Dr RK Gupta I New life Clinic

Dr RK Gupta I New life Clinic consultant for :- psychiatric disorders, Mental health, Phobia , lack of confidence , Anxiet

07/05/2026

एक नई कविता " परजीवी "
कुछ इंसान और पौधे जन्म से ही परजीवी होते हैं ,
कुछ कीट -पतंगें और मानुष तक ,
इनके भ्रम जाल में फंस कर मारे जाते हैं !
जैसे / पीचर प्लांट ( पौधा ) जिसकी शरण -कीट -पतंगे
पौधा समझ कर लेते हैं ,
उन्हें भी हजम कर लेता है !
इसी तरह कुछ पेरासाइट कीड़े और जीवाणु
शरीर में घुसपैठ कर मनुष्य का
रक्त शोषण कर , परजीवी होकर पनपते हैं ।
राजनेता, साहित्यकार और कुछ चाटुकार -पत्रकार भी
परजीवी होकर जीते हैं !
इनके डी -एन -ए में ही, परजीवी के गुण सूत्र छिपे होते हैं ।
इनका एक मात्र ध्येय होता है --
देश मे नफरत फैल कर दंगें करवा कर,
साम्प्रदायिकता का परचम लहराना
हर दिन, हर वक्त और हर जगह
ये परजीवी , देश भक्ति की लार टपकते हैं , जबकि
रात के अंधेरों में
मदिरा के साथ धूम्रपान करते हैं ,
इनकी कोई जाति न धर्म , बस इनके भीतर
नफरत का जहरीला अजगर छिपा होता है ।
शोषण कर दूसरों को , यही इनके जीने का मकसद,
यही इनके चेहरों का नकाब होता है ।

07/05/2026

कविता -2 '-काम की बात '
जो शक्स , अक्सर अधिक बोलता है, वह
ठीक कम , गलत अधिक बोलता है !
इस लिए, सुनो अधिक और बोलो कम
मनन कर सोचो , फिर बोलो
जो भी बोलो, तोल कर बोलो
मौन की भाषा भी बड़ी अनमोल है
जो कभी कभी ,
बोलने से भी अधिक शसक्त होती है
कहावत है - " एक चुप सौ सुख
किसी ने कहा है कि ,
म्यान से निकली कमान, और
मुहं से निकली जबान कभी भी
वापस नहीं लौटती !
इसलिए जो भी बोलो,
समझ कर बोलो , मधुरता से बोलो
सच वालो , जिससे सबका भला हो!
जिससे किसी को भी कड़वाहट न हो !
बोलोकम और सुनो अधिक ,
सुखी जीवन जीने का
यही है - सबसे बड़ा ' गुरुमंत्र ! !

03/05/2026

समर्पित कविता " भ्राता श्री "
जब -जब भूला, सपनों में दिखे ,
खाट के पास खड़े - भ्राता श्री ' भाई जी '
जब तक जीवित रहे,
मेरी सांसों की लय बने रहे !
उनकी हर बात, मेरे लिए संदेश नहीं,
आदेश होता था !
वह अक्सर इक बात शायरी मे कहा करते थे , कि
बाखबर अपनी मौत से, कोई बसर नहीं!
सामान सौ बरस का, और
पल की खबर नहीं !
खो गये है - किसी
गहन अंधकार में ,छोड़ कर मुझे?
फिर भी, किसी साय की तरह बसे हैं -
आज भी, मेरे रोम -रोम में !
किरदार उनका अंतरिक्ष से भी विशाल था
उनकी मानसिकता में ,
इंसानियत का जुनून और
कमाल का जज्बा था !
उनकी कथनी और करनी का कोई
सानी न हुआ, न होगा कभी ;
उनका कद्द, , वट्ट वृक्ष की तरह विशाल था !

