30/01/2026
🎊मेरे गुरुदेव- मेरा जीवन🎊
अध्याय 1 : आत्मा की अंधेरी रात (1999–2007)
सन 2000 — रात का कोरा सन्नाटा है। ठंडी हवा कड़कड़ाती हुई बह रही है।✨️
मैं, उन्नीस वर्ष की एक लड़की, अपने घर की छत पर बैठी हूँ।
अंधेरे को देख रही हूँ… पर ऐसा लगता है जैसे वह अंधेरा बाहर नहीं, मेरे भीतर फैला हुआ है।
सत्य यही है कि अब तक के जीवन में मैंने ख़ुशी नहीं जानी।
अधिकतर लोग अपने बचपन को स्वर्णिम समय के रूप में याद करते हैं लेकिन मैंने बचपन से एक रिक्तता अपने भीतर हमेशा महसूस की। 🍁
जैसे मैं यहाँ पर फेंक दी गयी होऊं एक ऐसी दुनिया में , जहाँ कोई अपना नहीं , जैसे अपना घर कहीं और हो , जैसे I dont belong here.
🍁🍁🍁
मेरे भीतर के हालात कुछ ऐसे हैं:
रोज़ रूखी रूखी सी ज़िन्दगी जीनी
जैसे पत्ता कोई पेड़ से झड़ गया हो
और अपने वजूद से अलग हो गया हो 🍁
और गिर पड़ा हो ऐसे अंतहीन तहखाने में🍁
जहाँ रोशनी की कोई किरण नहीं आती
अकेला पड़ा वह बस यही विचार करता है
कि क्या यही जीवन है ??🍂
Jesus ने इस अवस्था का वर्णन “dark night of the soul” के नाम से किया है। 🪹
यह वह अवस्था होती है जब साधक भीतर से पूरी तरह खाली, अकेला, खोया हुआ और मार्गहीन महसूस करता है।🪹
जैसे भीतर की सारी रोशनी बुझ गई हो, जैसे ईश्वर, कृपा, दिशा — सब दूर हो गए हों। लेकिन वास्तव में यह एक गहन आध्यात्मिक रूपांतरण की अवस्था है।🌕
इस अंधकार के बाद ही साधक की चेतना नये प्रकाश के लिए तैयार होती है।💫
मैं इसी dark night of the soul से गुज़र रही थी।लेकिन उस समय ऐसा कोई ख्याल मेरे भीतर नहीं है , बस मैं यही जानती हूँ कि जीवन गहन अन्धकार है ।🌑
लेकिन उस रात छत पर बैठी मैं, महसूस कर रही हूँ — कि इस साल कुछ बहुत गहरा होने वाला है। जीवन किसी अदृश्य ढंग से बदलने वाला है। एक देजा वू अपने भीतर महसूस कर रही हूँ।🌟
क्रमश:....