Navkar Ayurveda

Navkar Ayurveda �Navkar Aushdhalaya, Bara Dhana Singoli Distt. Neemuch (M.P.)

एकाग्रता बढ़ाने के आयुर्वेदिक उपाय– नवकार आयुर्वेदा, सिंगोलीआज का युग गति और प्रतिस्पर्धा का युग है। चारों ओर मोबाइल, सो...
26/02/2026

एकाग्रता बढ़ाने के आयुर्वेदिक उपाय
– नवकार आयुर्वेदा, सिंगोली
आज का युग गति और प्रतिस्पर्धा का युग है। चारों ओर मोबाइल, सोशल मीडिया, भागदौड़ भरी दिनचर्या और मानसिक दबाव ने मन को चंचल बना दिया है। परिणामस्वरूप किसी एक कार्य पर लंबे समय तक ध्यान केंद्रित करना कठिन होता जा रहा है। एकाग्रता की कमी से न केवल पढ़ाई और कार्य प्रभावित होते हैं, बल्कि व्यक्ति की कार्यक्षमता और आत्मविश्वास भी कम होने लगता है। आयुर्वेद में मन, मस्तिष्क और शरीर को संतुलित रखकर एकाग्रता बढ़ाने के सरल और प्रभावी उपाय बताए गए हैं।
1. संतुलित और सात्विक आहार
आयुर्वेद के अनुसार आहार का सीधा प्रभाव मन पर पड़ता है। बादाम, अखरोट, घी, दूध, हरी सब्जियां और ताजे फल मस्तिष्क को पोषण देते हैं। विशेष रूप से भीगे हुए बादाम और गाय का घी स्मरण शक्ति और एकाग्रता बढ़ाने में सहायक माने गए हैं।
2. ब्राह्मी और शंखपुष्पी का सेवन
ब्राह्मी और शंखपुष्पी आयुर्वेद की प्रसिद्ध मेध्य रसायन औषधियां हैं। ये मस्तिष्क को शक्ति प्रदान करती हैं, मानसिक तनाव कम करती हैं और ध्यान केंद्रित करने की क्षमता बढ़ाती हैं। नियमित और चिकित्सकीय परामर्श से इनका सेवन लाभकारी होता है।
3. पर्याप्त और नियमित नींद
अच्छी नींद मस्तिष्क के लिए प्राकृतिक औषधि है। आयुर्वेद में रात्रि में समय पर सोने और प्रातः जल्दी उठने की सलाह दी गई है। इससे मन शांत रहता है और एकाग्रता में सुधार होता है।
4. योग और प्राणायाम
योग और प्राणायाम मन को स्थिर करने का सबसे सरल उपाय हैं। विशेष रूप से अनुलोम-विलोम, भ्रामरी और ध्यान करने से मानसिक शांति मिलती है और ध्यान केंद्रित करने की क्षमता बढ़ती है।
5. नियमित दिनचर्या और डिजिटल संतुलन
अनियमित जीवनशैली और अत्यधिक मोबाइल उपयोग एकाग्रता के सबसे बड़े शत्रु हैं। आयुर्वेद नियमित दिनचर्या अपनाने और इंद्रियों पर संयम रखने की सलाह देता है।
आयुर्वेद का मूल सिद्धांत है कि स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मन निवास करता है। यदि हम संतुलित आहार, नियमित दिनचर्या और आयुर्वेदिक उपायों को अपने जीवन में अपनाएं, तो एकाग्रता में स्वाभाविक रूप से वृद्धि होती है और जीवन में सफलता का मार्ग प्रशस्त होता है।
नवकार आयुर्वेदा, सिंगोली पर एकाग्रता, स्मरण शक्ति एवं स्वास्थ्य से संबंधित सभी प्रकार की आयुर्वेदिक औषधियां उपलब्ध हैं।
संपर्क: 8358078639

25/02/2026

बोर्ड परीक्षाओं में सफलता का गुप्त सूत्र: पढ़ाई के साथ सही खानपान भी जरूरी
– डॉ. सुनील रणावत

