OM YOG

OM YOG yog & ayurvedic

1. उदान वायुस्थान: इसका स्थान कंठ (गले) के क्षेत्र में है।कार्य: इसके द्वारा वाणी (बोलना), सोचने की शक्ति, स्मरण शक्ति (...
26/05/2026

1. उदान वायुस्थान: इसका स्थान कंठ (गले) के क्षेत्र में है।कार्य: इसके द्वारा वाणी (बोलना), सोचने की शक्ति, स्मरण शक्ति (याददाश्त) तथा शरीर को ऊपर की ओर ले जाने का कार्य होता है।2. प्राण वायुस्थान: इसका स्थान हृदय (छाती) के क्षेत्र में है।कार्य: इसके द्वारा श्वास-प्रश्वास (सांस लेने और छोड़ने) की क्रिया, हृदय की गति तथा जीवन शक्ति का संचार होता है।3. समान वायुस्थान: इसका स्थान नाभि (पेट) के आसपास है।कार्य: इसके द्वारा भोजन का पाचन, पोषक तत्वों का अवशोषण तथा शरीर में संतुलन बनाए रखने का कार्य होता है।4. अपान वायुस्थान: इसका स्थान नाभि के नीचे, पेल्विक क्षेत्र (गुदा के पास) में है।कार्य: इसके द्वारा मल-मूत्र त्याग, प्रसव क्रिया (बच्चे के जन्म की प्रक्रिया) तथा अन्य निष्कासन कार्य होते हैं।5. व्यान वायुस्थान: इसका स्थान पूरे शरीर में व्यापक (फैला हुआ) है।कार्य: इसके द्वारा रक्त संचार (ब्लड सर्कुलेशन), नसों में ऊर्जा का संचार तथा पूरे शरीर की गतिविधियों का संचालन होता है।

🕉️ नाद योग और श्री साधना: ध्वनि से पराचेतना की दिव्य यात्रा 🌺​क्या आप जानते हैं कि ब्रह्मांड की उत्पत्ति कैसे हुई? आधुनि...
26/05/2026

🕉️ नाद योग और श्री साधना: ध्वनि से पराचेतना की दिव्य यात्रा 🌺
​क्या आप जानते हैं कि ब्रह्मांड की उत्पत्ति कैसे हुई? आधुनिक विज्ञान कहता है—'बिग बैंग' (एक महाविस्फोट), और हमारी सनातन संस्कृति कहती है—'नाद ब्रह्म' यानी एक परम ध्वनि, एक दिव्य स्पंदन (Vibration)!
​जब हम इस दिव्य ध्वनि के विज्ञान (नाद योग) को 'श्री साधना' (Shri Vidya) के रहस्यों से जोड़ते हैं, तो यह केवल एक साधना नहीं रह जाती, बल्कि यह 'शिव और शक्ति' के मिलन का महाविज्ञान बन जाती है।
​✨ साधना मार्गदर्शक (Sadhana Guide)
​ब्रह्मचारी महेशस्वरूप जी
स्थान: बूढ़ा महादेव शिवालय, विकासनगर, देहरादून (उत्तराखंड)
​1️⃣ श्री चक्र: नाद का ही दृश्य रूप (Visual Form of Sound)
​श्री विद्या साधना का मुख्य आधार 'श्री चक्र' (Shri Yantra) है। आज का विज्ञान (Cymatics) भी मानता है कि हर ध्वनि तरंग एक विशेष ज्यामितीय आकृति (Geometry) बनाती है। श्री विद्या के अनुसार, जब सृष्टि की उत्पत्ति के समय मूल स्पंदन (नाद) हुआ, तो उससे जो सबसे दिव्य आकृति उभरी, वही 'श्री चक्र' है।
​सरल शब्दों में, श्री चक्र और कुछ नहीं बल्कि "नाद का ही साक्षात् दृश्य रूप" है।
​2️⃣ वाणी के चार स्तर और श्री महात्रिपुरा सुंदरी
​ललिता सहस्रनाम में माँ भगवती को 'परा, पश्यंती, मध्यमा और वैखरी-रूपा' कहा गया है। श्री मंत्र (पंचदशाक्षरी या षोडशी) का जाप साधक को ध्वनि के इन चार स्तरों के माध्यम से परम मौन तक ले जाता है:
​वैखरी: मुंह से मंत्र का स्पष्ट उच्चारण (स्थूल रूप)।
​मध्यमा: कंठ और मन के स्तर पर मंत्र का मानसिक जाप (सूक्ष्म रूप)।
​पश्यंती: जहाँ मंत्र शब्दों से मुक्त होकर एक दिव्य प्रकाश या आंतरिक अंतःप्रेरणा बन जाता है।
​परा: ध्वनि की उच्चतम अवस्था, जहाँ कोई शब्द नहीं बचता—सिर्फ विशुद्ध चेतना बचती है। यही साक्षात् माँ ललिता त्रिपुरा सुंदरी का स्वरूप है।
​3️⃣ चक्र भेदन और अनाहत नाद की गूँज
​हमारे शरीर के सभी चक्रों की पंखुड़ियों पर जो अक्षर अंकित हैं, उन्हें श्री साधना में 'मातृका शक्ति' कहा गया है।
जब एक नाद योगी गहरे ध्यान के माध्यम से अपने भीतर उतरता है, तो चक्रों के शुद्ध होने पर उसे अपने भीतर दिव्य ध्वनियाँ सुनाई देने लगती हैं—जैसे झींगुर की आवाज, शंख की ध्वनि, घंटियों की गूंज या बांसुरी का सुरीला स्वर।
​जब यह ऊर्जा हृदय के 'अनाहत चक्र' (Anahata-Abja-Nilaya) पर पहुँचती है, तो साधक बिना किसी बाहरी टकराव के गूंजने वाले ब्रह्मांडीय संगीत (अनाहत नाद) से जुड़ जाता है।
​✨ साधना का अंतिम फल: 'श्री' की प्राप्ति
​श्री साधना में जब नाद योग का सम्पुट मिलता है, तो चंचल मन बहुत तेजी से शांत हो जाता है। भीतर गूंजने वाला वह दिव्य नाद साधक के जीवन में 'श्री' यानी मानसिक शांति, भावनात्मक संतुलन, आंतरिक आनंद और अंततः मोक्ष (शिव-शक्ति से एकाकार) लेकर आता है।
​🎶 "मन रूपी मतवाले हाथी को बांधने के लिए, भीतर की दिव्य ध्वनि (नाद) ही सबसे श्रेष्ठ अंकुश है।"
​📍 संपर्क एवं साधना केंद्र:
ब्रह्मचारी महेशस्वरूप जी
बूढ़ा महादेव शिवालय,
विकासनगर, देहरादून, उत्तराखंड।
​🏷️ Tags:

