Mitahara

Mitahara मिताहार,
Eating In Moderation Simple Diet to Live Healthy
Mitahara is a concept in Ind

South Indian cuisine's focus on fermented foods, whole grains, and probiotics, along with spices like turmeric and cumin...
11/03/2025

South Indian cuisine's focus on fermented foods, whole grains, and probiotics, along with spices like turmeric and cumin, makes it a delicious and nutritious choice.
One of the standout features of South Indian cuisine is its reliance on fermented foods like Idli, Dosa, and Uttapam. These dishes are made from batters that have been fermented overnight, which introduces beneficial probiotics into the mix.
“Probiotics are crucial for maintaining a healthy gut microbiome, which plays a pivotal role in digestion, nutrient absorption, and overall well-being.”
The cuisine's balanced meals can significantly benefit overall health when consumed mindfully.
Carnatic Cafe

25/09/2022

अरबी के पत्ते के फायदे

1. दिल के स्वास्थ्य को बढ़ावा देता है
2. वजन घटाने में मददगार
3. आंखों के लिए फायदेमंद
4. हाई बीपी में फायदेमंद
5. फाइबर से है भरपूर
6. प्रेगनेंसी में फायदेमंद
7.स्किन और बालों के लिये फायदेमंद

अरबी के पत्ते की सब्‍जी बनाने के लिए सामग्री:
अरबी के पत्ते- 3-4
बेसन- 1 कप
प्याज- 2
अजवायन- ½ टेबल स्‍पून
राई- 2 टेबल स्‍पून
हींग- चुटकीभर
हरी मिर्च- 3-4
हल्दी- 1 टेबल स्‍पून
धनिया पाउडर- 2 टेबल स्‍पून
लाल मिर्च पाउडर- 1 टेबल स्‍पून
नींबू- स्वादानुसार
शुगर- स्वादानुसार
तेल- 2 टेबल स्‍पून
नमक- स्वादानुसार

  Yoga Classes   Yoga   Diet   place  #B 20/11 Ved Nagar In Front of Model school Indore Road Ujjain
15/05/2022

Yoga Classes Yoga Diet place #
B 20/11 Ved Nagar In Front of Model school Indore Road Ujjain

प्रतिष्ठित योग जरनल "Yoga and Total health"  में प्रकाशित आलेख
05/05/2022

प्रतिष्ठित योग जरनल "Yoga and Total health" में प्रकाशित आलेख

26/04/2022
शुभ नव वर्ष  ।  शुभ गुड़ी पड़वा ।नीम की पत्तियाँ खाकर करें नव वर्ष की शुरुआत ।नीम के औषधीय गणों से हम सभी परिचित हैं। चैत्...
01/04/2022

शुभ नव वर्ष । शुभ गुड़ी पड़वा ।

नीम की पत्तियाँ खाकर करें नव वर्ष की शुरुआत ।

नीम के औषधीय गणों से हम सभी परिचित हैं। चैत्र मास में खाली पेट नीम की पाँच पत्तियों का नियमित सेवन करने से साल भर रोगों से मुक्त रह सकतें हैं।आयुर्वेद के अनुसार नीम वात पित्त कफ तीनों दोषों को हरने वाला, हल्का, हितकारी एवं शीतल होता हैं। इसकी पत्तियों का रस निकाल कर, चटनी बनाकर एवं चूर्ण आदि रुपों में इसका सेवन किया जा सकता हैं। नीम एक ऐसा पेड़ है जिसके जड़, तने, पत्तियां और बीज औषधि का काम करते हैं। इससे त्वचा के रोग, बुखार, कृमि रोग, क्षय रोग, हृदय के रोग, मधुमेह, आँख कान गले एवं दाँत के रोग,संक्रमण, पाईल्स एवं पेट के रोगों का नाश होता हैं।इसके साथ कलिमिर्च एवं मिश्री का सेवन करने से इसके गणों में वृद्धि होती हैं। सर्वव्याधिनिवारक नीम का उपयोग करे एवं स्वास्थय को प्राप्त करें।
शुभ नवरात्रि