बोर्ड परीक्षाओं का समय हर विद्यार्थी के जीवन का सबसे महत्वपूर्ण और चुनौतीपूर्ण दौर होता है। इस समय दिन-रात पढ़ाई, अच्छे अंक लाने की चिंता और भविष्य की उम्मीदें, मन पर एक अलग ही दबाव बना देती हैं। ऐसे तनावपूर्ण माहौल में विद्यार्थी अक्सर सिर्फ पढ़ाई पर ध्यान देते हैं, लेकिन यह भूल जाते हैं कि तेज याददाश्त, गहरी एकाग्रता और मानसिक स्थिरता के लिए सही खानपान भी उतना ही आवश्यक है।
हमारा मस्तिष्क शरीर का सबसे संवेदनशील अंग है, जिसे सही पोषण की आवश्यकता होती है। यदि भोजन संतुलित और पौष्टिक नहीं होगा, तो थकान, चिड़चिड़ापन, भूलने की समस्या और ध्यान भटकने जैसी परेशानियां सामने आने लगती हैं।
क्या खाएं, जिससे बढ़े याददाश्त और एकाग्रता
1. बादाम और अखरोट
इनमें ओमेगा-3 फैटी एसिड और एंटीऑक्सीडेंट्स होते हैं, जो मस्तिष्क की कोशिकाओं को मजबूत बनाते हैं और स्मरण शक्ति बढ़ाते हैं। रोजाना 4-5 भीगे बादाम लेना विशेष लाभकारी होता है।
2. दूध और घी
दूध में मौजूद प्रोटीन और घी में पाए जाने वाले आवश्यक फैटी एसिड मस्तिष्क को ऊर्जा देते हैं। आयुर्वेद में घी को "स्मृति वर्धक" माना गया है।
3. हरी सब्जियां और ताजे फल
पालक, मेथी, गाजर, आंवला और मौसमी फल शरीर को आवश्यक विटामिन और खनिज प्रदान करते हैं, जिससे मानसिक थकान कम होती है।
4. पर्याप्त पानी
पानी की कमी से सिरदर्द, कमजोरी और ध्यान की कमी हो सकती है। इसलिए दिनभर में पर्याप्त मात्रा में पानी पीना जरूरी है।
किन चीजों से बचें
अत्यधिक चाय-कॉफी, जंक फूड, तले-भुने पदार्थ और अधिक मीठा, मस्तिष्क की कार्यक्षमता को प्रभावित करते हैं। ये शरीर को क्षणिक ऊर्जा तो देते हैं, लेकिन बाद में थकान और सुस्ती बढ़ा देते हैं।
आयुर्वेद की उपयोगी सलाह
आयुर्वेद के अनुसार ब्राह्मी, शंखपुष्पी और अश्वगंधा जैसी औषधियां स्मरण शक्ति और मानसिक शांति के लिए लाभकारी मानी गई हैं। ये मस्तिष्क को पोषण देकर एकाग्रता बढ़ाने में सहायक होती हैं।
निष्कर्ष
विद्यार्थियों को यह समझना चाहिए कि परीक्षा में सफलता केवल अधिक घंटे पढ़ने से नहीं, बल्कि स्वस्थ शरीर और शांत मन से मिलती है। संतुलित आहार, पर्याप्त नींद, नियमित दिनचर्या और सकारात्मक सोच, ये सभी सफलता के मजबूत आधार हैं।
यदि विद्यार्थी पढ़ाई के साथ-साथ अपने खानपान और स्वास्थ्य का भी ध्यान रखें, तो न केवल उनकी याददाश्त और एकाग्रता बेहतर होगी, बल्कि वे परीक्षा में आत्मविश्वास के साथ उत्कृष्ट प्रदर्शन भी कर सकेंगे।
याद रखें, स्वस्थ मस्तिष्क ही सफलता की असली कुंजी है।

स्ट्रॉबेरी: स्वाद का लाल रंग, सेहत का सुनहरा संग— डॉ. सुनील रणावतप्रकृति ने कुछ फलों को केवल स्वाद के लिए नहीं, बल्कि से...
24/02/2026