'नाड़ी शोधन' और 'ब्रेन-वेव्स': मस्तिष्क का विद्युतीकरण
26/05/2026

'नाड़ी शोधन' और 'ब्रेन-वेव्स': मस्तिष्क का विद्युतीकरण

“योग अपनाओ, फेफड़ों को मजबूत बनाओ।” 🧘‍♀️💚 #योग    #प्राणायाम
26/05/2026

“योग अपनाओ, फेफड़ों को मजबूत बनाओ।” 🧘‍♀️💚
#योग #प्राणायाम

 # # # #ध्यान मन की अंतर यात्रा हैं अगर जीवन को सार्थक बनाना है ध्यान मे उतरना पड़ेगा # # # #  # # STRESS MANAGMENT # # #
25/05/2026

# # # #ध्यान मन की अंतर यात्रा हैं अगर जीवन को सार्थक बनाना है ध्यान मे उतरना पड़ेगा # # # # # # STRESS MANAGMENT # # #

सिंहासन – शेर बनने की कला, आत्मविश्वास और शक्ति का अद्भुत आसनमित्रो, आज हम एक ऐसे आसन पर बात करेंगे जो तुम्हें शेर बना द...
25/05/2026

सिंहासन – शेर बनने की कला, आत्मविश्वास और शक्ति का अद्भुत आसन

मित्रो, आज हम एक ऐसे आसन पर बात करेंगे जो तुम्हें शेर बना देता है – सिंहासन। जैसे शेर जंगल का राजा होता है, निडर, शक्तिशाली और गरिमामय – वैसे ही यह आसन साधक के भीतर छिपे हुए सिंह को जगाता है। जो नियमित रूप से इस आसन का अभ्यास करता है, वह धीरे-धीरे शेर की तरह हो जाता है – निडर, आत्मविश्वासी, और अपनी उपस्थिति से ही वातावरण को बदल देने वाला।

यह पोस्ट आप Telepathy – A Yoga For Complete Transformation पर पढ़ रहे हैं।

सिंहासन क्यों करें – शेर हमें क्या सिखाता है

शेर कभी पीछे मुड़कर नहीं देखता। वह डरता नहीं। वह जानता है कि वह राजा है। सिंहासन साधक को वही आत्मविश्वास, वही निर्भयता, वही शक्ति प्रदान करता है। यह आसन विशेष रूप से गले, जीभ, चेहरे की मांसपेशियों और मुखर रज्जुओं को सक्रिय करता है। जो लोग डरपोक होते हैं, जिनकी आवाज कांपती है, जो सामने बोलने में संकोच करते हैं – उनके लिए यह आसन रामबाण है।

