Lalgarhia Hospital

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28/12/2025

आयरन गोली खाते समय कुछ गलतियां करने से आयरन का अवशोषण ठीक से नहीं हो पाता है, जिससे हीमोग्लोबिन (एचबी) बढ़ने में समस्या हो सकती है। यहाँ 4 आम गलतियां हैं जो लोग आयरन गोली खाते समय करते हैं:
1. दूध या चाय के साथ लेना: आयरन गोली को दूध या चाय के साथ लेने से आयरन का अवशोषण कम हो जाता है। इसलिए, आयरन गोली को खाली पेट या फल के रस के साथ लेना चाहिए।
2. कैल्शियम सप्लीमेंट के साथ लेना: कैल्शियम आयरन के अवशोषण को कम कर सकता है, इसलिए आयरन गोली को कैल्शियम सप्लीमेंट के साथ नहीं लेना चाहिए।
3 नियमित रूप से नहीं लेना*: आयरन गोली को नियमित रूप से लेना आवश्यक है, ताकि शरीर में आयरन का स्तर बना रहे।
इन गलतियों से बचने के लिए, आयरन गोली को डॉक्टर की सलाह के अनुसार लें और अपनी डाइट में आयरन युक्त खाद्य पदार्थों को शामिल करें।

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27/12/2025

आम तौर पर, जब गर्भ में बच्चे का सिर पेल्विस में आ जाता है, तो इसे “लाइटनिंग” या “ड्रॉपिंग” कहा जाता है। यह आमतौर पर 37वें हफ्ते के बाद होता है, और इसका मतलब है कि शरीर प्रसव के लिए तैयार हो रहा है।
डॉक्टर आमतौर पर निम्नलिखित स्थितियों में प्रसव की सलाह देते हैं:
- 37-38 हफ्ते: अगर महिला की गर्भावस्था सामान्य है और बच्चे का विकास ठीक है, तो डॉक्टर आमतौर पर 37-38 हफ्ते में प्रसव की सलाह देते हैं।
- 39-40 हफ्ते: अगर महिला की गर्भावस्था उच्च जोखिम वाली है या बच्चे का विकास ठीक नहीं है, तो डॉक्टर आमतौर पर 39-40 हफ्ते में प्रसव की सलाह देते हैं।
- 41 हफ्ते: अगर महिला की गर्भावस्था 41 हफ्ते से अधिक हो गई है, तो डॉक्टर आमतौर पर प्रसव की सलाह देते हैं क्योंकि इस समय के बाद बच्चे के लिए जोखिम बढ़ जाता हैं.
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26/12/2025

ऑपरेशन डिलीवरी (सीजेरियन सेक्शन) के बाद दूसरा बच्चा कब प्लान करें, यह कई कारकों पर निर्भर करता है, जैसे कि आपकी स्वास्थ्य स्थिति, पहले बच्चे की डिलीवरी की स्थिति, और आपके डॉक्टर की सलाह।
आमतौर पर, डॉक्टर निम्नलिखित बातों को ध्यान में रखते हुए दूसरे बच्चे की प्लानिंग के लिए समय बताते हैं:
1. उम्र: अगर आपकी उम्र 35 साल से कम है, तो डॉक्टर आमतौर पर 2-3 साल के अंतराल की सलाह देते हैं।
2. स्वास्थ्य स्थिति: अगर आपकी स्वास्थ्य स्थिति अच्छी है, तो डॉक्टर आमतौर पर 1-2 साल के अंतराल की सलाह देते हैं।
3. पहले बच्चे की डिलीवरी: अगर पहले बच्चे की डिलीवरी में कोई समस्या नहीं थी, तो डॉक्टर आमतौर पर 1-2 साल के अंतराल की सलाह देते हैं।
4. सीजेरियन सेक्शन की स्थिति: अगर सीजेरियन सेक्शन के दौरान कोई समस्या नहीं थी, तो डॉक्टर आमतौर पर 1-2 साल के अंतराल की सलाह देते हैं।
आमतौर पर, डॉक्टर निम्नलिखित समय अंतराल की सलाह देते हैं:
- 1-2 साल: अगर आपकी स्वास्थ्य स्थिति अच्छी है और पहले बच्चे की डिलीवरी में कोई समस्या नहीं थी।
- 2-3 साल: अगर आपकी उम्र 35 साल से कम है और स्वास्थ्य स्थिति अच्छी है।
- 3-5 साल: अगर आपकी उम्र 35 साल से अधिक है या स्वास्थ्य स्थिति में कोई समस्या है।
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25/12/2025

