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उत्तर दिशा  सिद्धि-समृद्धि का चमत्कारी क्षेत्र है, जहाँ शिवजी की सम्पूर्ण सत्ता और ससुराल है। उत्तर जितना बढ़ेंगे ऊंचाई ...
31/01/2026

उत्तर दिशा सिद्धि-समृद्धि का चमत्कारी क्षेत्र है, जहाँ शिवजी की सम्पूर्ण सत्ता और ससुराल है। उत्तर जितना बढ़ेंगे ऊंचाई मिलेगी पर्वत मिलेगा, रहस्य - आकर्षण ( मैगनेटिक प्रभाव) और अद्भुत की प्राप्ति होगी

15 फरवरी 2026 को महाशिवरात्रि है।

उत्तरं जलस्रवो नित्यं, तत्र तिष्ठन्ति देवताः।

शिव आगम, कर्णा अध्याय के अनुसार जहाँ जल उत्तर दिशा से बहता है, वहाँ देवता निवास करते हैं।

इसलिए शिवलिंग से निकलने वाला जल उत्तर की ओर जाए तो वह शुद्धि, समृद्धि और मोक्षमार्ग का प्रतीक होता है।

उत्तरं यत्र वहति हरिजलं शंभुभक्तेः प्रसादम्।

तत्रैव तिष्ठति हरिः स्वयं भक्तवशो नित्यम्॥

अर्थात-जहाँ शिवलिंग से अभिषेक का जल उत्तर दिशा में प्रवाहित होता है, वहाँ स्वयं हरि (विष्णु) और शिव दोनों का आशीर्वाद स्थायी होता है।

वास्तुशास्त्र के अनुसार उत्तर दिशा में चुंबकीय ध्रुव का प्रभाव सबसे शुद्ध माना जाता है। जल यदि इस दिशा में बहता है तो वह विद्युतचुंबकीय तरंगों को संतुलित कर ऊर्जा प्रवाह को स्थिर करता है।

इसलिए प्राचीन मंदिरों में जलहरि का मुख उत्तर की ओर रखने से पूरे गर्भगृह में positive ionic flow बनता है!

उत्तर दिशा क्यों शुभ मानी गई है?

उत्तर दिशा का अधिपति कुबेर हैं-धन, स्थिरता और ज्ञान के देवता।

यह दिशा सूर्य के उत्तरायण का संकेत है अर्थात ऊर्ध्वगति, उन्नति और प्रकाश का मार्ग।

इसलिए जलहरि का मुख उत्तर की ओर रखने का अर्थ है जीवन का प्रवाह अब नीचे नहीं, ऊपर की ओर उत्तरायण दिशा में हो।

यह प्रतीकात्मक रूप से संसारिक भाव से आत्मिक भाव की यात्रा है।

शिवलिंग की जलहरि का अर्थ और रहस्य

जलहरि वह भाग होता है जहाँ शिवलिंग से अभिषेक का जल एकत्र होता है और बाहर निकलता है। यह नालीनुमा भाग सदैव उत्तर दिशा में बनाया जाता है क्योंकि जल उत्तर दिशा की ओर प्रवाहित होकर देवताओं के मार्ग (देवयान) में जाता है। आगम शास्त्र कहता है

उत्तर का उत्तर- रहस्यमय उत्तर

उत्तर का उत्तर क्या है? यह अत्यंत दार्शनिक प्रश्न है। उत्तर का अर्थ केवल दिशा नहीं, प्रत्युत्तर भी है।

जब हम किसी प्रश्न का “उत्तर” देते हैं, तब भी हम ज्ञान के उत्तर दिशा की ओर बढ़ते हैं। तो उत्तर का उत्तर वह स्थिति है! जहाँ प्रश्न ही समाप्त हो जाता है। वह है-शिव जो हर प्रश्न, हर दिशा, हर उत्तर से परे है।

उत्तर दिशा में जलहरि का रहस्य यह है कि यह जीवन की चेतना को दक्षिण (मृत्यु) से उत्तर (मोक्ष) की ओर मोड़ने की यंत्र-संरचना है। और उत्तर का उत्तर है!

शिव का मौन -जहाँ कोई प्रश्न, कोई दिशा, कोई जल भी नहीं, केवल अस्तित्व की एकता है।
मस्तिष्क स्वरूप किंग- शिवलिंग

शिवलिंग का वह भाग, जिससे अभिषेक का जल उत्तर दिशा में प्रवाहित होता है, उसे जलहरि” कहा जाता है।

शिवलिंग केवल पत्थर का टुकड़ा नहीं, बल्कि जीवन ऊर्जा की दिशा निर्धारित करने वाला वैदिक यंत्र है।

शिवलिंग पर जब जल, दूध या पंचामृत चढ़ाया जाता है, तो उसका प्रवाह हमारी चेतना के प्रवाह का प्रतीक होता है। वास्तु, आगम और तंत्र सभी कहते हैं जलहरि सदा उत्तर दिशा की ओर ही रखी जानी चाहिए।

उत्तर दिशा का अधिपति कुबेर है! धन, स्थिरता और सिद्धि के देवता। यही दिशा ज्ञान, समृद्धि और मोक्ष की ओर जाने का मार्ग भी मानी गई है।

उत्तर दिशा = देवयान मार्ग यह दिशा सूर्य के उत्तरायण की है अर्थात् प्रकाश, ज्ञान और उन्नति की ओर अग्रसर होना।

जब शिवलिंग से जल उत्तर की ओर बहता है, तो वह बताता है कि अब जीवन का प्रवाह मृत्यु (दक्षिण) से हटकर अमरत्व (उत्तर) की ओर है। जो साधक की ध्यानावस्था को गहराई देता है।

इसलिए शिव अभिषेक का महत्व बढ़ जाता है शिव की सबसे छोटी आराधना रूद्राभिषेक है भिन्न-भिन्न कामनाओं के लिए भिन्न भिन्न पदार्थों से अभिषेक किया जाता है।
सावधान मुद्रा में खड़े होइये या बैठ कर विवेक से देखिए आपका स्वयं के शरीर में गर्दन तक शिवलिंग और गर्दन के नीचे अरघे का रुप ले लेगा। परछाई को ध्यान देकर देखें ऐसा ही प्रतीत होगा।

बहुत से लोग इस पर तर्क कुतर्क भी कर सकते हैं पर इस पेज पर हमने पहले ही बताया है कैसे हमारे शरीर में ब्रह्मांड समाहित है।

महाशिवरात्रि आध्यात्मिक उन्नति से जुड़ी है। यह रात्रि साधना, ध्यान और कुंडलिनी जागरण के लिए सर्वश्रेष्ठ मानी जाती है।
इसका importance इसलिए भी अधिक है क्योंकि यह शिव-तत्व को जीवन में धारण करने का अवसर देती है—जहाँ शिव का अर्थ है “कल्याण”।

हर चंद्र मास का चौदहवाँ दिन अथवा अमावस्या से पूर्व का एक दिन शिवरात्रि के नाम से जाना जाता है। एक कैलेंडर वर्श में आने वाली सभी शिवरात्रियों में से,