स्ट्रॉबेरी: स्वाद का लाल रंग, सेहत का सुनहरा संग
— डॉ. सुनील रणावत

प्रकृति ने कुछ फलों को केवल स्वाद के लिए नहीं, बल्कि सेहत की रक्षा के लिए भी बनाया है। स्ट्रॉबेरी ऐसा ही एक आकर्षक और गुणकारी फल है। अपने चमकीले लाल रंग, मीठे-खट्टे स्वाद और मनमोहक सुगंध के कारण यह हर उम्र के लोगों की पसंद बन चुकी है, लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि यह छोटा सा फल स्वास्थ्य के बड़े-बड़े लाभ समेटे हुए है।
स्ट्रॉबेरी में प्रचुर मात्रा में विटामिन सी पाया जाता है, जो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाता है। नियमित सेवन से सर्दी-जुकाम जैसी सामान्य समस्याओं से बचाव में मदद मिलती है। इसके साथ ही इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स शरीर में बनने वाले हानिकारक फ्री-रेडिकल्स को निष्क्रिय करते हैं, जिससे कोशिकाएं स्वस्थ रहती हैं और समय से पहले आने वाले बुढ़ापे के लक्षण कम होते हैं।
त्वचा के लिए स्ट्रॉबेरी किसी प्राकृतिक वरदान से कम नहीं है। यह त्वचा में कसाव बनाए रखने, झुर्रियों को कम करने और चेहरे पर प्राकृतिक चमक लाने में सहायक होती है। यही कारण है कि कई सौंदर्य उत्पादों में भी स्ट्रॉबेरी का उपयोग किया जाता है।
हृदय स्वास्थ्य के लिए भी यह फल लाभकारी माना गया है। इसमें मौजूद पोषक तत्व रक्तचाप को संतुलित रखने और हृदय को मजबूत बनाने में मदद करते हैं। इसके अलावा स्ट्रॉबेरी में फाइबर की अच्छी मात्रा होने से यह पाचन तंत्र को सुधारने और वजन नियंत्रित रखने में भी सहायक होती है।
मानसिक स्वास्थ्य पर भी इसका सकारात्मक प्रभाव देखा गया है। इसमें मौजूद तत्व मस्तिष्क की कार्यक्षमता को बेहतर बनाने और तनाव को कम करने में मदद कर सकते हैं।
आयुर्वेद का मूल सिद्धांत है कि भोजन ही सर्वोत्तम औषधि है। यदि हम अपने दैनिक आहार में स्ट्रॉबेरी जैसे प्राकृतिक और पौष्टिक फलों को शामिल करें, तो कई रोगों से बचाव संभव है और जीवन में स्फूर्ति बनी रहती है।
इसलिए अगली बार जब आपके सामने स्ट्रॉबेरी आए, तो उसे केवल स्वाद के लिए नहीं, बल्कि अपनी सेहत के एक सच्चे साथी के रूप में जरूर अपनाएं। क्योंकि कभी-कभी छोटे-छोटे फल ही बड़े स्वास्थ्य का आधार बनते हैं।

कम उम्र में बढ़ता अनियमित रक्तचाप: एक मौन महामारी– नवकार आयुर्वेदा, सिंगोलीआज की तेज रफ्तार जिंदगी में एक चिंताजनक सच सा...
22/02/2026

कम उम्र में बढ़ता अनियमित रक्तचाप: एक मौन महामारी
– नवकार आयुर्वेदा, सिंगोली

आज की तेज रफ्तार जिंदगी में एक चिंताजनक सच सामने आ रहा है। मात्र 20-30 वर्ष की उम्र, जो ऊर्जा और स्वास्थ्य का प्रतीक मानी जाती है, उसी उम्र में अनियमित रक्तचाप (ब्लड प्रेशर) एक मौन महामारी का रूप ले रहा है। दुर्भाग्य से इस उम्र में अधिकांश लोग इसे गंभीरता से नहीं लेते, क्योंकि इसके लक्षण अक्सर स्पष्ट नहीं होते। यही कारण है कि इसे “साइलेंट किलर” भी कहा जाता है।

