटी या गैस समझकर नजरअंदाज कर देते हैं? अगर ऐसा है, तो सावधान हो जाएं। संभव है ये समस्या किसी गंभीर रोग का संकेत हो। जी हां, सीने में जलन की समस्या सिर्फ मिर्च-मसाले वाले भोजन और एसिडिटी के कारण नहीं होती है, बल्कि ये दिल की किसी बीमारी का शुरुआती संकेत भी हो सकता है। इसलिए अगर सीने में जलन होने पर आप भी एसिडिटी की दवा खाते हैं, तो लक्षणों पर एक बार फिर से गौर करें।

एसिडिटी और दिल की बीमारी
एसिडिटी और हार्ट की बीमारियां, दोनों में ही सीने में जलन की समस्या पाई जाती है। मगर दोनों में थोड़ा अंतर होता है। जैसे- हार्ट बर्न की समस्या आमतौर पर तब होती है जब आपने मिर्च-मसाले वाला भोजन किया हो, खाना खाने के बाद तुरंत सो गए हों या दिनभर में बहुत कम पानी पिया हो। मगर हार्ट अटैक या दिल के रोगों के कारण होने वाली जलन और दर्द कभी भी और किसी भी परिस्थिति में हो सकती है।

कैसे अलग है हार्ट अटैक और हार्ट बर्न का दर्द
हार्ट बर्न होने पर आमतौर पर सीने में जलन और दर्द तो महसूस होता है मगर इसके साथ ही आपको अपने फूड पाइप में भी जलन महसूस होती है। साथ ही कई बार डकार आने पर खाना बाहर आने जैसा महसूस होता है। जबकि हार्ट अटैक के कारण होने वाला दर्द कंधे, गर्दन और बांहों तक फैल जाता है। इसके साथ ही हार्ट अटैक के कारण होने वाले दर्द में आमतौर पर ठंडा पसीना आता है और चक्कर आने और सांस लेने में परेशानी की समस्या होती है।

क्यों होता है हार्ट बर्न
जब भोजन मुंह में प्रवेश करता है, तब लार भोजन में उपस्थित स्टार्च को छोटे-छोटे अणुओं में तोड़ने लगती है। इसके बाद भोजन इसोफैगस (भोजन नली) से होता हुआ पेट में जाता है, जहां पेट की अंदरूनी परत भोजन को पचाने के लिए पाचक उत्पाद बनाती है। इसमें से एक स्टमक एसिड है। कई लोगों में लोवर इसोफैगल स्फिंक्टर (एलईएस) ठीक से बंद नहीं होता और खुला रह जाता है। जिससे पेट का एसिड वापस बहकर इसोफैगस में चला जाता है। इससे छाती में दर्द और तेज जलन होती है। इसे ही जीईआरडी या एसिड रिफ्लक्स कहते हैं।