महाशिवरात्रि, को सर्वाधिक महत्वपूर्ण माना जाता है, जो फरवरी-मार्च माह में आती है। इस रात, ग्रह का उत्तरी गोलार्द्ध इस प्रकार अवस्थित होता है कि मनुष्य भीतर ऊर्जा का प्राकृतिक रूप से ऊपर की और जाती है।

यह एक ऐसा दिन है, जब प्रकृति मनुष्य को उसके आध्यात्मिक शिखर तक जाने में मदद करती है। इस समय का उपयोग करने के लिए, इस परंपरा में, हम एक उत्सव मनाते हैं, जो पूरी रात चलता है।

हिन्दू पौराणिक ग्रंथों के अनुसार शिव एक शक्ति है, एक रहस्यमय ऊर्जा, जिससे संपूर्ण जगत चलायमान है।

हालांकि वैज्ञानिक भी अभी तक इसे कोई नाम नहीं दे पाए हैं। लेकिन यदि प्राचीन काल के संत मुनि-ऋषियों की मानें तो उन्होंने इस अज्ञात शक्ति को शिव कहा है।

और वैज्ञानिक दृष्टि से देखा महाशिवरात्रि की रात्रि बहुत खास होती है

इस रात्रि ग्रह का उत्तरी गोलार्द्ध इस प्रकार विद्यमान होता है कि हर मनुष्य के अंदर की ऊर्जा, प्राकृतिक रूप से ऊपर की ओर जाने लगती है।

अर्थात् कहने का तात्पर्य यह हैं कि प्रकृति स्वयं ही मनुष्य को आध्यात्मिक शिखर तक जाने में मदद कर रही होती है।

अत: महाशिवरात्रि के दिन भगवान शिव का पूजन-आराधना करने के लिए व्यक्ति को एकदम सीधे बैठना पड़ता है, जिससे रीड की हड्डी मजबूत होती है तथा वह व्यक्ति जो सोचता हैं वो पा सकता है, यानी इस समयावधि में आप सुपर नेचर पावर का अहसास महसूस करते हैं।

बहुत कम लोग जानते हैं कि Maha Shivratri scientific benefits आधुनिक विज्ञान से भी जुड़े हैं।

इस दिन पृथ्वी की ऊर्जा उत्तर दिशा में प्रवाहित होती है

रात्रि जागरण से पीनियल ग्लैंड सक्रिय होती है

उपवास से शरीर का डिटॉक्स होता है
यही कारण है कि Maha Shivratri scientific benefits मानसिक शांति, हार्मोन संतुलन और एकाग्रता बढ़ाने में सहायक माने जाते हैं।
वास्तव में
Maha Shivratri scientific benefits योग और ध्यान के लिए आदर्श स्थिति बनाते हैं।

ध्यान, उपवास और जागरण तीनों मिलकर Maha Shivratri scientific benefits को पूर्ण करते हैं।

यह पर्व नींद के चक्र, हार्मोन संतुलन और मानसिक स्थिरता में सहायक होता है।

इसीलिए योगियों के लिए यह रात अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है।

महाशिवरात्रि पर चंद्रमा और पृथ्वी की स्थिति मानव शरीर की जैविक घड़ी को संतुलित करने में मदद करती है।

इस दिन व्रत रखने से शरीर का पाचन तंत्र सुधारता है, विषैले तत्व बाहर निकलते हैं और मेटाबॉलिज्म सही रहता है।

इससे शरीर डिटॉक्स (detox) होता है और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। इसलिए उपवास (फलों और जल का सेवन) करने से शरीर की ऊर्जा शुद्ध होती है और मन शांत रहता है।

वैज्ञानिक शोध बताते हैं कि महाशिवरात्रि की रात को जागने से शरीर में मेलाटोनिन (Melatonin) हार्मोन का स्तर बढ़ता है, जो तनाव कम करता है, मानसिक शांति और ध्यान केंद्रित करने की शक्ति बढ़ाता है, गहरी आध्यात्मिक अनुभूति उत्पन्न करता है।

इसीलिए, महाशिवरात्रि पर रातभर भजन, ध्यान और सत्संग करने का महत्व बताया गया है।

स्कन्द पुराण कहता है महाशिवरात्रि को अर्धरात्रि में शिव के 1008 नामों से 1008 बेर चढ़ाया जाए तो गरीबी दूर हो जाती है।

अभिषेक मनोकामना पूर्ण करने वाली होती है।

।। हर हर महादेव 🙏🙏।। श्री परमात्मने नमः 🙏🙏।।
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1.भारत में शुद्धता और समानता की राजनीति हो तो 75 से 85% राजनीति खत्म हो जायेंगी 2.यहां सुविधाजनक और सत्ता की राजनीति है ...
28/01/2026

1.भारत में शुद्धता और समानता की राजनीति हो तो 75 से 85% राजनीति खत्म हो जायेंगी

2.यहां सुविधाजनक और सत्ता की राजनीति है देशहित जनता और समाज की नहीं।

3. शैक्षिक स्तर विश्व रैंकिंग (शिक्षा प्रणाली) में भारत 75 स्तर पर पहुंच गया है यानी विदेश में नौकरी आपको 75 लोग के बाद ही मिलगी

4. शिक्षा की गुणवत्ता (WEF): वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF) की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत की शिक्षा की गुणवत्ता विश्व में 90वें स्थान पर है

5.जबकी उच्च शिक्षा के क्षेत्र में, भारत अमेरिका और चीन के बाद दुनिया में तीसरा सबसे बड़ा देश है।

6.QS विश्व विश्वविद्यालय रैंकिंग 2026 में 54 भारतीय संस्थान शामिल हैं, जिसमें आईआईटी दिल्ली 123वें स्थान पर है।

7.अलग-अलग रिपोर्ट (जैसे वर्ल्ड बैंक, यूनेस्को, क्यूएस) का मूल्यांकन मानदंड अलग होने के कारण भारत का रैंक 40 से 100+ के बीच भिन्न हो सकता है।

8.भारत में आंकड़े भी जो प्रस्तुत किए जाते हैं महत्वाकांक्षा सिद्ध करने के हिसाब दिये जातें हैं कुछ समय पहले ही वैश्विक वित्तीय संस्थानों ने वित्तीय आंकड़े का बेस 2012 को रखने के कारण स्तर गिरा दिया बहुत लोग तो जानते भी नहीं होगें।

9. अभि UGC ने आंकड़ा दिया 118% भेदभाव की घटनाएं बढ़ गई गणित पढ़ें होंगें परसेंट निकालने आता है तो ध्यान दिजिए

भारत में सरकारी- प्राइवेट कालेज और यूनिवर्सिटी की बात करे तो लगभग 30 हजार की संख्या में हैं उसमें 3 करोड़ के करीब OBC/ST/SC छात्र पढ़ते हैं जिससे 378 भेदभाव की घटनाएं होती हैं