क्यों बढ़ रहा है कम उम्र में रक्तचाप?
- आधुनिक जीवनशैली इसके पीछे सबसे बड़ा कारण बनकर उभरी है।
- अत्यधिक तनाव और मानसिक दबाव
- अनियमित दिनचर्या और अपर्याप्त नींद
- जंक फूड और अधिक नमक का सेवन
- शारीरिक श्रम और व्यायाम की कमी
- मोबाइल और स्क्रीन पर अधिक समय
ये सभी कारण शरीर के प्राकृतिक संतुलन को बिगाड़कर रक्तचाप को प्रभावित करते हैं।

आगे चलकर हो सकते हैं गंभीर परिणाम
कम उम्र में अनदेखा किया गया अनियमित रक्तचाप भविष्य में कई गंभीर बीमारियों का कारण बन सकता है, जैसे
- हृदय रोग
- स्ट्रोक (लकवा)
- किडनी संबंधी रोग
-मानसिक तनाव और कमजोरी

इसलिए समय रहते सजग होना ही सबसे बड़ा बचाव है।

आयुर्वेद में है संतुलित समाधान
आयुर्वेद केवल रोग का उपचार नहीं करता, बल्कि शरीर के मूल संतुलन को पुनः स्थापित करने पर जोर देता है। आयुर्वेद के अनुसार रक्तचाप असंतुलन का मुख्य कारण दोषों (वात, पित्त, कफ) का असंतुलन और मानसिक तनाव है।

आयुर्वेदिक जीवनशैली अपनाकर इसे नियंत्रित किया जा सकता है, जैसे
- नियमित दिनचर्या और पर्याप्त नींद
- संतुलित और सात्विक आहार
- योग, प्राणायाम और ध्यान
- उचित आयुर्वेदिक औषधियों का सेवन विशेषज्ञ की सलाह से

स्वस्थ भविष्य के लिए आज ही जागरूक बनें
युवावस्था में लिया गया छोटा-सा ध्यान भविष्य की बड़ी समस्याओं से बचा सकता है। नियमित जांच, संतुलित जीवनशैली और आयुर्वेदिक मार्गदर्शन से रक्तचाप को नियंत्रित रखकर स्वस्थ और सुखी जीवन जिया जा सकता है।

सभी प्रकार की आयुर्वेदिक औषधियां एवं परामर्श के लिए संपर्क करें:
नवकार आयुर्वेदा
बारह ढाणा, सिंगोली
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आयुर्वेद का अमृत – अमृतारिष्ट: रोग प्रतिरोधक क्षमता का विश्वसनीय साथीबार-बार सर्दी-जुकाम, कमजोरी, थकान या संक्रमण से परे...
17/02/2026

आयुर्वेद का अमृत – अमृतारिष्ट: रोग प्रतिरोधक क्षमता का विश्वसनीय साथी
बार-बार सर्दी-जुकाम, कमजोरी, थकान या संक्रमण से परेशान हैं? आयुर्वेद में वर्णित अमृतारिष्ट शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने और संपूर्ण स्वास्थ्य को सशक्त बनाने में उपयोगी माना गया है।
अमृतारिष्ट के प्रमुख लाभ: • रोग प्रतिरोधक क्षमता (इम्युनिटी) को मजबूत बनाने में सहायक
• बार-बार होने वाले बुखार व संक्रमण में उपयोगी
• कमजोरी, थकान और शरीर की दुर्बलता दूर करने में सहायक
• पाचन शक्ति को सुधारकर शरीर को ऊर्जा प्रदान करने में मददगार
• दीर्घकालिक रोगों के बाद शरीर को पुनः स्वस्थ बनाने में सहायक
सभी प्रकार की शुद्ध एवं विश्वसनीय आयुर्वेदिक औषधियां उपलब्ध हैं —
📍 नवकार आयुर्वेदा
बारह ढाणा, सिंगोली
📞 8358078639
स्वस्थ जीवन की ओर बढ़ें, आयुर्वेद को अपनाएं।

17/02/2026

ठंड से गर्मी की ओर बदलता मौसम और बढ़ती मौसमी बीमारियां: आयुर्वेद है प्रभावी समाधान
- नवकार आयुर्वेदा, सिंगोली