विधि – ऐसे करें सिंहासन

सबसे पहले वज्रासन (घुटनों के बल बैठना) में बैठ जाएँ। घुटने जमीन पर, पैर पीछे की ओर।

अब दोनों घुटनों को थोड़ा अलग करें। शरीर का पूरा वजन घुटनों और हाथों पर रहेगा।

दोनों हाथों को घुटनों के बीच जमीन पर रखें – हथेलियाँ जमीन की ओर, उँगलियाँ शरीर की ओर।

रीढ़ को सीधा रखें। आँखें खोलें और सामने देखें।

अब गहरी साँस लें। साँस छोड़ते हुए मुँह को पूरा खोलें, जीभ को जितना हो सके बाहर निकालें (निचले होंठ के नीचे), और ‘हा…’ या ‘सिंह की दहाड़’ जैसी आवाज करें। आँखों को एकटक सामने रखें।

यह एक बार की क्रिया है। फिर सामान्य श्वास लें। इस प्रक्रिया को 5-7 बार दोहराएँ।

ध्यान रखने योग्य बातें

· जीभ को जितना हो सके उतना बाहर निकालें – चेहरे की सारी मांसपेशियाँ खिंचनी चाहिए।
· आवाज गले से निकले – फेफड़ों से नहीं। दहाड़ गहरी और गंभीर हो।
· आँखों को सामने किसी एक बिंदु पर स्थिर रखें – डोलने न दें।
· यदि घुटनों में दर्द हो तो नीचे कंबल या मैट बिछा लें।

सिंहासन के लाभ

· गला, जीभ, मुखर रज्जु, चेहरे की मांसपेशियाँ – सब मजबूत होती हैं।
· आवाज में गहराई और गंभीरता आती है। जो लोग हकलाते हैं, डरकर बोलते हैं – उन्हें बहुत लाभ होता है।
· थायराइड ग्रंथि सक्रिय होती है – गले के रोग दूर होते हैं।
· मन का डर, हिचक, संकोच – सब निकल जाता है। आत्मविश्वास बढ़ता है।
· चेहरे पर तेज और ग्लो आता है। झुर्रियाँ कम होती हैं।
· बच्चों को टॉन्सिल, सर्दी-जुकाम, एडेनोइड्स में बहुत लाभ होता है।

एक प्रयोग – शेर बनकर दहाड़ो

प्रतिदिन सुबह 5-7 बार सिंहासन का अभ्यास करो। जब दहाड़ो, तो कल्पना करो कि तुम शेर हो – जंगल का राजा। तुझे किसी से डर नहीं। तेरी आवाज सुनकर सब ठहर जाते हैं। 21 दिन लगातार करो। तुम पाओगे – तुम्हारे अंदर का डर खत्म हो गया है। तुम सामने बोलने में संकोच नहीं करते। तुम निडर हो गए हो। तुम सिंह हो गए हो।

एक लाइन में सार – “सिंहासन सिखाता है – डर मिथ्या है, शक्ति तुम्हारे भीतर है। बस उसे जगाना है। दहाड़ो, और दुनिया सुन लेगी।”

🔔 व्हाट्सएप चैनल का लिंक कमेंट बॉक्स में PIN है, जरूर ज्वाइन करें।

Release gas, improve digestion & feel lighter with Pawanmuktasana ✨A simple yoga pose that helps reduce bloating, consti...
25/05/2026

Release gas, improve digestion & feel lighter with Pawanmuktasana ✨
A simple yoga pose that helps reduce bloating, constipation & belly fat naturally 🧘‍♀️

Practice for 1-2 minutes and repeat 3 times daily for better results 💚

Balance your body, focus your mind ✨Nataraj Asana improves flexibility, posture, balance & full body strength while open...
25/05/2026

Balance your body, focus your mind ✨
Nataraj Asana improves flexibility, posture, balance & full body strength while opening the chest and reducing stress 🧘‍♀️🔥

Start slowly, stay steady, and enjoy the journey of yoga 💫

शीर्षक: प्राण वायु - आपके जीवन की संजीवनी शक्ति​क्या आपने कभी सोचा है कि आपके शरीर की वह कौन सी अदृश्य शक्ति है, जो हर ध...
25/05/2026