कितना %परसेंट हुआ थोड़ा कैलकुलेट कर लिजिए।

10. सरकार राजनीतिक पार्टियां सुप्रीम कोर्ट का हवाला देती है।

ये हवाला उस समय क्यों नहीं दिया गया - जब सुप्रीम ने कहा न्याय और अपना पक्ष रखना सबका सबका मौलिक अधिकार है बिना जांच - सबूत और दोषारोपण से किसी को जेल नहीं भेज सकते पहले जांच फिर जेल।

सरकार को अपना हित साधना था - तुरन्त सुप्रीम कोर्ट के आदेश को बदलने के लिए संसद में अध्यादेश लायी सुप्रीम कोर्ट का आदेश बदला SC/ST ACT बनाया पहले जेल फिर जांच बिना सबूत के

परिणाम सामने है 90% केश फर्जी निकल रहे हैं पर जिसपे लगा उसका घर परिवार जीवन तो बर्बाद हुआ न।

11. संविधान की दुहाई पर स्वार्थ और राजनीति में परिभाषा बदल जाती है। संविधान बदल जाता है भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14 से 18 तक वर्णित 'समानता का अधिकार' एक मौलिक अधिकार है, जो कानून के समक्ष समानता, भेदभाव निषेध, अवसरों की समानता, अस्पृश्यता के अंत (Article 17) और उपाधियों के उन्मूलन (Article 18) के माध्यम से समाज में न्याय और समानता सुनिश्चित करता है। यह अधिकार नागरिकों और विदेशियों दोनों को कानून के तहत निष्पक्ष व्यवहार की गारंटी देता है।

12.मैं समानता भरपूर समर्थन करता हूं दलित हों या ब्राह्मण या कोई भी जाती हों सब समान है किसी के साथ अत्याचार नहीं होना चाहिए।

भारतीय समाज विभिन्न वर्गों- सभ्यताओं - समाजों और जातियों का ताना-बाना है और सभी को एक जैसा न्याय व्यवहार और अवसर प्रदान करना सरकार और संविधान की जिम्मेदारी है।

13. भेदभाव हर जगह व्याप्त है अपनों में बड़े छोटे में अमीर गरीब में सब जगह तो पाया जाता अलग-अलग व्यवहार और न्याय व्यवस्था भी देखने को मिलती है किसी को दिखाई नहीं पड़ता।

14. 75 सालों से देश संविधान और न्याय व्यवस्था से चल रहा है जितना भेदभाव राजनीतिक रूप से दिखाया जाता है शायद वास्तविक जीवन में देखने को नहीं मिलता

15. हमारे छात्र जीवन में सिर्फ एक जाति वर्ग विशेष के ही मित्र नहीं होते भिन्न-भिन्न होते हैं सिर्फ प्रेम ही नहीं टकराव गुटबाजी कहासुनी अनाप-शनाप शब्दों का प्रयोग भी होता है कई लोग कान भरने का भी कार्य करते हैं। समाजिक जीवन में राजनीतिक अवधारणा के कारण वही से गालियां भी मिलती है।

16. UGC के बिल का मैं भरपूर समर्थन करूंगा पर वह बिल संविधान अनुसार हो 2012 के तरह Right to justice दिया जाये सभी वर्गों को शामिल किया जाए।

सच पाये जाने पर कठोर दंड और झूठे आरोप पर भी कठोर दंड प्रावधान होना चाहिए।

भारत में न्याय और सबके लिए अलग-अलग इतने सारे कानून प्रावधान होने के बावजूद भेदभाव -गतिरोध - न्याय और सोशल अनरेस्ट है तो यहां कानून बनाने की जरूरत नहीं विचार करने की जरूरत है।

सरकार का फेल्योर है न्याय व्यवस्था कानून व्यवस्था का फेल्योर है।

17. भारत का आम आदमी और सामान्य आदमी पुलिस और कोर्ट का मुंह नहीं देखना चाहता सब जानते हैं घूस पैसा और खेत खलिहान बिक जाने का अड्डा है।

न्याय कैसा मिलेगा मिलेगा या नहीं मिलेगा कब मिलेगा इसका कोई भरोसा नहीं मिल भी गया तो उपयोग कर पायेगें के नहीं इसका भी भरोसा नहीं यहा तो बस पैसा और पहुंच होनी चाहिए सब आपका है।

18. ऐसे जगह पर एक वर्ग कैटगरी को बाहर रखकर समरसता लाने के लिए ऐसा घटीया कानून जनता और छात्रों के हित में नहीं नेताओं के हित में है ।

19. इस बिल से हर एक परिवार को फर्क पड़ेगा जिस परिवार के बेटा-बेटी कालेज में पढ़ रहे हैं या आगे जायेगें क्योंकि अभी तो विवाद कुछ यूनिवर्सिटी और कालेजों तक सिमित था छोटे छोटे स्तर तक सिमित था अब आर पार की लड़ाई बन जायेगा क्योंकि कैरियर और ज़िन्दगी दांव पर लगेगी।

20. सबका साथ सबका विकास, एक रहेंगे तो सेफ रहेंगे तो सेफ रहेंगे कहने वाली पार्टी ऐसे बिल ला सकती है जो जातिगत है तो सोचिए जो पार्टियां अलग-अलग राज्यों में जातियों पर ही आधारित है वो क्या करेगीं।

21. डॉ भीमराव अम्बेडकर को महान थे उन्होंने उठने समानता के लिए शिक्षा और ज्ञान को चुना शिक्षा पर जोर दिया आरक्षण को भी एक समय सिमा तक देने की बात लिखी अपने समाज को बढ़ाने के हर साकारात्मक कदम उठाए।

पर आज अम्बेडकर के नाम पर सिर्फ राजनीति होती है उनके विचारों का समर्थन नहीं किया जाता बल्कि उनका फोटो बैनर लगाके वोट मांगा जाता है।

भारत को शिक्षा रोजगार उन्नति समाज के उत्थान को भूलकर सिर्फ भीड़ तंत्र तैयार किया जाता है ताकि ज्यादा वोट हासिल हो सके सालों साल कुर्सी पर बने रहे।

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25/01/2026

सबको सच बात चाहिए
पर सच पच नहीं पाता
प्रकृति किये कर्मो का हिसाब 30 साल बाद लेती है

UGC ACT पहले से ही है पर अन्तर क्या है 2012 तक 1.यह कानून सभी के लिए समान था आप पीड़ित हैं शिकायत करिये सही साबित हुई तो...
25/01/2026

UGC ACT पहले से ही है पर अन्तर क्या है 2012 तक
1.यह कानून सभी के लिए समान था आप पीड़ित हैं शिकायत करिये सही साबित हुई तो दोषी के खिलाफ कार्रवाई होगी

2. पर अगर आपने झूठा आरोप लगाया है और जांच में पाया जाता है तो लगाने के वाले के खिलाफ भी कार्रवाई होगी।

नया क्या है
3. झूठे आरोप पर कार्रवाई वाला क्लाज हटा देना

4.इक्विटी के नाम पर गुटबाजी पर जोर

5.समय सिमा तय करना और मैनेजमेंट पर कार्रवाई फर्जीवाड़ा को बढ़ावा देगा पैसे ऐंठने का हथियार बनेगा

