Akarsh Hospital

Akarsh Hospital Akarsh hospital brings the finest health care services to ensure the safest you Best Maternity Hospital for Normal & Painless Delivery

॥ श्री गणेशाय नमः ॥आकर्ष आरोग्य क्लिनिककाली स्थान, पिपरा, दारौंदा (सिवान)माताओ एवं बहनों के लिए विशेष खुशखबरी!अब आपके अप...
04/05/2026

॥ श्री गणेशाय नमः ॥
आकर्ष आरोग्य क्लिनिक
काली स्थान, पिपरा, दारौंदा (सिवान)
माताओ एवं बहनों के लिए विशेष खुशखबरी!
अब आपके अपने क्षेत्र दारौंदा में महिलाओं से संबंधित सभी बीमारियों के इलाज के लिए एक विश्वसनीय स्थान।
डॉ. उर्मिला कुमारी
(स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ)
कुशल एवं अनुभवी डॉक्टर द्वारा विशेष परामर्श एवं उपचार
🚨 विशेष सुविधा: 24 घंटे इमरजेंसी सेवा उपलब्ध 🚨
किसी भी आपातकालीन स्थिति (Emergency) में अब घबराएं नहीं, हम आपकी सेवा के लिए दिन-रात तत्पर हैं।
हमारी प्रमुख सेवाएँ:
सुरक्षित प्रसव (Delivery): गर्भवती महिलाओं की संपूर्ण देखभाल एवं सुरक्षित प्रसव संबंधी परामर्श।
स्त्री रोग उपचार: बांझपन, अनियमित माहवारी, सफेद पानी (ल्यूकोरिया) और अन्य गुप्त रोगों का सफल इलाज।
परामर्श: महिलाओं की शारीरिक कमजोरी एवं हार्मोनल समस्याओं का उचित समाधान।
उचित दर: ग्रामीण क्षेत्र के अनुरूप किफायती और बेहतर इलाज।
"आपका स्वास्थ्य, हमारी प्राथमिकता"
📍 पता: काली स्थान, पिपरा, दारौंदा, सिवान (बिहार)
📞 अभी संपर्क करें: 9470707048

अत्यधिक गर्मी (Heatwave) के दौरान गर्भवती महिलाओं को अपनी और बच्चे की सुरक्षा के लिए निम्नलिखित बातों का विशेष ध्यान रखन...
20/04/2026

अत्यधिक गर्मी (Heatwave) के दौरान गर्भवती महिलाओं को अपनी और बच्चे की सुरक्षा के लिए निम्नलिखित बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए:
हाइड्रेशन (Hydration): दिन भर में कम से कम 3-4 लीटर तरल पदार्थ पिएं। पानी के साथ-साथ नारियल पानी, नींबू पानी, छाछ और ताजे फलों के जूस का सेवन करें ताकि शरीर में इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी न हो।
धूप से बचाव: सुबह 11 बजे से शाम 4 बजे के बीच, जब गर्मी सबसे अधिक होती है, घर से बाहर निकलने से बचें। यदि बाहर जाना जरूरी हो, तो हमेशा छाया में रहें और सनस्क्रीन का उपयोग करें।
सही पहनावा: शरीर को ठंडा रखने के लिए ढीले-ढाले, हल्के रंग के और सूती (cotton) कपड़े पहनें। पैरों में सूजन से बचने के लिए आरामदायक और खुले फुटवियर (जैसे फ्लिप-फ्लॉप) पहनें।
खान-पान: हल्का और सुपाच्य भोजन लें। अपनी डाइट में खीरा, तरबूज, खरबूजा और दही जैसी ठंडी तासीर वाली चीजों को शामिल करें। अधिक नमक, मसालेदार भोजन, कैफीन (चाय/कॉफी) और बाहर के स्ट्रीट फूड से परहेज करें।
शरीर को ठंडा रखें: बहुत ज्यादा गर्मी लगने पर ठंडे पानी से स्नान करें या बार-बार शॉवर लें। चेहरे और गर्दन पर ठंडे पानी की पट्टी या स्प्रे का उपयोग किया जा सकता है।
आराम और व्यायाम: पर्याप्त नींद लें और दिन में छोटे-छोटे अंतराल पर आराम करें क्योंकि गर्मी में जल्दी थकान (heat exhaustion) हो सकती है। व्यायाम केवल सुबह जल्दी या देर शाम को ठंडे वातावरण में ही करें।
चेतावनी: यदि चक्कर आना, अत्यधिक सिरदर्द, धुंधला दिखना या पेशाब कम आने जैसे लक्षण दिखें, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करे

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18/04/2026

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डॉ. उर्मिला कुमारी (स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ)आकर्ष आरोग्य हॉस्पिटल, दारौंदा, सिवानहमारी प्रमुख सेवाएँ:सुरक्षित प्...
03/04/2026

डॉ. उर्मिला कुमारी (स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ)आकर्ष आरोग्य हॉस्पिटल, दारौंदा, सिवान
हमारी प्रमुख सेवाएँ:सुरक्षित प्रसव (Safe Delivery): सामान्य एवं सिजेरियन डिलीवरी की आधुनिक सुविधा
।गर्भावस्था देखभाल: गर्भस्थ शिशु की नियमित जाँच और उचित परामर्श।
स्त्री रोग उपचार: बांझपन, पीसीओडी (PCOD), अनियमित माहवारी और संक्रमण का सफल इलाज।
निवारक स्वास्थ्य: सर्वाइकल कैंसर स्क्रीनिंग और स्तन परीक्षण।स्वस्थ रहने के लिए कुछ खास टिप्स:नियमित जाँच: साल में कम से कम एक बार स्त्री रोग विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य लें
सही पोषण: आहार में कैल्शियम, आयरन और फोलिक एसिड युक्त चीजों को शामिल करें।
स्वच्छता का ध्यान: संक्रमण से बचने के लिए व्यक्तिगत स्वच्छता (Personal Hygiene) का विशेष ध्यान रखें।
संपर्क करें:📍 स्थान: आकर्ष आरोग्य हॉस्पिटल, दारौंदा, सिवान📞 फोन: 9470707048

