13/02/2025
🌼⚜️ किस रोग में कौन सा आसन करें ⚜️🌼
1 पद्मासन- मन की शांति, मन को एकाग्र करने के लिए, यौन रोग, हर्निया, वीर्यदोष, आँख, आंमवात जठराग्नि, वातव्याधि, अजीर्ण, आँतों के रोग, ब्रह्मचर्य, बवासीर आदि।
2 शवासन - उच्च रक्तचाप, हृदय रोग, अनिद्रा, सिरदर्द, शारीरिक थकावट, तनाव, तुतलाहट, मानसिक थकान, आदि
3 अश्वासन - मोटापा, बवासीर, कमर दर्द, कब्ज, नाभि टलना, सर्वाइकल स्पाण्डलाइटिस, तनाव, शारीरिक थकावट आदि।
4 उत्तानपादासन - मोटापा, बवासीर, नाभि टलना, गर्भाशय दोष, घुटने का दर्द, सायटिका, हार्निया, पेटदर्द, श्वास रोग, आँत उतरना, गैस, कमर दर्द, टाँगों की दुर्बलता, कब्ज, और मोटापा कम करने के लिए हृदय, श्वास रोग, अतिसार, दस्त आदि।
5 पवनमुक्तासन - मोटापा, गैस, यकृत, गठिया, शुगर, हल्का पेट दर्द, तनाव आँतों के रोग, अम्लपित्त, सियाटिका, चर्बी कम करना, तिल्ली, प्लीहा, पर प्रभाव स्लिप डिस्क, हृदय, गर्भाशय, कटि पीडा, स्त्रीरोग, आदि।
6 पश्चिमोत्तानासन - अजीर्ण, मोटापा, कब्ज, मदाग्नि, मधुमेह, आमवात, कृमि, दोष, हार्निया, पौरुष शक्ति, वीर्य दोष, बौनापन, बवासीर, गठिया, जठराग्नि, कद, पृष्ठभाग की मांसपेशिया आदि।
7 चक्रासन- मोटापा, कमर दर्द, कब्ज, मधुमेह, नाभि टलना, आमवात, कृमि दोष, गर्भाशय रोग, बौनापन, कटिपीडा, श्वास रोग, सिरदर्द, नेत्र रोग, सर्वाइकल स्पाण्डलाइटिस, रीड की हड्डी, गर्भाशय, जठर, आँत आदि।
8 सर्वांगासन - अनिद्रा, बवासीर, गैस, नेत्ररोग, वीर्यदोष, सूजन, गला, यकृत, खाँसी, मोटापा, दुर्बलता, कृमि, गर्भाशय दोष, फेफडे, कद वृद्धि, दमा, उदर, हर्निया, हल्का पेट दर्द, बाल सफेद, पिट्यूटरी ग्रंथि, अजीर्ण-बदहजमी, जुकाम, तिल्ली-प्लीहा, पांडु रोग, तनाव, मंदाग्नि, कब्ज, कुष्ठ, शुक्रग्रंथि, एड्रिनल ग्रंथि, थायरायड आदि
9 हलासन - मोटापा, अनिद्रा, कब्ज, दमा, मधुमेह, गला, यकृत, तनाव, गर्भाशय दोष, पांडु, बौनापन, दुर्बलता, पौरूष शक्ति, बौनापन, जुकाम, कंठमाला, अजीर्ण, मंदाग्नि, खांसी, गुल्म, वात, कब्ज, बुढापा, जुकाम, तिल्ली-प्लीहा, मानसिक रोग, हृदय रोग, थायरायड, डायबिटीज, स्त्रीरोग, मेंरूदण्ड, अग्नाशय, रीढ, अग्नाशय, रीड की हड्डी, आदि। सावधानी- बढी तिल्ली, यकृत, उच्च रक्तचाप, सर्वाइकल स्पाण्डलाइटिस, मेंरूदण्ड मे टीवी वाले न करे।
