11/01/2026
मुझे जानते हो डॉक्टर?
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रोगी और उसके परिजन उपचार के दौरान कई गलतियां करते हैं, जो उन्हें पता नहीं होती। एक आम गलती में देखता हूं जो वे करते हैं लेकिन, वे दुर्भाग्य से उसे गलती नहीं अच्छी बात मानते हैं। वह गलती है- डॉक्टर को या अस्पताल को बहुत सारे बड़े व्यक्तियों से फोन लगवाना और बताना कि यह मरीज खास है, इसका खास ख्याल रखा ही जाना चाहिए।
हकीकत में होता यह है कि जब किसी बड़े व्यक्ति का दबाव आता है, तो डॉक्टर की एप्रोच डिफेंसिव हो जाती है। ऐसे में वह रोगी से पहले अपनी स्वयं की और अपने अस्पताल की सुरक्षा को ध्यान में रखने लगता है। वह सोचता है कि अगर सब कुछ करते हुए भी यह रोगी ठीक नहीं हुआ या इसकी समस्या और बढ़ गई तो मुझ पर मुसीबत आ जाएगी। इस डर की अवस्था में वह रोगी का इलाज ठीक से नहीं कर पाता। वह उसे किसी और बड़े सेंटर पर रेफर करने के बहाने ढूंढने लगता है, वह परिजनों से कहता है कि, "मुझे लगता है इन्हें किसी बड़े विशेषज्ञ की आवश्यकता है" या वह कहता है कि, "हमें इन्हें बड़े शहर में या बड़े अस्पताल में में भर्ती करवाना चाहिए।" ऐसा करके वह अपने आप को सेफ कर लेता है। चूंकि डॉक्टर मनुष्य ही है इसलिए वह भी अपनी सुरक्षा को तरजीह देता है।
कुछ वर्षों पहले मुझसे अपने कमर दर्द का इलाज करवाने एक बड़े विभाग के प्रिंसिपल सेक्रेट्री आए थे। वह इलाज के दौरान जब भी क्लीनिक पर आते तो अपने बेटे की कार से आते और एकदम सिम्पल ड्रेस में आते। जब ठीक हो गए तो फिर आखरी विजिट के समय वे अपनी कार से आए थे और उनके पहनावे को देखकर लग भी रहा था कि वे कोई बड़े अफसर हैं। मैंने उनसे पूछा कि सर आपने मुझे शुरुआत में यह क्यों नहीं बताया कि आप स्टेट के एक बहुत बड़े अधिकारी हैं? उन्होंने कहा कि, "डॉक्टर साहब शुरुआत में डॉक्टरों को यह बता देना कि हम कोई अधिकारी हैं, इससे वे खुलकर अपना इलाज नहीं कर पाते। वे एक अफसर का इलाज करने में जुट जाते हैं रोगी का नहीं। वे डिफेंसिव हो जाते हैं। इस चक्कर में हमारा सही इलाज नहीं हो पाता। इसलिए मैं और मेरा परिवार अपने चिकित्सकों को शुरुआत में नहीं बताते कि हम क्या हैं। हम एक अच्छा चिकित्सक चुनते हैं, उस पर भरोसा करके इलाज करवाते हैं, जब वे हमारा व्यवहार जान जाते हैं कि हम भी एक आम इंसान ही हैं कोई सज़ा का डंडा लिए घूमने वाले राक्षस नहीं, तो फिर हम उनके एक पारिवारिक मित्र की तरह हो जाते हैं और हमारा इलाज सही तरह से हो पाता है।"
रोगियों को अगर किसी से चिकित्सक की बात करवाना ही हो तो उसे बात करवाना चाहिए किसी अन्य परिचित चिकित्सक से या चिकित्सक के किसी मित्र से जो उसे रोगी और रोगी के परिवार की यथास्थिति बता सके। ऐसे कॉल्स रोगी के लिए फायदेमंद होते हैं, क्योंकि चिकित्सक ऐसे रोगियों से भावनात्मक रूप से जुड़ जाता है। वह रोगी के परिजनों को यथास्थिति बताता रहता है। यदि उस रोगी का उपचार उसी चिकित्सक के पास संभव होता है, तो वह स्वयं ही करता है अगर उसे लगता है कि नहीं, इसे वाकई किसी बड़े सेंटर की या किसी बड़े विशेषज्ञ की आवश्यकता है, तो वह उसे उसके पास भेज देता है। चिकित्सक में भय पैदा करने वाली नहीं उससे जुड़ाव पैदा करने वाली पहचान बताएं।
~डॉ अबरार मुल्तानी
लेखक: बीमारियां हारेंगी
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