अभी मौसम परिवर्तन का समय चल रहा है। ठंड धीरे-धीरे विदा ले रही है और गर्मी की शुरुआत हो रही है। इस संधिकाल में शरीर को नए वातावरण के अनुसार ढलने में समय लगता है। यही कारण है कि इस समय सर्दी-खांसी, बुखार, एलर्जी, गले में खराश, त्वचा रोग, अपच, कमजोरी और थकान जैसी मौसमी बीमारियां तेजी से बढ़ने लगती हैं।
आयुर्वेद के अनुसार मौसम परिवर्तन के समय शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता प्रभावित होती है। यदि इस समय सही आहार-विहार और औषधियों का सहारा लिया जाए, तो इन रोगों से बचाव और उपचार दोनों संभव हैं।

आयुर्वेदिक दृष्टि से प्रभावी उपाय
1. रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाएं
गिलोय, तुलसी, आंवला और अश्वगंधा जैसी आयुर्वेदिक औषधियां शरीर की इम्यूनिटी बढ़ाकर बीमारियों से रक्षा करती हैं।
2. पाचन शक्ति मजबूत रखें
इस मौसम में अपच और गैस की समस्या आम होती है। त्रिफला, अभयारिष्ट और चूर्ण आदि पाचन को सुधारकर शरीर को स्वस्थ रखते हैं।
3. सर्दी-खांसी से बचाव
तुलसी, अदरक, मुलेठी और सितोपलादि चूर्ण का सेवन गले और श्वसन तंत्र को सुरक्षित रखता है।
4. दिनचर्या और खानपान पर ध्यान दें
हल्का, सुपाच्य और ताजा भोजन करें। सुबह-शाम नियमित दिनचर्या अपनाएं और ठंडी-गरम चीजों का अचानक सेवन करने से बचें।

आयुर्वेद अपनाएं, स्वस्थ जीवन पाएं
आयुर्वेद केवल रोगों का उपचार नहीं करता, बल्कि शरीर को संतुलित कर रोगों से बचाने का कार्य भी करता है। मौसम परिवर्तन के इस समय आयुर्वेदिक औषधियों और सही जीवनशैली को अपनाकर आप स्वयं और अपने परिवार को स्वस्थ रख सकते हैं।

सभी प्रकार की शुद्ध एवं विश्वसनीय आयुर्वेदिक औषधियां उपलब्ध हैं –
📍 नवकार आयुर्वेदा, बारह ढाणा, सिंगोली
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स्वस्थ रहें, सुरक्षित रहें – आयुर्वेद के साथ।

15/02/2026

आज हर घर में एक ही दृश्य आम होता जा रहा है — बच्चा चुप है, मोबाइल हाथ में है, और माता-पिता को लगता है सब ठीक है।
लेकिन सच यह है कि बढ़ता स्क्रीन टाइम अक्सर बच्चों के भीतर के एकाकीपन का संकेत होता है। जब संवाद कम होता है, साथ खेलने वाला कोई नहीं होता, और समय खाली होता है, तो स्क्रीन उसका आसान सहारा बन जाती है।
स्क्रीन छीन लेना समाधान नहीं है।
समाधान है — एकाकी समय को रचनात्मक समय में बदल देना।
✔️ बच्चों को खेल, चित्रकला, संगीत, पढ़ाई से अलग किताबें, बागवानी या घर के छोटे कामों में शामिल करें।
✔️ परिवार के साथ प्रतिदिन “नो मोबाइल समय” तय करें।
✔️ सप्ताह में एक दिन आउटडोर गतिविधि अनिवार्य बनाएं।
✔️ सबसे महत्वपूर्ण — उनसे बात करें, उनकी सुनें।
जब बच्चा व्यस्त नहीं, बल्कि सार्थक रूप से संलग्न होता है, तो उसे स्क्रीन की आवश्यकता स्वतः कम होने लगती है।
बचपन को डिजिटल खामोशी से निकालकर सृजन और संवाद की दुनिया में ले जाना ही आज की सबसे बड़ी परवरिश है।
— डॉ. सुनील रणावत