23/01/2019

डायबिटीज के कारण
यह तो आप जानते ही होंगे कि हमारे शरीर की पेंक्रियाज ग्रंथी के ठीक से काम ना करने या फिर पूरी तरह से बेकार होने से डायबिटीज हो जाती है। हालांकि डायबिटीज होने के और भी कई कारक है लेकिन पेंक्रियाज ग्रंथी इसका सबसे बड़ा कारण है। दरअसल पेंक्रियाज ग्रंथी से तरह-तरह के हार्मोंस निकलते हैं, इन्हीं में से हैं इंसुलिन और ग्लूकान। इंसुलिन हमारे शरीर के लिए बहुत उपयोगी है। इंसुलिन के जरिए ही हमारे रक्त में, हमारी कोशिकाओं को शुगर मिलती है, यानी इंसुलिन शरीर के अन्य भागों में शुगर पहुंचाने का काम करता है। इंसुलिन द्वारा पहुंचाई गई शुगर से ही कोशिकाओं या सेल्स को एनर्जी मिलती है। डायबिटीज का कारण है इंसुलिन हार्मोंन का कम निर्माण होना। जब इंसुलिन कम बनता है तो कोशिकाओं तक और रक्त में शुगर ठीक से नहीं पहुंच पाती जिससे सेल्स की एनर्जी कम होने लगती है और इसी कारण से शरीर को नुकसान पहुंचने लगता है। जैसे- बेहोशी आना, दिल की धड़कन तेज होना इत्यादि समस्याएं होने लगती हैं। इसके अलावा नीचे बताए गए 3 कारण भी डायबिटीज होने के लिए जिम्मेदार हैं।डायबिटीज के कारण इंसुलिन के कम निर्माण से रक्त में शुगर अधिक हो जाती है क्योंकि शारीरिक ऊर्जा कम होने से रक्त में शुगर जमा होती चली जाती है जिससे कि इसका निष्कासन मूत्र के जरिए होता है। इसी कारण डायबिटीज रोगी को बार-बार पेशाब आता है।डायबिटीज के होने का मुख्य कारण अनुवांशिक भी होता है। यदि आपके परिवार के किसी सदस्य मां-बाप, भाई-बहन में से किसी को है तो भविष्य में आपको भी डायबिटीज होने की आशंका बढ़ जाती है।जो लोग मोटापे के शिकार होेते हैं उन्हें भी डायबिटीज होने का ज्यादा खतरा रहता है। आपका वजन बहुत बढ़ा हुआ है, आपका बीपी बहुत हाई है और कॉलेस्ट्रॉल भी संतुलित नहीं है तो भी आपको डायबिटीज हो सकता है। इसक अलावा व्यायाम की कमी भी डायबिटीज को निमंत्रण देती है।

23/01/2019

डायबिटीज के लिए जरूरी टेस्ट
ग्लूकोज की जांच
जो लोग डायबिटीज से पीड़ित होते हैं उन्हें समय समय पर ग्लूकोज की जांच जरूर करा लेनी चाहिए। क्योंकि यदि डायबिटीज के मरीज का ग्लूकोज स्तर बढ़ता है तो रोगी के लिए ये बहुत खतरनाक हो सकता है। इसके साथ ही खून की जांच भी मधुमेह रोगियों के लिए जरूरी है इससे पता चलता है कि किडनी ठीक ढंग से काम कर रही हैं या नहीं। मधुमेह में किडनी पर काफी प्रभाव पड़ता है। नियमित जांच से रोगी को किडनी की समस्या से दूर रखता है।
कोलेस्ट्रोल की जांच कोलेस्ट्रोल को नजरअंदाज करना भी बहुत महंगा पड़ सकता है। क्योंकि मधुमेह रोगियों में कोलेस्ट्रोल बढ़ने पर हृदय रोग का खतरा दुगुना हो जाता है। रक्त में ग्लूकोज की मात्रा खराब कोलेस्ट्रोल को गति को धीमा कर सकती है जिसकी वजह से वह चिपचिपा हो जाता है और यही कारण है जिससे कोलेस्ट्रोल तेजी से बनने लगता है। बैड कोलेस्ट्रोल रक्‍त की धमनियों में जम जाता है और हृदय से जुड़ी समस्याएं पैदा करता है।
ब्लड प्रेशर की जांच हाई ब्लड प्रेशर ‘साइलेंट किलर’ के समान है। मधुमेह रोगियों में हाई ब्लड प्रेशर काफी घातक साबित हो सकता है। मधुमेह में हाई ब्लड प्रेशर होने से हृदय रोग, हृदयघात, किडनी व आंखों की समस्या भी हो सकती है। इन सबसे बचने के लिए जरूरी है कि आप ब्लड प्रेशर की नियमित जांच करवाएं।
पैरों की जांच मधुमेह में रोगियों को पैरों की समस्या हो सकती है। मधुमेह में पैरों की कोई भी समस्या होने पर इसे गंभीरता से लेना चाहिए क्योंकि इसमें पैरों की संवेदनशीलता धीरे धीरे कम होने लगती है। इसलिए पैरों में लगने वाली छोटी से छोटी चोट, संक्रमण रोगियों के लिए खतरनाक हो सकती है।
आंखों की जांच जब रक्त में ग्लूकोज का स्तर लंबे समय तक बढ़ा हुआ रहता है तो इसका सीधी असर रेटिना पर पड़ता है। इसे रेटिनोपेथी कहते हैं। आंखों को होने वाले नुकसान आसानी से नहीं पता चलता है इसके लिए रोगी को नियमित जांच करना जरूरी है। अगर रेटिनोपेथी का ज्लद इलाज नहीं किया गया तो रोगी अंधा भी हो सकता है। कई बार मधुमेह रोगी को धुंधला दिखाई देता है। ऐसे में तुरंत डॉक्टर से संपंर्क करें।