PCOD (Polycystic O***y Disease) को PCOS (Polycystic O***y Syndrome) भी कहा जाता है। यह एक आम समस्या है जो महिलाओं में पाई जाती है, और यह गर्भावस्था को प्रभावित कर सकती है। लेकिन चिंता न करें, PCOD के साथ भी गर्भावस्था संभव है! 😊
PCOD में गर्भावस्था के लिए कुछ उपाय:
1. वजन कम करें: अगर आपका वजन अधिक है, तो वजन कम करने से PCOD के लक्षणों में सुधार हो सकता है और गर्भावस्था की संभावना बढ़ सकती है।
2. हार्मोनल संतुलन: हार्मोनल असंतुलन को ठीक करने के लिए डॉक्टर की सलाह लें। यह गर्भावस्था के लिए आवश्यक है।
3. ओवुलेशन को बढ़ावा दें: ओवुलेशन को बढ़ावा देने के लिए दवाएं लेना पड़ सकता है। डॉक्टर की सलाह लें।
4. फोलिक एसिड लें: फोलिक एसिड गर्भावस्था के लिए आवश्यक है। इसे लेना शुरू करें।
5. स्वस्थ आहार लें: स्वस्थ आहार लेने से PCOD के लक्षणों में सुधार हो सकता है और गर्भावस्था की संभावना बढ़ सकती है।
6. नियमित व्यायाम करें: नियमित व्यायाम करने से PCOD के लक्षणों में सुधार हो सकता है और गर्भावस्था की संभावना बढ़ सकती है।
7. तनाव कम करें: तनाव को कम करने के लिए योग, मेडिटेशन, या अन्य तकनीकों का उपयोग करें।
8. डॉक्टर की सलाह लें: PCOD के लिए डॉक्टर की सलाह लेना आवश्यक है। वे आपको गर्भावस्था के लिए तैयार करने में मदद करेंगे।

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24/12/2025

स्यूडोसाइएसिस! 😊 ये एक ऐसी स्थिति है जिसमें महिला को लगता है कि वह गर्भवती है, लेकिन वास्तव में गर्भ नहीं होता है। इसे “फॉल्स प्रेग्नेंसी” या “झूठी गर्भावस्था” भी कहा जाता है।
इस स्थिति में, महिला को गर्भावस्था के सभी लक्षण महसूस होते हैं, जैसे कि नॉटी, ब्रेस्ट में दर्द, मूड स्विंग, आदि। लेकिन जब अल्ट्रासाउंड या अन्य परीक्षण किए जाते हैं, तो गर्भ नहीं मिलता है।
स्यूडोसाइएसिस के कारण:
- हार्मोनल असंतुलन
- मानसिक तनाव या दबाव
- गर्भावस्था की इच्छा
- अन्य चिकित्सकीय स्थितियां
स्यूडोसाइएसिस का उपचार:
- डॉक्टर की सलाह लेना
- हार्मोनल असंतुलन का उपचार
- मानसिक तनाव को कम करने के लिए काउंसलिंग या थेरेपी.Kindly subscribe my tube channel savita_mittal
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23/12/2025

सच्चे श्रम दर्द, जिसे वास्तविक श्रम के रूप में भी जाना जाता है, की कुछ विशिष्ट विशेषताएं हैं। यहां देखने के लिए कुछ संकेत दिए गए हैंः