❄️ सर्दियों में बढ़ता वजन और धीमा मेटाबॉलिज्मघरेलू और आयुर्वेदिक उपाय– नवकार आयुर्वेदा, सिंगोलीसर्दियों का मौसम अपने साथ...
13/02/2026

❄️ सर्दियों में बढ़ता वजन और धीमा मेटाबॉलिज्म
घरेलू और आयुर्वेदिक उपाय
– नवकार आयुर्वेदा, सिंगोली
सर्दियों का मौसम अपने साथ स्वाद और सुस्ती दोनों लेकर आता है। तिल-गुड़, गाजर का हलवा, पकवान और देर तक रजाई में आराम… नतीजा यह कि शरीर की गतिविधि कम होती है और वजन धीरे-धीरे बढ़ने लगता है।
आयुर्वेद के अनुसार इस समय पाचन अग्नि तो मजबूत रहती है, लेकिन अगर खानपान असंतुलित हो जाए और व्यायाम कम हो जाए, तो यही ताकत वसा के रूप में जमा होने लगती है। आधुनिक विज्ञान की भाषा में कहें तो मेटाबॉलिज्म धीमा पड़ने लगता है।
अब सवाल है, इसे संतुलित कैसे रखें?
🔥 1. सुबह की शुरुआत गरम जल से
सुबह खाली पेट गुनगुना पानी पिएं। चाहें तो उसमें आधा नींबू और थोड़ा शहद मिला सकते हैं। यह शरीर की सफाई करता है और मेटाबॉलिज्म को सक्रिय करता है।
🌿 2. त्रिकटु का प्रयोग
सौंठ, काली मिर्च और पिप्पली का मिश्रण जिसे त्रिकटु कहते हैं, पाचन को तेज करता है। भोजन के बाद चुटकीभर गुनगुने पानी के साथ लिया जा सकता है। यह जमा कफ और अतिरिक्त चर्बी को कम करने में सहायक है।
🫖 3. हर्बल काढ़ा या मसाला चाय
अदरक, तुलसी, दालचीनी और काली मिर्च से बना काढ़ा सर्दी से भी बचाता है और पाचन शक्ति भी बढ़ाता है। दिन में एक बार पर्याप्त है।
🧘 4. नियमित योग और प्राणायाम
सूर्य नमस्कार, कपालभाति और तेज चाल से 30 मिनट टहलना। सर्दी में पसीना कम आता है, इसलिए व्यायाम और भी जरूरी हो जाता है।
🥗 5. संतुलित और हल्का रात्रि भोजन
रात का भोजन हल्का और सुपाच्य रखें। दाल, सब्जी, सूप या दलिया बेहतर विकल्प हैं। देर रात खाने से बचें।
🌰 6. सूखे मेवे सीमित मात्रा में
बादाम, अखरोट और तिल ऊर्जा देते हैं, लेकिन मात्रा सीमित रखें। अधिक सेवन से वजन बढ़ सकता है।
कुछ सरल नियम याद रखें
दिन में पर्याप्त पानी पिएं, भले प्यास कम लगे।
मीठा और तला हुआ भोजन सीमित करें।
नियमित दिनचर्या बनाए रखें।
सर्दी का आनंद लीजिए, लेकिन शरीर की सुनिए भी। सही खानपान और थोड़ी सक्रियता से वजन और मेटाबॉलिज्म दोनों संतुलित रह सकते हैं।
स्वस्थ रहें, सजग रहें।

दोस्तों के साथ समय बिताने के फायदे– सुनील रणावतआज की भागदौड़ भरी जिंदगी में हम काम, जिम्मेदारियों और मोबाइल स्क्रीन में ...
09/02/2026

दोस्तों के साथ समय बिताने के फायदे
– सुनील रणावत

आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में हम काम, जिम्मेदारियों और मोबाइल स्क्रीन में इतने उलझ जाते हैं कि सच्चे रिश्तों के लिए समय निकालना भूल जाते हैं। लेकिन सच यह है कि दोस्तों के साथ बिताया गया समय केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य के लिए भी एक दवा की तरह काम करता है।