उनका हृदय सभी के लिए , प्रेम का सागर था

वो, धर्म पुत्र युधिष्ठिर, और बुद्ध का अवतार थे
मेरे लिए भ्राता या भाई जी नही बल्कि
पिता के किरदार थे !
ऐसे थे मेरे --' भ्राता श्री '
ईश्वर की तरह प्रातः स्मरणीय - ' भाई जी '

02/05/2026

हम सभी अच्छा बनना तो पसंद करते हैं ,
पर कभी , अच्छा कर नहीं पाते !
फिर भी , दूसरों को उनके सामने
अच्छा कहने से कतराते नहीं

भले ही वह पाजी और मक्कार ही हो !
फिर भी हम उसे अच्छा कह के थकते भी नहीं ?
एक दूसरे को अच्छा कहने की होड़ लग गई है !
कुछ लोग प्रयास रत हैं कि
गांधी के हत्यारे को भी ,
अच्छा इंसान घोषित कर दिया जाए?
ताकि , कोई गलत फहमीं में न रहे कि कोई अब
अच्छा आदमी नहीं हो सकता !
आज कल हम सभी
एक दूसरे को अच्छा -अच्छा ही कहते हैं
पीठ पीछे कर भले ही , उस पर हंसते हैं !
मुझे ऐसा लगता है कि
अच्छा होने के बाद भी इन दिनों, प्रश्न चिन्ह लग सकता है?

24/04/2026

कविता -1 " शब्दों की खेती "
मेरी रक्त शिराओं में कल्पना की नदी बहती है
जिसमें सृजन का हल चलता है
मेरे शब्दों के उपवन में उपजते हैं
रंग विरंगे पंकज और पुष्प
जिससे हर रोज सुबह गुलदस्ता बनता है
नित रोज, 'मैं'
शब्दों की खेती करता हूं !
जैसे भोर वेला से पहले अंधेरा छटता है
सुबह का सूर्य उदय होता है
उसी तरह हर रोज, मैं भी
इक नई कविता लिखता हूं
हर दिन शब्दों की खेती करता हूँ!

24/04/2026

कविता --" हर रोज एक कविता " - 2
मैं स्वयं से ही एक यक्ष प्रश्न करता हूं कि -मैं
हर रोज, कविता क्यों लिखता हूँ?
जैसे शिखर पर्वत पर
नदियों का उदगम होता है,
कली से फूल निकलता है ,
चिड़िया चुग -चुग कर
ले जाती है - मेरे आंगन से
कविता के दाने !
जब चारो सुनाई देता है , ' मुझे'
आवाजों ही आवाजों शोर
हर तरफ, दुख -दर्द दिखाई देता है
तब मैं अपनी कलम कस कर
हर रोज ,
इक नई कविता लिख लेता हूं !
मेरे लिखने से होगा क्या !
युग बदलेगा , युध्द समाप्त होगा !
अकायक, याद करता हूं, छोटी सी गलहरी को
राम सेतु बनाने को जिसने जिद्द की थी,
और उस नन्ही सी चिड़िया को,
जो, चोंच में पानी लेकर , सागर से लड़ी थी ?
मैं सोचता है कि
हिम्मत करे इंसान अगर तो क्या
हो नहीं सकता !
ऐसा कौन सा अहद है - जो ,
हो नहीं सकता ?
यदि कोई दधीचि , अस्थी दान कर
युद्ध कलश बन कर युग पुरूष बन सकता है
शिव की जटाओं से गंगा निकल सकती है !
मेरी कविता से भी
दुनिया बदल सकती है ,
क्यों नहीं, क्यों नहीं ? ?

17/12/2024

Address

Sundarnagar
175019

Opening Hours

Monday 10:30am - 5pm
Tuesday 10:30am - 5pm
Wednesday 10:30pm - 5pm
Thursday 10:30am - 5pm
Friday 10:30am - 5pm
Saturday 10:30am - 5pm

Telephone

+918219201293

Website

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when Dr RK Gupta I New life Clinic posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Contact The Practice

Send a message to Dr RK Gupta I New life Clinic:

Share

Category