Happy and Healthy Rangpanchmi🙏स्वास्थ्य में चार चाँद लगाए  'ठंडाई'होली एवं रंग पंचमी पर जहाँ रंगों का महत्व हैं वहीं ठंड...
22/03/2022

Happy and Healthy Rangpanchmi🙏
स्वास्थ्य में चार चाँद लगाए 'ठंडाई'
होली एवं रंग पंचमी पर जहाँ रंगों का महत्व हैं वहीं ठंडाई पीने का भी महत्व हैं। ठंडाई में डाले गए मसालें जैसें बादाम, खस-खस, काली मिर्च, इलायची, गुलकंद, केसर, खरबुज ,कद्दू के बीज मिश्री और सौंफ आदि ना केवल स्वाद बढ़ातें हैं बल्कि हमारे स्वास्थ्य में भी चार चाँद लगा देतें हैं।
1 पाचन में सहायक - ठंडाई बनाने में गुलकंद और सौंफ का का उपयोग होता हैं।इन दोनों का मिश्रण पाचन क्रिया को बेहतर बनाने में सहायता करता हैं।
2 ऊर्जावान बनाएं- ठंडाई में तरबूज और कद्दू के बीज, बादाम और पिस्ता होने से यह हमारे शरीर को उर्जा प्रदान करती है और मजबूती प्रदान करती है।
3 प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाएँ - काली मिर्च और लौंग जैसे मसालों से मिलकर तैयार ठंडाई इम्यून सिस्टम के लिए काफी फायदेमंद होती है।
4 कब्ज से राहत - ठंडाई में खसखस होने से प्रोटीन, फाइबर, कैल्शियम, फैट और मिनरल्स भरपूर मात्रा में होते हैं. इससे पेट की जलन की समस्या दूर हो जाती है और कब्ज भी नहीं होती है।
5 पेट संबंधी समस्या - ठंडाई में मेथी और सौंफ भी मिलाया जाता है जिससे एसिडिटी, पेट में जलन, अपच जैसी समस्याएं भी नहीं होती हैं और पेट फूलने की समस्या भी दूर हो जाती है।
6 दिमाग में ठंडक- सूखे मेवे के कारण ठंडाई दिमाग को पोषण देने का काम करती है। यह दिमाग ठंडा रखकर तनाव व चिड़चिड़ेपन से भी बचाती हैं।ठंडाई में केसर एंटी-डिप्रेशन और एंटी-ऑक्सीडेंट के तौर पर काम करती है।
7 संक्रमण से बचाव- ठंडाई में मिश्री डाली जाती है जो न केवल पेय को मीठा बनाती है, बल्कि गर्मी के मौसम में खांसी, सर्दी और गले के संक्रमण से भी बचाती हैं।

Happy and Healthy Republic day
26/01/2022

Happy and Healthy Republic day

It is health that is real wealth!Shubh Deepawali🪔
04/11/2021

It is health that is real wealth!
Shubh Deepawali🪔

शुभ नवरात्रि 🙏खायें  ये आहार जीवन में लाएँ खुशियों की बहार अच्छे स्वास्थ्य के लिए खुश रहना बहुत जरूरी है । शरीर में बहुत...
07/10/2021

शुभ नवरात्रि 🙏
खायें ये आहार जीवन में लाएँ खुशियों की बहार

अच्छे स्वास्थ्य के लिए खुश रहना बहुत जरूरी है । शरीर में बहुत से हार्मोंस होते हैं जो अलग-अलग प्रतिक्रियाओं के लिए जिम्मेदार होते हैं। वैसे ही खुश रहने के लिए चार प्रकार के हार्मोंस सेरोटोनिन,डोपामाइन ,ऑक्सीटोसिनऔर एंडोर्फिन होते हैं। जिनके बढ़ने से हम खुशी महसूस करते हैं।
अपने आहार मे इन खाद्य पदार्थों को शामिल कर हैप्पी होर्मोनस को बढा सकतें हैं।