जब हम अपने मन की बात खुलकर दोस्तों से साझा करते हैं, तो भीतर का दबाव हल्का हो जाता है। हंसी-मज़ाक और सहज बातचीत तनाव हार्मोन को कम करने में मदद करती है। कई बार जो बात हम परिवार से नहीं कह पाते, वह दोस्त से आसानी से कह देते हैं।

अकेलापन धीरे-धीरे अवसाद और चिंता का कारण बन सकता है। नियमित रूप से दोस्तों के संपर्क में रहना आत्मविश्वास बढ़ाता है और सकारात्मक सोच को मजबूत करता है। सामाजिक जुड़ाव दिमाग को सक्रिय और संतुलित रखता है।

अध्ययनों से पता चलता है कि जिन लोगों का सामाजिक दायरा मजबूत होता है, उनकी इम्यूनिटी बेहतर होती है। अच्छा साथ शरीर में सकारात्मक रसायनों का स्राव बढ़ाता है, जो समग्र स्वास्थ्य को लाभ पहुंचाते हैं।

जो लोग सामाजिक रूप से सक्रिय रहते हैं, वे उम्र के साथ भी अधिक ऊर्जावान और मानसिक रूप से सजग रहते हैं। मित्रों के साथ समय बिताना दिमागी सक्रियता बनाए रखता है और जीवन में उत्साह भरता है।

दोस्त हमें केवल हंसाते नहीं, बल्कि सही समय पर सही सलाह भी देते हैं। वे हमारी गलतियों पर आईना दिखाते हैं और उपलब्धियों में सच्ची खुशी साझा करते हैं। यह संतुलन जीवन को बेहतर दिशा देता है।

ऑनलाइन चैट अपनी जगह है, लेकिन आमने-सामने बैठकर बातचीत का प्रभाव अलग होता है। कोशिश करें कि सप्ताह में कम से कम एक बार मित्रों के साथ प्रत्यक्ष मुलाकात जरूर हो।

अंत में इतना ही कहना चाहूंगा कि पैसा, पद और प्रतिष्ठा अपने स्थान पर हैं, लेकिन सच्चे दोस्त जीवन की असली पूंजी होते हैं। समय निकालिए, मिलिए, हंसिए और अपने रिश्तों को मजबूत रखिए। यही स्वस्थ और खुशहाल जीवन का आधार है।

आज का दिन चिकित्सा विज्ञान के इतिहास में एक महत्वपूर्ण पड़ाव के रूप में दर्ज है।1944 में आज ही के दिन अमेरिका में पहली ब...
06/02/2026

आज का दिन चिकित्सा विज्ञान के इतिहास में एक महत्वपूर्ण पड़ाव के रूप में दर्ज है।
1944 में आज ही के दिन अमेरिका में पहली बार मानव भ्रूण को शरीर के बाहर विकसित करने में सफलता मिली। यह उपलब्धि स्त्री रोग विशेषज्ञ John Rock और उनकी सहयोगी Miriam F. Menkin के वर्षों के अथक प्रयासों का परिणाम थी।
उनकी इस खोज ने आगे चलकर टेस्ट ट्यूब बेबी तकनीक की नींव रखी और लाखों निःसंतान दंपत्तियों के लिए आशा की नई किरण जगाई। आज जिस आईवीएफ तकनीक को हम सामान्य चिकित्सा प्रक्रिया के रूप में देखते हैं, उसके पीछे दशकों का शोध, धैर्य और समर्पण छिपा है।
विज्ञान का हर छोटा कदम, मानव जीवन को बेहतर बनाने की दिशा में एक बड़ा बदलाव बन सकता है।
– डॉ. सुनील रणावत

कड़ी पत्ता के फायदे– सुनील रणावतभारतीय रसोई में तड़के की खुशबू अगर किसी एक पत्ते से पहचान पाती है, तो वह है कड़ी पत्ता। ...
06/02/2026

कड़ी पत्ता के फायदे
– सुनील रणावत

भारतीय रसोई में तड़के की खुशबू अगर किसी एक पत्ते से पहचान पाती है, तो वह है कड़ी पत्ता। स्वाद बढ़ाने के साथ यह छोटा सा पत्ता सेहत के लिए भी बड़ा काम करता है। आयुर्वेद में इसे औषधीय गुणों से भरपूर माना गया है और नियमित उपयोग से कई लाभ मिल सकते हैं।