23/01/2019

डायबिटीज का इलाज
डायबिटीज एक ऐसा रोग है जिसका इलाज किसी दवा पर निर्भर नहीं है। यह एक लाइफस्टाइल से जुड़ा हुआ रोग है और आप अपने लाइफस्टाइल को बदलकर ही इस रोग से छुटकारा पा सकते हैं। जो लोग डायबिटीज जैसे खतरनाक रोग की चपेट में आने के बाद भी गंभीर नहीं होते हैं यानि कि मीठा खाना नहीं छोड़ते, फास्ट फूड का शौक रखते हैं, बढ़ते वजन पर ध्या नहीं देते, व्यायाम या योग नहीं करते, शराब पीते हैं व मीठा खाना बंद नहीं करते उन लोगों के लिए जीना बहुत मुश्किल हो जाता है। जबकि अगर रोगी अपने रोग को लेकर गंभीर रहें और अपनी जीवनशैली में जरूरी बदलाव करें तो डायबिटीज से छुटकारा पाना संभव है।
डायबिटीज को कैसे रोकें
कम कैलोरी, विशेष रूप से कम संतृप्त वसा वाला आहार लेकर आप डायबिटीज की चपेट में आने से खुद को बचा सकते हैं। सब्जियां, ताज़े फल, साबुत अनाज, डेयरी उत्पादों और ओमेगा-3 वसा के स्रोतों को अपने आहार में शामिल कीजिये। इसके अलावा फाइबर का भी अधिक मात्रा में सेवन कीजिए।
जितना अधिक आप तनाव लेंगे उतना अधिक आप अस्वास्थ्यकर आदतों का पालन करेंगे। कई शोधों से यह पता चला है कि तनाव के कारण हॉर्मोन्स का स्राव बाधिक होता है और इससे रक्त ब्‍लड ग्‍लूकोज का स्‍तर बढ़ता है। इसलिए तनाव से बचने के तरीके आजमायें।
ऐसा कोई सबूत नहीं है कि मधुमेह को हमेशा के लिए रोका जा सकता है। जैसे जैसे आपकी उम्र बढ़ती है, उच्च रक्तचाप, हृदय रोग और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं का जोखिम भी बढ़ जाता है जो मधुमेह से जुड़े हैं। इसलिए, 45 साल की उम्र के बाद, हर साल नियमित रूप से पूर्ण स्वास्थ्य जांच कराना ज़रूरी है।