1.दूध, दही, पनीर से सेरोटोनिन डोपामाइन ऑक्सीटोसिन बढतें है।

2. खड़े अनाज, फलियां, दालें सेरोटोनिन, डोपामाइन बढतें है।

3. केला, सेवफल, तरबूज, संतरा, अनानास ,जामुन ,आलू बुखारा आदि को खाने से हैप्पीनेस हार्मोन एंडोर्फिन एवं सेरोटोनिन बनाता है।साथ ही इसमें सेलेनियम एंटीऑक्सीडेंट्स होते हैं जो मूड बेहतर करते हैं।

4. हरी पत्तेदार एवं रेशेदार सब्जियां टमाटर बैंगन आदि में सेरोटोनिन से भरपूर होते हैं।

5. सूखे मेवे जैसे अखरोट अंजीर बदाम एवं मूंगफली तिल्ली आदिऑक्सीटोसिन, सेरोटोनिन हार्मोन को बढ़ाते हैं।
अत: इन पदार्थों को अपने दैनिक आहार में शामिल कर अपने जीवन में खुशियाँ बढ़ाएँ ।

World Heart Day “Use Heart to Connect”यूँ रखें अपने दिल का  खयाल             दिल यानी हृदय हमारे शरीर का ऐसा महत्वपूर्ण ...
29/09/2021

World Heart Day
“Use Heart to Connect”