कड़ी पत्ता भूख बढ़ाने, अपच, गैस और कब्ज जैसी समस्याओं में सहायक माना जाता है। इसमें मौजूद फाइबर और प्राकृतिक एंटीऑक्सीडेंट पाचन क्रिया को संतुलित रखने में मदद करते हैं।

कई अध्ययनों में पाया गया है कि कड़ी पत्ता इंसुलिन की कार्यक्षमता को बेहतर करने में सहायक हो सकता है। मधुमेह रोगियों के लिए सीमित मात्रा में इसका सेवन लाभकारी माना जाता है।

इसमें पाए जाने वाले तत्व खराब कोलेस्ट्रॉल (LDL) को कम करने में मदद कर सकते हैं, जिससे हृदय स्वास्थ्य बेहतर रहता है। नियमित और संतुलित उपयोग से धमनियों पर सकारात्मक प्रभाव देखा गया है।

कड़ी पत्ता में आयरन, कैल्शियम और विटामिन A, B, C जैसे पोषक तत्व होते हैं। यह बालों की जड़ों को पोषण देने और समय से पहले सफेद होने की समस्या को कम करने में सहायक माना जाता है। त्वचा पर भी इसका सकारात्मक प्रभाव देखा गया है।

आयरन और फोलिक एसिड की उपस्थिति के कारण यह रक्त की कमी से जूझ रहे लोगों के लिए उपयोगी हो सकता है, खासकर जब इसे विटामिन C युक्त आहार के साथ लिया जाए।

- रोज सुबह 7–8 ताजे पत्ते चबा सकते हैं।
- सब्जी या दाल के तड़के में नियमित प्रयोग करें।
- कड़ी पत्ता को उबालकर हर्बल पानी या चाय के रूप में भी लिया जा सकता है।

ध्यान रहे, यह कोई चमत्कारी औषधि नहीं बल्कि सहायक प्राकृतिक तत्व है। संतुलित आहार और जीवनशैली के साथ इसका प्रयोग ही वास्तविक लाभ देता है।
छोटा सा पत्ता, लेकिन गुण बड़े। रसोई में मौजूद इस सरल तत्व को पहचानिए और समझदारी से अपनाइए।

🎗️ विश्व कैंसर दिवस – जागरूकता ही सबसे बड़ी शक्ति हैकैंसर केवल एक बीमारी नहीं, बल्कि एक चुनौती है जो व्यक्ति, परिवार और ...
04/02/2026

🎗️ विश्व कैंसर दिवस – जागरूकता ही सबसे बड़ी शक्ति है
कैंसर केवल एक बीमारी नहीं, बल्कि एक चुनौती है जो व्यक्ति, परिवार और समाज सभी को प्रभावित करती है। लेकिन अच्छी बात यह है कि आज चिकित्सा विज्ञान, जागरूकता और समय पर जांच के कारण कैंसर को हराने की संभावना पहले से कहीं अधिक बढ़ चुकी है।
अक्सर हम लक्षणों को नजरअंदाज कर देते हैं — लगातार थकान, असामान्य गांठ, वजन में अचानक कमी, लंबे समय तक खांसी या किसी भी प्रकार का असामान्य बदलाव। याद रखें, जल्दी पहचान ही सबसे बड़ा बचाव है।
✔ नियमित स्वास्थ्य जांच
✔ संतुलित और प्राकृतिक आहार
✔ तंबाकू और नशे से दूरी
✔ तनाव पर नियंत्रण
✔ सक्रिय जीवनशैली
ये छोटे कदम आगे चलकर बड़ा अंतर पैदा कर सकते हैं।
आज विश्व कैंसर दिवस पर संकल्प लें —
डर नहीं, जानकारी फैलाएं।
अनदेखी नहीं, समय पर जांच कराएं।
निराशा नहीं, सकारात्मकता अपनाएं।
आपका एक संदेश, एक सलाह या एक जागरूक कदम किसी का जीवन बचा सकता है।
स्वस्थ रहें, सजग रहें।
— डॉ. सुनील रणावत 🎗️

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