26/11/2025
🌺 अयोध्या का प्राचीन राजचिह्न – कोविदार वृक्ष फिर लौटा अपने गौरव के साथ 🌺
✍️ Kulvriksh | हमारी विरासत, हमारा गौरव
त्रेतायुग की अयोध्या में एक पवित्र प्रतीक था — कोविदार वृक्ष। यह किसी साधारण वृक्ष का रूप नहीं था, बल्कि राम राज्य की राजसत्ता, शौर्य, मर्यादा और धर्म का कालातीत प्रतीक माना जाता था। आज, सहस्राब्दियों के बाद कलियुग में एक बार फिर यही वृक्ष अयोध्या के नव-निर्मित श्रीराम मंदिर के मुख्य शिखर पर सुशोभित है, मानो रामराज्य के आदर्शों को पुनः प्रकट कर रहा हो।
🏹 धर्म ध्वजा का आरोहण — पूर्णता का प्रतीक
अयोध्या में आज राम मंदिर के शिखर पर धर्म ध्वजा फहरा रही है, जिसके साथ भव्य निर्माण की पूर्णता की औपचारिक घोषणा भी हो गई। इस ध्वजा के दो दिव्य प्रतीक हैं:
🌞 सूर्य — भगवान राम के सूर्यवंशी कुल का चिन्ह
🌳 कोविदार वृक्ष — अयोध्या की प्राचीन पवित्रता और सांस्कृतिक पहचान का प्रतिनिधि
🌿 कोविदार वृक्ष — दिव्यता, औषधीय गुण और इतिहास का संगम
कहते हैं कि ऋषि कश्यप ने मंदार और पारिजात के संकरण से इस दिव्य वृक्ष की उत्पत्ति की।
आयुर्वेद में इसका विशेष स्थान है — इसके फूल, पत्तियां और छाल कई रोगों की औषधि मानी जाती हैं।
यह वृक्ष देवताओं का प्रिय माना गया है, और इसके आसपास सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है।
👑 अयोध्या का प्राचीन राजचिह्न — पुनः स्थापित
त्रेतायुग में कोविदार वृक्ष केवल प्रकृति का अंश नहीं था —
यह अयोध्या की राजसत्ता और रामराज्य के आदर्शों का राजचिह्न था।
और आज, उसी कोविदार वृक्ष का प्रतीक राम मंदिर के मुख्य शिखर पर चमक रहा है —
मानो यह हमें याद दिला रहा हो कि:
👉 धर्म, न्याय, करुणा और सच्ची मर्यादा ही रामराज्य के स्तंभ हैं।
👉 और वही संकल्प आज फिर से जागृत किए जा रहे हैं।
🙏 Kulvriksh की ओर से
विरासत केवल इतिहास नहीं…
यह वो रूहानी धागा है जो हमें अपने पूर्वजों, अपनी संस्कृति और अपने धर्म से जोड़ता है।
अयोध्या का यह पुनःस्थापित राजचिह्न आने वाली पीढ़ियों को रामराज्य के मूल्यों की याद दिलाता रहेगा।
🌳 जानिए अपने वंश, अपनी परंपरा और अपनी विरासत — Kulvriksh के साथ।