- संकुचन नियमित होते हैं और एक साथ क़रीब आते हैं

- संकुचन तीव्र होते हैं और मज़बूत हो जाते हैं

- संकुचन लगभग 30-70 सेकंड तक रहता है

- संकुचन आंदोलन या आराम के साथ दूर नहीं जाते हैं

- आपको एक ख़ूनी शो या पानी के टूटने का अनुभव हो सकता हैKindly subscribe my tube channel savita_mittal
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22/12/2025

अरे वाह! 🤗 प्रेगनेंसी में कलेजे में जलन, ये तो बहुत ही आम बात है! 🥵 इसका मतलब है कि आपके पेट में एसिडिटी बढ़ गई है, जो कि प्रेगनेंसी के दौरान बहुत आम है।
क्यों होता है?
प्रेगनेंसी में हार्मोनल बदलाव के कारण पेट की मांसपेशियां आराम करती हैं, जिससे एसिडिटी बढ़ जाती है। इसके अलावा, बढ़ता हुआ गर्भ पेट पर दबाव डालता है, जिससे एसिडिटी और भी बढ़ जाती है।
क्या करें?
- खाने की आदतें बदलें: छोटे-छोटे भोजन करें और ज्यादा मसालेदार या तले हुए खाने से बचें।
- पानी पीना: ज्यादा पानी पीने से एसिडिटी कम होती है।
- गुलकंद या सौंफ: गुलकंद या सौंफ खाने से एसिडिटी कम होती है।
- दही या छाछ: दही या छाछ पीने से एसिडिटी कम होती है।
- बिस्तर पर सीधे न लाएं: खाने के बाद कम से कम 2 घंटे तक बिस्तर पर न लाएं।Kindly subscribe my tube channel savita_mittal
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21/12/2025

डीप स्क्वाट समग्र निचले शरीर की ताक़त और लचीलेपन के लिए बहुत फायदेमंद हो सकता है। यदि आपका साथी आपका समर्थन कर रहा है, तो यह निश्चित रूप से डिलीवरी में मदद कर सकता है,Kindly subscribe my tube channel savita_mittal
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20/12/2025

अरे वाह! 🤗 नसबंदी का ऑपरेशन खुलवाने के बाद बच्चा ठहर सकता है, लेकिन ये कई कारकों पर निर्भर करता है, जैसे कि ऑपरेशन की सफलता, आपकी उम्र, और आपकी स्वास्थ्य स्थिति।

*ट्यूबोप्लास्टी (Tuboplasty) क्या है?*

ट्यूबोप्लास्टी एक सर्जिकल प्रक्रिया है जिसमें फॉलोपियन ट्यूब को फिर से जोड़ने या खोलने की कोशिश की जाती है, जो पहले नसबंदी के दौरान बंद कर दी गई थी।

*बच्चा ठहरने की संभावना*

ट्यूबोप्लास्टी के बाद बच्चा ठहरने की संभावना कई कारकों पर निर्भर करती है, जैसे कि:

- ऑपरेशन की सफलता
- आपकी उम्र
- आपकी स्वास्थ्य स्थिति
- फॉलोपियन ट्यूब की स्थिति

आमतौर पर, ट्यूबोप्लास्टी के बाद 60-80% महिलाओं में फॉलोपियन ट्यूब फिर से खुल जाती है, लेकिन बच्चा ठहरने की संभावना 40-60% होती है।Kindly subscribe my tube channel savita_mittal
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19/12/2025

