22/03/2026
सेक्स को देखने का हर किसी का
अपना अपना एक अलग नज़रिया है ।
पर पहले मैं आपको बता दूँ...
सेक्स है क्या ?
सेक्स हमारे जीवन में होने वालीं एक आम प्रक्रिया है ।
जैसे हम भूख लगने पर खाना खाते हैं ।
प्यास लगने पर पानी पीते हैं ।
वैसे ही सेक्स की इच्छा होने पर सेक्स भी करते हैं ।
मानें या ना मानें
हमारे जीवन का एक बहुत ही अहम हिस्सा है ।
जहाँ सेक्स करते रहने से हम
डिप्रेशन/तनाव/अवसाद से
काफी हद तक निज़ात पाते हैं
वहीं सेक्स ना करने से
हम अन्दर से कुण्ठित हो कर भर जाते हैं,
फ्रस्ट्रेटेड हो जाते हैं ।
अब सेक्स कैसे करें और कैसे नहीं
यह अपने-अपने नज़रिये पर निर्भर करता है ।
सेक्स एक चरम सुख है
जो सम्भोग से बहुत भिन्न है ।
सेक्स सिर्फ़ एक मात्र दैहिक सुख है ।
जबकि सम्भोग अध्यात्मिक सुख ।
सेक्स :-।
ख़ुद को ख़ुश करने के लिए
एक स्त्री या पुरुष के साथ भोग करने को
सेक्स कहते हैं ।
इस में व्यक्ति स्वार्थी रहता
उसे सिर्फ़ ख़ुद के सुख से मतलब रहता है ।
और
सम्भोग :-
सम्भोग = सम+भोग
यानि समान रूप से भोगना ।
ये वो प्रक्रिया है
जिस में दो लोग देह से ही नहीं
अपितु भावनाओं के स्तर पर
तन मन और आत्माओं के साथ जुड़ते हैं ।
“सम्भोग प्रेम की वो समाधि हैं
जहाँ प्रेमी और प्रेमिका एक दूसरे में
परस्पर लीन हो जाते हैं ।”
जिसके फलस्वरूप
इस लीन अवस्था से उत्पत्ति होती हैं
जीवन चक्र प्रजनन की ।
ब्रह्मा की बनायी इस सृष्टि के विस्तार के लिए
प्रजनन का होना अति आवश्यक है ।
और
“सम्भोग ही प्रजननता का मूल है ।”
प्रेमी द्वारा छूयी गयी छुअन किया गया चुम्बन
मानो आत्मा को आनन्द के सागर में डुबो देता है ।
सम्भोग ...भावनाओं के स्तर पर
जहाँ प्रेमी और प्रेमिका
आनन्द के सागर में डुबकी लगाते हैं
जिस में तन मन और आत्मा
आनन्द से तृप्त हो जाती हैं ।
एक दूसरे से भावनात्मक स्तर पर
सम्भोगरत होना
उनके प्रेम को निखारता है ।
“शब्दों में इस घटना या अवस्था को
लिख पाना सम्भव ही नहीं है ।”
ये वो एहसास हैं,
जो समुद्र की गहरायी से भी गहरा है,
जिसमें रोम-रोम समा जाता है....!!
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