06/10/2018

एक *जज अपनी पत्नी को क्यों दे रहे हैं तलाक???*।
*""रोंगटे खड़े"" कर देने वाली स्टोरी* को जरूर पढ़े
⚡कल रात एक ऐसा वाकया हुआ जिसने मेरी *ज़िन्दगी के कई पहलुओं को छू लिया*.
करीब 7 बजे होंगे,
शाम को मोबाइल बजा ।
उठाया तो *उधर से रोने की आवाज*...
मैंने शांत कराया और पूछा कि *भाभीजी आखिर हुआ क्या*?
उधर से आवाज़ आई..
*आप कहाँ हैं??? और कितनी देर में आ सकते हैं*?
मैंने कहा:- *"आप परेशानी बताइये"*।
और "भाई साहब कहाँ हैं...?माताजी किधर हैं..?" "आखिर हुआ क्या...?"
लेकिन
*उधर से केवल एक रट कि "आप आ जाइए"*, मैंने आश्वाशन दिया कि *कम से कम एक घंटा पहुंचने में लगेगा*. जैसे तैसे पूरी घबड़ाहट में पहुँचा;
देखा तो भाई साहब [हमारे मित्र जो जज हैं] सामने बैठे हुए हैं;
*भाभीजी रोना चीखना कर रही हैं* 12 साल का बेटा भी परेशान है; 9 साल की बेटी भी कुछ नहीं कह पा रही है।
मैंने भाई साहब से पूछा कि *""आखिर क्या बात है""*???
*""भाई साहब कोई जवाब नहीं दे रहे थे ""*.
फिर भाभी जी ने कहा ये देखिये *तलाक के पेपर, ये कोर्ट से तैयार करा के लाये हैं*, मुझे तलाक देना चाहते हैं,
मैंने पूछा - *ये कैसे हो सकता है???. इतनी अच्छी फैमिली है. 2 बच्चे हैं. सब कुछ सेटल्ड है. ""प्रथम दृष्टि में मुझे लगा ये मजाक है""*.
लेकिन मैंने बच्चों से पूछा *दादी किधर है*,
बच्चों ने बताया पापा ने उन्हें 3 दिन पहले *नोएडा के वृद्धाश्रम में शिफ्ट* कर दिया है.
मैंने घर के नौकर से कहा।
मुझे और भाई साहब को चाय पिलाओ;
कुछ देर में चाय आई. भाई साहब को *बहुत कोशिशें कीं चाय पिलाने की*.
लेकिन उन्होंने नहीं पी और कुछ ही देर में वो एक *"मासूम बच्चे की तरह फूटफूट कर रोने लगे "*बोले मैंने 3 दिन से कुछ भी नहीं खाया है. मैं अपनी 61 साल की माँ को कुछ लोगों के हवाले करके आया हूँ.
*पिछले साल से मेरे घर में उनके लिए इतनी मुसीबतें हो गईं कि पत्नी (भाभीजी) ने कसम खा ली*. कि *""मैं माँ जी का ध्यान नहीं रख सकती""*ना तो ये उनसे बात करती थी
और ना ही मेरे बच्चे बात करते थे. *रोज़ मेरे कोर्ट से आने के बाद माँ खूब रोती थी*. नौकर तक भी *अपनी मनमानी से व्यवहार करते थे*
माँ ने 10 दिन पहले बोल दिया.. बेटा तू मुझे *ओल्ड ऐज होम* में शिफ्ट कर दे.
मैंने बहुत *कोशिशें कीं पूरी फैमिली को समझाने की*, लेकिन *किसी ने माँ से सीधे मुँह बात नहीं की*.
*जब मैं 2 साल का था तब पापा की मृत्यु हो गई थी दूसरों के घरों में काम करके *""मुझे पढ़ाया. मुझे इस काबिल बनाया कि आज मैं जज हूँ""*. लोग बताते हैं माँ कभी दूसरों के घरों में काम करते वक़्त भी मुझे अकेला नहीं छोड़ती थीं.
*उस माँ को मैं ओल्ड ऐज होम में शिफ्ट करके आया हूँ*. पिछले 3 दिनों से
मैं *अपनी माँ के एक-एक दुःख को याद करके तड़प रहा हूँ,*जो उसने केवल मेरे लिए उठाये।
मुझे आज भी याद है जब..
*""मैं 10th की परीक्षा में अपीयर होने वाला था. माँ मेरे साथ रात रात भर बैठी रहती""*.
एक बार *माँ को बहुत फीवर हुआ मैं तभी स्कूल से आया था*. उसका *शरीर गर्म था, तप रहा था*. मैंने कहा *माँ तुझे फीवर है हँसते हुए बोली अभी खाना बना रही थी इसलिए गर्म है*.
लोगों से *उधार माँग कर मुझे दिल्ली विश्वविद्यालय से एलएलबी तक पढ़ाया*. मुझे *ट्यूशन तक नहीं पढ़ाने देती थीं*कि कहीं मेरा टाइम ख़राब ना हो जाए.
*कहते-कहते रोने लगे..और बोले--""जब ऐसी माँ के हम नहीं हो सके तो हम अपने बीबी और बच्चों के क्या होंगे""*.
हम जिनके *शरीर के टुकड़े हैं*,आज हम उनको *ऐसे लोगों के हवाले कर आये, ""जो उनकी आदत, उनकी बीमारी, उनके बारे में कुछ भी नहीं जानते""*,
जब मैं ऐसी माँ के लिए कुछ नहीं कर सकता तो *"मैं किसी और के लिए भला क्या कर सकता हूँ".*
आज़ादी अगर इतनी प्यारी है और *माँ इतनी बोझ लग रही हैं, तो मैं पूरी आज़ादी देना चाहता हूँ*
जब *मैं बिना बाप के पल गया तो ये बच्चे भी पल जाएंगे*. इसीलिए मैं तलाक देना चाहता हूँ।