02/04/2026

प्रेग्नेंसी के दौरान सही पोषण मां और बच्चे दोनों के स्वास्थ्य के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।
आपके द्वारा साझा किए गए पोस्टर के आधार पर, यहाँ खान-पान से जुड़ी कुछ मुख्य बातें दी गई हैं:
प्रेग्नेंसी के दौरान आहार (Trimester-wise Diet)
1. पहली तिमाही (1st Trimester)शुरुआत के तीन महीनों में बच्चे के अंगों का विकास होता है, इसलिए फोलेट (Folic Acid) बहुत जरूरी है।क्या खाएं: हरी पत्तेदार सब्जियां (पालक), नट्स (बादाम, अखरोट), दालें और ताजे फल।फायदा: यह बच्चे के मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी के विकास में मदद करता है।
2. दूसरी तिमाही (2nd Trimester)इस समय बच्चे की हड्डियों का विकास तेज होता है, इसलिए कैल्शियम और प्रोटीन की मांग बढ़ जाती है।क्या खाएं: दूध, दही, पनीर, अंडा, लीन मीट और सोयाबीन।फायदा: इससे बच्चे की हड्डियां मजबूत होती हैं और मां की ऊर्जा बनी रहती है।
3. तीसरी तिमाही (3rd Trimester)अंतिम महीनों में बच्चे का वजन तेजी से बढ़ता है, इसलिए फाइबर और विटामिन्स पर ध्यान दें।क्या खाएं: साबुत अनाज (ओट्स, दलिया), जामुन, रंग-बिरंगी सब्जियां और पर्याप्त पानी।फायदा: फाइबर पाचन को सही रखता है और कब्ज जैसी समस्याओं से बचाता है।
कुछ जरूरी सावधानियां:आयरन: खून की कमी से बचने के लिए आयरन युक्त चीजें (अनार, चुकंदर) जरूर लें।
परहेज करें: कच्चा मांस, अधपके अंडे, ज्यादा कैफीन (चाय-कॉफी) और बाहर के जंक फूड से बचें।
नियमित जांच: डॉक्टर की सलाह के अनुसार समय-समय पर अल्ट्रासाउंड और चेकअप कराते रहें।
महत्वपूर्ण सूचना: यह जानकारी केवल सामान्य जागरूकता के लिए है। अपनी स्थिति के अनुसार सटीक डाइट चार्ट के लिए डॉ. उर्मिला सिंह से संपर्क करें

आकर्ष आरोग्य हॉस्पिटल दारौंदा (सिवान)में डॉ उर्मिला कुमारी द्वारा स्त्री एवं प्रसूति रोग का ईलाज किया जाता हैं यह बीमारी...
28/03/2026

आकर्ष आरोग्य हॉस्पिटल दारौंदा (सिवान)में डॉ उर्मिला कुमारी द्वारा स्त्री एवं प्रसूति रोग का ईलाज किया जाता हैं यह बीमारी महिलाओं के प्रजनन स्वास्थ्य से जुड़े होते हैं, जिनमें मुख्य रूप से अनियमित मासिक धर्म, पीसीओएस, फाइब्रॉएड, एंडोमेट्रियोसिस, बांझपन, योनि संक्रमण, गर्भाशय/अंडाशय कैंसर और गर्भावस्था संबंधी जटिलताएं (जैसे मधुमेह, उच्च रक्तचाप) शामिल हैं। ये गर्भाशय, अंडाशय, नलिकाओं और स्तन ऊतक को प्रभावित करते हैं।
प्रमुख स्त्री रोग (Gynecological Diseases):
मासिक धर्म विकार: दर्दनाक माहवारी (Dysmenorrhea), अत्यार्तव (Heavy bleeding), और अनियमित माहवारी।
संक्रमण: योनिशोथ (Vaginitis), पेल्विक सूजन रोग (PID), और बैक्टीरिया वेजिनोसिस।
गांठ/कैंसर: फाइब्रॉएड (Fibroids), ओवेरियन सिस्ट (Ovarian cysts), गर्भाशय ग्रीवा कैंसर (Cervical cancer), और अंडाशय कैंसर।
हार्मोनल: पॉलीसिस्टिक अंडाशय सिंड्रोम (PCOS)।
अन्य: एंडोमेट्रियोसिस, पेल्विक ऑर्गन प्रोलैप्स (गर्भाशय का खिसकना), और रजोनिवृत्ति (Menopause)।
प्रमुख प्रसूति रोग (Obstetric Diseases/Complications):
गर्भावस्था में ब्लीडिंग।
जेस्टेशनल डायबिटीज (गर्भावधि मधुमेह)।
उच्च रक्तचाप (High blood pressure/Pre-eclampsia)।
अस्थानिक गर्भावस्था (Ectopic pregnancy)।
गर्भपात (Miscarriage)।
प्रसव संबंधी जटिलताएं (जैसे समय से पहले प्रसव)।

28/03/2026
20/09/2025

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Siwan
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