03/03/2026
एक 5 साल के बच्चे ने गंभीर meningitis के बाद अपनी सुनने की शक्ति खो दी थी। पारंपरिक Cochlear Implant संभव नहीं था क्योंकि auditory nerve क्षतिग्रस्त थी। ऐसे दुर्लभ मामलों में किया गया Auditory Brainstem Implant (ABI) उसे फिर से ध्वनियाँ सुनने में सक्षम बना पाया। यह केवल एक सर्जरी की सफलता नहीं है — यह समय पर पहचान, सही जाँच और उन्नत उपचार की शक्ति का उदाहरण है।
लेकिन हर बच्चे को इतनी जटिल सर्जरी की जरूरत नहीं पड़ती। सच यह है कि अधिकतर मामलों में यदि Hearing Loss को जन्म के समय या शुरुआती महीनों में पहचान लिया जाए, तो सरल और प्रभावी उपचार से बच्चे का भविष्य पूरी तरह बदला जा सकता है।
बिहार में सालाना लगभग 25–30 लाख जन्म होते हैं। अनुमानतः 5,000–7,000 नवजात हर वर्ष Significant Hearing Loss के साथ जन्म ले सकते हैं।
❗Hearing Loss को “Hidden Disability” कहा जाता है क्योंकि:
• बच्चा देखने में बिल्कुल सामान्य लगता है।
• माता-पिता सोचते हैं कि “अभी छोटा है, बाद में बोलने लगेगा।”
• “लड़के देर से बोलते हैं, चिंता की बात नहीं।”
• “हमारे परिवार में सब देर से बोले थे।”
• “कान में मैल है, इसलिए नहीं सुन रहा।”
• “बड़ा होकर खुद ठीक हो जाएगा।”
ये धारणाएँ खतरनाक हो सकती हैं। Speech delay का सबसे सामान्य कारण Hearing Loss होता है।
👶 कब और कैसे जाँच कराएँ?
हर नवजात की OAE / ABR (BERA) Screening जन्म के 24–72 घंटे के भीतर होनी चाहिए।
International “1-3-6 Rule” अपनाएँ:
• 1 माह में Screening
• 3 माह में Diagnosis
• 6 माह में Treatment (Hearing Aid / Cochlear Implant / Therapy)
🚨 Warning Signs
• 0–6 माह: तेज आवाज पर चौंकना नहीं, babbling न करना
• 6–12 माह: नाम पुकारने पर प्रतिक्रिया नहीं
• 1–2 वर्ष: 1 साल तक शब्द न बोलना, 2 साल तक दो शब्दों का वाक्य न बनाना
Speech delay दिखे तो तुरंत ENT Specialist से मिलें. Hearing Loss दिखती नहीं है, पर भविष्य को प्रभावित करती है।