6. मेधावी छात्रों के दिक्कत का कारण बनेगा

7. आदेश ऊपर से आयेगा मतलब कालेज की स्वतंत्रता खत्म अब राजनीति प्रेरित होगा

भारत में न्याय की हालत सबको पता है और यहां तो सबूत भी नहीं होगा सिर्फ बातें होंगी

कालेज में हसि- मजाक ,कहां- सुनी तो होती ही रहती है गुटबाजी भी चलती है पर झूठ वाला क्लाज हटा देना माहौल खराब कर देगा।

राजनितिक हित साधने के चक्कर शिक्षा के जगह को गुटबाजी का मैदान बना देगा

25-30 साल पहले हम कम पढ़े लिखे थे किसी का नाम लेकर बुलाने पर डांट पड़ती थी। चाचा,काका, ताऊ, दादा, भईया - दीदी कहकर बुलाया जाता है। इक्का - दुक्का लोगों के यहां ही लैट्रीन हुआ करता था बाकी पूरे गांव का सहारा लोटा ही था।

बहुत साल तो पता ही नहीं चला हमारे सिरवाह झांगुर -झांगुर कहकर परिवार हर समय छोटे बड़े कामों की जिम्मेदारी सौंपता है जिसे हम झांगुर चाचा कहते हैं जो घर के सदस्यों के तरह गलती होने पर थप्पड़ दे देते थे 6 अंगुली होने के कारण उनको झांगुर बुलाया जाता है नाम कुछ और है जाति से...... जाति नहीं लिखूंगा नये दलित को बुरा लग जायेगा।

झांगुर आज भी है 75 साल के है नाति पोते है पर स्थितियां नहीं बदली

नूर मियां, महमूद, जफरूल्ला, अनवर, सोस और ऐसे बहुत से नाम है जो आज भी है। बचपन से जवानी तक छोटे बड़े काम काज से जुड़े रहे नहीं लगा इतनी वैमनस्यता है।
आज सबका अपना अपना बिजनेस है काम पड़ जाये तो आज भी पैसे नहीं लेते।
पर कुछ वर्षों से जो दादा परदादा के जमाने में नहीं हुआ वो आजादी और संविधान के 75- 78 बाद होने लगा है।

जिनको गांव की चौहद्दी नहीं मालूम वह देश दुनिया की बातें करते हैं

हम शिक्षित तो हो गये पर संस्कार.... चाचा ताऊ दादा तो छोड़िए आज तो टाईटिल ( शर्मा जी, वर्मा जी, मौर्या जी) लेकर ही बुलाया जाता है। बच्चे को तो पहले ही जातियां बतायी जा रही है।

हमारे दो मित्र हैं पोस्ट ग्रेजुएशन तक साथ पढ़े दादा से लेकर पिता तक रेलवे में नौकरी किये आना जाना खाना पीना सब साथ रहा पर भईया जैसे इन दोनों ने राजनीति में आए सुर बदल गए फेसबुक दिन भर गाली देना और मिलने पर भाई करना पड़ता है।

यही राजनीति है चुनाव है

सबका साथ सबका विकास करते करते वर्तमान सरकार भी वोट की राजनीति में घुस गई। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्र के बढ़ते वर्चस्व को रोकने के लिए प्रधानमंत्री की कुर्सी के लिए कुछ लोगों को यह भी ध्यान नहीं

डिग्रियां बांट कर क्या करोगे जब काबिलियत ही नहीं रहेगी होंगा क्या एक भीड़ तैयार होगी जो एक के इशारे पर कार्य करेगी जो दिखाई दे रहा है।

नक्षत्रमण्डलका परिमाण पाँच सौ, चार सौ, तीन सौ, दो सौ तथा एक सौसे लेकर कम-से-कम एक योजन, आधा योजनतक है; इससे छोटा कोई नक्...
24/01/2026

नक्षत्रमण्डलका परिमाण पाँच सौ, चार सौ, तीन सौ, दो सौ तथा एक सौसे लेकर कम-से-कम एक योजन, आधा योजनतक है; इससे छोटा कोई नक्षत्र नहीं है।

​पृथ्वीपर स्थित सभी लोक, जहाँ पैदल जाया जा सकता है, भूर्लोक कहलाता है। भूमि और सूर्यके मध्यवर्ती लोकको भुवर्लोक कहते हैं।

भुव तथा सूर्यलोकके बीच जो चौदह लाख योजन का (एक योजन=13 Km ) अवकाश है, उसे लोक स्थिति का विचार करनेवाले विज्ञ पुरुषों ने स्वर्गलोक कहा है।

भुवसे ऊपर एक करोड़ योजनतक महर्लोक बताया गया है।
उससे ऊपर दो करोड़ योजनतक जनलोक है, जहाँ सनकादि निवास करते हैं।

उससे ऊपर चार करोड़ योजनतक तपोलोक माना गया है, जहाँ वैराज नामवाले देवता सन्तापरहित होकर निवास करते हैं।
तपोलोकसे ऊपर उसकी अपेक्षा छः गुने विस्तारवाला सत्यलोक विराजमान है, वहाँ ऐसे लोग निवास करते हैं, जिनकी पुनर्मृत्यु नहीं होती (अर्थात् जो वहाँ ज्ञान प्राप्त करके ब्रह्माजीके साथ मुक्त हो जाते हैं।(इस संसारमें उनकी पुनरावृत्ति नहीं होती)।

सत्यलोक ही ब्रह्मलोक माना गया है। उसके ऊपर अठारह करोड़ पच्चीस लाख योजन परम कल्याणमय धाम प्रकाशित होता है; उसकी कहीं उपमा नहीं है, वह सर्वोपरि विराजमान है।

​भूर्लोक, भुवर्लोक और स्वर्लोक—इन तीनोंको त्रैलोक्य कहते हैं। यह त्रैलोक्य कृतक (अनित्य) लोक हैं।

जनलोक, तपोलोक तथा सत्यलोक—ये तीनों अकृतक (नित्य) लोक हैं। कृतक और अकृतक लोकोंके मध्यमें महर्लोककी स्थिति मानी गयी है।

कल्पके अन्तमें जब महाप्रलय होता है, उस समय त्रिलोकी सर्वथा नष्ट हो जाती है;

महर्लोक जनशून्य तो हो जाता है, परन्तु उसका अत्यन्त विनाश नहीं होता।

ये पुण्यकर्मोंद्वारा प्राप्त होनेवाले सात लोक बताये गये हैं; वेदादि शास्त्रोंमें कहे हुए यज्ञ, दान, जप, होम, तीर्थ और व्रतसमुदाय तथा अन्यान्य साधनोंसे पूर्वोक्त सातों लोक साध्य माने गये हैं।

​अर्जुन! वायुकी सात शाखाएँ हैं, उनकी स्थिति जिस प्रकार है, वह बतलाता हूँ सुनो,—पृथ्वीको लाँघकर मेघमण्डलपर्यन्त जो वायु स्थित है, उसका नाम 'प्रवह' है।
वह अत्यन्त शक्तिमान् है और वही बादलोंको इधर-उधर उड़ाकर ले जाता है।
धूम तथा गर्मीसे उत्पन्न होनेवाले मेघोंको यह प्रवह वायु ही समुद्रजलसे परिपूर्ण करती है, जिससे ये मेघ काली घटाके रूपमें परिणत हो अतिशय वर्षा करनेवाले होते हैं।