35 साल की उम्र में दूसरा बच्चा प्लान करना एक अच्छा फैसला हो सकता है, लेकिन इसमें कुछ जोखिम भी हो सकते हैं। आइए जानते हैं कि 35 साल की उम्र में दूसरे बच्चे के लिए प्लान करने से क्या फायदे और नुकसान हो सकते हैं:
फायदे:
- आपके पास पहले से ही एक बच्चा है, इसलिए आपको पता है कि क्या उम्मीद करनी है।
- आपके पास पहले से ही कुछ अनुभव है, जो आपको दूसरे बच्चे की देखभाल में मदद कर सकता है।
- आपके बच्चे एक-दूसरे के साथ खेलने और सीखने के लिए एक साथी होंगे।
नुकसान:
- 35 साल की उम्र में गर्भावस्था के दौरान कुछ जोखिम बढ़ जाते हैं, जैसे कि:
- गर्भावस्था के दौरान उच्च रक्तचाप
- गर्भावस्था के दौरान शुगर
- प्रीमैच्योर डिलिवरी
- सीजेरियन डिलिवरी
- 35 साल की उम्र में गर्भावस्था के दौरान कुछ जेनेटिक समस्याएं होने का खतरा बढ़ जाता है, जैसे कि डाउन सिंड्रोम।
- आपको अपने पहले बच्चे की देखभाल के साथ-साथ दूसरे बच्चे की देखभाल भी करनी होगी, जो कि थकाऊ हो सकता है।
क्या करें?
- अपने डॉक्टर से बात करें और अपनी स्वास्थ्य स्थिति के बारे में चर्चा करें।
- अपने दूसरे बच्चे के लिए तैयार रहने के लिए अपने जीवनशैली में कुछ बदलाव करें, जैसे कि स्वस्थ आहार लेना और नियमित व्यायाम करना।Kindly subscribe my tube channel savita_mittal
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18/12/2025

अंडा फूटने का मतलब है ओवुलेशन, जब ओवरी से एक म्योर एग रिलीज होता है। ये प्रॉसेस आमतौर पर मेनस्ट्रुअल साइकल के 14वें दिन होता है, लेकिन ये हर महिला के लिए अलग हो सकता है।
ओवुलेशन के दौरान, फॉलिकल-स्टिम्युलेटिंग हॉर्मोन (FSH) और ल्यूटिनाइजिंग हॉर्मोन (LH) के लेवल में बदलाव होता है, जिससे ओवरी से एग रिलीज होता है। फिर ये एग फॉलोपियन ट्यूब में जाता है, जहां इसे फर्टिलाइजेशन के लिए स्पर्म का इंतजार करना पड़ता है।
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17/12/2025

वाह! ये सवाल तो वाकई दिलचस्प है! 🤔
प्रीमैच्योर बच्चों की बात करें, तो सच है कि लड़कियों की तुलना में लड़कों की स्थिति थोड़ी कमजोर होती है, खासकर गर्भावस्था और नवजात अवस्था में। इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं:
⿡ बायोलॉजिकल फेक्टर: लड़कों में एक एक्स और एक वाई क्रोमोसोम होता है, जबकि लड़कियों में दो एक्स क्रोमोसोम होते हैं। ये वाई क्रोमोसोम लड़कों को थोड़ा अधिक संवेदनशील बनाता है, खासकर गर्भावस्था के दौरान।
⿢ हार्मोनल प्रभाव: लड़कियों में एस्ट्रोेजन जैसे हार्मोन्स होते हैं जो उनके विकास में मदद करते हैं, जबकि लड़कों में टेस्टोस्टेरोन होता है जो उनके विकास को प्रभावित करता है।
⿣ गर्भावस्था में जोखिम: लड़कों के गर्भ में अधिक जोखिम होता है, जैसे कि प्रीमैच्योरिटी, जन्म के समय कम वजन, और अन्य जटिलताएं।
⿤ नवजात देखभाल: लड़कों को नवजात अवस्था में अधिक देखभाल की आवश्यकता होती है, खासकर अगर वे प्रीमैच्योर हैं।
लेकिन इसका मतलब ये नहीं है कि लड़के कमजोर होते हैं! लड़कों को बस थोड़ी अधिक देखभाल और ध्यान की आवश्यकता होती है। 💪Kindly subscribe my tube channel savita_mittal
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