10 मत्स्यासन - बवासीर, अजीर्ण बदहजमी, जुकाम, पैर, दमा, गला, सर्वाइकल व स्लिप डिस्क, मंदाग्नि, यकृत,फेफडे, गठिया, तनाव, मासिकधर्म, बाल सफेद, नाभिटलना, कब्ज, गठिया, मंदाग्नि, हार्निया, आँतों के रोग, थायरॉयड, पैराथायरॉयड, एड्रिनल ग्रंथि विकार आदि।
11.मयूरासन -मोटापा, अजीर्ण-बदहजमी, कृमि, पांडु, मंदाग्नि, कब्ज, गैस, आमवात, जठराग्नि, बवासीर, तिल्ली, यकृत, गुर्दे, अमाशय, अग्नाशय, मधुमेह आदि।
12 उष्ट्रासन - कमरदर्द, मोटापा, गैस मंदाग्नि, दमा, गला, सर्वाइकल व स्लिप डिस्क, फेफडे, गठिया, नेत्र रोग, पांडु, बौनापन, सियाटिका, श्वसन तंत्र, थायरॉयड आदि।
13. वज्रासन - गैस, मंदाग्नि, मधुमेह, फेफडे, पांडु (पीलिया), साईटिका, वीर्य दोष, अपचन, अम्लपित्त, कब्ज आदि ।
14. सुप्त वज्रासन - गला, सर्वाइकल, स्लिप डिस्क, गठिया, मासिकधर्म, कमर दर्द, कब्ज, थायराइड, गले के रोग दमा, तनाव, पौरूष-शक्ति, खाँसी, पेट, बडी आँत, नाभि, गुर्दों के रोग बवासीर, फेफडे, आदि।
15.अर्द्धमत्स्येन्द्रासन - कमरदर्द, अजीर्ण बदहजमी, मधुमेह, आमवात, कृमि, फेफडे, पौरुष शक्ति, कब्ज, सायाटिका, वृक्कविकार, सर्वाइकल व स्लिप डिस्क, रक्त संचरण, उदरविकार, आँत, पृष्ठदेश आदि।
16 गौमुखासन - दमा, फेफडे, कमरदर्द, हृदय दुर्बलता, गठिया, सर्वाइकल व स्लिप डिस्क, सन्धिवात, मधुमेह, यकृत, हृदय रोग, अनिद्रा, रीढ का टेढापन, गुर्दे, स्वप्नदोष, गर्दन तोड बुखार, बहुमूत्र अंडकोष वृद्धि, आंत्र वृद्धि, बहुमूत्र, धातुरोग तथा स्त्री रोग आदि।
17. भुजंगासन - अजीर्ण, बदहजमी, मंदाग्नि, मधुमेह, नाभि टलना, सर्वाइकल, व स्लिपडिस्क, गला, यकृत, गर्भाशय दोष, पांडु, तिल्ली-प्लीहा, खाँसी, बौनापन, कमरदर्द, दमा, कटिवात, जांघों का दर्द मासिक धर्म, कुबडापन आदि।
18.शलभासन कब्ज, मंदाग्नि, यकृत, रीढ तथा कमर का दर्द, अजीर्ण, दुर्बलता, मेरूदण्ड के निचले भाग, सियाटिका का दर्द आदि।
19 नौकासन - मोटापा अजीर्ण-बदहजमी, मधुमेह, नाभि टलना, हृदय, फेफडे, आमाशय, अग्नाशय आँत, यकृत आदि।
20 धनुरासन -मोटापा, कमरदर्द, वीर्यदोष, गठिया, नाभि टलना, बौनापन, शारीरिक थकावट, तनाव, अजीर्ण-बदहजमी, सायटिका, गैस, गुर्दे, सर्वाइकल, स्पॉण्डलाइटिस, उदर, आदि।
21 गरुडासन- गठिया, घुटने का दर्द, हर्निया, सायटिका, अण्डकोष वृद्धि, पौरूष ग्रंथि, मूत्ररोग, गुर्दे, मोटापा, गुप्त रोगों में, हाइड्रोसिल, बवासीर, हाथ पैर की अन्य विकृति आदि (सूरज निकलने के बाद, सूरज डूबने से पहले, समय- 15-60 मि०)
