31/01/2026
उत्तर दिशा सिद्धि-समृद्धि का चमत्कारी क्षेत्र है, जहाँ शिवजी की सम्पूर्ण सत्ता और ससुराल है। उत्तर जितना बढ़ेंगे ऊंचाई मिलेगी पर्वत मिलेगा, रहस्य - आकर्षण ( मैगनेटिक प्रभाव) और अद्भुत की प्राप्ति होगी
15 फरवरी 2026 को महाशिवरात्रि है।
उत्तरं जलस्रवो नित्यं, तत्र तिष्ठन्ति देवताः।
शिव आगम, कर्णा अध्याय के अनुसार जहाँ जल उत्तर दिशा से बहता है, वहाँ देवता निवास करते हैं।
इसलिए शिवलिंग से निकलने वाला जल उत्तर की ओर जाए तो वह शुद्धि, समृद्धि और मोक्षमार्ग का प्रतीक होता है।
उत्तरं यत्र वहति हरिजलं शंभुभक्तेः प्रसादम्।
तत्रैव तिष्ठति हरिः स्वयं भक्तवशो नित्यम्॥
अर्थात-जहाँ शिवलिंग से अभिषेक का जल उत्तर दिशा में प्रवाहित होता है, वहाँ स्वयं हरि (विष्णु) और शिव दोनों का आशीर्वाद स्थायी होता है।
वास्तुशास्त्र के अनुसार उत्तर दिशा में चुंबकीय ध्रुव का प्रभाव सबसे शुद्ध माना जाता है। जल यदि इस दिशा में बहता है तो वह विद्युतचुंबकीय तरंगों को संतुलित कर ऊर्जा प्रवाह को स्थिर करता है।
इसलिए प्राचीन मंदिरों में जलहरि का मुख उत्तर की ओर रखने से पूरे गर्भगृह में positive ionic flow बनता है!
उत्तर दिशा क्यों शुभ मानी गई है?
उत्तर दिशा का अधिपति कुबेर हैं-धन, स्थिरता और ज्ञान के देवता।
यह दिशा सूर्य के उत्तरायण का संकेत है अर्थात ऊर्ध्वगति, उन्नति और प्रकाश का मार्ग।
इसलिए जलहरि का मुख उत्तर की ओर रखने का अर्थ है जीवन का प्रवाह अब नीचे नहीं, ऊपर की ओर उत्तरायण दिशा में हो।
यह प्रतीकात्मक रूप से संसारिक भाव से आत्मिक भाव की यात्रा है।
शिवलिंग की जलहरि का अर्थ और रहस्य
जलहरि वह भाग होता है जहाँ शिवलिंग से अभिषेक का जल एकत्र होता है और बाहर निकलता है। यह नालीनुमा भाग सदैव उत्तर दिशा में बनाया जाता है क्योंकि जल उत्तर दिशा की ओर प्रवाहित होकर देवताओं के मार्ग (देवयान) में जाता है। आगम शास्त्र कहता है
उत्तर का उत्तर- रहस्यमय उत्तर
उत्तर का उत्तर क्या है? यह अत्यंत दार्शनिक प्रश्न है। उत्तर का अर्थ केवल दिशा नहीं, प्रत्युत्तर भी है।
जब हम किसी प्रश्न का “उत्तर” देते हैं, तब भी हम ज्ञान के उत्तर दिशा की ओर बढ़ते हैं। तो उत्तर का उत्तर वह स्थिति है! जहाँ प्रश्न ही समाप्त हो जाता है। वह है-शिव जो हर प्रश्न, हर दिशा, हर उत्तर से परे है।
उत्तर दिशा में जलहरि का रहस्य यह है कि यह जीवन की चेतना को दक्षिण (मृत्यु) से उत्तर (मोक्ष) की ओर मोड़ने की यंत्र-संरचना है। और उत्तर का उत्तर है!
शिव का मौन -जहाँ कोई प्रश्न, कोई दिशा, कोई जल भी नहीं, केवल अस्तित्व की एकता है।
मस्तिष्क स्वरूप किंग- शिवलिंग
शिवलिंग का वह भाग, जिससे अभिषेक का जल उत्तर दिशा में प्रवाहित होता है, उसे जलहरि” कहा जाता है।
शिवलिंग केवल पत्थर का टुकड़ा नहीं, बल्कि जीवन ऊर्जा की दिशा निर्धारित करने वाला वैदिक यंत्र है।
शिवलिंग पर जब जल, दूध या पंचामृत चढ़ाया जाता है, तो उसका प्रवाह हमारी चेतना के प्रवाह का प्रतीक होता है। वास्तु, आगम और तंत्र सभी कहते हैं जलहरि सदा उत्तर दिशा की ओर ही रखी जानी चाहिए।
उत्तर दिशा का अधिपति कुबेर है! धन, स्थिरता और सिद्धि के देवता। यही दिशा ज्ञान, समृद्धि और मोक्ष की ओर जाने का मार्ग भी मानी गई है।
उत्तर दिशा = देवयान मार्ग यह दिशा सूर्य के उत्तरायण की है अर्थात् प्रकाश, ज्ञान और उन्नति की ओर अग्रसर होना।
जब शिवलिंग से जल उत्तर की ओर बहता है, तो वह बताता है कि अब जीवन का प्रवाह मृत्यु (दक्षिण) से हटकर अमरत्व (उत्तर) की ओर है। जो साधक की ध्यानावस्था को गहराई देता है।
इसलिए शिव अभिषेक का महत्व बढ़ जाता है शिव की सबसे छोटी आराधना रूद्राभिषेक है भिन्न-भिन्न कामनाओं के लिए भिन्न भिन्न पदार्थों से अभिषेक किया जाता है।
सावधान मुद्रा में खड़े होइये या बैठ कर विवेक से देखिए आपका स्वयं के शरीर में गर्दन तक शिवलिंग और गर्दन के नीचे अरघे का रुप ले लेगा। परछाई को ध्यान देकर देखें ऐसा ही प्रतीत होगा।