वायुकी दूसरी शाखाका नाम 'आवह' है, जो सूर्यमण्डलमें व्याप्त हुआ है। उसीके द्वारा ध्रुवसे आबद्ध होकर सूर्यमण्डल घुमाया जाता है।

तीसरी शाखाका नाम 'उद्वह' है, जो चन्द्रलोकमें प्रतिष्ठित है। इसीके द्वारा ध्रुवसे सम्बद्ध होकर यह चन्द्रमण्डल घुमाया जाता है।

चौथी शाखाका नाम 'संवह' है, जो नक्षत्रमण्डलमें स्थित है। उसीके द्वारा वायुमयी डोरियोंसे ध्रुवमें आबद्ध होकर सम्पूर्ण नक्षत्रमण्डल घूमता रहता है।

पाँचवीं शाखाका नाम 'विवह' है, यह ग्रहमण्डलमें स्थित है। उसीके द्वारा यह ग्रहमण्डल ध्रुवसे सम्बद्ध होकर घूमा करता है।

वायुकी छठी शाखाका नाम 'परिवह' है, जो सप्तर्षिमण्डलमें स्थित है। इसीके द्वारा ध्रुवसे सम्बद्ध हो सप्तर्षि आकाशमें भ्रमण करते हैं।

वायुकी सातवीं शाखाका नाम 'परावह' है, जो ध्रुवमें आबद्ध है। उसीके द्वारा ध्रुवचक्र तथा अन्यान्य मण्डल दृढ़तापूर्वक एक स्थानपर स्थापित हैं।

ध्रुवसे ऊपर जो स्थान है, वहाँ न तो सूर्य प्रकाशित होते हैं और न नक्षत्र एवं तारे ही उदित होते हैं। वहाँके लोग अपने ही तेज और अपनी ही शक्तिसे सदा स्थिर रहते हैं। इस प्रकार ऊर्ध्वलोकोंका वर्णन किया गया है। अब पातालका वर्णन सुनो।

​अर्जुन! भूमिकी ऊँचाई सत्तर हजार योजन है। इसके भीतर सात पाताल हैं, जो एक दूसरेसे दस-दस हजार योजनकी दूरीपर हैं।

उनके नाम इस प्रकार हैं—अतल, वितल, नितल, रसातल, तलातल, सुतल तथा पाताल। कुरुनन्दन! वहाँकी भूमियाँ सुन्दर महलोंसे सुशोभित हैं।

ये क्रमशः कृष्ण, शुक्ल, अरुण, पीत, कंकरीली, पथरीली तथा सुवर्णमयी हैं।

उन पातालोंमें दानव, दैत्य और नाग सुखोंसे सन्तुष्ट होकर रहते हैं।

वहाँपर न गर्मी है, न सर्दी है, न वर्षा है, न कोई कष्ट। सातवें पातालमें 'हाटकेश्वर' शिवलिङ्ग है, जिसकी स्थापना ब्रह्माजीके द्वारा हुई है। वहाँ अनेकानेक नागराज उस शिवलिङ्गकी आराधना करते हैं। पातालके नीचे बहुत अधिक जल है।
।। परमात्मने नमः 🙏🙏।।हर हर महादेव 🙏🙏।।
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गुणों की ख़ान! शरीर की जान- अजवायनपेट में गैस बनना या पेट दर्द में अजवायन का लेप पेट पर करने की पुरानी रीति रही है। इस न...
23/01/2026

गुणों की ख़ान! शरीर की जान- अजवायन

पेट में गैस बनना या पेट दर्द में अजवायन का लेप पेट पर करने की पुरानी रीति रही है।

इस नीति को अपनाने वाली जानकार महिलाएं अजवाइन सुबह खाली पेट फांक कर सादा पानी पीती थी और 100 साल तक बिना बीमारी के जीती थी। अब वे इस धरती पर नहीं हैं।

वे महान माताएं पितृमातृकाओं-मातृमात्रकाओं के रूप में ब्रह्माण्ड के किसी क्षेत्र में विचरण कर रही होगीं।

अजवाइन का एक नाम यवानी खाण्डव भी है।

भावप्रकाश ग्रन्थ के पृष्ठ 24 एवं वनोषधि चंद्रोदय के अनुसार अजवाइन अमृतम बूटी व ओषधि है।

द्रव्यगुण विज्ञान नामक आयुर्वेदिक ग्रन्थ में अजवायन को घर का वैध बताया है।

!!दुष्ट यव: यवानी!! (भावप्रकाश निघण्टु)

यह दूषित यव की तरह दिखती है। अजवाइन को यवनिका, उग्रगन्धा, ब्रह्मदर्भा, अजमोदिका, दीप्या आदि नामों से भी जाना जाता है। एक खुरासानी अजवायन भी होती है।

अजवायन के कद्रदान इसके लाभ से परिचित हैं।

अजवायन का स्वभाव…

मान न मान…मैं तेरा मेहमान की तरह यह भी बेशर्म प्रवृत्ति की औषधि है। अजवायन का उपयोग उदररोग, त्वचा रोग, वातरोग आदि विकारों में कारगर है। आयुर्वेदिक निघण्टु-शास्त्रों में इसे अदभुत और असरदायक बताया है।

अजवायन के 19 फायदे और चमत्कार….

【१】यह अग्निदीपक, भूख बढ़ाने वाली, कृमि नाशक, पाचक, गर्म (उष्ण), उत्तेजक, संक्रमण निरोधी अर्थात हल्दी से अधिक गुणकारी।

【२】उदरशूल, आध्मान आदि विकारों में अजवाइन, सेंधा नमक, सोंचर नमक, यव क्षार, हींग और अमृतम आँवला चूर्ण सब सम भाग मिलाकर चूर्ण बनाकर खिलाने से जबरदस्त फायदा होता है।

【३】दुर्गंध नाशक, पेट के कीड़े मारने वाली, गैस नाशक, उदर रोग नाशक, शरीर की सड़न दूर करने वाली।

【४】अजीर्ण, कुपचन, अपचन, पेटदर्द, वायुविकार, विसूचिका यानि दस्तों में हितकारी है।

【५】कोरोना जैसे संक्रमण को दूर करने में सहायक।

【६】अजवाइन को अलग-अलग अनुपान और अनुपतानुसार लिया जावे, तो लगभग 55 से अधिक वात-पित्त- कफ से जुड़ी तकलीफों को दूर करने उपयोगी है।

【७】लाचार रोगी के उपचार में अजवाइन खाने से लेकर इसका धुँआ तक लाभदायक है।

【८】श्वांस की परेशानी में अजवाइन को सेंक कर गुड़ के साथ मिलकर गर्म पानी से देने से फायदा होता है।

【९】अजवाइन का सेवन फेफड़ों के संक्रमण को मिटाता है।

【१०】अजवाइन को चिलम में रखकर तम्बाकू के साथ पीने की परंपरा कभी राजस्थान में बहुत थी। इससे अनेक समस्याओं का अंत होता था।