*सारी प्रॉपर्टी इन लोगों के हवाले* करके उस *ओल्ड ऐज होम* में रहूँगा. कम से कम मैं माँ के साथ रह तो सकता हूँ।
और अगर *इतना सब कुछ कर के ""माँ आश्रम में रहने के लिए मजबूर है"", तो एक दिन मुझे भी आखिर जाना ही पड़ेगा*.
माँ के साथ रहते-रहते आदत भी हो जायेगी. *माँ की तरह तकलीफ* तो नहीं होगी.
*जितना बोलते उससे भी ज्यादा रो रहे थे*.
बातें करते करते रात के 12:30 हो गए।
मैंने भाभीजी के चेहरे को देखा.
उनके *भाव भी प्रायश्चित्त और ग्लानि* से भरे हुए थे; मैंने ड्राईवर से कहा अभी हम लोग नोएडा जाएंगे।
भाभीजी और बच्चे हम सारे लोग नोएडा पहुँचे.
*बहुत ज़्यादा रिक्वेस्ट करने पर गेट खुला*. भाई साहब ने उस *गेटकीपर के पैर पकड़ लिए*, बोले मेरी माँ है, मैं उसको लेने आया हूँ,
चौकीदार ने कहा क्या करते हो साहब,
भाई साहब ने कहा *मैं जज हूँ,*
उस चौकीदार ने कहा:-

*""जहाँ सारे सबूत सामने हैं तब तो आप अपनी माँ के साथ न्याय नहीं कर पाये,
औरों के साथ क्या न्याय करते होंगे साहब"*।

इतना कहकर हम लोगों को वहीं रोककर वह अन्दर चला गया.
अन्दर से एक महिला आई जो *वार्डन* थी.
उसने *बड़े कातर शब्दों में कहा*:-
"2 बजे रात को आप लोग ले जाके कहीं मार दें, तो

*मैं अपने ईश्वर को क्या जबाब दूंगी..*?"

मैंने सिस्टर से कहा *आप विश्वास करिये*. ये लोग *बहुत बड़े पश्चाताप में जी रहे हैं*.
अंत में किसी तरह उनके कमरे में ले गईं. *कमरे में जो दृश्य था, उसको कहने की स्थिति में मैं नहीं हूँ.*

केवल एक फ़ोटो जिसमें *पूरी फैमिली* है और वो भी माँ जी के बगल में, जैसे किसी बच्चे को सुला रखा है.
मुझे देखीं तो उनको लगा कि बात न खुल जाए
लेकिन जब मैंने कहा *हम लोग आप को लेने आये हैं, तो पूरी फैमिली एक दूसरे को पकड़ कर रोने लगी*

आसपास के कमरों में और भी बुजुर्ग थे सब लोग जाग कर बाहर तक ही आ गए.
*उनकी भी आँखें नम थीं*
कुछ समय के बाद चलने की तैयारी हुई. पूरे आश्रम के लोग बाहर तक आये. किसी तरह हम लोग आश्रम के लोगों को छोड़ पाये.
सब लोग इस आशा से देख रहे थे कि *शायद उनको भी कोई लेने आए, रास्ते भर बच्चे और भाभी जी तो शान्त रहे*.......

लेकिन भाई साहब और माताजी एक दूसरे की *भावनाओं को अपने पुराने रिश्ते पर बिठा रहे थे*.घर आते-आते करीब 3:45 हो गया.