22.योगमुद्रासन (1,2) मोटापा, अनिद्रा, बवासीर, गैस अजीर्ण-बदहजमी, वीर्य दोष, यकृत, गठिया, हल्का पेट दर्द, पौरुष शक्ति, कब्ज, फेफडे संबधी रोग, प्लीहा उदर, डायबिटीज, जठराग्नि, माईग्रेन आदि।
23. शीर्षासन - अनिद्रा, वीर्यदोष, जुकाम, मधुमेह, सूजन, खाँसी, कृमि, बाल सफेद, तनाव, गर्भाशय दोष, शिरपीडा, कान, आँख, नेत्र रोग, मोटापा, सिर के बाल उडना, झुर्रियां पडना, वीर्यपात, पिट्युटरी एवं पीनियल ग्रंथि, मेधा-स्मृति, प्रमेह, नपुंसकता, थायरॉयड, अमाशय, आँत, वेरिकोज वेन्स, कब्ज, हार्निया, यकृत, आदि।
24.ताडासन - बौनापन, सर्वाइकल, स्लिप डिस्क, कद आदि।
25 उत्कटासन - कमरदर्द, सूजन, कब्ज, गठिया, हार्निया, पथरी, घुटने का दर्द, सायाटिका, बेरी-बेरी, ब्रह्मचर्य, बवासीर आदि ।
26 अर्धकूर्मासन- अजीर्ण, कमरदर्द, उदररोग, आँव, अग्न्याशय, आदि।
27 शशकासन - कमरदर्द, तिल्ली, प्लीहा, पाचन शक्ति, थायरॉयड, स्त्रीरोग, हृदयरोग, तनाव, मानसिक रोग गर्भाशय आँत, यकृत अग्न्याशय, गुर्दो, मोटापा आदि।
28 जानुशिरासन (महामुद्रा) अजीर्ण, आँतों के रोग, कटिवात, मधुमेह, जांघो के रोग, तिल्ली, प्लीहा, पांडुरोग, नाभि पश्चिमोत्तासन के समान लाभ आदि।
29 पाद-हस्तासन - कमर दर्द, कटिवात, जांघों का दर्द, तिल्ली, प्लीहा, मानसिक रोग, कदवृद्धि, पेट आदि।
30 अर्धचंद्रासन - आँतों के रोग, कुबडापन, यकृत, प्लीहा, श्वसन तंत्र, दमा, थायरॉयड, सर्वाइकल, स्पाण्डलाइटिस, सियाटिका आदि ।
31 मण्डूकासन (1,2) डायबिटीज, उदर व हृदयरोग, अग्न्याशय आदि ।
32 मर्कटासन (1,2,3)- सर्वाइकल स्पाण्डलाइटिस, स्लिप डिस्क, सियाटिक, कमर दर्द, पेटदर्द, कब्ज, दस्त, गैस, नितम्ब, जोडो के दर्द आदि।
33.सिंहासन-थायरॉयड, टॉसिल, कान का रोग, गला रोग, हकलाना, तुतलाना आदि।
34 वक्रासन- डायबिटीज, कमर की चर्बी कम करने, यकृत व तिल्ली आदि।
35 बद्धपदासन - स्त्री व पुरूष की छाती विकास, हाथ, कंधे व सम्पूर्ण पृष्ठभाग, जठराग्नि, वातव्याधि, आदि।
36 बह्मचर्यासन - धातुरोग, स्वप्नदोष व प्रमेह, मधुमेह, ब्रह्मचर्य आदि।
37 वृक्षासन - मन की चंचलता स्नायुमंडल, वीर्य, नेत्र रोग, धातुरोग, कफ रोग, हृदय, फेफडे आदि।
38 तिर्यक् ताडासन - कटि प्रदेश लचीला, पार्श्व भाग की चर्बी को कम करना आदि।
39. कटि चक्रासन- कब्ज, आँत, गुर्दे, तिल्ली, अग्न्याशय, मासिक धर्म, कमर गर्दन, शरीर में जकडन आदि।
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