शीर्षक: प्राण वायु - आपके जीवन की संजीवनी शक्ति
​क्या आपने कभी सोचा है कि आपके शरीर की वह कौन सी अदृश्य शक्ति है, जो हर धड़कन, हर विचार और हर श्वास को संचालित करती है? आयुर्वेद के प्राचीन ज्ञान में इसे 'प्राण वायु' कहा गया है। यह सिर्फ हवा नहीं है, यह आपके जीवन का मूल आधार है।
​शरीर के पाँच ऊर्जा केंद्र (पंच-वायु)
​हमारा शरीर पाँच मुख्य वायुओं से मिलकर बना है, जो अलग-अलग कार्यों के लिए जिम्मेदार हैं:
​प्राण वायु (हृदय, गला, श्वास नली): जीवन की मुख्य ऊर्जा, श्वास और इंद्रियों का संतुलन।
​उदान वायु (गला, सिर): वाणी, उत्साह और सोचने की शक्ति का केंद्र।
​समान वायु (नाभि क्षेत्र): पाचन और पोषक तत्वों के वितरण का आधार।
​अपान वायु (नाभि से नीचे): शरीर से अशुद्धियों को बाहर निकालने की प्राकृतिक प्रक्रिया।
​व्यान वायु (संपूर्ण शरीर): पूरे शरीर में रक्त और ऊर्जा का संचार।
​प्राण वायु का असंतुलन: संकेत और चेतावनी
​जब हम गलत जीवनशैली और तनाव के जाल में फंसते हैं, तो 'प्राण वायु' कमजोर पड़ने लगती है। इसके असंतुलन के कुछ संकेत इस प्रकार हैं:
​सांसों का फूलना या अनियमित धड़कन।
​अकारण चिंता, भय और मानसिक अस्थिरता।
​लगातार थकान और इंद्रियों में कमजोरी महसूस होना।
​कैसे करें 'प्राण वायु' को पुनर्जीवित? (आपका डेली एक्शन प्लान)
​प्राण वायु को संतुलित रखना कठिन नहीं है, बस कुछ आदतों में बदलाव की जरूरत है:
​सात्विक आहार: 'प्राण' को शुद्ध करने के लिए सात्विक भोजन (ताजे फल, हरी सब्जियाँ, बादाम और घी) अपनाएं। बासी और भारी भोजन से परहेज करें।
​प्राणायाम का अभ्यास: अनुलोम-विलोम, नाड़ी शोधन और उज्जायी प्राणायाम आपके शरीर की ऊर्जा को तुरंत स्थिर और शक्तिशाली बनाते हैं।
​ब्रह्म मुहूर्त की शक्ति: सूर्योदय से पहले उठकर प्रकृति के सानिध्य में समय बिताएं। यह समय प्राणों को जागृत करने के लिए सबसे उत्तम है।
​मानसिक स्वच्छता: ध्यान (मेडिटेशन) करें। सकारात्मक विचारों के माध्यम से क्रोध और भय जैसे विकारों को दूर करें।
​सुगंध और शुद्धता: तुलसी, लौंग और काली मिर्च की प्राकृतिक सुगंध लें, गुनगुना पानी पिएं और हानिकारक आदतों (धूम्रपान/शराब) से दूर रहें।
​निष्कर्ष: स्वस्थ जीवन, आपका अधिकार है!
​आयुर्वेद कहता है— "प्राण की रक्षा करें, स्वस्थ जीवन पाएं।"
​हमारा शरीर एक मशीन नहीं, बल्कि ऊर्जा का एक अद्भुत तंत्र है। जब तक आपकी प्राण वायु संतुलित है, आपका मन शांत रहेगा और शरीर स्वस्थ। आज से ही अपनी दिनचर्या में थोड़ा बदलाव लाएं और अपने भीतर के प्राण को नई चेतना प्रदान करें।
​क्या आप अपने स्वास्थ्य के प्रति जागरूक हैं? नीचे कमेंट्स में बताएं कि आप अपनी 'प्राण ऊर्जा' को संतुलित रखने के लिए आज क्या करने वाले हैं?
​ #प्राणवायु #आयुर्वेद #स्वास्थ्य

"श्री साधना के लिए प्रेरणा: प्राण वायु को शुद्ध करना ही वास्तव में अपने भीतर के ईश्वर को जागृत करने की पहली सीढ़ी है।"

24/05/2026

कलात्मक ऐकाल

24/05/2026

कलात्मक एकल

Address

Sultanpur
464986

Telephone

+919755163454

Website

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when OM YOG posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Share