08/10/2025
Essence of Ishavasya Upanishad Day-3: Verse:2
Sloka :
kurvann eveha karmāṇi jijīviṣec chataṁ samāḥ
evaṁ tvayi nānyatheto ’sti na karma lipyate nare.
A person should wish to live a hundred years performing righteous actions;
By living thus, no sin or bo***ge touches one — action itself becomes pure.
Song:
Live by your work, with heart awake,
Let every act be for truth’s sake,
In deeds of light, the soul shall grow,
Free from chains this life shall flow.
श्लोक:
कुर्वन्नेविह कर्माणि जिजीविषेच्छतं समाः ।
एवं त्वयि नान्यथेतोऽस्ति न कर्म लिप्यते नरे ॥
मनुष्य को कर्म करते हुए सौ वर्षों तक जीने की इच्छा रखनी चाहिए;
ऐसे कर्मों से, जो धर्म और सत्य पर आधारित हों, वह कभी बंधन में नहीं बँधता।
गीत :
कर्म करो निष्काम भाव से,
सत्य रहे हर साँस में,
बंधन टूटे प्रेम प्रकाश से,
जीवन बने उपास में।