29/09/2021
World Heart Day
“Use Heart to Connect”
यूँ रखें अपने दिल का खयाल
दिल यानी हृदय हमारे शरीर का ऐसा महत्वपूर्ण अंग है, जो जीवन का पर्याय है। भारत में लगातार हृदय संबंधी समस्याएं बढ़ती जा रही है, जिसका मुख्य कारण अनियमित दिनचर्या एवं खानपान हैं। इस कारण मोटापा मधुमेह एवं किडनी से संबंधित बीमारियां भी बढ़ती जा रही है। हृदय रोग को नियंत्रण करने हेतु दिनचर्या में सुधार के साथ-साथ खानपान की आदतों में बदलाव बहुत महत्वपूर्ण है। तो आए जाने की ह्रदय संबंधी समस्याओं में खान-पान कैसा हो।
1 वसा नियंत्रण- ह्रदय के रोगों का कारण धमनियों में वसा यानी कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड का जमाव है। यह जमाव धीरे धीरे बढ़ता जाता है, और ह्रदय संबंधी बीमारियां भी बढ़ती जाती है। अतः सबसे पहले खानपान में वसा को कम करना बहुत आवश्यक है। ह्रदय के रोगियों को अपने दिन भर के खाने में से एनिमल फूड (नॉन वेज) एवं तेल को एकदम कम या बंद ही कर देना चाहिए। अगर दूध ले रहे हैं तो गाय के दूध उपयोग में लाएं या दूध का पूरा फैट निकालने के बाद उसका उपयोग करें।भोजन में तेल का इस्तेमाल कम करें। सब्जियों को बनाने में भी तेल उपयोग में ना करे।बिना तेल के बने खाद्य पदार्थों को भोजन में शामिल करें। साथ ही नट्स जैसे काजु,पिस्ता को भी अपने आहार का हिस्सा ना बनाएँ । जिससे हमारे शरीर में वसा का जमाव कम होगा और काफी हद तक हृदय के रोगों पर नियंत्रण कर पाएंगे।
2 नमक एवं शक्कर पर नियंत्रण- ह्रदय के रोगियों के लिए नमक एवं शक्कर बहुत नुकसानदायक हैं । दैनिक भोजन में से नमक और शक्कर को कम करने के लिये सबसे पहले प्रोसेस फूड और पैक्ड फूड को हटाना बहुत जरुरी हैं, क्योंकि प्रोसेस और पैक्ड फूड में प्रिजर्वेटिव के रूप में बहुत अधिक नमक और शक्कर का इस्तेमाल होता है दूसरा दिन भर के खाने में से स्नेक्स जैसे चिप्स नमकीन दाने नमकीन चने और दूसरी तरह के जितने भी हम नमकीन खाद्य पदार्थों खाते हैं उनका उपयोग बंद कर देना चाहिए। भोजन के बाद मिठाइयों का उपयोग स्वीट डिश के रूप में करते हैं उसे भी कम कर देना चाहिए एवं किसी भी खाद्य पदार्थ में ऊपर से शक्कर एवं नमक का उपयोग भी ना करें। जिससे हृदय रोग के साथ साथ काफी हद तक मोटापे और मधुमेह से भी बच सकते हैं।
3 अनाज - मोटापा हृदय रोग का एक मुख्य कारण है। इसे कम करने के लिए हमें अनाज को भी सीमित मात्रा में उपयोग में लाना चाहिए।खास करके रिफाइंड फ्लोर की जगह अगर हम दो तीन मोटे अनाजों जैसे गेहूं चना सोयाबीन आदि को मिलाकर उसकी रोटियां खाए ।साबुत अनाज जिसमें फाइबर की मात्रा ज्यादा है उनका उपयोग करें। साथ ही अंकुरित अनाज या अंकुरित के साथ बहुत सारी मात्रा में सब्जियां डालकर एवं आटे की ब्रेड के वेजिटेबल सैंडविच बनाकर उनका उपयोग कर सकते हैं। इसी तरह से अनाज के साथ अगर हम सब्जियों का उपयोग ज्यादा करें तो यह हृदय रोगियों के लिए बहुत फायदेमंद है।
4 दालें- हृदय के रोग में दालें बहुत फायदेमंद रहती हैं रोज के खाने में सुबह-शाम कम से कम एक कटोरी दाल जरूर शामिल करें । छिलके वाली दाल जिसमें प्रोटीन के साथ-साथ फाइबर्स भी अधिक मात्रा में रहता है जिसका उपयोग ज्यादा मात्रा में करें ।साथ ही दालों से कई प्रकार के व्यंजन बनते हैं जो अधिकतर खमीर युक्त होते हैं यह भी ह्रदय के रोगियों के लिए बहुत फायदेमंद हैं ।अतः दालों को अपने दैनिक आहार का हिस्सा जरूर बनाएं।
5. फल एवं सब्जियां- हृदय के रोगियों को आहार में सबसे ज्यादा मात्रा में फल और सब्जियों को उपयोग में लाना चाहिए। सब्जियों में भरपूर मात्रा में फाइबर खनिज लवण एवं विटामिंस तो होते ही हैं साथ ही एक बहुत महत्वपूर्ण तत्व होता है एंटीऑक्सीडेंट , यह बेड कोलेस्ट्रोल यानी एलडीएल के ऑक्सीडेशन को कम कर वसा के जमाव को नियंत्रित रखता है। अतः किसी भी रूप में चाहे वह सुबह का नाश्ता हो, दोपहर का भोजन हो,शाम का स्नैक्स हो या रात का खाना हो। हमें फल और सब्जियों को भरपूर स्थान देना चाहिए जिससे हम काफी हद तक ह्रदय के रोक पर नियंत्रण कर सकतें हैं।
अत: हृदय रोगों में भोजन में वसा ,नमक, शक्कर, रिफाइंड तेल एवं रिफाइंड आटे को कम करके मोटा अनाज ,अंकुरित अनाज, खमीर युक्त खाद्य पदार्थ ,दालें एवं सबसे ज्यादा मात्रा में सब्जियों और फलों को शामिल करें। इसके साथ ही नियमित दिनचर्या जिसमें योगासन, प्राणायाम, ध्यान, सुबह एवं शाम खुली हवा में घूमना, खुश रहना एवं रचनात्मक कार्यों को स्थान देना बहुत आवश्यक है।