【११】पुरानी खांसी में जब कफ अधिक हो, तो कफ ढ़ीला होकर मल विसर्जन द्वारा निकल जाता है।

【१२】किसी की शराब छुड़ानी हो, तो अजवायन को उपयोग ज्यादा करवाएं।

【१३】हैजे में अजवायन का अर्क उपयोगी है।

【१४】घर में करें-दस्त-जुकाम का इलाज…

【१५】अजवायन सत्व, पिपरमेंट और कर्पूर तीनो सम मात्रा में लेकर यह पानी जैसा तरल हो जाएगा। इसे बताशे में एक बूंद डालकर खिलाने से दस्त आदि में राहत मिलती है।

【१६】सभी कम्पनियों के अमृतधारा जैसे प्रचलित ब्रांड का यही फार्मूला है।

【१७】अमृतधारा सन्धिशूल, बदन दर्द, सिरदर्द आदि में भी लाभकारी है।

【१८】अजवायन की गर्म पुल्टिश बनाकर दर्द वाले या ठंडक वाले स्थान पर सिकाई करें, तो तुंरत दर्द-सर्दी का अंत होता है।

【१९】अजवायन के पत्ते का रस दाद, खाज आदि मिटाता है और कभी कोई कीड़ा काट ले, तो इसे लगाने से तत्काल लाभ होता है।

हमारे यहां ऐसे घरेलू देशी उपाय किचन में ही होते हैं पर हम परिचित नहीं हैं ।

।।श्री परमात्मने नमः 🙏🙏।। हर-हर महादेव 🙏🙏।।
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19/01/2026

गुजरात का वापी शहर

कर्म और भाग्य पर चर्चाएं होती ही रहती है । कर्म से ही भाग्य का निर्माण होता हैं तो दुनिया में ऐसा कौन सा व्यक्ति हैं जो ...
18/01/2026

कर्म और भाग्य पर चर्चाएं होती ही रहती है । कर्म से ही भाग्य का निर्माण होता हैं तो दुनिया में ऐसा कौन सा व्यक्ति हैं जो कर्म नहीं कर रहा ।

अच्छा हो या खराब अपने आचरण अनुसार प्रत्येक व्यक्ति कार्य कर रहा बहुत से लोग जी तोड़ कर्म कार्य करते हैं फिर भी हाल वही है ।

जीवन को उन्नत बनाने वाला कर्म ही भाग्य कहलाता है । कर्म और भाग्य जीवन रथ के दो पहिए हैं एक वृहस्पति है दूसरा शनि दोनों में से कोई पहिया गड़बड़ हुआ जीवन रथ खिसटेगा।

रामचरित मानस में भगवान शिव माता पार्वती से कहते हैं ।
"कर्म प्रधान विश्व रचि राखा, जो जस करहि सो तस फल चाखा" ।।
यह संसार कर्मों पर आधारित है; जो जैसा कर्म करता है, उसे वैसा ही फल मिलता है, और मनुष्य अपने कर्मों से ही अपना भाग्य बनाता-बिगाड़ता है,

अब इसि में गहरी बात है कर्म से भाग्य बनेगा बिगड़ेगा यानी शनि पर भाग्य बनाने वाला कर्म करने के लिए वृहस्पति ज्ञान बुद्धि योग्यता आवश्यक है।

अब इस श्लोक को देखिए ।
न देशकालव्यवसायवयं भवेत्फलाप्तिः सति चापि दैव।
तथा फले सत्यपि जातकस्य भवेत्फलाप्तिस्तिथिभोदयाद्यैः ॥

अर्थात_ भाग्य के होने पर भी देशकाल तथा उद्यम के बिना भी फल प्राप्ति नहीं हो सकती है।

कुंडली में कुछ लिखा है इसका समीकरण ऐसा नहीं होगा कि वही मिलेगा इसका समीकरण होगा । भाग्य+ देश काल +उद्यम = फल प्राप्ति।।

दृढ़ कर्म , अदृढ़ कर्म ,दृढ़अदृढ़ कर्म यह तीन प्रकार है । कुछ बिल्कुल नहीं बदला जा सकता ,कुछ बदला जा सकता है ,कुछ में दोनों संभावना है।

ज्योतिष में एक ज्योतिषी बता सकता है क्या हो सकता है परन्तु ब्रह्मा ही बता सकते है निश्चित क्या होगा।

जब हमें कभी कहीं से कोई चौपई,दोहा , श्लोक पढ़ने को मिलता है जैसे भगवान की मर्जी से पत्ता भी नहीं हिलता तो यह जरूर ध्यान में रखना चाहिए वह किस संदर्भ,देश काल पात्र ,स्तिथि पर quote किया है।

आप पायेंगे कुंडली में भी तृतीय भाव को पुरुषार्थ बोला है, दशम को कर्म।

गीता में कर्मयोग पर इतना बड़ा अध्याय है ।

स्वयं ऋषियों ने ज्योतिष के श्लोक लिखने के बाद अंत में जो कुछ उपाय लिखे है, वह इसलिए तो ही लिखे है कि कुछ छूट कर्म करने की मनुष्य को है ।

अन्यथा सब लिखा ही है तो उपाय बनाने की जरूरत ही क्या थी ? ऑटोपायलट मोड में दुनिया चलते रहती।

मैं आपको एक उदाहरण देता हूं _ माना किसी का द्वितीय भाव ,द्वितीय भाव का कारक गुरु , द्वितीय भाव का स्वामी यह तीनों बहुत पीड़ित हो जाए तो क्या कहेंगे भाव का फल नहीं होगा यानि जातक को धन नहीं मिलेगा तो हो सकता है यह निर्धन परिवार में जन्मा हो यह दृढ़ कर्म का फल है

इसमें यह कोई बदलाव नहीं कर सकता। अब किसी का द्वितीय भाव,द्वितीयेश पीड़ित है ,कारक ठीक है ,हल्का शुभ प्रभाव दूसरे भाव में आया तो आप कहेंगे दृढ़ अदृढ़ कर्म है यानि कुछ छूट इस मामले में है । वह क्या करेगा इस स्तिथि में वह निर्धन परिवार में नहीं जन्मेगा बस उसका पैसा हाथ में नहीं बचेगा ।

लेकिन अब इस जन्म के कर्मों से वह जैसे दरिद्र दहन शिव स्तोत्र पढ़के उस बहते पैसे को कुमार्ग में जाने से सही जगह निवेश कर देगा ,पैसे पहले भी बह रहा था अभी भी अपने कर्मों की छूट से उसने उसके फल के बहाव को परिवर्तित किया नुकसान फायदेमंद होने लगा कर्म भाग्य बनाने लगा ।

स्वामी परमहंस जी ने क्या उदाहरण दिया _ कि एक मैदान में गाय खंभे से बंधी है ये भाग्य है , अब उसकी रस्सी जितनी लंबी होगी ये उसके कर्मों के लिए छूट है इसमें वह जो मर्जी चाहे कर्म कर सकती है ये उसकी freewill है।

इसलिए ही किसी को अधिक freewill है किसी को नहीं है ।। यह freewill vs destiny हमेशा से एक बहस का मुद्दा रहा है ।

