12/07/2024
बिल्कुल सही बोला उस माँ ने वो जानती है आज का दोर इंसान से नहीं प्रॉपर्टी से मतलब होता है शादी आज की डेट में contract है बाकी कभी शादी एक पवित्र बंधन था जब इंसान की कीमत होती थी और रिश्तों की कदर और आजकल के लौंडे भी समझ जाये जो नचनिया रात दिन रील ठुमके पे बंजारा बनी है क्या वो बुढ़ापे में आपका सहारा बनेगी हाँ तब तक जब तक नोट की पर्ची आपके पास है सब आपके हैं जिस दिन आपका शरीर समर्थवान ना होकर एक वृद्ध जीवन में आता है तब पता चलता है तुम्हारी शादी के बनाए जुते रिश्ते का मगर आने वाली नस्ल पहले ही खत्म है ना वो घर की ना घाट की है
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