👩 💐 *भाभीजी भी अपनी ख़ुशी की चाबी कहाँ है; ये समझ गई थी* 💐

मैं भी चल दिया. लेकिन *रास्ते भर वो सारी बातें और दृश्य घूमते रहे*.

👵 💐*""माँ केवल माँ है""* 💐👵

*उसको मरने से पहले ना मारें.*

*माँ हमारी ताकत है उसे बेसहारा न होने दें , अगर वह कमज़ोर हो गई तो हमारी संस्कृति की ""रीढ़ कमज़ोर"" हो जाएगी* , बिना रीढ़ का समाज कैसा होता है किसी से छुपा नहीं

अगर आपकी परिचित परिवार में ऐसी कोई समस्या हो तो उसको ये जरूर पढ़ायें, *बात को प्रभावी ढंग से समझायें , कुछ भी करें लेकिन हमारी जननी को बेसहारा बेघर न होने दें*, अगर *माँ की आँख से आँसू गिर गए तो *"ये क़र्ज़ कई जन्मों तक रहेगा"*, यकीन मानना सब होगा तुम्हारे पास पर *""सुकून नहीं होगा""* , सुकून सिर्फ *माँ के आँचल* में होता है उस *आँचल को बिखरने मत देना*।

25/08/2018

*जीवन में 45 पार का मर्द........*
*कैसा होता है ?*

थोड़ी सी सफेदी कनपटियों के पास,
खुल रहा हो जैसे आसमां बारिश के बाद,

जिम्मेदारियों के बोझ से झुकते हुए कंधे,
जिंदगी की भट्टी में खुद को गलाता हुआ,

अनुभव की पूंजी हाथ में लिए,
परिवार को वो सब देने की जद्दोजहद में,
जो उसे नहीं मिल पाया था,

बस बहे जा रहा है समय की धारा में,
*बीवी और प्यारे से बच्चों में*

पूरा दिन दुनिया से लड़ कर थका हारा,
रात को घर आता है, सुकून की तलाश में,

लेकिन क्या मिल पाता है सुकून उसे ?
दरवाजे पर ही तैयार हैं बच्चे,

पापा से ये मंगाया था, वो मंगाया था,
नहीं लाए तो क्यों नहीं लाए,
लाए तो ये क्यों लाए वो क्यों नहीं लाए,

अब वो क्या कहे बच्चों से,
कि जेब में पैसे थोड़े कम थे,

कभी प्यार से, कभी डांट कर,
समझा देता है उनको,

एक बूंद आंसू की जमी रह जाती है, आँख के कोने में,

लेकिन दिखती नहीं बच्चों को,
उस दिन दिखेगी उन्हें, जब वो खुद, बन जाएंगे माँ बाप अपने बच्चों के,

खाने की थाली में दो रोटी के साथ,
परोस दी हैं पत्नी ने दस चिंताएं,

*कभी,*

तुम्हीं नें बच्चों को सर चढ़ा रखा है,
कुछ कहते ही नहीं,

*कभी,*

हर वक्त डांटते ही रहते हो बच्चों को,
कभी प्यार से बात भी कर लिया करो,

लड़की सयानी हो रही है,
तुम्हें तो कुछ दिखाई ही नहीं देता,

लड़का हाथ से निकला जा रहा है,
तुम्हें तो कोई फिक्र ही नहीं है,

पड़ोसियों के झगड़े, मुहल्ले की बातें,
शिकवे शिकायतें दुनिया भर की,

सबको पानी के घूंट के साथ,
गले के नीचे उतार लेता है,

जिसने एक बार हलाहल पान किया,
वो सदियों नीलकंठ बन पूजा गया,

यहाँ रोज़ थोड़ा थोड़ा विष पीना पड़ता है,
जिंदा रहने की चाह में,
फिर लेटते ही बिस्तर पर,
मर जाता है एक रात के लिए,

*क्योंकि*

सुबह फिर जिंदा होना है,
काम पर जाना है,
कमा कर लाना है,
ताकि घर चल सके,....ताकि घर चल सके.....ताकि घर चल सके।।।।