लेकिन ज्योतिष में मुहूर्त शास्त्र ,कुंडली मिलान आदि यह कर्म यह दिखाते है कि इनमें छूट है । मैं यह बिल्कुल नहीं मानता कि भगवान किस्मत लिखता है क्योंकि वह अगर लिखता तो हर किसी के जीवन में इतना भेदभाव असमानता नहीं होती ।

उसकी मर्जी जब चलती वह सबका भला ही करता। वरना वह बार बार यह नहीं कहता कि मेरी शरण में आ जा तेरे सारे पापों से मुक्त कर दूंगा।

यह पाप क्या है संचित कर्म ! जो जन्मों जन्मों के हमने इकट्ठे कर रखे है। फिर भी यह कभी खत्म न होने वाली बहस है क्योंकि हमने अपने अवचेतन मन पर गहराई से ऐसे भाव बैठा रखे है।

हर चीज तय नहीं है मनुष्य को कुछ क्रिय माण कर्म की उसके प्रारब्ध अनुसार छूट भी है ।

तभी कहा गया - भगवान शिव (त्रिपुरारी) भाग्य (भावी) को मिटा (बदल) सकते हैं।
।। परमात्मने नमः 🙏🙏।। हर हर महादेव 🙏🙏।।

हाथी जब दौड़ लगाए तो सतर्क हो जाना चाहिए।अर्थात ! बड़ा ग्रह होने के कारण बृहस्पति को शास्त्र में हाथी बोला गया है, गजकेस...
17/01/2026

हाथी जब दौड़ लगाए तो सतर्क हो जाना चाहिए।
अर्थात ! बड़ा ग्रह होने के कारण बृहस्पति को शास्त्र में हाथी बोला गया है, गजकेसरी योग बनाने वाला गुरु। बृहस्पति विशालकाय तो है साथ भारी भरकम ग्रह भी है ।धीरे चलता है।

शनि और गुरु का मंद गति से गोचर होता है । गुरु का गोचर देखना इसलिए जरूरी होता है क्योंकि साल के मुख्य घटनाएं यह बताता है।

आप जंगल सफारी में गए हैं लेकिन एक शांत हाथी अगर तेज भागने लग जाए , कुछ अजीब से उसकी प्रवृत्ति हो जाय तो आश्चर्य होगा न ?

गुरु का अतिचारी गोचर ,मिथुन राशि में इंटरनेट ,सोशल मीडिया की राशि है । बहुत सारे फर्जी, फर्जी लोग और अफवाहों और बातों का बोलबाला हो जायेगा, बहुत सारे बैन भी होंगे।

केतु जब सिंह सिंहासन की राशि में चलता है तो बहुत नेताओं के लिए हाहाकार करता है, सरकार गिराता है , नेपाल में सरकार गई , जापान के pm का पद छोड़ना ,भारत के उपराष्ट्रपति का त्यागपत्र , अभी आगे भी और देखेंगे ।

नाड़ी ग्रंथों में खासकर देव केरलम ,चंद्रकला नाड़ी आदि ग्रंथों में ये जो अभी हो रहा है इसके बारे में बिल्कुल स्पष्ट श्लोक दिए हैं ये न सिर्फ सत्ता संघर्ष ,बल्कि भारी प्राकृतिक आपदा ,हाहाकार की सूचना देते हैं ।

बरसात के मौसम में पहाड़ से भूस्खलन, नदियों का उफान में होना कोई भविष्यवाणी नहीं है ,परन्तु अगर सीमा से ऊपर चले जाए हजारों लाखों लोग बेघर हो जाए तो आपदा कह सकते है।

शास्त्र कहते है _ अतिचारगते जीवे वक्रत्वमागते।।
हाहाकारं जगत्सर्वं विशेषाद्दक्षिणादिशि ।।

अर्थात _ जब गुरु अतिचारी चल रहा हो और शनि भी वक्री चल रहा हो तो संसार में संकट ,अशांति आएगी ,आक्रोश हाहाकार की नौबत आ सकती है विशेषकर दक्षिण दिशा के देश,प्रदेश आदि पर।

यही समीकरण शायद 20,21 में था तब वायरस से लोग परेशान थे ।

कार्मिक भाषा को समझेंगे तो शनि वक्री है यानि जितना खाया है लेने आ रहा है दूसरा बृहस्पति नीति,धर्म , नियम, मर्यादा शांति है , ये ग्रह जब जब खराब चलता है तो दिक्कतें अधिक होती है । ऐसे समय में सरकार अगर ठोस कानून या bill लाए जब केतु भी सिंह में चल रहा हो तो खतरे से भरा कार्य हो सकता है।

जिस नेता के पत्रिका में भ्रष्ट योग हो , दबाकर पैसा कमाया हो और केतु खराब स्थान में गोचर में आया हो तो वह नजरों में आ जाता है या raid का शिकार होता है।

मंत्रिमंडल बदलना ,मुख्यमंत्री बदलने , अंदर से टूट फूट होना ये सब सिंह में केतु रहने से रहेगा । मार्च में कहा था,ध्यान रखें आगे आर्थिक मंदी के संकेत है। अब टैरिफ वार कहिए , या आगे जो सैन्य संघर्ष तैयार हो रहे है, कर्मकारक शनि loss की राशि में चलने से भारी मात्रा में नौकरी जाना आम रहेगा।

अब आप तब तक देखेंगे ये सब क्योंकि गुरु तो रहेगा अतिचारी परन्तु जब जब शनि वक्री होगा तब तक सतर्क रहना होगा।

पॉडकास्ट में भर भर कर ज्योतिष की जो बातें हो रही हैं शायद उन्होंने शास्त्र पढ़ें है या नहीं वह trp,views के लिए अगर ऐसी बातें बोलते है कि सुनामी आ जाएगी , विश्व युद्ध होगा , ये होगा वह होगा , ऐसे विचार में कई बार घटित होते हुए भी देखा है। परन्तु उनका आधार भगवान जाने।

कई लोग तो news पढ़कर ज्योतिष करते है ये गलत है। आपको कुछ संभावनाएं दिख रही है तो ग्रह ही दिखाएंगे वही लिखो। शनि मीन में है पूरी geopolitics बदल देता है।

फिर मेष में आएगा , एक नई शुरुआत। दुनिया का अंत कहीं नहीं है , इसमें कोई भय की बात नहीं परन्तु देश दुनिया को भविष्य में अभी जो सब हो रहा है इसकी आदत डालनी पड़ेगी, ये भारी घटनाएं सामान्य लगने लग जाएगी , शनि मेष में आएगा तब कैंसर दिखाएगा कि कैंसर क्या चीज है।

परन्तु राहु कुंभ में होने से मानवता के हित के लिए 1,2 शोध आविष्कार करवा देता है।

गुरु की यह असामान्य गति अगले 8 वर्षों तक जारी रहने वाली है। ज्योतिषीय इतिहास गवाह है कि जब-जब गुरु अतिचारी हुए हैं, पृथ्वी पर बड़े सत्ता परिवर्तन और युद्ध हुए हैं।