यूँ रखें अपने दिल का खयाल
दिल यानी हृदय हमारे शरीर का ऐसा महत्वपूर्ण अंग है, जो जीवन का पर्याय है। भारत में लगातार हृदय संबंधी समस्याएं बढ़ती जा रही है, जिसका मुख्य कारण अनियमित दिनचर्या एवं खानपान हैं। इस कारण मोटापा मधुमेह एवं किडनी से संबंधित बीमारियां भी बढ़ती जा रही है। हृदय रोग को नियंत्रण करने हेतु दिनचर्या में सुधार के साथ-साथ खानपान की आदतों में बदलाव बहुत महत्वपूर्ण है। तो आए जाने की ह्रदय संबंधी समस्याओं में खान-पान कैसा हो।
1 वसा नियंत्रण- ह्रदय के रोगों का कारण धमनियों में वसा यानी कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड का जमाव है। यह जमाव धीरे धीरे बढ़ता जाता है, और ह्रदय संबंधी बीमारियां भी बढ़ती जाती है। अतः सबसे पहले खानपान में वसा को कम करना बहुत आवश्यक है। ह्रदय के रोगियों को अपने दिन भर के खाने में से एनिमल फूड (नॉन वेज) एवं तेल को एकदम कम या बंद ही कर देना चाहिए। अगर दूध ले रहे हैं तो गाय के दूध उपयोग में लाएं या दूध का पूरा फैट निकालने के बाद उसका उपयोग करें।भोजन में तेल का इस्तेमाल कम करें। सब्जियों को बनाने में भी तेल उपयोग में ना करे।बिना तेल के बने खाद्य पदार्थों को भोजन में शामिल करें। साथ ही नट्स जैसे काजु,पिस्ता को भी अपने आहार का हिस्सा ना बनाएँ । जिससे हमारे शरीर में वसा का जमाव कम होगा और काफी हद तक हृदय के रोगों पर नियंत्रण कर पाएंगे।
2 नमक एवं शक्कर पर नियंत्रण- ह्रदय के रोगियों के लिए नमक एवं शक्कर बहुत नुकसानदायक हैं । दैनिक भोजन में से नमक और शक्कर को कम करने के लिये सबसे पहले प्रोसेस फूड और पैक्ड फूड को हटाना बहुत जरुरी हैं, क्योंकि प्रोसेस और पैक्ड फूड में प्रिजर्वेटिव के रूप में बहुत अधिक नमक और शक्कर का इस्तेमाल होता है दूसरा दिन भर के खाने में से स्नेक्स जैसे चिप्स नमकीन दाने नमकीन चने और दूसरी तरह के जितने भी हम नमकीन खाद्य पदार्थों खाते हैं उनका उपयोग बंद कर देना चाहिए। भोजन के बाद मिठाइयों का उपयोग स्वीट डिश के रूप में करते हैं उसे भी कम कर देना चाहिए एवं किसी भी खाद्य पदार्थ में ऊपर से शक्कर एवं नमक का उपयोग भी ना करें। जिससे हृदय रोग के साथ साथ काफी हद तक मोटापे और मधुमेह से भी बच सकते हैं।
3 अनाज - मोटापा हृदय रोग का एक मुख्य कारण है। इसे कम करने के लिए हमें अनाज को भी सीमित मात्रा में उपयोग में लाना चाहिए।खास करके रिफाइंड फ्लोर की जगह अगर हम दो तीन मोटे अनाजों जैसे गेहूं चना सोयाबीन आदि को मिलाकर उसकी रोटियां खाए ।साबुत अनाज जिसमें फाइबर की मात्रा ज्यादा है उनका उपयोग करें। साथ ही अंकुरित अनाज या अंकुरित के साथ बहुत सारी मात्रा में सब्जियां डालकर एवं आटे की ब्रेड के वेजिटेबल सैंडविच बनाकर उनका उपयोग कर सकते हैं। इसी तरह से अनाज के साथ अगर हम सब्जियों का उपयोग ज्यादा करें तो यह हृदय रोगियों के लिए बहुत फायदेमंद है।
4 दालें- हृदय के रोग में दालें बहुत फायदेमंद रहती हैं रोज के खाने में सुबह-शाम कम से कम एक कटोरी दाल जरूर शामिल करें । छिलके वाली दाल जिसमें प्रोटीन के साथ-साथ फाइबर्स भी अधिक मात्रा में रहता है जिसका उपयोग ज्यादा मात्रा में करें ।साथ ही दालों से कई प्रकार के व्यंजन बनते हैं जो अधिकतर खमीर युक्त होते हैं यह भी ह्रदय के रोगियों के लिए बहुत फायदेमंद हैं ।अतः दालों को अपने दैनिक आहार का हिस्सा जरूर बनाएं।
5. फल एवं सब्जियां- हृदय के रोगियों को आहार में सबसे ज्यादा मात्रा में फल और सब्जियों को उपयोग में लाना चाहिए। सब्जियों में भरपूर मात्रा में फाइबर खनिज लवण एवं विटामिंस तो होते ही हैं साथ ही एक बहुत महत्वपूर्ण तत्व होता है एंटीऑक्सीडेंट , यह बेड कोलेस्ट्रोल यानी एलडीएल के ऑक्सीडेशन को कम कर वसा के जमाव को नियंत्रित रखता है। अतः किसी भी रूप में चाहे वह सुबह का नाश्ता हो, दोपहर का भोजन हो,शाम का स्नैक्स हो या रात का खाना हो। हमें फल और सब्जियों को भरपूर स्थान देना चाहिए जिससे हम काफी हद तक ह्रदय के रोक पर नियंत्रण कर सकतें हैं।
अत: हृदय रोगों में भोजन में वसा ,नमक, शक्कर, रिफाइंड तेल एवं रिफाइंड आटे को कम करके मोटा अनाज ,अंकुरित अनाज, खमीर युक्त खाद्य पदार्थ ,दालें एवं सबसे ज्यादा मात्रा में सब्जियों और फलों को शामिल करें। इसके साथ ही नियमित दिनचर्या जिसमें योगासन, प्राणायाम, ध्यान, सुबह एवं शाम खुली हवा में घूमना, खुश रहना एवं रचनात्मक कार्यों को स्थान देना बहुत आवश्यक है।

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