*दिलसे सभी पिताओं को समर्पित,,,,,,,,,,,,,,,*

27/06/2018

कुछ बेटियों को मेरी बात का बुरा जरूर लगेगा!पर सच हैं!जिन बेटियों से घर का काम नही होता!उनको कहीं पर भी जीवन में उचित सम्मान ओर उचित स्थान नही मिलता-------!! ==================================
एक वकील साहब ने अपने बेटे का रिश्ता तय किया....
कुछ दिनों बाद वकील साहब होने वाले समधी के घर गए!
तो देखा कि होने वाली समधन खाना बना रही थीं!सभी बच्चे और होने वाली बहू टी वी देख रहे थे!वकील साहब ने चाय पी कुशल जाना और चले आये!
एक माह बाद वकील साहब समधी जी के घर फिर गए!
देखा भावी समधन जी झाड़ू लगा रहीं थी!बच्चे पढ़ रहे थे!
और होने वाली बहू सो रही थी!वकील साहब ने खाना
खाया!और चले आये!कुछ दिन बाद वकील साहब किसी काम से फिर होने वाले समधी जी के घर गए!घर में जाकर देखा!होने वाली समधन बर्तन साफ़ कर रही थी!बच्चे टीवी देख रहे थे!और होने वाली बहू खुद के हाथों में नेलपेंट लगा रही थी!
वकील साहब ने घर आकर!गहन सोच-विचार कर लड़की
वालों के यहाँ खबर पहुचाई कि हमें ये रिश्ता मंजूर नहीं है!..कारण पूछने पर वकील साहब ने कहा कि मैं होने वाले
समधी के घर तीन बार गया!तीनों बार सिर्फ समधन जी ही घर के काम काज में व्यस्त दिखीं!एक भी बार भी मुझे होने वाली बहू घर का काम काज करते हुए नहीं दिखी!जो बेटी अपने सगी माँ को हर समय काम में व्यस्त पा कर भी उन की मदद करने का न सोचे!
उम्र दराज माँ से कम उम्र की जवान हो कर भी स्वयं की
माँ का हाथ बटाने का जज्बा न रखे!वो किसी और की
माँ और किसी अपरिचित परिवार के बारे में क्या!
सोचेगी!मुझे अपने बेटे के लिए एक बहू की आवश्यकता है!किसी गुलदस्ते की नहीं!जो किसी फ्लावर पाटॅ में सजाया
जाये!
इसलिये सभी माता-पिता को चाहिये!कि वे इन छोटी
छोटी बातों पर अवश्य ध्यान दें!
बेटी कितनी भी प्यारी क्यों न हो उससे घर का काम
काज अवश्य कराना चाहिए!
समय-समय पर डांटना भी चाहिए! जिससे ससुराल में!
ज्यादा काम पड़ने या डांट पड़ने पर उसके द्वारा गलत करने!
की कोशिश ना की जाये!हमारे घर बेटी पैदा होती है!हमारी जिम्मेदारी बेटी से
बहू बनाने की है!
अगर हमने अपनी जिम्मेदारी ठीक तरह से नहीं निभाई!
बेटी में बहू के संस्कार नहीं डाले तो इसकी सज़ा बेटी को
तो मिलती है!और माँ बाप को मिलती हैं!जिन्दगी भर
गालियाँ!
हर किसी को सुन्दर सुशील बहू चाहिए! लेकिन भाइयो!
जब हम अपनी बेटियों में एक अच्छी बहु के संस्कार डालेंगे!
तभी तो हमें संस्कारित बहू मिलेगी!
ये कड़वा सच शायद कुछ लोग न बर्दाश्त कर पाएं!
----- लेकिन पढ़ें और समझें बस इतनी इलतिजा!

वृद्धाआश्रम में माँ बाप को देखकर सब लोग बेटो को ही
कोसते हैं!लेकिन ये कैसे भूल जाते हैं!कि उन्हें वहां भेजने में
किसी की बेटी का भी अहम रोल होता है!वरना बेटे अपने
माँ बाप को शादी के पहले वृद्धाश्रम क्यों नही भेजते-------!

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