बहुत से लोग इस पर तर्क कुतर्क भी कर सकते हैं पर इस पेज पर हमने पहले ही बताया है कैसे हमारे शरीर में ब्रह्मांड समाहित है।
महाशिवरात्रि आध्यात्मिक उन्नति से जुड़ी है। यह रात्रि साधना, ध्यान और कुंडलिनी जागरण के लिए सर्वश्रेष्ठ मानी जाती है।
इसका importance इसलिए भी अधिक है क्योंकि यह शिव-तत्व को जीवन में धारण करने का अवसर देती है—जहाँ शिव का अर्थ है “कल्याण”।
हर चंद्र मास का चौदहवाँ दिन अथवा अमावस्या से पूर्व का एक दिन शिवरात्रि के नाम से जाना जाता है। एक कैलेंडर वर्श में आने वाली सभी शिवरात्रियों में से,
महाशिवरात्रि, को सर्वाधिक महत्वपूर्ण माना जाता है, जो फरवरी-मार्च माह में आती है। इस रात, ग्रह का उत्तरी गोलार्द्ध इस प्रकार अवस्थित होता है कि मनुष्य भीतर ऊर्जा का प्राकृतिक रूप से ऊपर की और जाती है।
यह एक ऐसा दिन है, जब प्रकृति मनुष्य को उसके आध्यात्मिक शिखर तक जाने में मदद करती है। इस समय का उपयोग करने के लिए, इस परंपरा में, हम एक उत्सव मनाते हैं, जो पूरी रात चलता है।
हिन्दू पौराणिक ग्रंथों के अनुसार शिव एक शक्ति है, एक रहस्यमय ऊर्जा, जिससे संपूर्ण जगत चलायमान है।
हालांकि वैज्ञानिक भी अभी तक इसे कोई नाम नहीं दे पाए हैं। लेकिन यदि प्राचीन काल के संत मुनि-ऋषियों की मानें तो उन्होंने इस अज्ञात शक्ति को शिव कहा है।
और वैज्ञानिक दृष्टि से देखा महाशिवरात्रि की रात्रि बहुत खास होती है
इस रात्रि ग्रह का उत्तरी गोलार्द्ध इस प्रकार विद्यमान होता है कि हर मनुष्य के अंदर की ऊर्जा, प्राकृतिक रूप से ऊपर की ओर जाने लगती है।
अर्थात् कहने का तात्पर्य यह हैं कि प्रकृति स्वयं ही मनुष्य को आध्यात्मिक शिखर तक जाने में मदद कर रही होती है।
अत: महाशिवरात्रि के दिन भगवान शिव का पूजन-आराधना करने के लिए व्यक्ति को एकदम सीधे बैठना पड़ता है, जिससे रीड की हड्डी मजबूत होती है तथा वह व्यक्ति जो सोचता हैं वो पा सकता है, यानी इस समयावधि में आप सुपर नेचर पावर का अहसास महसूस करते हैं।
बहुत कम लोग जानते हैं कि Maha Shivratri scientific benefits आधुनिक विज्ञान से भी जुड़े हैं।
इस दिन पृथ्वी की ऊर्जा उत्तर दिशा में प्रवाहित होती है
रात्रि जागरण से पीनियल ग्लैंड सक्रिय होती है
उपवास से शरीर का डिटॉक्स होता है
यही कारण है कि Maha Shivratri scientific benefits मानसिक शांति, हार्मोन संतुलन और एकाग्रता बढ़ाने में सहायक माने जाते हैं।
वास्तव में
Maha Shivratri scientific benefits योग और ध्यान के लिए आदर्श स्थिति बनाते हैं।
ध्यान, उपवास और जागरण तीनों मिलकर Maha Shivratri scientific benefits को पूर्ण करते हैं।
यह पर्व नींद के चक्र, हार्मोन संतुलन और मानसिक स्थिरता में सहायक होता है।
इसीलिए योगियों के लिए यह रात अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है।
महाशिवरात्रि पर चंद्रमा और पृथ्वी की स्थिति मानव शरीर की जैविक घड़ी को संतुलित करने में मदद करती है।
इस दिन व्रत रखने से शरीर का पाचन तंत्र सुधारता है, विषैले तत्व बाहर निकलते हैं और मेटाबॉलिज्म सही रहता है।
इससे शरीर डिटॉक्स (detox) होता है और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। इसलिए उपवास (फलों और जल का सेवन) करने से शरीर की ऊर्जा शुद्ध होती है और मन शांत रहता है।
वैज्ञानिक शोध बताते हैं कि महाशिवरात्रि की रात को जागने से शरीर में मेलाटोनिन (Melatonin) हार्मोन का स्तर बढ़ता है, जो तनाव कम करता है, मानसिक शांति और ध्यान केंद्रित करने की शक्ति बढ़ाता है, गहरी आध्यात्मिक अनुभूति उत्पन्न करता है।
इसीलिए, महाशिवरात्रि पर रातभर भजन, ध्यान और सत्संग करने का महत्व बताया गया है।
स्कन्द पुराण कहता है महाशिवरात्रि को अर्धरात्रि में शिव के 1008 नामों से 1008 बेर चढ़ाया जाए तो गरीबी दूर हो जाती है।
अभिषेक मनोकामना पूर्ण करने वाली होती है।
।। हर हर महादेव 🙏🙏।। श्री परमात्मने नमः 🙏🙏।।
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