इतिहास के पन्ने पलटें तो पता चलता है कि लगभग 5000 साल पहले महाभारत युद्ध के समय भी गुरु 7 वर्षों तक अतिचारी रहे थे।

यही स्थिति प्रथम और द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान भी देखी गई थी। हाल ही में 2018 से 2022 के बीच जब गुरु अतिचारी हुए, तो पूरी दुनिया ने 'कोरोना' जैसी वैश्विक विभीषिका और आर्थिक मंदी का सामना किया। अब वैसी ही स्थिति फिर से दस्तक दे रही है।

भारत की कुंडली के लिहाज से यह समय 'अग्निपरीक्षा' और 'अमृत काल' दोनों का मिश्रण है।

श्रीमद्भागवत पुराण एवं आइंस्टीन का सापेक्षता का सिद्धांत (Theory of Relativity)श्रीमद्भागवत पुराण में सापेक्षता का सिद्ध...
17/01/2026

श्रीमद्भागवत पुराण एवं आइंस्टीन का सापेक्षता का सिद्धांत (Theory of Relativity)

श्रीमद्भागवत पुराण में सापेक्षता का सिद्धांत (Theory of Relativity) आइंस्टीन से हजारों वर्ष पूर्व ही लिख दिया गया था |

आइंस्टीन के सापेक्षता के सिद्धांत (Theory of Relativity) के बारे में हम सभी भली प्रकार से परिचित हैं ।आइंस्टीन ने अपने सिद्धांत में दिक् व काल की सापेक्षता प्रतिपादित की थी ।

उसने कहा, विभिन्न ग्रहों पर समय की अवधारणा भिन्न-भिन्न ग्रहों पर अलग-अलग होती है | काल का सम्बन्ध ग्रहों की गति से रहता है |

उदाहरण के लिए यदि दो जुड़वा भाइयों में से एक को पृथ्वी पर ही रखा जाये तथा दूसरे को किसी अन्य ग्रह पर भेज दिया जाये और कुछ वर्षों पश्चात् लाया जाये तो दोनों भाइयों की आयु में अंतर होगा ।

आयु का अंतर इस बात पर निर्भर करेगा कि बालक को जिस ग्रह पर भेजा गया | उस ग्रह की सूर्य से दूरी तथा गति, पृथ्वी की सूर्य से दूरी तथा गति से कितनी अधिक अथवा कम है ।

एक और उदाहरण के अनुसार चलती रेलगाड़ी में रखी घडी उसी रेल में बैठे व्यक्ति के लिए सामान रूप से चलती है क्योंकि दोनों रेल के साथ एक ही गति से गतिमान है, परन्तु वही घडी रेल से बाहर खड़े व्यक्ति के लिए धीमे चल रही होगी तथा कुछ सेकंडों को अंतर होगा ।

यदि रेल की गति और बढाई जाये तो समय का अंतर बढेगा और यदि रेल को प्रकाश की गति 299792.458 किमी प्रति सेकंड की गति से (जो कि संभव नहीं है) दौड़ाया जाए तो रेल से बाहर खड़े व्यक्ति की घड़ी पूर्णतया रुक जायेगी ।
इसकी जानकारी के संकेत हमारे प्राचीन ग्रंथों में मिलते हैं।

श्रीमद्भागवत पुराण में कथा आती है कि रैवत राजा की पुत्री रेवती बहुत लम्बी थी, अत: उसके अनुकूल वर नहीं मिल रहा था ।इस समस्या के समाधान के लिए राजा रैवतक योग बल से अपनी पुत्री को लेकर ब्रह्मलोक पहुँचे।

जिस समय राजा अपनी पुत्री को लेकर ब्रहम लोक पहुँचे उस समय वहाँ गंधर्व गान चल रहा था | राजा अपनी पुत्री सहित उक्त कार्यक्रम के समापन की प्रतीक्षा की |

जब गान पूरा हुआ तो ब्रह्मा ने राजा को देखा और पूछा कैसे आना हुआ? राजा ने कहा मेरी पुत्री के लिए किसी वर को आपने पैदा किया है या नहीं?

ब्रह्मा जोर से हँसे और कहा,-“ जितनी देर तुमने यहां गान सुना, उतने समय में पृथ्वी पर 27 चर्तुयुगी (1 चर्तुयुगी =4 सत्य युग, त्रेता, द्वापर और कलियुग ) = 1 महायुग ) बीत चुकी हैं और 28 वां द्वापर समाप्त होने वाला है।

तुम वहां जाओ और कृष्ण के भाई बलराम से इसका विवाह कर देना। अब पृथ्वी लोक पर तुम्हे तुम्हारे सगे सम्बन्धी, तुम्हारा राजपाट तथा वैसी भौगोलिक स्थितियाँ भी नही मिलेंगी जो तुम छोड़ कर आये हो |

साथ ही उन्होंने कहा कि यह अच्छा हुआ कि रेवती को तुम अपने साथ लेकर आये। इस कारण इसकी आयु नहीं बढ़ी। अन्यथा लौटने के पश्चात् तुम इसे भी जीवित नहीं पाते | अब यदि क्षण भर भी देर की तो द्वापर के पश्चात् कलियुग में पहुचोगे|”

इससे यह भी स्पष्ट है की निश्चय ही ब्रह्मलोक कदाचित हमारी आकाशगंगा से भी कहीं अधिक दूर है |

यह कथा पृथ्वी से ब्रहम लोक तक विशिष्ट गति से जाने पर समय के अंतर को बताती है।

आधुनिक वैज्ञानिकों ने भी कहा कि यदि एक व्यक्ति प्रकाश की गति से कुछ कम गति से चलने वाले यान में बैठकर जाए तो उसके शरीर के अंदर परिवर्तन की प्रक्रिया प्राय: स्तब्ध हो जायेगी |

यदि एक दस वर्ष का व्यक्ति ऐसे यान में बैठकर देवयानी आकाशगंगा (Andromedia Galaz) की ओर जाकर वापस आये तो उसकी उमर में केवल 56 वर्ष बढ़ेंगे किन्तु उस अवधि में पृथ्वी पर 40 लाख वर्ष बीत गये होंगे।

काल के मापन की सूक्ष्मतम और महत्तम इकाई के वर्णन को पढ़कर दुनिया का प्रसिद्ध ब्राह्माण्ड विज्ञानी Carl Sagan अपनी पुस्तक Cosmos में लिखता है, -
"विश्व में एक मात्र सनातन हिन्दू धर्म ही ऐसा धर्म है, जो इस विश्वास को समर्पित है ।

कि ब्रह्माण्ड के सृजन और विनाश का चक्र सतत चल रहा है। तथा यही एक धर्म है जिसमें काल के सूक्ष्मतम नाप परमाणु से लेकर दीर्घतम माप ब्रह्म दिन और रात की गणना की गई, जो 8 अरब 64 करोड़ वर्ष तक बैठती है तथा जो आश्चर्यजनक रूप से हमारी आधुनिक गणनाओं से मेल खाती है।"
।। परमात्मने नमः 🙏🙏।। हर-हर महादेव 🙏🙏।।

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